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First Phase of Indian National Movement - ICSE HISTORY 22-2023 | Early Nationalist | English For All
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First Phase of Indian National Movement - ICSE HISTORY 22-2023 | Early Nationalist | English For All

English For All

6 chapters7 takeaways9 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के पहले चरण, जिसे प्रारंभिक राष्ट्रवादी चरण (1885-1905) के रूप में जाना जाता है, पर केंद्रित है। यह बताता है कि कैसे शुरुआती भारतीय राष्ट्रवादी, जो पढ़े-लिखे थे, ब्रिटिश शासन के तहत भारत के विकास की उम्मीद करते थे। यह उनके संवैधानिक तरीकों, जैसे याचिकाएं और विरोध प्रदर्शन, और उनके दोहरे उद्देश्यों - भारतीयों को शिक्षित करना और ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाना - की व्याख्या करता है। वीडियो दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले और सुरेंद्रनाथ बनर्जी जैसे प्रमुख नेताओं के योगदान पर भी प्रकाश डालता है, जिसमें उनके आर्थिक विचारों, सामाजिक सुधारों और राजनीतिक सक्रियता पर चर्चा की गई है।

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Chapters

  • भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को तीन चरणों में बांटा गया है: प्रारंभिक राष्ट्रवादी (1885-1905), उग्रवादी (1905-1919), और गांधीवादी (1919-1947)।
  • प्रारंभिक राष्ट्रवादी कांग्रेस के शुरुआती नेता थे, जो पढ़े-लिखे थे और मानते थे कि ब्रिटिश शासन से भारत का विकास होगा।
  • उनका मानना था कि ब्रिटिश न्यायप्रिय हैं और वे भारत में सामाजिक बुराइयों जैसे छुआछूत और सती प्रथा को खत्म करने में मदद करेंगे।
  • वे ब्रिटिश शासन के तहत सीमित स्व-शासन (होम रूल) की उम्मीद करते थे, जहां भारतीय अपनी सरकार चलाएंगे लेकिन सम्राट ब्रिटिश ही रहेंगे।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई और शुरुआती नेताओं की क्या सोच थी, क्योंकि इसने भविष्य के आंदोलनों की नींव रखी।
प्रारंभिक राष्ट्रवादियों का मानना था कि ब्रिटिश शासन समाज में सती प्रथा जैसी बुराइयों को खत्म करेगा, जिससे समाज सुधरेगा।
  • इन नेताओं ने 'संवैधानिक तरीकों' का इस्तेमाल किया, जिसका अर्थ है कानून के दायरे में रहकर विरोध करना।
  • वे लड़ाई-झगड़े या खून-खराबे में विश्वास नहीं करते थे, बल्कि सरकार को पत्र, याचिकाएं और ज्ञापन भेजते थे।
  • उनका पहला उद्देश्य भारतीयों को आधुनिक राजनीति के बारे में शिक्षित करना और एक एकीकृत जनमत तैयार करना था।
  • दूसरा उद्देश्य ब्रिटिश सरकार को प्रभावित करना था, जिसमें ब्रिटेन में जाकर अपनी बात रखना भी शामिल था।
यह जानना आवश्यक है कि शुरुआती राष्ट्रवादी कैसे काम करते थे, क्योंकि उनके तरीके आज के विरोध प्रदर्शनों से काफी अलग थे और उन्होंने भविष्य के आंदोलनों के लिए एक आधार तैयार किया।
सरकार की नीतियों की आलोचना करने और अपनी मांगें रखने के लिए उन्होंने अखबारों और प्रेस का सहारा लिया।
  • राष्ट्रवादियों ने ब्रिटेन में ब्रिटिश सरकार और जनता को भारत की स्थिति के बारे में सूचित करने की कोशिश की।
  • उन्होंने 'इंडिया' नामक एक साप्ताहिक पत्रिका निकाली और भारतीय नेताओं को ब्रिटेन भेजा ताकि वे वहां के लोगों को भारत में हो रहे अत्याचारों के बारे में बता सकें।
  • उनका लक्ष्य ब्रिटेन में भारत की अच्छी छवि को तोड़ना और सच्चाई को सामने लाना था।
  • उन्होंने याचिकाएं (Petitions), प्रार्थनाएं (Prayers), और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों (Protests) का इस्तेमाल किया।
यह समझने से पता चलता है कि राष्ट्रवादी केवल भारत तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी आवाज उठाने का प्रयास किया।
लंदन में 'इंडियन सोसायटी' की स्थापना की गई ताकि भारतीयों की शिकायतों को वहां के लोग जान सकें।
  • दादाभाई नौरोजी को 'भारत के ग्रैंड ओल्ड मैन' के रूप में जाना जाता है और वे भारत के अनौपचारिक राजदूत थे।
  • उन्होंने लंदन में इंडियन सोसायटी की स्थापना की और ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स के पहले भारतीय सदस्य बने।
  • उन्होंने भारतीयों को उच्च पदों पर नियुक्त करने की मांग की, जिसके परिणामस्वरूप आईसीएस परीक्षा भारत में भी आयोजित होने लगी।
  • उन्होंने कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, तीन बार इसके अध्यक्ष रहे और स्वराज (स्व-शासन) की मांग करने वाले पहले राष्ट्रवादी थे।
नौरोजी जैसे नेताओं के प्रयासों से ही भारतीयों को राजनीतिक अधिकार मिले और स्वराज की मांग को बल मिला।
उनकी 'ड्रेन थ्योरी' (Drain Theory) ने समझाया कि कैसे भारत का धन ब्रिटेन जा रहा है, जिससे ब्रिटिश शासन की आर्थिक शोषणकारी प्रकृति उजागर हुई।
  • गोपाल कृष्ण गोखले महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु थे और वे एक पढ़े-लिखे प्रोफेसर थे।
  • उन्होंने ब्रिटिश सरकार के सामने भारतीयों के विचारों को रखने के लिए वेलबी कमीशन के समक्ष गवाही दी।
  • उन्होंने ब्रिटिश सेना पर अत्यधिक खर्च कम करने, भारतीयों को उच्च पदों पर नियुक्त करने और भारतीय कपास पर टैक्स कम करने की मांग की।
  • उन्होंने न्यायपालिका और कार्यपालिका को अलग करने और 'सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य नए नेताओं को तैयार करना और वंचितों को ऊपर उठाना था।
गोखले के सुधारवादी दृष्टिकोण और सामाजिक कार्यों ने भारत में एक मजबूत नागरिक समाज की नींव रखी।
उन्होंने भारतीय कपास पर लगने वाले भारी टैक्स को खत्म करने की मांग की ताकि भारतीय उद्योग बर्बाद न हों।
  • सुरेंद्रनाथ बनर्जी पहले भारतीय थे जिन्होंने भारतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन भेदभाव के कारण उन्हें पद से हटा दिया गया।
  • उन्होंने 'इंडियन एसोसिएशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारतीयों को एकजुट करना और राजनीतिक जागरूकता फैलाना था।
  • उन्होंने 'इंडियन नेशनल कॉन्फ्रेंस' की स्थापना की, जो बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विलीन हो गई, और कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष रहे।
  • उन्होंने 'बंगाली' अखबार के संपादक के रूप में अपनी बात रखी और 'ए नेशन इन द मेकिंग' नामक पुस्तक लिखी।
बनर्जी जैसे नेताओं ने भारतीयों को संगठित करने और उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने 'बंगाली' अखबार का इस्तेमाल लोगों को देश के लिए खड़ा होने और अंग्रेजों से लड़ने के लिए प्रेरित करने के एक माध्यम के रूप में किया।

Key takeaways

  1. 1भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का पहला चरण संवैधानिक तरीकों और ब्रिटिश शासन के तहत सुधार की उम्मीदों पर आधारित था।
  2. 2प्रारंभिक राष्ट्रवादियों का मुख्य उद्देश्य भारतीयों को राजनीतिक रूप से शिक्षित करना और एक एकीकृत जनमत तैयार करना था।
  3. 3दादाभाई नौरोजी जैसे नेताओं ने आर्थिक शोषण को उजागर किया और स्वराज की मांग को आगे बढ़ाया।
  4. 4गोपाल कृष्ण गोखले ने सामाजिक सुधारों पर जोर दिया और वंचितों के उत्थान के लिए काम किया।
  5. 5सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने भारतीयों को संगठित करने और राजनीतिक जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  6. 6इन नेताओं ने ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाने के लिए भारत और ब्रिटेन दोनों में प्रयास किए।
  7. 7प्रारंभिक राष्ट्रवादियों के काम ने भविष्य के अधिक उग्र आंदोलनों के लिए मंच तैयार किया।

Key terms

Early NationalistsConstitutional MethodsHome RuleDrain TheorySwarajIndian AssociationServants of India SocietyBritish House of CommonsImperial Legislative Council

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  1. 1प्रारंभिक राष्ट्रवादी ब्रिटिश शासन के तहत भारत के विकास की उम्मीद क्यों करते थे?
  2. 2प्रारंभिक राष्ट्रवादियों द्वारा अपनाए गए 'संवैधानिक तरीके' क्या थे और वे क्यों महत्वपूर्ण थे?
  3. 3दादाभाई नौरोजी की 'ड्रेन थ्योरी' ने ब्रिटिश शासन की किस आर्थिक आलोचना को उजागर किया?
  4. 4गोपाल कृष्ण गोखले ने समाज सुधार के लिए कौन से महत्वपूर्ण कदम उठाए?
  5. 5सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने भारतीयों को संगठित करने और राजनीतिक जागरूकता फैलाने के लिए किन साधनों का उपयोग किया?

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