
Legal Reasoning 06 | Introduction to the Constitution and The Preamble | CLAT 2027 Preparation
PW CLAT
Overview
यह वीडियो भारतीय संविधान और उसकी प्रस्तावना (Preamble) का एक परिचयात्मक अवलोकन प्रदान करता है। यह लीगल रीजनिंग में संविधान के महत्व, क्लैट परीक्षा में इसके वेटेज और तैयारी की रणनीतियों पर प्रकाश डालता है। वीडियो संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसके प्रमुख घटकों (कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका), और प्रस्तावना के महत्व, उसके स्रोत, प्रकृति, उद्देश्यों और प्रमुख शब्दों जैसे 'संप्रभु', 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष', 'लोकतांत्रिक' और 'गणराज्य' की व्याख्या करता है। इसमें प्रस्तावना के संशोधन की संभावना और केशवानंद भारती मामले जैसे महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों पर भी चर्चा की गई है। अंत में, कुछ बोरोड फीचर्स और प्रस्तावना से संबंधित अभ्यास प्रश्न भी शामिल हैं।
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Chapters
- लीगल रीजनिंग क्लैट परीक्षा का एक महत्वपूर्ण और स्कोरिंग हिस्सा है, जिसमें लगभग 30-32 प्रश्न होते हैं।
- संविधान की अच्छी समझ लीगल रीजनिंग में उच्च स्कोर प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
- तैयारी के लिए नियमित मॉक टेस्ट, कॉन्सेप्ट क्लियरेंस, रिवीजन और एक्यूरेसी पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।
- नकारात्मक अंकन से बचने और सही उत्तर पहचानने की क्षमता एक्यूरेसी के लिए महत्वपूर्ण है।
- भारत में संविधान की आवश्यकता ब्रिटिश शासन के दौरान महसूस की गई थी।
- माउंटबेटन योजना के तहत धार्मिक आधार पर देश का विभाजन हुआ और भारत व पाकिस्तान के लिए अलग-अलग संविधान सभाएं बनीं।
- भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
- 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में चुना गया क्योंकि 1930 में इसी दिन पूर्ण स्वराज का संकल्प लिया गया था।
- भारत में तीन प्रमुख शासकीय निकाय हैं: कार्यपालिका (Executive), विधायिका (Legislature), और न्यायपालिका (Judiciary)।
- कार्यपालिका में मंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं।
- विधायिका का कार्य कानून बनाना है, जिसके लिए यूनिवर्सल एडल्ट सफरेज के आधार पर चुने गए प्रतिनिधि संसद में कार्य करते हैं।
- न्यायपालिका निचले स्तर (मुंसिफ कोर्ट) से शुरू होकर सुप्रीम कोर्ट तक एक एकीकृत प्रणाली का पालन करती है, लेकिन मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जाया जा सकता है।
- संविधान भारत का सर्वोच्च कानून है, जो सरकार की कार्यप्रणाली और नागरिकों के अधिकारों (भाग III में मौलिक अधिकार, भाग IV A में मौलिक कर्तव्य) को परिभाषित करता है।
- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई और डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसके स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
- ड्राफ्टिंग कमेटी, जिसमें सात सदस्य थे, ने संविधान का वास्तविक मसौदा तैयार किया।
- संविधान को बनने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे, जिसमें 11 सत्र और 144 दिन की चर्चा शामिल थी।
- संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया (कानून दिवस) और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
- एम.एन. रॉय संविधान के विचार को प्रस्तावित करने वाले पहले व्यक्ति थे।
- सर बी.एन. राव संविधान के सलाहकार थे, जिन्होंने विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन करके भारतीय संविधान के लिए सुझाव दिए।
- भारतीय संविधान को 'उधारों का थैला' (bag of borrowings) भी कहा जाता है क्योंकि इसमें दुनिया के विभिन्न संविधानों से अच्छी बातें ली गई हैं।
- जैसे, संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से, मौलिक अधिकार अमेरिका से, और आपातकालीन प्रावधान जर्मनी से लिए गए हैं।
- संविधान में अब तक 100 से अधिक संशोधन (Acts) हो चुके हैं।
- संशोधन (Amendment) का अर्थ है संविधान में कुछ जोड़ना, हटाना या बदलना।
- मूल संविधान में 395 अनुच्छेद थे, लेकिन नए अनुच्छेदों को जोड़ने के लिए अक्सर मौजूदा अनुच्छेदों में 'A', 'B', 'C' जैसे अक्षर जोड़कर विस्तार किया जाता है।
- संविधान में 22 भाग (Chapters), 12 अनुसूचियां (Schedules) और 395 अनुच्छेद (Articles) हैं।
- अनुच्छेद कानूनों को दी गई नंबरिंग हैं, जबकि अनुसूचियां मुख्य भाग को पूरक जानकारी प्रदान करती हैं।
- प्रस्तावना भारतीय संविधान का परिचयात्मक कथन है, जो जवाहरलाल नेहरू के उद्देश्य संकल्प (Objective Resolution) पर आधारित है।
- इसे 22 जनवरी 1947 को अपनाया गया था और यह संविधान निर्माताओं के विचारों को समझने की कुंजी है।
- प्रस्तावना संविधान का 'परिचय' या 'प्रीफेस' है, जो पुस्तक के मुख्य विषय का संक्षिप्त विवरण देता है।
- प्रस्तावना के चार मुख्य तत्व हैं: स्रोत (भारत के लोग), प्रकृति (संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य), उद्देश्य (न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व), और अपनाने की तिथि (26 नवंबर 1949)।
- बेरुबरी यूनियन मामले (1960) में कहा गया था कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है और इसे संशोधित नहीं किया जा सकता।
- केशवानंद भारती मामले (1973) में इस निर्णय को पलट दिया गया और कहा गया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसे संशोधित किया जा सकता है।
- केशवानंद भारती मामले में यह भी कहा गया कि प्रस्तावना संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का हिस्सा है, जिसे नष्ट नहीं किया जा सकता।
- 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' और 'अखंडता' (Integrity) शब्द जोड़े गए।
Key takeaways
- लीगल रीजनिंग में सफलता के लिए संविधान की गहरी समझ और एक्यूरेसी महत्वपूर्ण है।
- भारतीय संविधान का निर्माण एक लंबी और जटिल प्रक्रिया थी, जो ब्रिटिश शासन के अंत और स्वतंत्रता संग्राम से प्रेरित थी।
- कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका भारत की शासन प्रणाली के तीन स्तंभ हैं, जो शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
- संविधान एक जीवंत दस्तावेज़ है जिसमें समय के साथ संशोधन किए जा सकते हैं, लेकिन इसकी मूल संरचना को बदला नहीं जा सकता।
- प्रस्तावना संविधान के मूल आदर्शों, मूल्यों और लक्ष्यों का सार प्रस्तुत करती है, जो इसे समझने की कुंजी है।
- प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना जाता है और इसमें संशोधन भी किया जा सकता है, बशर्ते कि यह मूल संरचना को नष्ट न करे।
- विभिन्न देशों के संविधानों से प्रेरणा लेकर भारतीय संविधान को एक व्यापक और समावेशी दस्तावेज़ बनाया गया है।
Key terms
Test your understanding
- भारतीय संविधान के निर्माण में किन प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं और योजनाओं ने योगदान दिया?
- कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की भूमिकाओं और उनके बीच शक्तियों के पृथक्करण को समझाइए।
- प्रस्तावना को भारतीय संविधान का 'आधार' क्यों माना जाता है और इसके प्रमुख तत्व क्या हैं?
- केशवानंद भारती मामले ने प्रस्तावना और संविधान के संशोधन के संबंध में क्या महत्वपूर्ण निर्णय दिया?
- भारतीय संविधान को 'उधारों का थैला' क्यों कहा जाता है और इसके कुछ उदाहरण दीजिए।