Class 11 chap 3 | Periodic Table 01 | Historical Development | Periodic Classification Of Elements |
46:52

Class 11 chap 3 | Periodic Table 01 | Historical Development | Periodic Classification Of Elements |

Physics Wallah - Alakh Pandey

6 chapters5 takeaways13 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो तत्वों के वर्गीकरण के ऐतिहासिक विकास पर केंद्रित है, जिसमें डोबेराइनर के ट्राइड्स, न्यूलैंड के ऑक्टेव लॉ और मेंडेलीव की आवर्त सारणी की चर्चा की गई है। यह बताता है कि तत्वों की बढ़ती संख्या के कारण उनके अध्ययन को व्यवस्थित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। प्रत्येक वर्गीकरण प्रणाली की सफलताओं और सीमाओं को समझाया गया है, जिसमें मेंडेलीव की आवर्त सारणी को सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम के रूप में उजागर किया गया है, जिसने आधुनिक आवर्त सारणी की नींव रखी।

How was this?

Save this permanently with flashcards, quizzes, and AI chat

Chapters

  • 19वीं सदी में तत्वों की संख्या तेजी से बढ़ी, जिससे प्रत्येक तत्व का अलग-अलग अध्ययन करना मुश्किल हो गया।
  • समान गुणों वाले तत्वों को एक साथ समूहित करने की आवश्यकता महसूस हुई ताकि उनका अध्ययन आसान हो सके।
  • आवश्यकता ने तत्वों के वर्गीकरण की ओर प्रेरित किया।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि तत्वों को व्यवस्थित करने की आवश्यकता क्यों उत्पन्न हुई, क्योंकि यह भविष्य के वर्गीकरण प्रणालियों के विकास की प्रेरणा को दर्शाता है।
19वीं सदी में 31 से बढ़कर 63 तत्वों की खोज ने व्यक्तिगत अध्ययन को अव्यावहारिक बना दिया।
  • डोबेराइनर ने तीन-तीन तत्वों के समूह (ट्राइड्स) बनाए, जिनके गुण समान थे।
  • उनके नियम के अनुसार, ट्राइड के मध्य तत्व का परमाणु भार अन्य दो तत्वों के परमाणु भार का औसत होता है।
  • उन्होंने कुछ सफल ट्राइड्स दिए जैसे (Li, Na, K) और (Cl, Br, I), लेकिन सभी ज्ञात तत्वों को वर्गीकृत करने में विफल रहे।
यह पहला प्रयास था जिसने तत्वों को उनके परमाणु भार के आधार पर समूहित करने का प्रयास किया, जिससे भविष्य के वर्गीकरणों के लिए एक आधार तैयार हुआ।
लिथियम (Li), सोडियम (Na), और पोटेशियम (K) का ट्राइड, जहाँ सोडियम का परमाणु भार लिथियम और पोटेशियम के परमाणु भार का लगभग औसत था।
  • न्यूलैंड ने तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया।
  • उन्होंने संगीत के सुरों की तरह, हर आठवें तत्व के गुण पहले तत्व के समान पाए।
  • यह नियम हल्के तत्वों के लिए कुछ हद तक सफल रहा, लेकिन भारी तत्वों और नोबल गैसों की खोज के बाद यह विफल हो गया।
इस नियम ने तत्वों के गुणों में आवर्तता (periodicity) की अवधारणा को पेश किया, यह सुझाव देते हुए कि गुणों की पुनरावृत्ति एक निश्चित क्रम में होती है।
जब तत्वों को बढ़ते परमाणु भार में व्यवस्थित किया गया, तो लिथियम के बाद आठवां तत्व सोडियम था, और उनके गुण समान थे।
  • लोथर मेयर ने तत्वों के परमाणु आयतन और परमाणु भार के बीच संबंध दर्शाने वाला ग्राफ बनाया।
  • ग्राफ में, समान गुणों वाले तत्व समान स्थिति में दिखाई दिए, जैसे कि पीक्स पर क्षार धातुएं और आरोही ढलानों पर हैलोजन।
  • उन्होंने आवर्तता की खोज की लेकिन इसे तालिका के बजाय ग्राफ के रूप में प्रस्तुत किया।
यह विश्लेषण आवर्तता की अवधारणा को और मजबूत करता है और दिखाता है कि परमाणु आयतन जैसे भौतिक गुण परमाणु भार के साथ नियमित रूप से बदलते हैं।
परमाणु आयतन बनाम परमाणु भार के ग्राफ में सोडियम, पोटेशियम और रूबिडियम जैसी क्षार धातुएं वक्र के शिखर (peaks) पर दिखाई दीं।
  • मेंडेलीव ने तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया और समान गुणों वाले तत्वों को एक साथ रखा।
  • उन्होंने आवर्त नियम प्रस्तावित किया: तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु भार के आवर्ती फलन होते हैं।
  • उन्होंने अज्ञात तत्वों के लिए रिक्त स्थान छोड़े और उनके गुणों की भविष्यवाणी की, जो बाद में सही साबित हुए (जैसे एका-सिलिकॉन)।
  • उनकी सारणी में 63 ज्ञात तत्वों को शामिल किया गया था और इसमें समूह (groups) और आवर्त (periods) थे।
मेंडेलीव की आवर्त सारणी तत्वों के वर्गीकरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी, जिसने न केवल ज्ञात तत्वों को व्यवस्थित किया बल्कि भविष्य की खोजों के लिए भी मार्ग प्रशस्त किया।
मेंडेलीव ने एल्यूमीनियम के नीचे एक खाली स्थान छोड़ा और भविष्यवाणी की कि एक नया तत्व (एका-एल्यूमीनियम, जिसे बाद में गैलियम के रूप में खोजा गया) वहां फिट होगा और उसके गुण क्या होंगे।
  • कुछ तत्वों की स्थिति उनके परमाणु भार के बढ़ते क्रम के अनुरूप नहीं थी (जैसे टेल्यूरियम और आयोडीन)।
  • समस्थानिकों (Isotopes) की खोज के बाद उनकी स्थिति स्पष्ट नहीं थी, क्योंकि उनका परमाणु भार अलग-अलग होता है।
  • समान गुणों वाले कुछ तत्वों को अलग-अलग समूहों में रखा गया (जैसे कॉपर और सिल्वर), और असमान गुणों वाले तत्वों को एक साथ रखा गया (जैसे प्लैटिनम और गोल्ड)।
  • नोबल गैसों की खोज के बाद सारणी में संशोधन की आवश्यकता पड़ी।
इन सीमाओं ने आधुनिक आवर्त सारणी के विकास की आवश्यकता को उजागर किया, जो परमाणु संख्या पर आधारित है और अधिक सुसंगत वर्गीकरण प्रदान करती है।
टेल्यूरियम (परमाणु भार 127.6) को आयोडीन (परमाणु भार 126.9) से पहले रखा गया था, जो बढ़ते परमाणु भार के नियम का उल्लंघन था, ताकि समान गुणों वाले तत्वों को एक साथ रखा जा सके।

Key takeaways

  1. 1तत्वों के वर्गीकरण की आवश्यकता तत्वों की बढ़ती संख्या और उनके अध्ययन को सुव्यवस्थित करने की इच्छा से उत्पन्न हुई।
  2. 2डोबेराइनर के ट्राइड्स ने परमाणु भार के आधार पर तत्वों को समूहित करने का पहला प्रयास किया।
  3. 3न्यूलैंड के ऑक्टेव लॉ ने तत्वों के गुणों में आवर्तता की अवधारणा पेश की।
  4. 4मेंडेलीव की आवर्त सारणी ने परमाणु भार के आधार पर तत्वों को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की और भविष्य की खोजों की भविष्यवाणी की।
  5. 5मेंडेलीव की सारणी की सीमाओं ने परमाणु संख्या पर आधारित आधुनिक आवर्त सारणी के विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

Key terms

Periodic Classification of ElementsDobereiner's TriadsAtomic WeightNewland's Law of OctavesPeriodicityLaw of OctavesAtomic VolumeMendeleev's Periodic LawPeriodic TableGroupsPeriodsIsotopesNoble Gases

Test your understanding

  1. 1तत्वों के वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी और डोबेराइनर के ट्राइड्स ने इस दिशा में क्या योगदान दिया?
  2. 2न्यूलैंड के ऑक्टेव लॉ का सिद्धांत क्या था और यह किन तत्वों के लिए सफल रहा?
  3. 3मेंडेलीव ने अपनी आवर्त सारणी बनाते समय किन मुख्य सिद्धांतों का पालन किया और उन्होंने अज्ञात तत्वों के लिए क्या प्रावधान किया?
  4. 4मेंडेलीव की आवर्त सारणी की प्रमुख सीमाएं क्या थीं जिन्होंने आधुनिक आवर्त सारणी के विकास को प्रेरित किया?
  5. 5लोथर मेयर के ग्राफिकल विश्लेषण ने तत्वों के वर्गीकरण में कैसे योगदान दिया?

Turn any lecture into study material

Paste a YouTube URL, PDF, or article. Get flashcards, quizzes, summaries, and AI chat — in seconds.

No credit card required