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Class 12 Chapter 12 ii Atoms 01: Alpha Particle Scattering & Rutherford Model Of Atom JEE/NEET
Physics Wallah - Alakh Pandey
Overview
यह वीडियो परमाणु (atom) के रदरफोर्ड मॉडल को समझाने के लिए अल्फा कण प्रकीर्णन (alpha particle scattering) प्रयोग पर केंद्रित है। इसमें प्रयोग की स्थापना, अवलोकन और निष्कर्षों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिससे परमाणु के नाभिक (nucleus) की पहली बार खोज हुई। वीडियो में निकटतम पहुँच की दूरी (distance of closest approach) और प्रभाव पैरामीटर (impact parameter) जैसे महत्वपूर्ण शब्दों को भी समझाया गया है, और रदरफोर्ड मॉडल की सीमाओं पर भी चर्चा की गई है।
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Chapters
- यह प्रयोग रदरफोर्ड के छात्रों, गीजर और मार्सडेन द्वारा 1906 में रदरफोर्ड के सुझाव पर किया गया था।
- प्रयोग में अल्फा कणों के स्रोत (जैसे बिस्मथ), लेड ब्रिक्स द्वारा उन्हें कॉलिमेट करना, एक पतली गोल्ड फॉयल पर बमबारी करना और जिंक सल्फाइड स्क्रीन पर कणों का पता लगाना शामिल था।
- गोल्ड फॉयल का उपयोग इसलिए किया गया क्योंकि यह अत्यधिक लचीला (malleable) होता है और इसे बहुत पतली शीट में बनाया जा सकता है।
- जिंक सल्फाइड स्क्रीन पर अल्फा कणों के टकराने से प्रकाश का फ्लैश उत्पन्न होता है, जिसे माइक्रोस्कोप से देखा जाता है।
यह प्रयोग परमाणु की संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसने पहली बार परमाणु के अंदर एक सघन, धनावेशित (positively charged) कोर की ओर इशारा किया।
अल्फा कणों की एक बीम को लेड ब्रिक्स से गुजारकर एक सीधी रेखा में लाया जाता है और फिर सोने की एक बहुत पतली पन्नी पर डाला जाता है।
- अधिकांश अल्फा कण (लगभग 99.86%) बिना विचलित हुए सीधे निकल गए, जिससे पता चला कि परमाणु का अधिकांश भाग खाली है।
- बहुत कम अल्फा कण (लगभग 0.14%) 1 डिग्री से अधिक कोण पर विचलित हुए, जो परमाणु के अंदर कुछ धनावेशित कणों की उपस्थिति का संकेत देता है।
- बहुत ही कम कण (लगभग 10 लाख में एक) 180 डिग्री पर वापस आ गए, जिससे पता चला कि धनावेशित कण एक अत्यंत छोटे, सघन क्षेत्र में केंद्रित है जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है।
- रदरफोर्ड ने कणों के विचलन कोण (scattering angle) और उनकी संख्या के बीच संबंध का वर्णन करने के लिए एक सूत्र (N = K Z² / sin⁴(θ/2)) विकसित किया।
इन अवलोकनों ने जे.जे. थॉमसन के प्लम पुडिंग मॉडल को चुनौती दी और परमाणु के नाभिकीय मॉडल (nuclear model) की नींव रखी।
लगभग 10 लाख अल्फा कणों में से केवल एक का 180 डिग्री पर वापस आना यह दर्शाता है कि परमाणु के अंदर धनावेशित द्रव्यमान एक अत्यंत छोटे से स्थान में केंद्रित है।
- परमाणु का अधिकांश भाग खाली है।
- परमाणु का धनावेशित भाग (positive charge) एक अत्यंत छोटे से आयतन में केंद्रित है जिसे नाभिक (nucleus) कहा जाता है।
- नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में बहुत छोटा होता है (लगभग 10⁻¹⁵ मीटर)।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं (circular orbits) में घूमते हैं, और इलेक्ट्रोस्टैटिक आकर्षण बल (electrostatic attraction force) अभिकेन्द्रीय बल (centripetal force) प्रदान करता है।
यह मॉडल पहली बार परमाणु की संरचना को नाभिक और इलेक्ट्रॉनों के रूप में वर्णित करता है, जो आधुनिक परमाणु सिद्धांत का आधार बना।
नाभिक का आकार परमाणु के आकार से लगभग एक लाख गुना छोटा होता है, जैसे एक फुटबॉल के मैदान के बीच में एक कंचा।
- निकटतम पहुँच की दूरी (Distance of Closest Approach, R₀) वह न्यूनतम दूरी है जो एक अल्फा कण नाभिक के करीब जा सकता है, जहाँ उसकी सारी गतिज ऊर्जा (kinetic energy) स्थितिज ऊर्जा (potential energy) में बदल जाती है।
- यह दूरी अल्फा कण की प्रारंभिक गतिज ऊर्जा और नाभिक के आवेश (charge) पर निर्भर करती है (R₀ ∝ 1/KE)।
- प्रभाव पैरामीटर (Impact Parameter, B) अल्फा कण के प्रारंभिक वेग सदिश (initial velocity vector) और नाभिक के केंद्र के बीच की लंबवत दूरी है।
- प्रभाव पैरामीटर यह निर्धारित करता है कि अल्फा कण किस कोण पर विक्षेपित (scatter) होगा; यदि B शून्य के करीब है, तो θ 180 डिग्री के करीब होगा, और यदि B बहुत बड़ा है, तो θ शून्य के करीब होगा।
ये अवधारणाएँ अल्फा कणों के प्रकीर्णन के व्यवहार को समझने और नाभिक के आकार का अनुमान लगाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
एक अल्फा कण नाभिक के कितना करीब आ सकता है (R₀) यह उसकी गतिज ऊर्जा पर निर्भर करता है; जितनी अधिक ऊर्जा, उतना करीब वह जा सकता है।
- रदरफोर्ड मॉडल परमाणु की स्थिरता (stability) की व्याख्या नहीं कर सका, क्योंकि मैक्सवेल के सिद्धांत के अनुसार, त्वरित आवेशित कण (accelerated charged particle) विकिरण उत्सर्जित करता है और अंततः नाभिक में गिर जाएगा।
- यह मॉडल परमाणुओं के असतत (discrete) उत्सर्जन स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने में विफल रहा, जहाँ केवल कुछ विशिष्ट तरंग दैर्ध्य (wavelengths) उत्सर्जित या अवशोषित होती हैं।
- मॉडल यह नहीं बता सका कि इलेक्ट्रॉन किसी भी वृत्ताकार कक्षा में घूम सकते हैं या केवल निश्चित कक्षाओं में।
इन सीमाओं ने परमाणु की संरचना की अधिक सटीक समझ के लिए नील बोहर जैसे अन्य वैज्ञानिकों द्वारा आगे के मॉडल के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।
यदि इलेक्ट्रॉन किसी भी वृत्ताकार कक्षा में घूम सकता है, तो उसे लगातार ऊर्जा खोनी चाहिए और नाभिक में गिर जाना चाहिए, जिससे परमाणु अस्थिर हो जाएगा, जो कि वास्तविक नहीं है।
Key takeaways
- अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग ने परमाणु के नाभिकीय मॉडल की खोज की, जिसमें परमाणु का अधिकांश भाग खाली है और धनावेशित द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित है।
- परमाणु का नाभिक अत्यंत छोटा, सघन और धनावेशित होता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं, जो इलेक्ट्रोस्टैटिक बल द्वारा संतुलित होते हैं।
- निकटतम पहुँच की दूरी (R₀) अल्फा कण की गतिज ऊर्जा पर निर्भर करती है और नाभिक के आकार का अनुमान लगाने में मदद करती है।
- प्रभाव पैरामीटर (B) अल्फा कण के प्रकीर्णन कोण को निर्धारित करता है।
- रदरफोर्ड मॉडल परमाणु की स्थिरता और उसके असतत स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने में विफल रहा।
Key terms
Alpha Particle ScatteringRutherford ModelNucleusGold FoilZinc Sulfide ScreenScattering AngleDistance of Closest Approach (R₀)Impact Parameter (B)Empty SpaceNuclear ChargeCentripetal ForceStability of AtomDiscrete Spectrum
Test your understanding
- अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के मुख्य अवलोकन क्या थे और उन्होंने परमाणु की संरचना के बारे में क्या निष्कर्ष निकालने में मदद की?
- रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल के अनुसार परमाणु की संरचना का वर्णन करें।
- निकटतम पहुँच की दूरी (Distance of Closest Approach) क्या है और यह अल्फा कण की गतिज ऊर्जा से कैसे संबंधित है?
- प्रभाव पैरामीटर (Impact Parameter) क्या है और यह अल्फा कण के प्रकीर्णन कोण को कैसे प्रभावित करता है?
- रदरफोर्ड मॉडल की मुख्य सीमाएँ (drawbacks) क्या थीं?