
UGC NET English Literature | UGC NET English Unit 8 Literary Criticism By Aishwarya Mam
Adda247 UGC NET
Overview
यह वीडियो लेक्चर लिटरेरी क्रिटिसिज्म (साहित्यिक आलोचना) की अवधारणा को विस्तार से समझाता है, जिसमें इसके ऐतिहासिक विकास, प्रमुख सिद्धांतकारों और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। यह यूजीसी नेट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। वीडियो क्लासिकल क्रिटिसिज्म से शुरू होकर रेनेसां, नियो-क्लासिकल, रोमांटिक, विक्टोरियन और आधुनिक क्रिटिसिज्म तक के सफर को कवर करता है। इसमें प्लेटो, अरस्तू, होरेस, लोंजिनस, फिलिप सिडनी, जॉन ड्राइडन, अलेक्जेंडर पोप, सैमुअल जॉनसन, कोलरिज़, वर्ड्सवर्थ, मैथ्यू अर्नोल्ड और टी.एस. एलियट जैसे प्रमुख आलोचकों और उनके विचारों पर चर्चा की गई है।
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Chapters
- लिटरेरी थ्योरी (साहित्यिक सिद्धांत) मान्यताओं का एक समूह है जिसके आधार पर हम दुनिया को देखते हैं।
- लिटरेरी क्रिटिसिज्म (साहित्यिक आलोचना) किसी साहित्यिक कृति के गुणों और दोषों का मूल्यांकन करने की प्रक्रिया है।
- आलोचना का पारंपरिक अर्थ सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं का मूल्यांकन करना है, हालांकि आजकल इसका नकारात्मक अर्थ अधिक प्रचलित है।
- साहित्यिक आलोचना का अध्ययन कालानुक्रमिक रूप से करने से अवधारणाओं को समझने में मदद मिलती है।
- प्लेटो का मानना था कि कला (पोएट्री) वास्तविकता से दो गुना दूर है (थ्योरी ऑफ फॉर्म्स के अनुसार) और यह आदर्श राज्य के निर्माण में बाधा डालती है, इसलिए कवियों को निर्वासित किया जाना चाहिए।
- अरस्तू ने कला को जीवन का अनुकरण (Mimesis) माना और तर्क दिया कि यह दर्शकों को नकारात्मक भावनाओं (जैसे भय और करुणा) से मुक्ति (Catharsis) दिलाने का एक सुरक्षित माध्यम है।
- अरस्तू ने ट्रेजेडी के लिए एक मॉडल प्रस्तुत किया जिसमें प्लॉट, कैरेक्टर, थॉट, डिक्शन, सॉन्ग और स्पेक्टेकल शामिल थे, और डाउनफॉल के लिए हमार्टिया (Flaw) और पेरिपेटिया (Reversal of Fortune) जैसी अवधारणाएं दीं।
- होरेस, एक लैटिन आलोचक, ने तर्क दिया कि कला का उद्देश्य केवल सिखाना (Instruct) ही नहीं, बल्कि मनोरंजन (Delight) भी करना है (Ars Poetica)।
- लोंजिनस ने 'ऑन द सबलाइम' में 'सबलाइमिटी' (उदात्तता) की अवधारणा प्रस्तुत की, जो किसी कार्य के विशाल दायरे और भव्यता से उत्पन्न होती है और पाठक को भयभीत करती है।
- लोंजिनस ने उदात्तता प्राप्त करने के पांच तरीके बताए: पैशन (Pathos), ग्रेटनेस ऑफ थॉट, नोबल डिक्शन (Noble Diction), एलिवेटेड कंपोजीशन (Elevated Composition), और फिगर्स ऑफ स्पीच (Figures of Speech)।
- फिलिप सिडनी ने अपने 'डिफेंस ऑफ पोएज़ी' (या 'एन अपोलॉजी फॉर पोएट्री') में कविता और नाटक का बचाव किया, जो प्यूरिटन आलोचक स्टीफन गुसोन के हमलों का जवाब था।
- सिडनी का मानना था कि कविता का उद्देश्य 'डिलाइट एंड इंस्ट्रक्ट' (मनोरंजन और शिक्षा) दोनों देना है, जो होरेस के विचार को प्रतिध्वनित करता है।
- उन्होंने तर्क दिया कि कविता इतिहास और दर्शन से भी पुरानी और श्रेष्ठ कला है क्योंकि यह मानव भाषा के विकास के साथ ही उत्पन्न हुई थी।
- जॉन ड्राइडन को 'फादर ऑफ इंग्लिश क्रिटिसिज्म' कहा जाता है; उनका 'एस्से ऑन ड्रामेटिक पोएसी' तुलनात्मक आलोचना का पहला उदाहरण है, जिसमें उन्होंने प्राचीन और आधुनिक, फ्रेंच और अंग्रेजी नाटककारों की तुलना की।
- अलेक्जेंडर पोप ने 'चेन ऑफ बीइंग' (Existence की एक पदानुक्रमित व्यवस्था) की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया और 'पॉजिटिविज्म' (आशावाद) का सिद्धांत दिया।
- सैमुअल जॉनसन को 'फादर ऑफ प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म' माना जाता है; उन्होंने शेक्सपियर के नाटकों का विश्लेषण किया और 'लाइव्स ऑफ एमिनेंट पोएट्स' में मेटाफिजिकल पोएट्स शब्द गढ़ा।
- विलियम वर्ड्सवर्थ ने 'प्रीफेस टू लिरिकल बैलेट्स' में कहा कि कविता 'शक्तिशाली भावनाओं का सहज प्रवाह' है और इसे 'आम आदमी की भाषा' में लिखा जाना चाहिए।
- सैमुअल टेलर कोलरिज़ ने वर्ड्सवर्थ के विचारों का खंडन करते हुए कहा कि कविता एक 'कृत्रिम और विशिष्ट प्रक्रिया' है जिसके लिए 'सेकेंडरी इमेजिनेशन' (द्वितीयक कल्पना) की आवश्यकता होती है।
- कोलरिज़ ने 'बायोग्राफिया लिटरेरिया' में 'फैंसी' (कल्पना) और 'इमेजिनेशन' (कल्पनाशक्ति) के बीच अंतर किया, और 'विलिंग सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ' (अविश्वास का स्वैच्छिक निलंबन) और 'पोएटिक फेथ' (काव्यात्मक विश्वास) की अवधारणाएं दीं।
- विक्टोरियन युग में औद्योगिकरण और शहरीकरण से उत्पन्न सामाजिक मुद्दों को संबोधित करने के लिए 'आर्ट फॉर लाइफ सेक' (कला जीवन के लिए) का विचार प्रमुख था, जिसमें चार्ल्स डिकेंस जैसे लेखक शामिल थे।
- इसके विपरीत, 'आर्ट फॉर आर्ट सेक' (कला कला के लिए) का सिद्धांत, जो एस्थेटिक मूवमेंट और डेकाडेंट मूवमेंट (1890 के दशक) में चरम पर था, कला को उसके अपने सौंदर्य मूल्य के लिए महत्व देता था, जिसमें ऑस्कर वाइल्ड जैसे लेखक शामिल थे।
- मैथ्यू अर्नोल्ड ने 'टचस्टोन मेथड' (स्पर्शरेखा विधि) विकसित की, जिसमें महान लेखकों के अंशों का उपयोग करके हाल की कृतियों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता था; उन्होंने चौसर को 'क्लासिक' नहीं माना क्योंकि उनके काम में 'उच्च गंभीरता और सत्य' की कमी थी।
- टी.एस. एलियट ने 'ऑब्जेक्टिव कोरिलेटिव' (Objective Correlative) की अवधारणा दी, जिसके अनुसार भावनाओं को व्यक्त करने के लिए बाहरी वस्तुओं या स्थितियों का उपयोग किया जाना चाहिए; उन्होंने हैमलेट को इस अवधारणा की कमी के कारण एक 'कलात्मक विफलता' कहा।
- उन्होंने 'इंपर्सनालिटी' (अवैयक्तिकता) के सिद्धांत पर जोर दिया, जिसमें कवि को अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को साहित्यिक कृति से अलग रखना चाहिए।
- एलियट ने 'ट्रेडिशन' (परंपरा) के महत्व पर भी बल दिया, यह तर्क देते हुए कि एक कवि को न केवल अतीत की परंपराओं को समझना चाहिए बल्कि अपने समय में उन्हें सक्रिय रूप से आकार भी देना चाहिए।
Key takeaways
- साहित्यिक आलोचना कला के मूल्यांकन का एक व्यवस्थित तरीका है, जो समय के साथ विकसित हुआ है।
- प्लेटो ने कला को वास्तविकता से दूर माना, जबकि अरस्तू ने इसे भावनाओं के रेचन (Catharsis) के लिए उपयोगी बताया।
- होरेस और सिडनी ने कला के मनोरंजन और शिक्षा दोनों के उद्देश्य पर जोर दिया।
- नियो-क्लासिकल युग ने तर्क और नियमों पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि रोमांटिक युग ने भावना और कल्पना को महत्व दिया।
- विक्टोरियन युग में कला के सामाजिक उद्देश्य ('आर्ट फॉर लाइफ सेक') और सौंदर्यवादी मूल्य ('आर्ट फॉर आर्ट सेक') के बीच बहस हुई।
- कोलरिज़ ने 'फैंसी' और 'इमेजिनेशन' के बीच अंतर किया और 'विलिंग सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ' की अवधारणा दी।
- टी.एस. एलियट ने 'ऑब्जेक्टिव कोरिलेटिव' और 'इंपर्सनालिटी' जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए, जिन्होंने आधुनिक आलोचना को आकार दिया।
Key terms
Test your understanding
- प्लेटो ने कला को आदर्श राज्य के लिए हानिकारक क्यों माना और अरस्तू ने कला को किस प्रकार उपयोगी बताया?
- होरेस के अनुसार कला का दोहरा उद्देश्य क्या था और लोंजिनस ने 'सबलाइमिटी' (उदात्तता) को कैसे परिभाषित किया?
- फिलिप सिडनी ने कविता का बचाव कैसे किया और नियो-क्लासिकल आलोचकों जैसे ड्राइडन और जॉनसन के मुख्य योगदान क्या थे?
- वर्ड्सवर्थ और कोलरिज़ ने कविता की भाषा और कवि की भूमिका के बारे में क्या भिन्न विचार रखे?
- विक्टोरियन युग में 'आर्ट फॉर लाइफ सेक' और 'आर्ट फॉर आर्ट सेक' के बीच क्या अंतर था और मैथ्यू अर्नोल्ड की 'टचस्टोन मेथड' क्या थी?
- टी.एस. एलियट की 'ऑब्जेक्टिव कोरिलेटिव' और 'इंपर्सनालिटी' की अवधारणाएं क्या हैं और वे साहित्यिक विश्लेषण को कैसे प्रभावित करती हैं?