UGC NET English Literature | UGC NET English Unit 8 Literary Criticism By Aishwarya Mam
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UGC NET English Literature | UGC NET English Unit 8 Literary Criticism By Aishwarya Mam

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8 chapters7 takeaways20 key terms6 questions

Overview

यह वीडियो लेक्चर लिटरेरी क्रिटिसिज्म (साहित्यिक आलोचना) की अवधारणा को विस्तार से समझाता है, जिसमें इसके ऐतिहासिक विकास, प्रमुख सिद्धांतकारों और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। यह यूजीसी नेट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। वीडियो क्लासिकल क्रिटिसिज्म से शुरू होकर रेनेसां, नियो-क्लासिकल, रोमांटिक, विक्टोरियन और आधुनिक क्रिटिसिज्म तक के सफर को कवर करता है। इसमें प्लेटो, अरस्तू, होरेस, लोंजिनस, फिलिप सिडनी, जॉन ड्राइडन, अलेक्जेंडर पोप, सैमुअल जॉनसन, कोलरिज़, वर्ड्सवर्थ, मैथ्यू अर्नोल्ड और टी.एस. एलियट जैसे प्रमुख आलोचकों और उनके विचारों पर चर्चा की गई है।

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Chapters

  • लिटरेरी थ्योरी (साहित्यिक सिद्धांत) मान्यताओं का एक समूह है जिसके आधार पर हम दुनिया को देखते हैं।
  • लिटरेरी क्रिटिसिज्म (साहित्यिक आलोचना) किसी साहित्यिक कृति के गुणों और दोषों का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया है।
  • आलोचना का पारंपरिक अर्थ सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं का मूल्यांकन करना है, हालांकि आजकल इसका नकारात्मक अर्थ अधिक प्रचलित है।
  • साहित्यिक आलोचना का अध्ययन कालानुक्रमिक रूप से करने से अवधारणाओं को समझने में मदद मिलती है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि साहित्यिक आलोचना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है, ताकि हम साहित्यिक कृतियों का व्यवस्थित और निष्पक्ष मूल्यांकन कर सकें।
एक बैलेंस स्केल का उदाहरण जो किसी चीज़ के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को दर्शाता है।
  • प्लेटो का मानना था कि कला (पोएट्री) वास्तविकता से दो गुना दूर है (थ्योरी ऑफ फॉर्म्स के अनुसार) और यह आदर्श राज्य के निर्माण में बाधा डालती है, इसलिए कवियों को निर्वासित किया जाना चाहिए।
  • अरस्तू ने कला को जीवन का अनुकरण (Mimesis) माना और तर्क दिया कि यह दर्शकों को नकारात्मक भावनाओं (जैसे भय और करुणा) से मुक्ति (Catharsis) दिलाने का एक सुरक्षित माध्यम है।
  • अरस्तू ने ट्रेजेडी के लिए एक मॉडल प्रस्तुत किया जिसमें प्लॉट, कैरेक्टर, थॉट, डिक्शन, सॉन्ग और स्पेक्टेकल शामिल थे, और डाउनफॉल के लिए हमार्टिया (Flaw) और पेरिपेटिया (Reversal of Fortune) जैसी अवधारणाएं दीं।
प्लेटो और अरस्तू के विचार पश्चिमी साहित्यिक आलोचना की नींव रखते हैं और कला की प्रकृति, उद्देश्य और प्रभाव पर मौलिक बहसें प्रस्तुत करते हैं।
प्लेटो ने एक कुर्सी का उदाहरण दिया: ईश्वर के मन में 'कुर्सी' का विचार (आदर्श रूप), बढ़ई द्वारा बनाई गई कुर्सी (पहली प्रतिलिपि), और कलाकार द्वारा बनाई गई कुर्सी की पेंटिंग (प्रतिलिपि की प्रतिलिपि)।
  • होरेस, एक लैटिन आलोचक, ने तर्क दिया कि कला का उद्देश्य केवल सिखाना (Instruct) ही नहीं, बल्कि मनोरंजन (Delight) भी करना है (Ars Poetica)।
  • लोंजिनस ने 'ऑन द सबलाइम' में 'सबलाइमिटी' (उदात्तता) की अवधारणा प्रस्तुत की, जो किसी कार्य के विशाल दायरे और भव्यता से उत्पन्न होती है और पाठक को भयभीत करती है।
  • लोंजिनस ने उदात्तता प्राप्त करने के पांच तरीके बताए: पैशन (Pathos), ग्रेटनेस ऑफ थॉट, नोबल डिक्शन (Noble Diction), एलिवेटेड कंपोजीशन (Elevated Composition), और फिगर्स ऑफ स्पीच (Figures of Speech)।
होरेस और लोंजिनस ने कला के उद्देश्य और सौंदर्यशास्त्र पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए, जिन्होंने बाद के आलोचकों और रोमांटिक कवियों को गहराई से प्रभावित किया।
होरेस का वाक्यांश 'Ut pictura poesis' जिसका अर्थ है 'जैसा पेंटिंग में, वैसा ही कविता में', यह दर्शाता है कि कविता को भी चित्रकला की तरह जीवन का यथार्थवादी चित्रण करना चाहिए।
  • फिलिप सिडनी ने अपने 'डिफेंस ऑफ पोएज़ी' (या 'एन अपोलॉजी फॉर पोएट्री') में कविता और नाटक का बचाव किया, जो प्यूरिटन आलोचक स्टीफन गुसोन के हमलों का जवाब था।
  • सिडनी का मानना था कि कविता का उद्देश्य 'डिलाइट एंड इंस्ट्रक्ट' (मनोरंजन और शिक्षा) दोनों देना है, जो होरेस के विचार को प्रतिध्वनित करता है।
  • उन्होंने तर्क दिया कि कविता इतिहास और दर्शन से भी पुरानी और श्रेष्ठ कला है क्योंकि यह मानव भाषा के विकास के साथ ही उत्पन्न हुई थी।
फिलिप सिडनी का कार्य अंग्रेजी साहित्यिक आलोचना की शुरुआत का प्रतीक है, जिसने कला के मूल्य और उद्देश्य पर एक मजबूत रक्षात्मक तर्क प्रस्तुत किया।
सिडनी ने तर्क दिया कि कवियों की तुलना दार्शनिकों या इतिहासकारों से नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि उनका उद्देश्य जीवन के नैतिक और भावनात्मक पहलुओं को चित्रित करना है, न कि तथ्यात्मक या दार्शनिक सत्य को।
  • जॉन ड्राइडन को 'फादर ऑफ इंग्लिश क्रिटिसिज्म' कहा जाता है; उनका 'एस्से ऑन ड्रामेटिक पोएसी' तुलनात्मक आलोचना का पहला उदाहरण है, जिसमें उन्होंने प्राचीन और आधुनिक, फ्रेंच और अंग्रेजी नाटककारों की तुलना की।
  • अलेक्जेंडर पोप ने 'चेन ऑफ बीइंग' (Existence की एक पदानुक्रमित व्यवस्था) की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया और 'पॉजिटिविज्म' (आशावाद) का सिद्धांत दिया।
  • सैमुअल जॉनसन को 'फादर ऑफ प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म' माना जाता है; उन्होंने शेक्सपियर के नाटकों का विश्लेषण किया और 'लाइव्स ऑफ एमिनेंट पोएट्स' में मेटाफिजिकल पोएट्स शब्द गढ़ा।
नियो-क्लासिकल युग ने तर्क, नियम और संरचना पर जोर दिया, जिससे साहित्यिक आलोचना एक अधिक व्यवस्थित और अकादमिक अनुशासन बन गई।
जॉनसन ने शेक्सपियर के नाटकों में 'यूनिटी ऑफ टाइम एंड प्लेस' (समय और स्थान की एकता) के नियमों का पालन न करने को स्वीकार किया, यह तर्क देते हुए कि उनके नाटकों की समग्र प्रतिभा इन तकनीकी खामियों को दूर कर देती है।
  • विलियम वर्ड्सवर्थ ने 'प्रीफेस टू लिरिकल बैलेट्स' में कहा कि कविता 'शक्तिशाली भावनाओं का सहज प्रवाह' है और इसे 'आम आदमी की भाषा' में लिखा जाना चाहिए।
  • सैमुअल टेलर कोलरिज़ ने वर्ड्सवर्थ के विचारों का खंडन करते हुए कहा कि कविता एक 'कृत्रिम और विशिष्ट प्रक्रिया' है जिसके लिए 'सेकेंडरी इमेजिनेशन' (द्वितीयक कल्पना) की आवश्यकता होती है।
  • कोलरिज़ ने 'बायोग्राफिया लिटरेरिया' में 'फैंसी' (कल्पना) और 'इमेजिनेशन' (कल्पनाशक्ति) के बीच अंतर किया, और 'विलिंग सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ' (अविश्वास का स्वैच्छिक निलंबन) और 'पोएटिक फेथ' (काव्यात्मक विश्वास) की अवधारणाएं दीं।
रोमांटिक आलोचना ने व्यक्तिपरकता, भावना और कल्पना पर जोर दिया, जिससे कला की प्रकृति और कवि की भूमिका के बारे में हमारी समझ का विस्तार हुआ।
कोलरिज़ ने तर्क दिया कि पाठक को लेखक की दृष्टि में विश्वास दिखाना चाहिए और 'विलिंगली सस्पेंड डिसबिलीफ' करना चाहिए, भले ही वह अलौकिक या अवास्तविक तत्वों में विश्वास न करता हो।
  • विक्टोरियन युग में औद्योगिकरण और शहरीकरण से उत्पन्न सामाजिक मुद्दों को संबोधित करने के लिए 'आर्ट फॉर लाइफ सेक' (कला जीवन के लिए) का विचार प्रमुख था, जिसमें चार्ल्स डिकेंस जैसे लेखक शामिल थे।
  • इसके विपरीत, 'आर्ट फॉर आर्ट सेक' (कला कला के लिए) का सिद्धांत, जो एस्थेटिक मूवमेंट और डेकाडेंट मूवमेंट (1890 के दशक) में चरम पर था, कला को उसके अपने सौंदर्य मूल्य के लिए महत्व देता था, जिसमें ऑस्कर वाइल्ड जैसे लेखक शामिल थे।
  • मैथ्यू अर्नोल्ड ने 'टचस्टोन मेथड' (स्पर्शरेखा विधि) विकसित की, जिसमें महान लेखकों के अंशों का उपयोग करके हाल की कृतियों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता था; उन्होंने चौसर को 'क्लासिक' नहीं माना क्योंकि उनके काम में 'उच्च गंभीरता और सत्य' की कमी थी।
विक्टोरियन युग में कला की भूमिका पर बहस ने साहित्य के सामाजिक और सौंदर्यवादी कार्यों के बीच तनाव को उजागर किया, जो आज भी प्रासंगिक है।
मैथ्यू अर्नोल्ड ने चौसर को क्लासिक नहीं माना क्योंकि उनके काम में 'उच्च गंभीरता और सत्य' की कमी थी, जबकि वर्ड्सवर्थ को 'जीवन की आलोचना' (Criticism of Life) प्रदान करने के लिए सराहा।
  • टी.एस. एलियट ने 'ऑब्जेक्टिव कोरिलेटिव' (Objective Correlative) की अवधारणा दी, जिसके अनुसार भावनाओं को व्यक्त करने के लिए बाहरी वस्तुओं या स्थितियों का उपयोग किया जाना चाहिए; उन्होंने हैमलेट को इस अवधारणा की कमी के कारण एक 'कलात्मक विफलता' कहा।
  • उन्होंने 'इंपर्सनालिटी' (अवैयक्तिकता) के सिद्धांत पर जोर दिया, जिसमें कवि को अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को साहित्यिक कृति से अलग रखना चाहिए।
  • एलियट ने 'ट्रेडिशन' (परंपरा) के महत्व पर भी बल दिया, यह तर्क देते हुए कि एक कवि को न केवल अतीत की परंपराओं को समझना चाहिए बल्कि अपने समय में उन्हें सक्रिय रूप से आकार भी देना चाहिए।
टी.एस. एलियट के विचार 20वीं सदी के साहित्यिक आलोचना पर हावी रहे, जिन्होंने आधुनिकतावादी साहित्य और आलोचना के लिए एक नया दृष्टिकोण स्थापित किया।
एलियट ने हैमलेट को एक 'कलात्मक विफलता' कहा क्योंकि हैमलेट के बड़े इमोशंस (जैसे पिता की मृत्यु का बदला लेने की इच्छा) के लिए कोई उपयुक्त 'ऑब्जेक्टिव कोरिलेटिव' (जैसे कोई वस्तु या स्थिति जो उन भावनाओं को प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सके) नहीं था।

Key takeaways

  1. 1साहित्यिक आलोचना कला के मूल्यांकन का एक व्यवस्थित तरीका है, जो समय के साथ विकसित हुआ है।
  2. 2प्लेटो ने कला को वास्तविकता से दूर माना, जबकि अरस्तू ने इसे भावनाओं के रेचन (Catharsis) के लिए उपयोगी बताया।
  3. 3होरेस और सिडनी ने कला के मनोरंजन और शिक्षा दोनों के उद्देश्य पर जोर दिया।
  4. 4नियो-क्लासिकल युग ने तर्क और नियमों पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि रोमांटिक युग ने भावना और कल्पना को महत्व दिया।
  5. 5विक्टोरियन युग में कला के सामाजिक उद्देश्य ('आर्ट फॉर लाइफ सेक') और सौंदर्यवादी मूल्य ('आर्ट फॉर आर्ट सेक') के बीच बहस हुई।
  6. 6कोलरिज़ ने 'फैंसी' और 'इमेजिनेशन' के बीच अंतर किया और 'विलिंग सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ' की अवधारणा दी।
  7. 7टी.एस. एलियट ने 'ऑब्जेक्टिव कोरिलेटिव' और 'इंपर्सनालिटी' जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए, जिन्होंने आधुनिक आलोचना को आकार दिया।

Key terms

Literary Criticism (साहित्यिक आलोचना)Literary Theory (साहित्यिक सिद्धांत)Mimesis (अनुकरण)Catharsis (रेचन)Hamartia (पात्र का दोष)Peripeteia (भाग्य का उलटफेर)Sublimity (उदात्तता)Ars Poetica (काव्य कला)Defense of Poesie (कविता की रक्षा)Instruct and Delight (सिखाना और मनोरंजन करना)Unity of Action/Time/Place (कार्य/समय/स्थान की एकता)Fancy vs. Imagination (फैंसी बनाम कल्पना)Willing Suspension of Disbelief (अविश्वास का स्वैच्छिक निलंबन)Poetic Faith (काव्यात्मक विश्वास)Art for Life's Sake (कला जीवन के लिए)Art for Art's Sake (कला कला के लिए)Touchstone Method (स्पर्शरेखा विधि)Objective Correlative (वस्तुनिष्ठ सहसंबंधी)Impersonality (अवैयक्तिकता)Tradition (परंपरा)

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  1. 1प्लेटो ने कला को आदर्श राज्य के लिए हानिकारक क्यों माना और अरस्तू ने कला को किस प्रकार उपयोगी बताया?
  2. 2होरेस के अनुसार कला का दोहरा उद्देश्य क्या था और लोंजिनस ने 'सबलाइमिटी' (उदात्तता) को कैसे परिभाषित किया?
  3. 3फिलिप सिडनी ने कविता का बचाव कैसे किया और नियो-क्लासिकल आलोचकों जैसे ड्राइडन और जॉनसन के मुख्य योगदान क्या थे?
  4. 4वर्ड्सवर्थ और कोलरिज़ ने कविता की भाषा और कवि की भूमिका के बारे में क्या भिन्न विचार रखे?
  5. 5विक्टोरियन युग में 'आर्ट फॉर लाइफ सेक' और 'आर्ट फॉर आर्ट सेक' के बीच क्या अंतर था और मैथ्यू अर्नोल्ड की 'टचस्टोन मेथड' क्या थी?
  6. 6टी.एस. एलियट की 'ऑब्जेक्टिव कोरिलेटिव' और 'इंपर्सनालिटी' की अवधारणाएं क्या हैं और वे साहित्यिक विश्लेषण को कैसे प्रभावित करती हैं?

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