
The Rise of Nationalism in Europe Class 10 Full Chapter | Class 10 History Chapter 1 | Sunlike study
Sunlike study
Overview
यह वीडियो यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय पर एक विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है, जो 1848 की फ्रांसीसी क्रांति से शुरू होकर 19वीं सदी के अंत तक चलता है। यह बताता है कि कैसे फ्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन के सुधारों ने राष्ट्रवाद के विचारों को फैलाया। वीडियो में यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास, उदारवादी राष्ट्रवाद की अवधारणा, रूढ़िवाद की वापसी, और 1830-1848 के बीच हुए विभिन्न क्रांतियों का वर्णन किया गया है। इसमें जर्मनी और इटली के एकीकरण, ब्रिटेन के एकीकरण की अनूठी प्रक्रिया, और राष्ट्रों को चित्रित करने के लिए कला और संस्कृति के उपयोग पर भी प्रकाश डाला गया है। अंत में, यह राष्ट्रवाद के साम्राज्यवाद में बदलने और बाल्कन क्षेत्र में इसके विनाशकारी परिणामों की पड़ताल करता है, जो प्रथम विश्व युद्ध की ओर ले जाता है।
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Chapters
- 1848 में फ्रांसीसी कलाकार फ्रेडरिक सोरिए ने 'राष्ट्रों के बीच संधि' नामक चार चित्रों की एक श्रृंखला बनाई।
- इन चित्रों में, सोरिए ने स्वतंत्रता की प्रतिमा के साथ एक लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक विश्व की कल्पना की, जहाँ राजशाही के अवशेष बिखरे पड़े थे।
- यह कल्पना यूरोप में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष और राष्ट्रवाद के उदय की वास्तविकताओं को दर्शाती है।
- चैप्टर का उद्देश्य यह समझाना है कि यूरोप में राष्ट्रवाद कैसे फैला, कैसे राजशाही खत्म हुई और राष्ट्र-राज्यों का उदय हुआ।
- 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने फ्रांस में राजशाही को समाप्त कर सत्ता आम नागरिकों को हस्तांतरित कर दी।
- क्रांति के बाद 'ला पैट्री' (पिता) और 'ले सिटोएन' (नागरिक) जैसे विचारों ने एकता को बढ़ावा दिया, एक नया राष्ट्रीय ध्वज अपनाया गया, और फ्रांसीसी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गया।
- 1799 में नेपोलियन बोनापार्ट के उदय ने फ्रांसीसी क्रांति के आदर्शों को एक नागरिक संहिता (नेपोलियनिक कोड 1804) के माध्यम से पुनर्गठित किया, जिसने कानून के समक्ष समानता, संपत्ति का अधिकार और सामंती व्यवस्था का उन्मूलन जैसे सुधार लाए।
- शुरुआत में नेपोलियन को स्वतंत्रता का वाहक माना गया, लेकिन बाद में उसकी विस्तारवादी नीतियों और दमनकारी उपायों के कारण लोग उससे दूर हो गए।
- 18वीं सदी के मध्य तक यूरोप में राष्ट्र-राज्यों का अभाव था; इसके बजाय बड़े साम्राज्य थे जहाँ विभिन्न भाषाएँ और संस्कृतियाँ मौजूद थीं।
- समाज मुख्य रूप से अभिजात वर्ग (धनी, शिक्षित, फ्रेंच भाषी) और किसानों (गरीब, बहुसंख्यक) में विभाजित था।
- औद्योगिक क्रांति के कारण एक नए 'मध्य वर्ग' का उदय हुआ, जिसमें व्यवसायी और पेशेवर शामिल थे, जिन्होंने उदारवादी राष्ट्रवाद के विचारों को बढ़ावा दिया।
- उदारवादी राष्ट्रवाद ने निरंकुशता के अंत, विशेषाधिकारों की समाप्ति, और संवैधानिक सरकार की मांग की, लेकिन अक्सर महिलाओं और संपत्तिहीन पुरुषों के मताधिकार को शामिल नहीं किया।
- 1815 में वाटरलू की लड़ाई में नेपोलियन की हार के बाद, यूरोपीय शक्तियाँ (प्रशिया, ऑस्ट्रिया, ब्रिटेन, रूस) वियना की संधि के तहत रूढ़िवादी व्यवस्था को बहाल करने के लिए एकजुट हुईं।
- रूढ़िवादियों ने राजशाही, चर्च की शक्ति और सामाजिक पदानुक्रम को बहाल किया, और सेंसरशिप लागू की।
- इस दमनकारी माहौल के बावजूद, उदारवादी राष्ट्रवादियों ने गुप्त समाज बनाए और क्रांतियों के माध्यम से स्वतंत्रता और राष्ट्र-राज्यों की मांग जारी रखी।
- 1830-1848 के बीच फ्रांस में जुलाई क्रांति (जिससे संवैधानिक राजशाही स्थापित हुई), बेल्जियम की स्वतंत्रता, और ग्रीस के स्वतंत्रता संग्राम जैसी महत्वपूर्ण क्रांतियाँ हुईं, जो यूरोप में राष्ट्रवाद की लहर को दर्शाती हैं।
- राष्ट्रवाद केवल क्षेत्रीय विजय या आर्थिक सुधारों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आंदोलनों, विशेष रूप से रोमांटिसिज़्म से भी विकसित हुआ।
- रोमांटिसिज़्म ने तर्क के बजाय भावनाओं, अंतर्ज्ञान और रहस्यवाद पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय भावना और साझा सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना था।
- कलाकारों, कवियों और संगीतकारों ने लोकगीतों, लोक नृत्यों और स्थानीय भाषाओं के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान को बढ़ावा दिया।
- भाषा ने राष्ट्रीय भावना को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जैसा कि पोलैंड के मामले में देखा गया, जहाँ रूसी शासन के बावजूद पोलिश भाषा को बनाए रखने का संघर्ष हुआ।
- 1848 के आसपास यूरोप में जनसंख्या वृद्धि, बेरोजगारी और खराब फसलों के कारण व्यापक आर्थिक कठिनाई और भुखमरी फैली।
- पेरिस में, इन कठिनाइयों के कारण सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे राजा लुई-फिलिप को भागना पड़ा और फ्रांस एक गणराज्य घोषित किया गया।
- सभी 21 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को वोट देने का अधिकार मिला और काम का अधिकार प्रदान किया गया।
- इसी अवधि में सिलेसिया में बुनकरों का विद्रोह भी हुआ, जो ठेकेदारों द्वारा कम भुगतान के खिलाफ था, जो आर्थिक संकट के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
- 1848 में, मध्य वर्ग के उदारवादियों ने राष्ट्र-राज्यों की स्थापना और संसदीय सिद्धांतों (जैसे संविधान, प्रेस की स्वतंत्रता) की मांग के लिए क्रांति की।
- जर्मन क्षेत्रों में, फ्रैंकफर्ट पार्लियामेंट में 831 निर्वाचित प्रतिनिधियों ने एक एकीकृत जर्मनी के लिए एक संविधान का मसौदा तैयार किया।
- हालांकि, यह आंदोलन किसानों, श्रमिकों और कारीगरों के समर्थन के बिना कमजोर पड़ गया, और प्रशिया के राजा फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ ने ताज स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
- भले ही यह आंदोलन विफल रहा, इसने यूरोपीय सम्राटों को उदारवादी मांगों के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया, जिससे कुछ सुधारों को स्वीकार किया गया।
- जर्मनी का एकीकरण प्रशिया के नेतृत्व में हुआ, जिसमें ऑटोमन बिस्मार्क ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशिया ने ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस के खिलाफ युद्धों के माध्यम से जर्मन राज्यों को एकजुट किया।
- जनवरी 1871 में, विलियम प्रथम को जर्मन सम्राट घोषित किया गया, जिससे जर्मनी का एकीकरण पूरा हुआ।
- इटली सात राज्यों में विभाजित था; सार्डिनिया-पिडमोंट के राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय और उनके मुख्यमंत्री काउंट कैवूर के नेतृत्व में इसका एकीकरण हुआ।
- ग्यूसेप गैरीबाल्डी के सैन्य अभियानों और कूटनीतिक प्रयासों से इटली का एकीकरण 1861 तक पूरा हुआ, जिसमें विक्टर इमैनुएल द्वितीय को इटली का राजा घोषित किया गया।
- ब्रिटेन का एकीकरण एक लंबी और क्रमिक प्रक्रिया थी, जिसमें इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और आयरलैंड शामिल थे।
- 1707 के एक्ट ऑफ यूनियन ने इंग्लैंड और स्कॉटलैंड को मिलाकर ग्रेट ब्रिटेन का निर्माण किया।
- 1801 में आयरलैंड को बलपूर्वक ब्रिटिश नियंत्रण में ले लिया गया, जिससे यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड का गठन हुआ।
- 18वीं और 19वीं सदी में, कलाकारों ने राष्ट्रों को मानवीकृत करने के लिए 'एल्गोरि' (जैसे फ्रांस के लिए मारियान और जर्मनी के लिए जर्मेनिया) का उपयोग किया, ताकि राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा मिल सके।
- 19वीं सदी के अंत तक, राष्ट्रवाद अक्सर साम्राज्यवाद में बदल गया, जहाँ शक्तिशाली राष्ट्र कमजोर राष्ट्रों पर हावी होने लगे।
- बाल्कन क्षेत्र, जो कभी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था, विभिन्न जातीय समूहों के बीच राष्ट्रवादी तनाव का केंद्र बन गया।
- जैसे-जैसे ऑटोमन साम्राज्य कमजोर हुआ, बाल्कन के विभिन्न राष्ट्रों ने स्वतंत्रता की घोषणा की, लेकिन वे क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए आपस में लड़ने लगे।
- इस संघर्ष में रूस, जर्मनी, इंग्लैंड और ऑस्ट्रिया-हंगरी जैसी बड़ी शक्तियों के हस्तक्षेप ने बाल्कन को 'साम्राज्यवादी तनाव' का क्षेत्र बना दिया और अंततः प्रथम विश्व युद्ध का कारण बना।
Key takeaways
- फ्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन के सुधारों ने यूरोप में राष्ट्रवाद के विचारों को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उदारवादी राष्ट्रवाद ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संवैधानिक सरकार और राष्ट्र-राज्यों की मांग की, जो मध्य वर्ग के उदय से प्रेरित थी।
- रूढ़िवाद ने क्रांति के बाद यथास्थिति बहाल करने की कोशिश की, लेकिन राष्ट्रवादी भावनाएँ दमन के बावजूद जीवित रहीं।
- कला, संस्कृति और भाषा ने राष्ट्रीय पहचान को आकार देने और लोगों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- आर्थिक कठिनाइयों ने 1848 की क्रांतियों को बढ़ावा दिया, जिससे राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन हुए।
- जर्मनी और इटली का एकीकरण सैन्य शक्ति, कूटनीति और राष्ट्रीय आंदोलनों के संयोजन से संभव हुआ।
- राष्ट्रवाद का अतिवाद साम्राज्यवाद और बड़े पैमाने पर संघर्ष का कारण बन सकता है, जैसा कि बाल्कन क्षेत्र के मामले में देखा गया।
Key terms
Test your understanding
- 1848 की फ्रांसीसी क्रांति ने यूरोप में राष्ट्रवाद के विचारों को कैसे प्रभावित किया?
- नेपोलियन के सुधारों ने राष्ट्रवाद के प्रसार में क्या भूमिका निभाई, और क्यों लोग अंततः उससे दूर हो गए?
- उदारवादी राष्ट्रवाद की मुख्य मांगें क्या थीं, और यह समाज के किन वर्गों से जुड़ा था?
- 1815 के बाद रूढ़िवादी शक्तियों ने यूरोप में क्या बदलाव लाने की कोशिश की, और राष्ट्रवादी आंदोलनों ने इसका विरोध कैसे किया?
- कला और संस्कृति ने यूरोप में राष्ट्रीय भावना को जगाने में कैसे योगदान दिया?
- जर्मनी और इटली के एकीकरण की प्रक्रिया में मुख्य कारक क्या थे?
- राष्ट्रवाद का साम्राज्यवाद में बदलना बाल्कन क्षेत्र के लिए क्यों विनाशकारी साबित हुआ?