Trading Course (Day 1/10) : Learn Trading From Scratch | Trading For Beginners Full Course
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Trading Course (Day 1/10) : Learn Trading From Scratch | Trading For Beginners Full Course

Neeraj joshi

8 chapters7 takeaways16 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो ट्रेडिंग की दुनिया में शुरुआती लोगों के लिए एक व्यापक परिचय प्रदान करती है। यह ट्रेडिंग के मूल सिद्धांतों, विभिन्न प्रकार के बाजारों (स्टॉक, क्रिप्टो, फॉरेक्स, कमोडिटी), और ट्रेडिंग के विभिन्न तरीकों (स्कैल्पिंग, इंट्राडे, स्विंग, ऑप्शंस, फ्यूचर्स) की व्याख्या करती है। यह ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच अंतर को भी स्पष्ट करती है, और शुरुआती लोगों के लिए स्टॉक और क्रिप्टो बाजारों के फायदे और नुकसान पर प्रकाश डालती है। वीडियो का उद्देश्य दर्शकों को सूचित निर्णय लेने और एक सफल ट्रेडिंग यात्रा शुरू करने के लिए आवश्यक ज्ञान प्रदान करना है।

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Chapters

  • यह 10-एपिसोड का कोर्स है जो बिल्कुल शुरुआत से ट्रेडिंग सिखाएगा।
  • नोट्स बनाना महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रेडिंग एक स्किल है जिसमें अभ्यास की आवश्यकता होती है।
  • कोर्स में बेसिक्स, लिवरेज, प्राइस एक्शन, कैंडलस्टिक साइकोलॉजी, स्मार्ट मनी कॉन्सेप्ट, लिक्विडिटी, ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी, साइकोलॉजी और रिस्क मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल होंगे।
  • अंतिम एपिसोड में सीखी गई सभी बातों का रिवीजन और लाइव ट्रेड दिखाया जाएगा।
यह अध्याय आपको पूरे कोर्स की संरचना और सीखने की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है, जिससे आप अपनी अपेक्षाओं को निर्धारित कर सकते हैं और प्रभावी ढंग से नोट्स बना सकते हैं।
कोर्स की रूपरेखा बताई गई है, जिसमें पहली क्लास बेसिक्स पर, दूसरी लिवरेज पर, और इसी तरह आगे की क्लासेस के विषय शामिल हैं।
  • ट्रेडिंग का मतलब है किसी एसेट (स्टॉक, क्रिप्टो, सोना आदि) को खरीदकर बेचना और बीच के मूल्य अंतर से लाभ कमाना।
  • ट्रेडिंग में आप एसेट के मालिक नहीं बनते, बल्कि मूल्य की चाल से लाभ कमाने की कोशिश करते हैं।
  • ट्रेडिंग में दो मुख्य तरीके हैं: पहले खरीदना और फिर बेचना (बाय एंड सेल), या पहले बेचना और फिर खरीदना (सेल एंड बाय)।
  • पहले बेचने और बाद में खरीदने की प्रक्रिया को शॉर्ट सेलिंग कहा जाता है, जो ब्रोकर की मदद से संभव है और गिरते बाजार में भी लाभ कमाने की अनुमति देता है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि ट्रेडिंग कैसे काम करती है और लाभ कमाने के कौन-कौन से तरीके हैं, खासकर शॉर्ट सेलिंग की अवधारणा, जो आपको विभिन्न बाजार स्थितियों में अवसर तलाशने में मदद करती है।
एक उदाहरण दिया गया है जहाँ एक ट्रेडर ₹100 में एक शेयर बेचता है (ब्रोकर से उधार लेकर) और जब कीमत ₹95 हो जाती है, तो उसे खरीदकर ब्रोकर को वापस कर देता है, जिससे ₹5 का लाभ होता है।
  • ट्रेडिंग का उद्देश्य नियमित आय उत्पन्न करना और इसे एक व्यवसाय की तरह चलाना है।
  • इन्वेस्टिंग का उद्देश्य मौजूदा धन को बढ़ाना और संपत्ति का निर्माण करना है।
  • ट्रेडिंग में निश्चितता नहीं होती; यह संभावनाओं (प्रोबेबिलिटी) पर आधारित होती है।
  • ट्रेडिंग में लगातार लाभ की गारंटी नहीं है; आप लगातार कुछ दिन नुकसान कर सकते हैं, लेकिन बड़े लाभ से महीने या साल के अंत में लाभदायक रह सकते हैं।
ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच अंतर को स्पष्ट करना आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार सही रणनीति चुनने में मदद करता है, और ट्रेडिंग की अनिश्चित प्रकृति को समझना यथार्थवादी अपेक्षाएं निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
यह बताया गया है कि वारेन बफे इन्वेस्टिंग के लिए जाने जाते हैं, जबकि ट्रेडिंग आय उत्पन्न करने पर केंद्रित है।
  • स्टॉक मार्केट: कंपनियों के शेयर खरीदना और बेचना; SEBI द्वारा रेगुलेटेड; सोमवार-शुक्रवार, 9:15 AM - 3:30 PM खुला रहता है।
  • क्रिप्टो ट्रेडिंग: बिटकॉइन, इथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी खरीदना और बेचना; 24/7 खुला रहता है; डीसेंट्रलाइज्ड, कोई केंद्रीय नियामक नहीं।
  • फॉरेक्स मार्केट: मुद्राओं के जोड़े (जैसे USD/INR) में ट्रेड करना; बहुत बड़ा बाजार; सोमवार-शुक्रवार 24 घंटे खुला रहता है; भारत में फॉरेक्स ट्रेडिंग के लिए लीगल प्लेटफॉर्म की कमी है।
  • कमोडिटी मार्केट: सोना, चांदी, क्रूड ऑयल जैसी वस्तुओं में ट्रेड करना; भारत में MCX और NCDEX के माध्यम से संभव; फॉरेक्स की तरह, लीगल प्लेटफॉर्म की कमी एक मुद्दा हो सकता है।
विभिन्न ट्रेडिंग बाजारों को समझना आपको अपनी प्राथमिकताओं (जैसे समय की उपलब्धता, जोखिम सहनशीलता) के आधार पर सबसे उपयुक्त बाजार चुनने में सक्षम बनाता है।
फॉरेक्स ट्रेडिंग के लिए भारत में लीगल प्लेटफॉर्म की कमी और इसके कारण बैंक अकाउंट फ्रीज होने का उदाहरण दिया गया है।
  • स्टॉक मार्केट: सीमित ट्रेडिंग घंटे (दिन के दौरान); SEBI द्वारा रेगुलेटेड।
  • क्रिप्टो मार्केट: 24/7 खुला रहता है, रात में भी ट्रेड संभव; अधिक अस्थिरता (volatility) और अवसर।
  • पूंजी की आवश्यकता: स्टॉक मार्केट में शुरुआत के लिए अधिक पूंजी (लगभग ₹5,000) की सिफारिश की जाती है, जबकि क्रिप्टो में ₹100 से भी शुरू किया जा सकता है (सीखने के उद्देश्य से)।
  • लिवरेज: स्टॉक मार्केट में अधिकतम 5x लिवरेज मिलता है, जबकि क्रिप्टो फ्यूचर्स में 200x तक लिवरेज मिल सकता है, जिससे छोटे निवेश से बड़े ट्रेड संभव होते हैं (लेकिन जोखिम भी बढ़ता है)।
दोनों बाजारों के बीच के अंतर को जानने से आप अपनी जीवनशैली और वित्तीय क्षमता के अनुरूप सही बाजार चुन सकते हैं, खासकर लिवरेज और पूंजी की आवश्यकताओं के संबंध में।
₹1000 लगाकर क्रिप्टो में ₹2 लाख तक का ट्रेड लेने की संभावना का उल्लेख किया गया है, जो 200x लिवरेज के कारण संभव है।
  • स्कैल्पिंग: बहुत छोटे समय (मिनटों) के लिए ट्रेड करना; बहुत जोखिम भरा, शुरुआती लोगों के लिए अनुशंसित नहीं।
  • इंट्राडे ट्रेडिंग: एक ही दिन में ट्रेड खरीदना और बेचना; स्टॉक मार्केट में 3:30 PM से पहले एग्जिट करना होता है।
  • स्विंग ट्रेडिंग: ट्रेड को कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक होल्ड करना; बड़े टाइमफ्रेम पर काम करना।
  • ऑप्शंस ट्रेडिंग: उच्च अस्थिरता, एक्सपायरी डेट होती है, शुरुआती लोगों के लिए जोखिम भरा।
  • फ्यूचर्स ट्रेडिंग: क्रिप्टो में लोकप्रिय, उच्च लिवरेज की अनुमति देता है, आगे की क्लास में विस्तार से बताया जाएगा।
विभिन्न ट्रेडिंग शैलियों को समझना आपको अपनी जोखिम सहनशीलता और समय की उपलब्धता के अनुसार एक उपयुक्त ट्रेडिंग रणनीति चुनने में मदद करता है।
शुरुआती लोगों के लिए इंट्राडे या स्विंग ट्रेडिंग की सिफारिश की गई है, जबकि स्कैल्पिंग और ऑप्शंस ट्रेडिंग से बचने की सलाह दी गई है।
  • स्कैल्पिंग के लिए कम से कम ₹30,000 की पूंजी की सिफारिश की जाती है।
  • इंट्राडे ट्रेडिंग (स्टॉक मार्केट) के लिए ₹10,000 की पूंजी की सिफारिश की जाती है।
  • क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग (डेल्टा एक्सचेंज) ₹100 से शुरू की जा सकती है, लेकिन सीखने के लिए ₹10,000 एक अच्छा अमाउंट है।
  • लोन लेकर ट्रेडिंग कभी नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह अत्यधिक जोखिम भरा है और लगभग हमेशा नुकसान की ओर ले जाता है।
यह अध्याय आपको यथार्थवादी पूंजी आवश्यकताओं को समझने में मदद करता है और वित्तीय रूप से जिम्मेदार निर्णय लेने के लिए महत्वपूर्ण सलाह प्रदान करता है, जैसे कि लोन लेकर ट्रेडिंग न करना।
₹10,000 से 200x लिवरेज के साथ ₹20 लाख का ट्रेड लेने की क्षमता का उल्लेख किया गया है, लेकिन साथ ही अत्यधिक लिवरेज के जोखिमों पर भी जोर दिया गया है।
  • क्रिप्टो ट्रेडिंग स्पॉट (सीधे क्रिप्टो खरीदना/बेचना) या फ्यूचर्स (कॉन्ट्रैक्ट खरीदना) में की जा सकती है।
  • स्पॉट ट्रेडिंग पर 30% टैक्स और 1% टीडीएस लगता है, और नुकसान को लाभ के साथ सेट ऑफ नहीं किया जा सकता।
  • फ्यूचर्स ट्रेडिंग में 200x तक लिवरेज मिलता है और यह टैक्स नियमों के मामले में अधिक अनुकूल है (नुकसान को लाभ के साथ सेट ऑफ किया जा सकता है)।
  • डेल्टा एक्सचेंज जैसे प्लेटफॉर्म पर पैक्स जी (गोल्ड का क्रिप्टो रूप) में भी ट्रेड किया जा सकता है।
क्रिप्टो में स्पॉट और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के बीच के अंतर को समझना आपको टैक्स और लिवरेज के लाभों को ध्यान में रखते हुए सबसे प्रभावी ट्रेडिंग विधि चुनने में मदद करता है।
डेल्टा एक्सचेंज पर अकाउंट खोलने के फायदे बताए गए हैं, जिसमें अधीरा एआई सब्सक्रिप्शन और ब्रोकरेज डिस्काउंट शामिल हैं।

Key takeaways

  1. 1ट्रेडिंग एक स्किल है जिसे सीखने और अभ्यास करने में समय लगता है, यह रातोंरात अमीर बनने की योजना नहीं है।
  2. 2ट्रेडिंग में आप एसेट के मालिक नहीं बनते, बल्कि मूल्य की चाल से लाभ कमाते हैं, जिसमें खरीदने से पहले बेचने (शॉर्ट सेलिंग) की क्षमता भी शामिल है।
  3. 3ट्रेडिंग का उद्देश्य आय उत्पन्न करना है, जबकि इन्वेस्टिंग का उद्देश्य धन बढ़ाना है; दोनों अलग-अलग लक्ष्य हैं।
  4. 4क्रिप्टो मार्केट 24/7 खुला रहता है और उच्च लिवरेज प्रदान करता है, जो इसे कुछ ट्रेडर्स के लिए आकर्षक बनाता है, लेकिन इसमें जोखिम भी अधिक होता है।
  5. 5शुरुआती लोगों के लिए, इंट्राडे या स्विंग ट्रेडिंग जैसी कम जोखिम वाली रणनीतियों से शुरुआत करना और स्कैल्पिंग या ऑप्शंस ट्रेडिंग से बचना बेहतर है।
  6. 6लोन लेकर कभी भी ट्रेडिंग न करें; हमेशा केवल उस पैसे का उपयोग करें जिसे आप खो सकते हैं।
  7. 7डेल्टा एक्सचेंज जैसे विश्वसनीय और रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म का उपयोग करना महत्वपूर्ण है, खासकर जब उच्च लिवरेज का उपयोग कर रहे हों।

Key terms

TradingInvestingAssetStock MarketCrypto TradingForex MarketCommodity MarketShort SellingLeverageVolatilityIntraday TradingSwing TradingFutures TradingSpot TradingSEBIFIU

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  1. 1ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच मुख्य अंतर क्या हैं और आप अपने वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर किसे चुनेंगे?
  2. 2शॉर्ट सेलिंग की प्रक्रिया को समझाइए और यह कैसे काम करती है, खासकर जब आपके पास वह एसेट न हो?
  3. 3स्टॉक मार्केट और क्रिप्टो मार्केट की तुलना करें, उनके ट्रेडिंग घंटों, रेगुलेशन और लिवरेज के संदर्भ में।
  4. 4शुरुआती ट्रेडर के लिए इंट्राडे ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग में से कौन सी रणनीति अधिक उपयुक्त हो सकती है और क्यों?
  5. 5क्रिप्टो में स्पॉट ट्रेडिंग और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के बीच क्या अंतर हैं, विशेष रूप से टैक्स और लिवरेज के संबंध में?

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