Historical Background FULL CHAPTER | Indian Polity Chapter 1 | UPSC Preparation ⚡
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Historical Background FULL CHAPTER | Indian Polity Chapter 1 | UPSC Preparation ⚡

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8 chapters6 takeaways15 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो भारत के संविधान के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके विकास पर केंद्रित है। यह बताता है कि कैसे यूरोपीय कंपनियां, विशेष रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी, भारत में व्यापार करने आईं और धीरे-धीरे राजनीतिक शक्ति हासिल की। वीडियो 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से शुरू होकर 1861 के इंडियन काउंसिल एक्ट तक विभिन्न महत्वपूर्ण अधिनियमों और घटनाओं की व्याख्या करता है, यह समझाते हुए कि कैसे इन अधिनियमों ने कंपनी के शासन और बाद में ब्रिटिश क्राउन के शासन के तहत भारत के प्रशासनिक और विधायी ढांचे को आकार दिया। इसमें प्रमुख अधिनियमों, उनके प्रावधानों और भारतीय शासन प्रणाली पर उनके प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है।

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Chapters

  • 1600 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को रॉयल चार्टर मिला, जिससे उन्हें भारत में व्यापार करने की अनुमति मिली।
  • शुरुआत में, अंग्रेज, फ्रांसीसी, पुर्तगाली और डच जैसी यूरोपीय कंपनियां भारत में मसालों, कॉटन और इंडिगो जैसे सामानों के व्यापार के लिए आईं।
  • 1757 और 1764 की लड़ाइयों के बाद, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने धीरे-धीरे अपना राजनीतिक और सैन्य प्रभुत्व स्थापित करना शुरू कर दिया।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि कैसे एक व्यापारिक कंपनी ने भारत में राजनीतिक शक्ति हासिल की, जिसने आगे चलकर भारत के शासन और संविधान की नींव रखी।
1600 में महारानी ने एक प्राइवेट कंपनी को भारत में व्यापार करने का रॉयल चार्टर दिया, जैसे आज भारत सरकार किसी कंपनी को विदेश में व्यापार करने की अनुमति देती है।
  • 1764 की बक्सर की लड़ाई के बाद, ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय से बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी (राजस्व एकत्र करने का अधिकार) प्राप्त की।
  • दीवानी मिलने से कंपनी की आर्थिक और राजनीतिक पकड़ मजबूत हुई, जिससे वे केवल व्यापार से आगे बढ़कर शासन में शामिल हो गए।
  • कंपनी ने अन्य यूरोपीय शक्तियों जैसे फ्रांसीसियों के साथ संघर्ष किया और बॉम्बे जैसे क्षेत्रों को दहेज में प्राप्त किया।
यह चरण दर्शाता है कि कैसे कंपनी ने भारत के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित किया और यहीं से ब्रिटिश शासन की वास्तविक शुरुआत हुई, जिसने भारत के भविष्य को आकार दिया।
1765 में शाह आलम द्वितीय से बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी प्राप्त करना, जिससे कंपनी को इन क्षेत्रों से कर वसूलने का अधिकार मिला।
  • 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट ब्रिटिश सरकार द्वारा कंपनी के बेलगाम कामकाज को नियंत्रित करने का पहला प्रयास था।
  • इस एक्ट ने गवर्नर ऑफ बंगाल को गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल बनाया और बॉम्बे व मद्रास के गवर्नरों को उसके अधीन कर दिया।
  • 1781 के एक्ट ऑफ सेटलमेंट ने सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को सीमित किया, राजस्व मामलों को उसके दायरे से बाहर रखा और गवर्नर जनरल व उसके काउंसिल को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए छूट दी।
ये शुरुआती अधिनियम भारत में केंद्रीय प्रशासन की स्थापना और कंपनी के कामकाज पर ब्रिटिश संसद के नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थे।
1773 के एक्ट के तहत, लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स पहले गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल बने, जिससे एक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत हुई।
  • पिट्स इंडिया एक्ट 1784 ने कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को अलग कर दिया, एक नया निकाय 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' स्थापित किया जो राजनीतिक मामलों की देखरेख करता था, जबकि 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' वाणिज्यिक मामलों को देखते थे।
  • इस एक्ट ने भारत में कंपनी के क्षेत्रों को 'ब्रिटिश पज़ेशन्स इन इंडिया' के रूप में मान्यता दी, जिससे ब्रिटिश सरकार का कंपनी पर सीधा नियंत्रण बढ़ गया।
  • 1786 के एक्ट ने लॉर्ड कॉर्नवालिस को गवर्नर जनरल के रूप में नियुक्त किया और उन्हें अपनी काउंसिल के निर्णयों को ओवरराइड करने की विशेष शक्ति दी, साथ ही कमांडर-इन-चीफ का पद भी प्रदान किया।
ये अधिनियम ब्रिटिश सरकार द्वारा कंपनी पर नियंत्रण को मजबूत करने और भारत में शासन की दोहरी प्रणाली (बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण थे।
पिट्स इंडिया एक्ट के तहत, बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना ने ब्रिटिश सरकार को कंपनी के राजनीतिक और सैन्य मामलों पर सीधा नियंत्रण दिया।
  • 1793 के चार्टर एक्ट ने कंपनी के एकाधिकार को अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया और बोर्ड ऑफ कंट्रोल के खर्चों को भारतीय राजस्व से वहन करने का प्रावधान किया।
  • 1813 के चार्टर एक्ट ने कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया, सिवाय चाय व्यापार और चीन के साथ व्यापार के, और भारत में पश्चिमी शिक्षा और ईसाई मिशनरियों के प्रसार की अनुमति दी।
  • 1833 के चार्टर एक्ट ने गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल को गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया बनाया, जिससे भारत में केंद्रीकृत शासन की नींव पड़ी और कंपनी की वाणिज्यिक गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
ये चार्टर एक्ट्स कंपनी के एकाधिकार को धीरे-धीरे समाप्त करने, भारत में शिक्षा और धर्म के प्रसार की अनुमति देने और शासन को अधिक केंद्रीकृत बनाने में महत्वपूर्ण थे।
1813 के एक्ट ने कंपनी के चाय व्यापार एकाधिकार को छोड़कर बाकी सभी व्यापारिक एकाधिकार समाप्त कर दिए, जिससे अन्य ब्रिटिश कंपनियों को भी भारत में व्यापार करने का अवसर मिला।
  • 1853 के चार्टर एक्ट ने सिविल सेवाओं में खुली प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिससे भारतीयों के लिए आईसीएस परीक्षा में भाग लेना संभव हुआ।
  • इस एक्ट ने गवर्नर जनरल की काउंसिल के विधायी और कार्यकारी कार्यों को अलग कर दिया, जिससे एक अलग विधायी परिषद का गठन हुआ।
  • 1857 के विद्रोह के बाद, 1858 का गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट पारित हुआ, जिसने कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया।
यह एक्ट भारत में प्रशासनिक सुधारों और भारतीयों की भागीदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, और 1858 का अधिनियम ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष शासन की शुरुआत का प्रतीक है।
1853 के एक्ट के तहत मैकाले कमेटी की नियुक्ति, जिसने सिविल सेवाओं में भारतीयों के लिए खुली प्रतियोगिता की सिफारिश की।
  • 1858 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट ने ईस्ट इंडिया कंपनी को समाप्त कर दिया और भारत का शासन ब्रिटिश क्राउन के सीधे नियंत्रण में ला दिया।
  • गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया का पद बदलकर वाइसरॉय कर दिया गया, जो सीधे ब्रिटिश क्राउन का प्रतिनिधि होता था, और लॉर्ड कैनिंग पहले वाइसरॉय बने।
  • एक नए पद 'सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडिया' का सृजन किया गया, जो लंदन में रहकर भारतीय प्रशासन की देखरेख करता था, और उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय काउंसिल ऑफ इंडिया का गठन किया गया।
यह अधिनियम भारत के शासन में एक बड़े बदलाव का प्रतीक था, जिसने कंपनी के शासन को समाप्त कर ब्रिटिश राजशाही के प्रत्यक्ष शासन की शुरुआत की।
1858 के एक्ट के बाद, भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया, और वाइसरॉय क्राउन के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने लगे।
  • 1861 के भारतीय परिषद अधिनियम ने कानून बनाने की प्रक्रिया में भारतीयों को शामिल करने की शुरुआत की, हालांकि गैर-सरकारी सदस्यों के रूप में।
  • वाइसरॉय की विस्तारित परिषद में तीन भारतीय - बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव - को गैर-सरकारी सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया।
  • इस अधिनियम ने बंगाल, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत और पंजाब के लिए नई विधायी परिषदों की स्थापना की और मद्रास व बॉम्बे प्रेसीडेंसी की विधायी शक्तियों को बहाल किया।
यह अधिनियम भारतीयों को शासन में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने भारत में प्रतिनिधित्व की शुरुआत की और विधायी शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया।
1861 के एक्ट के तहत, राजा ऑफ बनारस, महाराजा ऑफ पटियाला और सर दिनकर राव को वाइसरॉय की परिषद में गैर-सरकारी सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया।

Key takeaways

  1. 1ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में आगमन केवल व्यापार के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने राजनीतिक शक्ति हासिल कर ली।
  2. 21773 के रेगुलेटिंग एक्ट से लेकर 1858 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट तक, ब्रिटिश संसद ने कंपनी के शासन को नियंत्रित करने और अंततः समाप्त करने के लिए कई अधिनियम पारित किए।
  3. 3कंपनी के शासन के दौरान, अधिनियमों ने धीरे-धीरे भारत में एक केंद्रीकृत प्रशासन की स्थापना की और ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण बढ़ाया।
  4. 41857 के विद्रोह के बाद, भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया, जिसने भारत के संवैधानिक इतिहास में एक नया अध्याय खोला।
  5. 5भारतीय परिषद अधिनियम 1861 ने भारतीयों को कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल करके प्रतिनिधित्व की शुरुआत की, भले ही यह सीमित था।
  6. 6समय के साथ, अधिनियमों ने विधायी शक्तियों का विस्तार किया और स्थानीय सरकारों को अधिक स्वायत्तता प्रदान की।

Key terms

रॉयल चार्टरईस्ट इंडिया कंपनीदीवानीरेगुलेटिंग एक्ट 1773गवर्नर जनरल ऑफ बंगालपिट्स इंडिया एक्ट 1784बोर्ड ऑफ कंट्रोलकोर्ट ऑफ डायरेक्टर्सचार्टर एक्टगवर्नर जनरल ऑफ इंडियागवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858वाइसरॉयसेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर इंडियाभारतीय परिषद अधिनियम 1861विधायी परिषद

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  1. 11764 की बक्सर की लड़ाई के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कौन से अधिकार प्राप्त किए और इसका क्या महत्व था?
  2. 21773 के रेगुलेटिंग एक्ट के मुख्य प्रावधान क्या थे और इसने भारत में प्रशासन को कैसे प्रभावित किया?
  3. 3पिट्स इंडिया एक्ट 1784 ने कंपनी के शासन में क्या बदलाव लाए और क्यों?
  4. 41833 के चार्टर एक्ट ने गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल के पद को कैसे बदला और इसके क्या परिणाम हुए?
  5. 51857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश क्राउन ने भारत का शासन सीधे अपने हाथ में क्यों लिया और इसके लिए कौन सा अधिनियम पारित किया गया?

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