प्रमुख पर्यावरण सम्मेलन एवं प्रोटोकॉल | Environment conference | Ramsar conversation
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प्रमुख पर्यावरण सम्मेलन एवं प्रोटोकॉल | Environment conference | Ramsar conversation

Trick Point

8 chapters6 takeaways14 key terms7 questions

Overview

यह वीडियो पर्यावरण से संबंधित प्रमुख सम्मेलनों, संधियों और प्रोटोकॉल की जानकारी देता है। इसमें रामसर कन्वेंशन, स्टॉकहोम सम्मेलन, सिटीज, वलैंड रिपोर्ट, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, जैव विविधता संधि, पृथ्वी सम्मेलन, क्योटो प्रोटोकॉल, कार्टाजेना प्रोटोकॉल और जिनेवा प्रोटोकॉल जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। प्रत्येक सम्मेलन के उद्देश्य, वर्ष, स्थान और मुख्य बिंदुओं को समझाया गया है, साथ ही याद रखने के लिए ट्रिक्स भी बताई गई हैं। वीडियो का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण से जुड़े इन महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों को आसानी से समझने और याद रखने में मदद करना है।

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Chapters

  • यह आद्र भूमि (wetlands) के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  • इसकी स्थापना 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में हुई थी।
  • यह 1975 में विश्व स्तर पर लागू हुई और भारत ने 1982 में हस्ताक्षर किए।
  • वर्तमान में भारत में 99 रामसर स्थल हैं, जिनमें शेखा झील पक्षी अभयारण्य नवीनतम है।
यह कन्वेंशन दुनिया भर की महत्वपूर्ण आद्र भूमियों के संरक्षण के लिए एक ढांचा प्रदान करता है, जो जैव विविधता और मानव कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ईरान के रामसर शहर में 1971 में हुई संधि, जिसने आद्र भूमियों के संरक्षण को वैश्विक एजेंडे पर लाया।
  • यह 5 जून 1972 को स्टॉकहोम, स्वीडन में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित किया गया था।
  • इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और विकास व पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना था।
  • इसके प्रमुख परिणाम स्टॉकहोम घोषणा, UNEP (United Nations Environment Programme) की स्थापना और 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस घोषित करना थे।
  • इंदिरा गांधी ने इस सम्मेलन में कहा था, 'Poverty is the biggest polluter' (गरीबी सबसे बड़ा प्रदूषक है)।
यह पहला प्रमुख वैश्विक सम्मेलन था जिसने पर्यावरण को एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दे के रूप में स्थापित किया और भविष्य के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों की नींव रखी।
5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में घोषित किया जाना, जो आज भी हर साल मनाया जाता है।
  • यह सरकारों के बीच एक समझौता है जो संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित और प्रतिबंधित करता है।
  • इसकी पहली बैठक 3 मार्च 1973 को वाशिंगटन डीसी में हुई और यह 1 जुलाई 1975 से लागू हुई।
  • इसके मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त प्रजातियों की रक्षा करना, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करना और जैव विविधता का संरक्षण करना है।
CITES लुप्तप्राय वन्यजीवों और पौधों की प्रजातियों को अवैध व्यापार से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे उनके अस्तित्व को सुनिश्चित किया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाथी दांत या गैंडे के सींग जैसे अवैध व्यापार पर रोक लगाने के लिए CITES नियमों का पालन किया जाता है।
  • यह रिपोर्ट 1987 में 'वर्ल्ड कमीशन ऑन एनवायरमेंट एंड डेवलपमेंट' द्वारा 'आवर कॉमन फ्यूचर' (Our Common Future) नाम से जारी की गई थी।
  • इस रिपोर्ट ने 'सतत विकास' (Sustainable Development) की अवधारणा को परिभाषित किया: ऐसा विकास जो वर्तमान की जरूरतों को भविष्य की पीढ़ियों की क्षमता से समझौता किए बिना पूरा करे।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDGs) 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए और 2030 तक इन्हें हासिल करने का लक्ष्य है।
वलैंड रिपोर्ट ने सतत विकास की अवधारणा को वैश्विक मंच पर लाकर भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण और संसाधनों को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सतत विकास की परिभाषा: 'ऐसा विकास जो वर्तमान की पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करे, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों की जरूरत को पूरा करने की क्षमता को नुकसान पहुंचाए बिना।'
  • यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिस पर 16 सितंबर 1987 को मॉन्ट्रियल, कनाडा में हस्ताक्षर किए गए थे।
  • इसका मुख्य लक्ष्य ओजोन परत को नष्ट करने वाले रसायनों, जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), के उत्पादन और उपयोग को समाप्त करना है।
  • 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है।
यह प्रोटोकॉल ओजोन परत के क्षरण को रोकने में एक बड़ी सफलता है, जो पृथ्वी पर जीवन को हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाता है।
क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के उत्पादन और उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का निर्णय।
  • जैव विविधता संधि (CBD) 1992 में रियो डी जनेरियो, ब्राजील में हुई, जिसका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण, सतत उपयोग और लाभों का न्यायपूर्ण वितरण है।
  • भारत ने 1992 में हस्ताक्षर किए और यह 1994 से लागू हुई।
  • पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit) भी जून 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर चर्चा करना और सतत विकास के लिए वैश्विक योजना बनाना था।
  • जैव विविधता पारिस्थितिकी संतुलन, खाद्य व औषधि स्रोत, आर्थिक विकास और मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
ये दोनों ही महत्वपूर्ण सम्मेलन पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं, जो पृथ्वी के भविष्य के लिए आवश्यक हैं।
रियो डी जनेरियो में 1992 में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन, जिसने पर्यावरण और विकास के मुद्दों को एक साथ जोड़ा।
  • क्योटो प्रोटोकॉल 1997 में जापान में अपनाया गया और 2005 से लागू हुआ। इसका उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है।
  • कार्टाजेना प्रोटोकॉल (Cartagena Protocol) 2000 में मॉन्ट्रियल, कनाडा में आया और सितंबर 2003 से लागू हुआ। यह जैव विविधता संधि के तहत जीवित परिवर्तित जीवों (LMOs) के सुरक्षित उपयोग और व्यापार को नियंत्रित करता है।
  • भारत 23 जनवरी 2003 को कार्टाजेना प्रोटोकॉल का सदस्य बना।
क्योटो प्रोटोकॉल जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था, जबकि कार्टाजेना प्रोटोकॉल जैव प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करता है।
क्योटो प्रोटोकॉल का लक्ष्य औद्योगिक देशों द्वारा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना।
  • यह 1925 की एक अंतरराष्ट्रीय संधि है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य रासायनिक और जैविक हथियारों के उपयोग को प्रतिबंधित करना है।
  • यह युद्ध में ऐसे अमानवीय हथियारों के विकास, भंडारण और उपयोग पर रोक लगाता है, जिसका उद्देश्य मानवता की रक्षा करना है।
यह प्रोटोकॉल रासायनिक और जैविक हथियारों के विनाशकारी प्रभावों को रोकने के लिए एक ऐतिहासिक प्रयास है, जो युद्धों में मानवता की रक्षा करता है।
रासायनिक और जैविक हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाला 1925 का जिनेवा प्रोटोकॉल।

Key takeaways

  1. 1पर्यावरण संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है, जैसा कि विभिन्न सम्मेलनों और प्रोटोकॉल से स्पष्ट होता है।
  2. 2सतत विकास की अवधारणा भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल देती है।
  3. 3ओजोन परत और जैव विविधता का संरक्षण वैश्विक स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अनिवार्य है।
  4. 4अंतरराष्ट्रीय संधियाँ संकटग्रस्त प्रजातियों और खतरनाक रसायनों के व्यापार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  5. 5जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना एक वैश्विक प्राथमिकता है।
  6. 6मानवता की रक्षा के लिए रासायनिक और जैविक हथियारों का निषेध आवश्यक है।

Key terms

Ramsar ConventionStockholm ConferenceCITESSustainable DevelopmentWeland ReportMontreal ProtocolBiodiversity Treaty (CBD)Earth SummitKyoto ProtocolCartagena ProtocolGeneva ProtocolOzone LayerGreenhouse GasesEndangered Species

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  1. 1रामसर कन्वेंशन का मुख्य उद्देश्य क्या है और यह कब स्थापित हुआ?
  2. 2स्टॉकहोम सम्मेलन के प्रमुख परिणाम क्या थे और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
  3. 3CITES संधि संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा में कैसे मदद करती है?
  4. 4सतत विकास की अवधारणा को वलैंड रिपोर्ट ने कैसे परिभाषित किया?
  5. 5मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का मुख्य लक्ष्य क्या था और यह किस रसायन से संबंधित था?
  6. 6क्योटो प्रोटोकॉल और कार्टाजेना प्रोटोकॉल के बीच मुख्य अंतर क्या हैं?
  7. 7जिनेवा प्रोटोकॉल किस प्रकार के हथियारों पर प्रतिबंध लगाता है?

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