
Vasco da Gama | Portuguese in India | Modern History for UPSC
Bookstawa
Overview
यह वीडियो भारत में वास्कोडिगामा के आगमन और उसके बाद भारत में पुर्तगाली शक्ति की स्थापना और विस्तार की कहानी बताता है। यह वास्कोडिगामा की पहली यात्रा, उसके व्यापारिक मुनाफे, और पुर्तगाली राजा मैनुअल प्रथम द्वारा व्यापार को सरकारी उद्यम बनाने के फैसले से शुरू होता है। वीडियो पेड्रो अल्वारेस कैब्राल की यात्रा, अरब व्यापारियों और जमोरिन के साथ संघर्ष, और भारत में पुर्तगाली फैक्ट्रियों और किलों की स्थापना का वर्णन करता है। इसके बाद, यह फ्रांसिस्को डी अलमिडा की ब्लू वाटर पॉलिसी, अलफोंजो डी अल्बुकर्क द्वारा गोवा पर कब्जा और पूर्वी वाणिज्य पर पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित करने के प्रयासों, और नीनो डी कुन्हा द्वारा कोचीन से गोवा में मुख्यालय स्थानांतरित करने और पूर्वी तट पर विस्तार की चर्चा करता है। अंत में, यह बहादुर शाह के साथ ट्रीटी ऑफ बसाई और उसकी मृत्यु के माध्यम से गुजरात में पुर्तगाली प्रभाव को दर्शाता है।
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Chapters
- वास्कोडिगामा 1498 में केप रूट से मालाबार तट (वर्तमान केरल) पहुंचे, जहां कलकट के शासक जमोरिन ने उनका स्वागत किया।
- अरब व्यापारियों की पहले से मौजूद मोनोपोली और धार्मिक मतभेदों के कारण पुर्तगालियों और अरबों के बीच तनाव था।
- वास्कोडिगामा की पहली यात्रा अत्यधिक लाभदायक रही, जिससे यूरोप में 60 गुना मुनाफा हुआ, जिसने अन्य पुर्तगालियों को प्रेरित किया।
- पुर्तगाली राजा मैनुअल प्रथम ने सभी व्यापारिक मिशनों को सरकारी उद्यम घोषित किया।
- 1500 में, पेड्रो अल्वारेस कैब्राल एक बड़े बेड़े के साथ भारत पहुंचे और कलकट में पहली पुर्तगाली फैक्ट्री स्थापित की।
- पुर्तगालियों की बढ़ती उपस्थिति और फैक्ट्री की स्थापना से अरब व्यापारियों को खतरा महसूस हुआ, जिससे हिंसक झड़पें हुईं।
- जमोरिन ने पुर्तगालियों को शांत रहने की चेतावनी दी, लेकिन कैब्राल को लगा कि जमोरिन अरबों के प्रति पक्षपाती है, जिससे पुर्तगाली जमोरिन के खिलाफ हो गए।
- अरब व्यापारियों और जमोरिन ने मिलकर कैब्राल को हराया, और वह 1501 में पुर्तगाल लौट गए।
- 1501 में, वास्कोडिगामा अधिक सैनिकों के साथ लौटे और अरब जहाजों को नष्ट कर दिया, जिससे जमोरिन भयभीत हो गया।
- वास्कोडिगामा ने जमोरिन पर मुसलमानों को निकालने का दबाव डाला, जिसे जमोरिन ने अस्वीकार कर दिया, जिससे तनाव बढ़ गया।
- वास्कोडिगामा ने कलकट, कन्नूर और कोचीन में किलेबंद फैक्ट्रियां स्थापित कीं, जिससे भारत में पुर्तगाली बस्तियों की नींव पड़ी।
- 1503 में, पुर्तगाली राजा मैनुअल प्रथम ने भारत में एक स्थायी प्रशासक नियुक्त करने का फैसला किया।
- फ्रांसिस्को डी अलमिडा भारत के पहले पुर्तगाली वाइसराय बने (1505-1509), जिनका लक्ष्य हिंद महासागर पर पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित करना था।
- उन्होंने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' लागू की, जिसके तहत हिंद महासागर में व्यापार करने वाले सभी जहाजों को पुर्तगालियों से लाइसेंस लेना अनिवार्य था।
- इस नीति से मिस्र के मामलू सुल्तान, गुजरात के महमूद बेगड़ा, अरब व्यापारी और जमोरिन जैसे स्थानीय शासक प्रभावित हुए और उन्होंने विरोध किया।
- 1508 में दू की लड़ाई में अलमिडा के बेटे की हार और मृत्यु के बावजूद, अलमिडा ने अगले वर्ष मिस्र और गुजरात की संयुक्त सेना को हराया।
- अलफोंजो डी अल्बुकर्क (1509-1515) ने अलमिडा की नीति को जारी रखा और पूर्वी वाणिज्य पर पूर्ण पुर्तगाली प्रभुत्व का लक्ष्य रखा।
- उन्होंने गोवा को एक रणनीतिक नौसैनिक अड्डे के रूप में पहचाना और 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से इसे आसानी से जीत लिया।
- गोवा को पुर्तगाली शक्ति का केंद्र बनाया गया, जहां हार्बर, किले और प्रशासनिक ढांचे विकसित किए गए।
- अल्बुकर्क ने मलक्का, अचीन, कोलंबो और फारस की खाड़ी के मुहाने जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों पर भी नियंत्रण स्थापित किया, जिससे हिंद महासागर पर पुर्तगाली प्रभुत्व मजबूत हुआ।
- नीनो डी कुन्हा (1529-1538) ने पुर्तगाली मुख्यालय को कोचीन से गोवा स्थानांतरित कर दिया, जिससे गोवा का महत्व और बढ़ गया।
- उन्होंने भारत के पूर्वी तट पर भी विस्तार किया और हुगली (बंगाल) में एक महत्वपूर्ण बस्ती स्थापित की।
- गुजरात के शासक बहादुर शाह ने पुर्तगालियों से मदद मांगी और 1534 में ट्रीटी ऑफ बसाई पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दू और बसाई द्वीप पुर्तगालियों को सौंप दिए गए।
- इस संधि के बावजूद, पुर्तगालियों ने 1537 में धोखे से बहादुर शाह की हत्या कर दी।
Key takeaways
- यूरोपीय खोजों ने भारत के लिए एक नया समुद्री मार्ग खोला, जिसने वैश्विक व्यापार और शक्ति संतुलन को बदल दिया।
- पुर्तगाली व्यापारिक लाभ के साथ-साथ धार्मिक विस्तार के उद्देश्यों से भी प्रेरित थे।
- स्थानीय शासकों के बीच आंतरिक संघर्षों और विभाजन का फायदा उठाकर पुर्तगालियों ने अपनी शक्ति स्थापित की।
- ब्लू वाटर पॉलिसी और नौसैनिक श्रेष्ठता ने हिंद महासागर में पुर्तगाली प्रभुत्व सुनिश्चित किया।
- गोवा का अधिग्रहण पुर्तगाली शक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया और भारत में यूरोपीय क्षेत्रीय कब्जे का प्रारंभिक उदाहरण था।
- पुर्तगालियों ने कूटनीति, गठबंधन और अंततः सैन्य बल का उपयोग करके अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार किया।
- स्थानीय शासकों के साथ पुर्तगाली संबंध अक्सर विश्वासघात और धोखे से चिह्नित थे, जैसा कि बहादुर शाह की मृत्यु से स्पष्ट है।
Key terms
Test your understanding
- वास्कोडिगामा की भारत यात्रा ने यूरोपीय व्यापार और भारत के इतिहास को कैसे प्रभावित किया?
- पुर्तगालियों ने हिंद महासागर में अपनी नौसैनिक श्रेष्ठता और व्यापारिक एकाधिकार कैसे स्थापित किया?
- गोवा पर पुर्तगालियों के कब्जे का भारत के इतिहास में क्या महत्व है?
- फ्रांसिस्को डी अलमिडा और अलफोंजो डी अल्बुकर्क की नीतियों में क्या मुख्य अंतर थे?
- ट्रीटी ऑफ बसाई ने गुजरात और पुर्तगालियों के बीच संबंधों को कैसे बदला और बहादुर शाह की मृत्यु का क्या कारण था?