
Lec 5 | He-Ne Laser Construction and Working | Laser Physics | Engineering Physics BTech 1st Year
EDVARA ENGINEERS
Overview
यह वीडियो हीलियम-नियॉन (He-Ne) लेजर के निर्माण और कार्यप्रणाली की व्याख्या करता है। इसमें लेजर के मुख्य घटकों जैसे ऑप्टिकल रेज़ोनेटर, एक्टिव मीडियम (हीलियम-नियॉन गैस मिश्रण), ब्रिस्टर विंडो और मिरर की चर्चा की गई है। वीडियो लेजर के कार्य सिद्धांत को विस्तार से बताता है, जिसमें पंपिंग सोर्स (इलेक्ट्रिक डिस्चार्ज) द्वारा गैस को उत्तेजित करना, जनसंख्या व्युत्क्रम (population inversion) की स्थिति प्राप्त करना और स्टिमुलेटेड एमिशन के माध्यम से लेजर प्रकाश उत्पन्न करना शामिल है। अंत में, He-Ne लेजर के लिए ऊर्जा स्तर आरेख (energy level diagram) को समझाया गया है, जिसमें हीलियम और नियॉन परमाणुओं के बीच ऊर्जा हस्तांतरण और लेजर प्रकाश के उत्सर्जन की प्रक्रिया को दर्शाया गया है।
Save this permanently with flashcards, quizzes, and AI chat
Chapters
- ऑप्टिकल रेज़ोनेटर लेजर ट्यूब के अंदर प्रकाश को बार-बार परावर्तित करके उसकी तीव्रता बढ़ाता है।
- एक्टिव मीडियम हीलियम और नियॉन गैस का 10:1 के अनुपात में मिश्रण है, जहाँ लेजर क्रिया होती है।
- पूरी तरह से सिल्वर्ड मिरर सभी प्रकाश को परावर्तित करता है, जबकि आंशिक रूप से सिल्वर्ड मिरर 99% प्रकाश को परावर्तित करता है और 1% को बाहर निकलने देता है।
- ब्रिस्टर विंडो अवांछित विकिरणों (जैसे इन्फ्रारेड) को ब्लॉक करती हैं और केवल दृश्यमान लेजर प्रकाश को बाहर निकलने देती हैं।
- पंपिंग सोर्स (जैसे डीसी सप्लाई) गैस को उत्तेजित करने के लिए बाहरी ऊर्जा प्रदान करता है।
- डीसी सप्लाई से मुक्त इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होते हैं और हीलियम परमाणुओं से टकराते हैं।
- हीलियम परमाणु ऊर्जा प्राप्त करके उत्तेजित अवस्था में चले जाते हैं और फिर नियॉन परमाणुओं से टकराते हैं।
- हीलियम नियॉन को उत्तेजित करने में उत्प्रेरक (catalyst) की तरह काम करता है, जिससे नियॉन परमाणु उत्तेजित अवस्था में पहुँच जाते हैं।
- जब उत्तेजित नियॉन परमाणु अपनी निम्न ऊर्जा अवस्था में आते हैं, तो वे स्टिमुलेटेड एमिशन के माध्यम से लेजर प्रकाश उत्सर्जित करते हैं।
- यह उत्सर्जित प्रकाश ऑप्टिकल रेज़ोनेटर के भीतर बार-बार परावर्तित होकर तीव्रता प्राप्त करता है और अंततः आंशिक रूप से सिल्वर्ड मिरर से बाहर निकल जाता है।
- हीलियम परमाणु बाहरी ऊर्जा से उत्तेजित होकर एक मेटा-स्टेबल अवस्था (E2) में पहुँचता है।
- उत्तेजित हीलियम परमाणु नियॉन परमाणु को ऊर्जा हस्तांतरित करता है, जिससे नियॉन परमाणु भी उत्तेजित अवस्था में पहुँच जाता है।
- नियॉन परमाणु उत्तेजित अवस्था से एक निम्न ऊर्जा स्तर पर संक्रमण (transition) करता है, जिससे 632.8 nm तरंग दैर्ध्य वाली लेजर प्रकाश उत्सर्जित होती है (स्टिमुलेटेड एमिशन)।
- यह पहला संक्रमण स्टिमुलेटेड एमिशन है, जबकि बाद के संक्रमण स्पॉन्टेनियस एमिशन या रेडिएशन-लेस ट्रांजिशन हो सकते हैं।
Key takeaways
- He-Ne लेजर हीलियम और नियॉन गैसों के मिश्रण का उपयोग करता है, जहाँ हीलियम नियॉन को उत्तेजित करने में मदद करता है।
- ऑप्टिकल रेज़ोनेटर और विशेष मिरर लेजर प्रकाश की तीव्रता और दिशा को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- ब्रिस्टर विंडो केवल वांछित लेजर तरंग दैर्ध्य को बाहर निकलने देती हैं, अन्य विकिरणों को रोकती हैं।
- लेजर क्रिया स्टिमुलेटेड एमिशन के सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ एक फोटॉन अन्य समान फोटॉनों के उत्सर्जन को प्रेरित करता है।
- He-Ne लेजर के लिए जनसंख्या व्युत्क्रम (population inversion) की स्थिति प्राप्त करना आवश्यक है, जहाँ उत्तेजित अवस्था में अधिक परमाणु हों।
Key terms
Test your understanding
- He-Ne लेजर में हीलियम और नियॉन गैसों का अनुपात क्या होता है और हीलियम की क्या भूमिका है?
- ऑप्टिकल रेज़ोनेटर और ब्रिस्टर विंडो लेजर के कार्य में क्या योगदान करते हैं?
- He-Ne लेजर में स्टिमुलेटेड एमिशन की प्रक्रिया कैसे होती है?
- He-Ne लेजर के ऊर्जा स्तर आरेख में नियॉन परमाणु के लिए लेजर उत्सर्जन किस संक्रमण के कारण होता है?
- जनसंख्या व्युत्क्रम (population inversion) क्या है और यह लेजर क्रिया के लिए क्यों आवश्यक है?