05-Lecture (Lisan-ul-Quran-2022) By Amir Sohail ( جمع سالم بنانے کا طریقہ)جمع سالم
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05-Lecture (Lisan-ul-Quran-2022) By Amir Sohail ( جمع سالم بنانے کا طریقہ)جمع سالم

Lisan ul Quran by Ustad Amir Sohail

7 chapters7 takeaways10 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो अरबी व्याकरण में 'जमा सालिम' (Plural Sound) बनाने के तरीके पर केंद्रित है। इसमें समझाया गया है कि कैसे वाहिद (singular) शब्दों से जमा सालिम (plural sound) बनाए जाते हैं, जो कि अरबी में दो तरह के होते हैं: मुज़क्कर (masculine) और मुअन्नस (feminine)। वीडियो में इन दोनों के लिए अलग-अलग फार्मूले बताए गए हैं और उदाहरणों के साथ समझाया गया है कि कैसे शब्दों के आखिर में 'ऊना' (ـون) या 'आना' (ـان) जोड़कर मुज़क्कर जमा और 'आतुन' (ـات) जोड़कर मुअन्नस जमा बनाई जाती है। यह भी बताया गया है कि कौन से शब्द 'आकिल' (समझदार) होते हैं और कौन से 'गैर-आकिल' (बेसमझ) और इसका जमा बनाने पर क्या असर पड़ता है।

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Chapters

  • अल्लाह की रहमत का ज़िक्र और फ़रिश्तों व मखलूकात का रहमत की दुआ करना।
  • भलाई (खैर) की तालीम देना अल्लाह की रहमत हासिल करने का एक ज़रिया है।
  • कुरान सीखना और सिखाना अल्लाह की रहमत का ज़रिया है।
  • जन्नत में दाखिला अल्लाह की रहमत पर मुनहसिर है, आमाल पर नहीं।
यह हिस्सा सीखने वाले को इल्म हासिल करने और सिखाने की अहमियत बताता है, जो अल्लाह की रहमत और आखिरत में कामयाबी के लिए ज़रूरी है।
अल्लाह ताला खुद रहमत नाज़िल फ़रमाते हैं जबकि उसके रिश्ते और आसमानों ज़मीन की तमाम मखलूकात उस शख्स के लिए रहमत की दुआ करते हैं जो लोगों को खैर की तालीम देता है।
  • अरबी में एक के लिए 'वाहिद' (singular) इस्तेमाल होता है।
  • दो के लिए 'मुसन्ना' (dual) इस्तेमाल होता है, जिसका खास पैटर्न है।
  • दो से ज़्यादा के लिए 'जमा' (plural) इस्तेमाल होता है।
यह समझना ज़रूरी है कि अरबी में गिनती के हिसाब से शब्दों के अलग-अलग रूप होते हैं, जो वाक्य की संरचना को सही बनाते हैं।
अंग्रेजी में 'book' (वाहिद) और 'books' (जमा) होता है, लेकिन अरबी में दो के लिए 'मुसन्ना' का अलग लफ्ज़ होता है, जैसे 'किताब' (एक किताब), 'किताबैन' (दो किताबें)।
  • जमा मुक़स्सर वो जमा हैं जिनका कोई तयशुदा फार्मूला नहीं होता।
  • इन्हें याद करना पड़ता है क्योंकि इनके बनाने का कोई सीधा नियम नहीं है।
  • यह अरबी में आम हैं और इनके पैटर्न अलग-अलग हो सकते हैं।
यह जानने से कि जमा मुक़स्सर को याद करना पड़ता है, सीखने वाले को अपनी शब्दावली बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
जैसे अंग्रेजी में 'child' का जमा 'children' होता है, जो किसी नियम पर आधारित नहीं है।
  • जमा सालिम मुज़क्कर बनाने का फार्मूला है: वाहिद शब्द को कॉपी करें, आखिर में 'पेश' (ـُ) लगाएं, और फिर 'ऊना' (ـون) जोड़ें।
  • यह फार्मूला 'आकिल' (समझदार) मुज़क्कर शब्दों पर लागू होता है।
  • उदाहरण: 'मुस्लिम' से 'मुस्लिमुन' (Muslimeen)।
यह फार्मूला सीखने से आप आसानी से समझदार पुल्लिंग शब्दों के बहुवचन बना सकते हैं, जो अरबी भाषा की संरचना के लिए महत्वपूर्ण है।
लफ्ज़ 'मुस्लिम' (Muslim) का जमा सालिम मुज़क्कर 'मुस्लिमुन' (Muslimoon) बनता है।
  • जमा सालिम मुअन्नस बनाने का फार्मूला है: वाहिद शब्द से 'ता मरबूता' (ـة) हटा दें, और आखिर में 'अलिफ' (ا) और 'ता' (ت) जोड़ें।
  • यह फार्मूला 'आकिल' और 'गैर-आकिल' (बेसमझ) स्त्रीलिंग शब्दों पर लागू होता है।
  • उदाहरण: 'मुस्लिमा' से 'मुस्लिमातुन' (Muslimaat)।
यह फार्मूला आपको स्त्रीलिंग शब्दों के बहुवचन बनाने में मदद करता है, चाहे वे समझदार हों या बेसमझ, जिससे आपकी वाक्य बनाने की क्षमता बढ़ती है।
लफ्ज़ 'मुस्लिमा' (Muslima) का जमा सालिम मुअन्नस 'मुस्लिमातुन' (Muslimaatun) बनता है।
  • मखलूकात को दो किस्मों में बांटा गया है: आकिल (इंसान, जिन्न, फरिश्ते) और गैर-आकिल (बाकी सब)।
  • जमा सालिम बनाने के फार्मूले में 'आकिल' और 'गैर-आकिल' का फर्क अहम होता है।
  • जमा सालिम मुज़क्कर का फार्मूला आम तौर पर सिर्फ आकिल शब्दों पर लागू होता है।
  • जमा सालिम मुअन्नस का फार्मूला आकिल और गैर-आकिल दोनों पर लागू हो सकता है।
यह वर्गीकरण यह समझने में मदद करता है कि कौन से शब्द जमा सालिम के किन नियमों का पालन करेंगे, जिससे व्याकरण की सटीकता बढ़ती है।
इंसान 'आकिल' है, इसलिए 'मुस्लिम' से 'मुस्लिमुन' बनेगा। लेकिन 'किताब' 'गैर-आकिल' है, इसलिए इसकी जमा 'कुतुब' (जमा मुक़स्सर) बनती है, न कि 'किताबून'।
  • मुज़क्कर जमा सालिम बनाने के लिए वाहिद के आखिर में 'पेश' और 'नून' (ـون) का इज़ाफ़ा होता है।
  • मुअन्नस जमा सालिम बनाने के लिए वाहिद के आखिर से 'ता मरबूता' हटाकर 'अलिफ' और 'ता' (ـات) का इज़ाफ़ा होता है।
  • कुछ शब्दों की जमा मुज़क्कर और मुअन्नस दोनों तरह से बन सकती हैं, खासकर सिफत (adjectives) के लिए।
  • वीडियो में 'सालेह', 'मुस्लिम', 'काफ़िर', 'मु'मिन', 'तालिब', 'मुअल्लिम' जैसे शब्दों के जमा बनाने के उदाहरण दिए गए हैं।
यह सेक्शन विभिन्न शब्दों के जमा सालिम बनाने के व्यावहारिक अभ्यास प्रदान करता है, जिससे सीखी हुई थ्योरी को लागू करने में मदद मिलती है।
लफ्ज़ 'तालिब' (Talib - student) का जमा सालिम मुज़क्कर 'तालिबून' (Taliboon) बनता है, और अगर स्त्रीलिंग के संदर्भ में हो तो 'तालिबा' (Taliba) से 'तालिबातुन' (Talibaatun) बनता है।

Key takeaways

  1. 1अरबी में एक, दो और दो से ज़्यादा के लिए अलग-अलग शब्द रूप होते हैं।
  2. 2जमा सालिम दो तरह के होते हैं: मुज़क्कर (masculine) और मुअन्नस (feminine), जिनके बनाने के फार्मूले अलग हैं।
  3. 3जमा मुक़स्सर वो जमा हैं जिनका कोई तयशुदा फार्मूला नहीं होता और उन्हें याद करना पड़ता है।
  4. 4शब्द 'आकिल' (समझदार) है या 'गैर-आकिल' (बेसमझ), यह जमा सालिम बनाने के नियमों को प्रभावित करता है।
  5. 5मुज़क्कर जमा सालिम बनाने के लिए वाहिद के आखिर में 'ऊना' (ـون) जोड़ा जाता है।
  6. 6मुअन्नस जमा सालिम बनाने के लिए वाहिद के आखिर से 'ता मरबूता' हटाकर 'आतुन' (ـات) जोड़ा जाता है।
  7. 7कुरान सीखना और सिखाना अल्लाह की रहमत हासिल करने का एक अहम ज़रिया है।

Key terms

जमा सालिम (Jum'a Saalim)वाहिद (Waahid - Singular)मुसन्ना (Musanna - Dual)जमा (Jum'a - Plural)जमा मुक़स्सर (Jum'a Muqassar - Irregular Plural)जमा सालिम मुज़क्कर (Jum'a Saalim Muzakkar - Sound Masculine Plural)जमा सालिम मुअन्नस (Jum'a Saalim Muannas - Sound Feminine Plural)आकिल (Aaqil - Rational/Sentient)गैर-आकिल (Ghair-Aaqil - Non-rational/Insentient)ता मरबूता (Taa Marbuta - ة)

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  1. 1अरबी में वाहिद, मुसन्ना और जमा में क्या फर्क है?
  2. 2जमा सालिम मुज़क्कर बनाने का क्या फार्मूला है और यह किस तरह के शब्दों पर लागू होता है?
  3. 3जमा सालिम मुअन्नस बनाने का क्या फार्मूला है और यह किस तरह के शब्दों पर लागू होता है?
  4. 4आकिल और गैर-आकिल मखलूकात का जमा सालिम बनाने पर क्या असर पड़ता है?
  5. 5जमा मुक़स्सर और जमा सालिम में क्या मुख्य अंतर है और इन्हें कैसे पहचाना जा सकता है?

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