
HPCL Junior Executive 2026 | HPCL Electrical Engineering Class | POWER SYSTEM HPCL JE 2026 03
Engineers Wallah AE JE
Overview
यह वीडियो पावर सिस्टम के महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स और उनसे संबंधित प्रश्नों पर केंद्रित है। इसमें बेस लोड और पीक लोड पावर प्लांट के बीच अंतर, सर्च इंपीडेंस लोडिंग की गणना, फेरेंटी इफेक्ट, वोल्टेज रेगुलेशन, ट्रांसमिशन लाइन की विशेषताओं, फॉल्ट एनालिसिस (जैसे जीरो सीक्वेंस करंट, लाइन-टू-ग्राउंड फॉल्ट), और इंसुलेटर स्ट्रिंग के विश्लेषण जैसे विषयों को कवर किया गया है। वीडियो में विभिन्न प्रकार के फॉल्ट्स, पावर सिस्टम में रिले के उपयोग, ट्रांसमिशन लाइन कंडक्टरों (जैसे ACSR) की विशेषताओं और पावर सिस्टम में बस की क्वांटिटीज पर भी चर्चा की गई है। अंत में, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स मैराथन की घोषणा की गई है।
Save this permanently with flashcards, quizzes, and AI chat
Chapters
- पावर प्लांट दो मुख्य प्रकार के होते हैं: बेस लोड और पीक लोड।
- बेस लोड प्लांट लंबे समय तक लगातार बिजली सप्लाई करते हैं (जैसे थर्मल, न्यूक्लियर, हाइड्रो)।
- पीक लोड प्लांट इमरजेंसी में या जब बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है, तब उपयोग किए जाते हैं (जैसे डीजल प्लांट, पंप स्टोरेज प्लांट)।
- डीजल पावर प्लांट को 5-10 मिनट में ऑपरेट किया जा सकता है, इसलिए यह पीक लोड के लिए उपयुक्त है।
- ट्रांसमिशन लाइन की पावर ट्रांसफर कैपेबिलिटी सर्च इंपीडेंस लोडिंग (SIL) से संबंधित है।
- SIL की गणना VL² / ZS फॉर्मूले से की जाती है, जहाँ VL लाइन-टू-लाइन वोल्टेज है और ZS सर्च इंपीडेंस है।
- सर्च इंपीडेंस (ZS) की गणना √L/C से की जाती है, जहाँ L इंडक्टेंस प्रति यूनिट लेंथ और C कैपेसिटेंस प्रति यूनिट लेंथ है।
- फेरेंटी इफेक्ट लंबी ट्रांसमिशन लाइनों में, विशेष रूप से नो-लोड या लाइट लोड कंडीशन में, अधिक स्पष्ट होता है।
- लॉन्ग ट्रांसमिशन लाइनों में वोल्टेज 100 KV (या 132 KV) से अधिक होता है, जिससे फेरेंटी इफेक्ट बढ़ जाता है।
- शॉर्ट ट्रांसमिशन लाइनों में, पावर फैक्टर वोल्टेज रेगुलेशन को प्रभावित करता है; लैगिंग पावर फैक्टर पर रेगुलेशन पॉजिटिव होता है, जबकि लीडिंग पावर फैक्टर पर नेगेटिव या जीरो हो सकता है।
- जब ट्रांसमिशन लाइन का कैरेक्टरिस्टिक इंपीडेंस लोड इंपीडेंस के बराबर होता है, तो वोल्टेज प्रोफाइल फ्लैट होता है और रेगुलेशन जीरो होता है, जिससे सारी एनर्जी लोड द्वारा एब्जॉर्ब हो जाती है।
- रेडियल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में डिस्ट्रीब्यूटर के चयन का मुख्य क्राइटेरिया वोल्टेज ड्रॉप है।
- जीरो सीक्वेंस करंट फॉल्ट के नेचर को इंगित करता है; यदि जीरो सीक्वेंस करंट जीरो है, तो यह डबल लाइन फॉल्ट (बिना ग्राउंडिंग के) का संकेत हो सकता है।
- लाइन-टू-ग्राउंड (LG) फॉल्ट और डबल लाइन-टू-ग्राउंड (LLG) फॉल्ट में जीरो सीक्वेंस करंट मौजूद होता है यदि ग्राउंडिंग की व्यवस्था है।
- थ्री-फेज फॉल्ट एक बैलेंस फॉल्ट है, और यदि ग्राउंडिंग मौजूद है, तो जीरो सीक्वेंस करंट भी मौजूद हो सकता है।
- ट्रांसफार्मर में HRC (High Rupturing Capacity) फ्यूज का उपयोग मुख्य रूप से शॉर्ट सर्किट करंट से सुरक्षा के लिए किया जाता है।
- सस्पेंशन इंसुलेटर स्ट्रिंग में, डिस्क के बीच सेल्फ-कैपेसिटेंस और पिन-टू-अर्थ म्यूचुअल कैपेसिटेंस के कारण वोल्टेज का वितरण असमान होता है।
- इंसुलेटर स्ट्रिंग की कुल वोल्टेज झेलने की क्षमता लोअर डिस्क पर अधिकतम वोल्टेज और स्ट्रिंग की कुल कैपेसिटेंस पर निर्भर करती है।
- सिमेट्रिकल फॉल्ट में थ्री-फेज शॉर्ट सर्किट फॉल्ट शामिल है, जहां सभी तीन फेज संतुलित रहते हैं।
- पावर सिस्टम में जनरेटिंग एंड से लोड एंड की ओर बढ़ने पर फॉल्ट की संभावना बढ़ती है; अल्टरनेटर में फॉल्ट की संभावना सबसे कम होती है।
- रिवर्स पावर रिले (जिसे वाटमीट्रिक रिले भी कहा जाता है) का उपयोग प्राइम मूवर की विफलता जैसी स्थितियों में जनरेटर को मोटर में बदलने से बचाने के लिए किया जाता है।
- ACSR (Aluminum Conductor Steel Reinforced) कंडक्टर में स्टील वायर का उपयोग कंडक्टर की टेंसाइल स्ट्रेंथ (यांत्रिक मजबूती) को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
- हाइपोथेटिकल रेडियस (GMR) और वास्तविक रेडियस (R) का अनुपात लगभग 0.7788 होता है।
- एसी ट्रांसमिशन सिस्टम का एक प्रमुख लाभ यह है कि वोल्टेज को आसानी से स्टेप-अप या स्टेप-डाउन किया जा सकता है, जो डीसी सिस्टम में संभव नहीं है।
- पावर सिस्टम में बस से संबंधित मुख्य क्वांटिटीज एक्टिव पावर, रिएक्टिव पावर, वोल्टेज मैग्नीट्यूड और फेज एंगल हैं।
- बस एडमिटेंस मैट्रिक्स (Ybus) में डायगोनल एलिमेंट्स सेल्फ-एडमिटेंस और ऑफ-डायगोनल एलिमेंट्स म्यूचुअल एडमिटेंस को दर्शाते हैं।
- 29 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक पावर इलेक्ट्रॉनिक्स का एक मैराथन सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें थ्योरी और एमसीक्यू दोनों शामिल होंगे।
Key takeaways
- पावर प्लांट को उनकी लोड-कैरींग क्षमता के आधार पर बेस लोड और पीक लोड में वर्गीकृत किया जाता है।
- ट्रांसमिशन लाइन की पावर ट्रांसफर कैपेबिलिटी सर्च इंपीडेंस लोडिंग (SIL) से निर्धारित होती है, जो लाइन के इंडक्टेंस और कैपेसिटेंस पर निर्भर करती है।
- फेरेंटी इफेक्ट लंबी और हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में एक महत्वपूर्ण घटना है, जो नो-लोड या लाइट-लोड स्थितियों में वोल्टेज वृद्धि का कारण बनती है।
- वोल्टेज रेगुलेशन लीडिंग पावर फैक्टर पर नेगेटिव या जीरो हो सकता है, खासकर जब ट्रांसमिशन लाइन का कैरेक्टरिस्टिक इंपीडेंस लोड इंपीडेंस के बराबर हो।
- जीरो सीक्वेंस करंट फॉल्ट एनालिसिस में महत्वपूर्ण है, और इसकी उपस्थिति या अनुपस्थिति फॉल्ट के प्रकार (जैसे LG, LL, LLG, 3-फेज) को इंगित कर सकती है।
- ACSR कंडक्टर एल्यूमीनियम की चालकता और स्टील की यांत्रिक मजबूती को मिलाकर ट्रांसमिशन लाइनों के लिए एक कुशल समाधान प्रदान करते हैं।
- पावर सिस्टम में फॉल्ट की संभावना जनरेटिंग एंड से लोड एंड की ओर बढ़ती है, जिसमें ओवरहेड लाइनें सबसे अधिक फॉल्ट-प्रोन होती हैं।
- रिवर्स पावर रिले जनरेटर को मोटर में बदलने से बचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर प्राइम मूवर की विफलता के मामलों में।
Key terms
Test your understanding
- बेस लोड और पीक लोड पावर प्लांट के बीच मुख्य अंतर क्या हैं और उनके उदाहरण क्या हैं?
- सर्च इंपीडेंस लोडिंग (SIL) क्या है और इसकी गणना कैसे की जाती है?
- फेरेंटी इफेक्ट क्या है और यह किन परिस्थितियों में अधिक स्पष्ट होता है?
- जीरो सीक्वेंस करंट फॉल्ट एनालिसिस में क्या भूमिका निभाता है और यह किन फॉल्ट्स में मौजूद होता है?
- ACSR कंडक्टर में स्टील वायर का उपयोग क्यों किया जाता है और इसके क्या फायदे हैं?
- पावर सिस्टम में फॉल्ट की संभावना के संबंध में जनरेटिंग एंड और लोड एंड की तुलना कैसे की जाती है?