प्रमुख पर्यावरण सम्मेलन एवं प्रोटोकॉल | Environment conference | Ramsar conversation
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प्रमुख पर्यावरण सम्मेलन एवं प्रोटोकॉल | Environment conference | Ramsar conversation

Trick Point

8 chapters6 takeaways15 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो पर्यावरण से संबंधित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संधियों और प्रोटोकॉल की जानकारी देता है। इसमें रामसर कन्वेंशन, स्टॉकहोम सम्मेलन, CITES, ब्रंटलैंड रिपोर्ट, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, जैव विविधता संधि, पृथ्वी सम्मेलन, क्योटो प्रोटोकॉल, कार्टाजेना प्रोटोकॉल और जिनेवा प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण समझौतों को शामिल किया गया है। वीडियो प्रत्येक समझौते के वर्ष, स्थान और मुख्य उद्देश्यों को बताता है, और याद रखने में मदद के लिए ट्रिक्स भी प्रदान करता है। इसका उद्देश्य शिक्षार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को समझने और याद रखने में सहायता करना है।

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Chapters

  • यह आद्र भूमि (wetlands) के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  • इसकी स्थापना 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में हुई थी।
  • यह 1975 में विश्व स्तर पर लागू हुई और भारत ने 1982 में हस्ताक्षर किए।
  • वर्तमान में भारत में 99 रामसर स्थल हैं, जिनमें शेखा झील पक्षी अभयारण्य नवीनतम है।
यह संधि दुनिया भर की महत्वपूर्ण आद्र भूमियों को संरक्षित करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करती है, जो जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ईरान के रामसर शहर में 1971 में हुई बैठक, जहाँ इस संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
  • यह 5 जून 1972 को स्टॉकहोम, स्वीडन में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित किया गया था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और विकास व पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना था।
  • इसके परिणामस्वरूप स्टॉकहोम घोषणा जारी हुई और UNEP (United Nations Environment Programme) की स्थापना हुई।
  • इस सम्मेलन में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस घोषित किया गया।
यह पहला प्रमुख वैश्विक सम्मेलन था जिसने पर्यावरण को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाया और भविष्य के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों की नींव रखी।
इंदिरा गांधी का यह कथन कि 'Poverty is the biggest polluter' (गरीबी सबसे बड़ा प्रदूषक है), जो सम्मेलन के दौरान कहा गया था।
  • यह संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विनियमित और प्रतिबंधित करने वाला एक सरकारी समझौता है।
  • इसकी पहली बैठक 3 मार्च 1973 को वाशिंगटन डीसी में हुई और यह 1 जुलाई 1975 से लागू हुई।
  • इसके मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा करना, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करना और जैव विविधता का संरक्षण करना है।
यह संधि लुप्तप्राय वन्यजीवों और पौधों की प्रजातियों को अवैध व्यापार से बचाने में मदद करती है, जिससे उनकी आबादी को स्थिर रखने में सहायता मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाघों की खाल या हाथी दांत के व्यापार पर रोक लगाना, CITES के तहत आता है।
  • यह रिपोर्ट 1987 में वर्ल्ड कमीशन ऑन एनवायरमेंट एंड डेवलपमेंट द्वारा 'Our Common Future' शीर्षक से जारी की गई थी।
  • इसने 'सतत विकास' (Sustainable Development) की अवधारणा को परिभाषित किया: वर्तमान की जरूरतों को पूरा करना, बिना भविष्य की पीढ़ियों की क्षमता को नुकसान पहुंचाए।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDGs) 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए और 2030 तक इन्हें हासिल करने का लक्ष्य है।
ब्रंटलैंड रिपोर्ट ने सतत विकास की अवधारणा को वैश्विक मंच पर स्थापित किया, जिसने भविष्य की सभी पर्यावरण और विकास नीतियों को प्रभावित किया है।
एक विकास परियोजना जो वर्तमान में आर्थिक लाभ प्रदान करती है, लेकिन साथ ही प्रदूषण को कम करती है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को भी संरक्षित रखती है।
  • यह 16 सितंबर 1987 को मॉन्ट्रियल, कनाडा में हस्ताक्षरित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य ओजोन परत को नष्ट करने वाले रसायनों, जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) के उत्पादन और उपयोग को समाप्त करना है।
  • 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस के रूप में मनाया जाता है।
यह प्रोटोकॉल ओजोन परत के क्षरण को रोकने में अत्यधिक सफल रहा है, जो पृथ्वी पर जीवन को हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से बचाता है।
रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर में इस्तेमाल होने वाले CFCs के उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना।
  • जैव विविधता संधि (CBD) 1992 में रियो डी जनेरियो, ब्राजील में हुई, जिसका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, सतत उपयोग और लाभों का न्यायपूर्ण वितरण है।
  • पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit) भी जून 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित हुआ, जिसका फोकस पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर चर्चा और सतत विकास के लिए वैश्विक योजना बनाना था।
  • दोनों संधियाँ संयुक्त राष्ट्र के तहत हुईं और भारत ने 1992 में CBD पर हस्ताक्षर किए।
ये सम्मेलन और संधियाँ जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करती हैं और इसके संरक्षण तथा सतत उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देती हैं।
पृथ्वी सम्मेलन में 'एजेंडा 21' का अपनाया जाना, जो सतत विकास के लिए एक व्यापक कार्य योजना थी।
  • यह 1997 में क्योटो, जापान में अपनाया गया और 2005 से लागू हुआ।
  • इसका मुख्य उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए औद्योगिक देशों द्वारा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है।
  • यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित करती है।
क्योटो प्रोटोकॉल जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पहला महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौता था जिसने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किए।
विकसित देशों के लिए अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 1990 के स्तर से औसतन 5% कम करने का लक्ष्य।
  • कार्टाजेना प्रोटोकॉल (2000) जैव प्रौद्योगिकी से बने जीवित परिवर्तित जीवों (LMOs) के सुरक्षित उपयोग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है, यह जैव विविधता संधि के तहत है।
  • जिनेवा प्रोटोकॉल (1925) रासायनिक और जैविक हथियारों के उपयोग को प्रतिबंधित करता है, जिसका उद्देश्य मानवता की रक्षा करना है।
ये प्रोटोकॉल क्रमशः जैव प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग और युद्ध में अमानवीय हथियारों के प्रयोग को रोककर मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
कार्टाजेना प्रोटोकॉल के तहत, जीएम फसलों के आयात-निर्यात से पहले संबंधित देशों को जानकारी देना अनिवार्य है।

Key takeaways

  1. 1पर्यावरण संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है, जैसा कि विभिन्न सम्मेलनों और प्रोटोकॉल से स्पष्ट होता है।
  2. 2सतत विकास का सिद्धांत वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों को संतुलित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  3. 3ओजोन परत और जैव विविधता जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय संधियाँ बनाई गई हैं।
  4. 4जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना एक वैश्विक प्राथमिकता है।
  5. 5प्रौद्योगिकी (जैसे जैव प्रौद्योगिकी) के विकास के साथ-साथ उसके सुरक्षित उपयोग और विनियमन के लिए भी अंतरराष्ट्रीय समझौते आवश्यक हैं।
  6. 6पर्यावरण संबंधी जागरूकता और शिक्षा, जैसे विश्व पर्यावरण दिवस की घोषणा, संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देती है।

Key terms

Ramsar ConventionStockholm ConferenceUNEPCITESSustainable DevelopmentBrundtland ReportMontreal ProtocolOzone LayerCBD (Convention on Biological Diversity)Earth SummitKyoto ProtocolCartagena ProtocolGeneva ProtocolWetlandsGreenhouse Gases

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  1. 1रामसर कन्वेंशन का मुख्य उद्देश्य क्या है और यह किन प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित है?
  2. 2स्टॉकहोम सम्मेलन के प्रमुख परिणाम क्या थे और इसने विश्व पर्यावरण दिवस की स्थापना को कैसे प्रभावित किया?
  3. 3सतत विकास की अवधारणा को ब्रंटलैंड रिपोर्ट ने कैसे परिभाषित किया और यह वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  4. 4मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का मुख्य लक्ष्य क्या था और इसने किस पर्यावरणीय समस्या को हल करने में मदद की?
  5. 5क्योटो प्रोटोकॉल और कार्टाजेना प्रोटोकॉल के बीच मुख्य अंतर क्या हैं, विशेष रूप से उनके उद्देश्यों के संबंध में?

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