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Part 5 Tally Prime Course | Bright Computer Institute | Sumit Yadav Sir
Bright Computer institute
Overview
यह वीडियो टैली प्राइम कोर्स का पांचवां भाग है, जिसमें मुख्य रूप से टैली में ग्रुप्स और लेजर बनाने की प्रक्रिया को समझाया गया है। इसमें बैलेंस शीट के विभिन्न घटकों जैसे लायबिलिटीज और एसेट्स के बारे में विस्तार से बताया गया है। वीडियो में कैपिटल अकाउंट, लोन लायबिलिटी, करंट लायबिलिटी, फिक्स्ड एसेट्स, इन्वेस्टमेंट और करंट एसेट्स जैसे महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स को उदाहरणों के साथ समझाया गया है। अंत में, टैली में सिंगल और मल्टी-लेजर बनाने की प्रैक्टिकल विधि बताई गई है, जिसमें क्रिएट और ऑल्टर ऑप्शन का उपयोग शामिल है।
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Chapters
- टैली में कुल 28 ग्रुप होते हैं, जिनमें 15 प्राइमरी और 13 सेकेंडरी होते हैं।
- प्रॉफिट एंड लॉस (PL) के अंतर्गत 6 ग्रुप आते हैं: एक्सपेंस (Purchase, Direct Expense, Indirect Expense) और इनकम (Sales, Direct Income, Indirect Income)।
- यह सेक्शन पिछले क्लास के कॉन्सेप्ट्स का रिवीजन कराता है ताकि आगे की पढ़ाई आसान हो।
ग्रुप्स को समझना टैली में लेजर बनाने की नींव है, क्योंकि हर लेजर किसी न किसी ग्रुप के अंतर्गत आता है।
प्रॉफिट एंड लॉस के अंतर्गत आने वाले ग्रुप्स जैसे परचेज, सेल्स, डायरेक्ट एक्सपेंस, इनडायरेक्ट एक्सपेंस, डायरेक्ट इनकम और इनडायरेक्ट इनकम का उल्लेख।
- बैलेंस शीट दो मुख्य भागों में बंटी होती है: लायबिलिटीज (दायित्व) और एसेट्स (संपत्ति)।
- लायबिलिटीज में वे सभी चीजें शामिल होती हैं जो बिजनेस को दूसरों को चुकानी होती हैं।
- एसेट्स में वे सभी चीजें शामिल होती हैं जो बिजनेस की अपनी संपत्ति होती हैं।
लायबिलिटीज और एसेट्स को समझना किसी भी बिजनेस की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण है।
लायबिलिटीज के अंतर्गत कैपिटल, लोन लायबिलिटी, करंट लायबिलिटी आते हैं, जबकि एसेट्स के अंतर्गत फिक्स्ड एसेट्स, इन्वेस्टमेंट, करंट एसेट्स आदि आते हैं।
- कैपिटल अकाउंट वह होता है जो बिजनेसमैन बिजनेस शुरू करने के लिए लगाता है।
- इसके दो मुख्य भाग होते हैं: रिजर्व एंड सरप्लस (लंबे समय के लिए पूंजी) और रिटेंड अर्निंग (शॉर्ट टर्म के लिए पूंजी)।
- रिजर्व एंड सरप्लस का मतलब है लंबे समय के लिए बिजनेस में लगाई गई पूंजी।
कैपिटल के विभिन्न प्रकारों को समझने से बिजनेस की पूंजी संरचना और उसके दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन को समझने में मदद मिलती है।
जब बिजनेसमैन लंबे समय के लिए बिजनेस में पैसा लगाता है, तो उसे रिजर्व एंड सरप्लस कहा जाता है।
- लोन लायबिलिटी के अंतर्गत बैंक ओसी (ओवर क्रेडिट), बैंक ओडी (ओवरड्राफ्ट), सिक्योर्ड लोन और अनसिक्योर्ड लोन आते हैं।
- बैंक ओसी/ओडी तब काम आता है जब अकाउंट में पैसे न होने पर भी बैंक अतिरिक्त राशि निकालने की सुविधा देता है।
- सिक्योर्ड लोन बैंक से लिया जाता है और इसके लिए संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती है, जबकि अनसिक्योर्ड लोन दोस्तों या अन्य स्रोतों से लिया जाता है जिस पर कोई गारंटी नहीं होती।
विभिन्न प्रकार के लोन को समझना बिजनेस की उधारी प्रबंधन और वित्तीय जोखिमों का आकलन करने में सहायक होता है।
जब आप बैंक से लोन लेते हैं और उसके बदले अपनी प्रॉपर्टी (जैसे घर या कार) के कागज जमा करते हैं, तो वह सिक्योर्ड लोन कहलाता है।
- करंट लायबिलिटीज में वे दायित्व शामिल होते हैं जिनका भुगतान निकट भविष्य में करना होता है, जैसे संड्री क्रेडिटर (देनदार) और संड्री डेबिटर (लेनदार)।
- ड्यूटीज एंड टैक्सेस ग्रुप का उपयोग टैक्स से संबंधित लेजर बनाने के लिए किया जाता है।
- यह सेक्शन बताता है कि वर्तमान दायित्वों को कैसे प्रबंधित किया जाता है।
करंट लायबिलिटीज को समझना बिजनेस की अल्पकालिक वित्तीय स्वास्थ्य और नकदी प्रवाह को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
संड्री क्रेडिटर (देनदार) वे लोग या संस्थाएं होती हैं जिन्हें बिजनेस को पैसा देना बाकी है।
- एसेट्स (संपत्ति) के मुख्य प्रकार हैं: फिक्स्ड एसेट्स, इन्वेस्टमेंट और करंट एसेट्स।
- फिक्स्ड एसेट्स वे होते हैं जो लंबे समय तक बिजनेस के उपयोग में आते हैं, जैसे कंप्यूटर, फर्नीचर, बिल्डिंग।
- करंट एसेट्स वे होते हैं जो जल्दी ही कैश में बदले जा सकते हैं या बिक जाएंगे, जैसे स्टॉक, कैश इन हैंड, बैंक अकाउंट।
- इन्वेस्टमेंट वह पैसा है जो बिजनेस कहीं और लगाता है।
एसेट्स को वर्गीकृत करना बिजनेस की संपत्ति की संरचना और उसकी तरलता (liquidity) को समझने में मदद करता है।
कंपनी के ऑफिस में लगे पंखे, एसी, कंप्यूटर और कुर्सियाँ फिक्स्ड एसेट्स के उदाहरण हैं।
- टैली में लेजर दो प्रकार से बनाए जाते हैं: सिंगल लेजर और मल्टी-लेजर।
- सिंगल लेजर बनाने के लिए क्रिएट ऑप्शन का उपयोग किया जाता है, जिसमें लेजर का नाम और उसका अंडर ग्रुप डिफाइन किया जाता है।
- मल्टी-लेजर बनाने के लिए चार्ट ऑफ अकाउंट में जाकर ऑल्ट + H (मल्टी अल्टर) का उपयोग किया जाता है, जिससे एक साथ कई लेजर बनाए जा सकते हैं।
लेजर बनाना टैली का एक मूलभूत कार्य है, जो सभी वित्तीय लेनदेन को रिकॉर्ड करने के लिए आवश्यक है। मल्टी-लेजर ऑप्शन समय बचाता है।
मल्टी-लेजर बनाने के लिए चार्ट ऑफ अकाउंट में जाकर ऑल्ट + H दबाकर 'मल्टी अल्टर' ऑप्शन चुनना और फिर 'ऑल आइटम्स' पर क्लिक करके लेजर और अंडर ग्रुप डिफाइन करना।
Key takeaways
- टैली में ग्रुप्स को समझना लेजर बनाने की प्रक्रिया का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
- लायबिलिटीज और एसेट्स बैलेंस शीट के दो स्तंभ हैं, जो किसी भी व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को दर्शाते हैं।
- कैपिटल, लोन, और करंट लायबिलिटीज को सही ढंग से वर्गीकृत करना व्यवसाय के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
- फिक्स्ड एसेट्स और करंट एसेट्स को समझना कंपनी की संपत्ति की प्रकृति और उसकी तरलता का आकलन करने में मदद करता है।
- टैली में लेजर बनाने की प्रक्रिया, चाहे वह सिंगल हो या मल्टी, सभी वित्तीय रिकॉर्ड के लिए आधार प्रदान करती है।
- तकनीकी कौशल सीखने के लिए मेहनत और निरंतरता महत्वपूर्ण है, डिग्री से ज्यादा हुनर मायने रखता है।
- टैली में कंट्रोल + A का उपयोग लेजर या किसी भी एंट्री को सेव (एक्सेप्ट) करने के लिए किया जाता है।
Key terms
GroupPrimary GroupSecondary GroupProfit & Loss (PL)Balance SheetLiabilitiesAssetsCapital AccountLoan LiabilityCurrent LiabilityFixed AssetsCurrent AssetsLedgerSingle LedgerMulti LedgerUnder (Group)Chart of AccountsAlterSundry CreditorSundry DebtorBank OD/OC
Test your understanding
- टैली में प्राइमरी और सेकेंडरी ग्रुप्स की कुल संख्या कितनी होती है और इनका क्या महत्व है?
- लायबिलिटीज और एसेट्स के बीच मुख्य अंतर क्या हैं और बैलेंस शीट में इनका क्या स्थान है?
- कैपिटल अकाउंट के अंतर्गत आने वाले रिजर्व एंड सरप्लस और रिटेंड अर्निंग में क्या फर्क है?
- सिक्योर्ड लोन और अनसिक्योर्ड लोन को उदाहरण सहित समझाइए।
- टैली में मल्टी-लेजर बनाने की प्रक्रिया क्या है और यह सिंगल लेजर बनाने से कैसे भिन्न है?