
Literary Theory and Criticism | Super revision I June '26 UGC NET English I Heena Wadhwani
Vallath by Dr. Kalyani Vallath
Overview
यह वीडियो यूजीसी नेट इंग्लिश लिटरेचर परीक्षा के लिए साहित्यिक सिद्धांत और आलोचना पर एक गहन पुनरीक्षण प्रस्तुत करता है। इसमें फॉर्मलिज्म, स्ट्रक्चरलिज्म, पोस्ट-स्ट्रक्चरलिज्म, डीकंस्ट्रक्शन, रीडर-रिस्पांस थ्योरी, साइकोएनालिटिक थ्योरी, मार्क्सिज्म, फेमिनिज्म, क्वीयर थ्योरी, न्यू हिस्टोरिसिज्म, कल्चरल मैटेरियलिज्म, इको-क्रिटिसिज्म और पोस्ट-कॉलोनियल थ्योरी जैसे प्रमुख सिद्धांत शामिल हैं। प्रत्येक सिद्धांत के मुख्य विचारों, प्रमुख अवधारणाओं, महत्वपूर्ण विचारकों और संबंधित कार्यों की व्याख्या की गई है, जो छात्रों को परीक्षा के लिए एक व्यापक समझ प्रदान करते हैं।
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Chapters
- फॉर्मलिज्म एक साहित्यिक दृष्टिकोण है जो केवल टेक्स्ट की आंतरिक विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करता है, लेखक, पाठक और ऐतिहासिक संदर्भ को अनदेखा करता है।
- रशियन फॉर्मलिज्म साहित्य को एक वैज्ञानिक अध्ययन के रूप में देखता है, 'लिटरेरीनेस' और 'डिफेमिलराइजेशन' जैसी अवधारणाओं पर जोर देता है।
- न्यू क्रिटिसिज्म, जो अमेरिका में विकसित हुआ, टेक्स्ट के औपचारिक तत्वों के माध्यम से अर्थ खोजने के लिए क्लोज रीडिंग का अभ्यास करता है।
- न्यू क्रिटिसिज्म 'इंटेंशनल फैलेसी' (लेखक के इरादे की अप्रासंगिकता) और 'एफेक्टिव फैलेसी' (पाठक की भावनात्मक प्रतिक्रिया की अप्रासंगिकता) को खारिज करता है।
- स्ट्रक्चरलिज्म टेक्स्ट को अलग-थलग कृतियों के बजाय चिह्नों (साइन्स) की प्रणालियों के रूप में देखता है, जो अंतर्निहित संरचनाओं द्वारा शासित होते हैं।
- यह 'लांग' (भाषा की समग्र प्रणाली) और 'परौल' (व्यक्तिगत भाषण का कार्य) जैसी अवधारणाओं का उपयोग करता है, जो फर्डिनेंड डी सॉसर द्वारा प्रस्तुत की गई हैं।
- अर्थ सिग्निफायर (शब्द या ध्वनि) और सिग्निफाइड (मानसिक अवधारणा) के बीच संबंध से उत्पन्न होता है, जो मनमाना होता है।
- स्ट्रक्चरलिज्म दुनिया को विरोधाभासी जोड़ियों (जैसे अच्छा-बुरा, प्रकाश-अंधेरा) के माध्यम से समझने पर जोर देता है।
- पोस्ट-स्ट्रक्चरलिज्म स्ट्रक्चरलिस्ट विचार को अस्वीकार करता है कि भाषा और टेक्स्ट में स्थिर अर्थ होते हैं; यह मानता है कि अर्थ अस्थिर और लगातार बदलता रहता है।
- यह 'लेखक की मृत्यु' की अवधारणा को बढ़ावा देता है, जो व्याख्या के अधिकार को लेखक से पाठक की ओर स्थानांतरित करता है।
- डीकंस्ट्रक्शन, जैक्स डेरिडा द्वारा विकसित, टेक्स्ट के भीतर आंतरिक विरोधाभासों को उजागर करने और निश्चित अर्थों के विचार को चुनौती देने का प्रयास करता है।
- डीकंस्ट्रक्शन 'डिफरेंस' (अर्थ का अंतहीन स्थगन) और 'लोगोसेंट्रिज्म' (केंद्रीय पूर्ण सत्य में विश्वास) जैसी अवधारणाओं का उपयोग करता है।
- रीडर-रिस्पांस थ्योरी अर्थ के केंद्र को लेखक और टेक्स्ट से पाठक की ओर स्थानांतरित करती है।
- यह मानता है कि टेक्स्ट का कोई निश्चित अर्थ नहीं होता है; अर्थ पाठक के व्यक्तिगत अनुभवों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के साथ टेक्स्ट की बातचीत के माध्यम से सक्रिय रूप से बनाया जाता है।
- वूल्फगैंग इज़र 'इम्प्लाइड रीडर' और 'वांडरिंग व्यूप्वाइंट' जैसी अवधारणाएं प्रस्तुत करते हैं।
- स्टेनली फिश 'इंटरप्रिटेटिव कम्युनिटीज' पर जोर देते हैं, यह तर्क देते हुए कि अर्थ साझा पठन रणनीतियों द्वारा शासित होता है।
- साइकोएनालिटिक थ्योरी अचेतन मन, बचपन के अनुभवों और दमित इच्छाओं पर केंद्रित है जो मानव व्यवहार को आकार देते हैं।
- सिगमंड फ्रायड ने व्यक्तित्व की संरचना (इड, ईगो, सुपरईगो) और मन की स्थलाकृति (कॉन्शियस, प्रीकॉन्शियस, अनकॉन्शियस) जैसे प्रमुख सिद्धांत विकसित किए।
- रक्षा तंत्र (डिफेंस मैकेनिज्म) ईगो द्वारा चिंता को कम करने के लिए उपयोग की जाने वाली अचेतन रणनीतियाँ हैं।
- नियो-फ्रायडियन जैसे कार्ल जंग, अल्फ्रेड एडलर और जैक्स लैकन ने फ्रायड के विचारों का विस्तार किया।
- मार्क्सवाद साहित्यिक टेक्स्ट का विश्लेषण सामाजिक-आर्थिक स्थितियों, वर्ग संघर्षों और शक्ति की गतिशीलता के संदर्भ में करता है।
- यह 'बेस' (आर्थिक नींव) और 'सुपरस्ट्रक्चर' (सांस्कृतिक, कानूनी, राजनीतिक संस्थान) के बीच संबंध पर जोर देता है।
- यह बुर्जुआ (शासक वर्ग) और सर्वहारा (श्रमिक वर्ग) के बीच संघर्ष को दर्शाता है।
- हेजेमनी (वर्चस्व) और फाल्स कॉन्शियसनेस (गलत चेतना) जैसी अवधारणाएं बताती हैं कि कैसे शासक वर्ग अपनी शक्ति बनाए रखता है।
- फेमिनिस्ट थ्योरी विश्लेषण करती है कि कैसे टेक्स्ट पितृसत्तात्मक शक्ति संरचनाओं का निर्माण, सुदृढ़ीकरण या चुनौती देते हैं।
- यह नारीवाद की तीन लहरों पर प्रकाश डालता है: पहली (शिक्षा और कानूनी अधिकार), दूसरी (पितृसत्ता का विश्लेषण, 'द सेकेंड सेक्स'), और तीसरी (इंटरसेक्शनैलिटी, विविधता)।
- गायनोक्रिटिसिज्म (इलेन शॉवाल्टर) महिलाओं को लेखकों के रूप में और उनके अनुभवों पर केंद्रित है।
- जेंडर परफॉर्मेटिविटी (जूडिथ बटलर) और मेल गेज़ (लौरा मल्वॉय) जैसी अवधारणाएं लिंग और कामुकता के सामाजिक निर्माण की जांच करती हैं।
- क्वीयर थ्योरी एक पोस्ट-स्ट्रक्चरलिस्ट ढाँचा है जो जेंडर और सेक्सुअलिटी की द्विआधारी श्रेणियों को डीकंस्ट्रक्ट करता है।
- यह हेट्रोनॉर्मेटिविटी (हेट्रोसेक्सुअलिटी को सामान्य मानने की धारणा) की आलोचना करता है।
- जेंडर परफॉर्मेटिविटी (जूडिथ बटलर) और होमोसोशियलिटी (ईव कोसोफ्स्की सेजविक) जैसी अवधारणाएं लिंग और समलैंगिकता के सामाजिक निर्माण की जांच करती हैं।
- यह टेक्स्ट में क्वीयर जीवन के रहस्यों और अदृश्यता को समझने के लिए 'क्लॉज़ेट' की अवधारणा का उपयोग करता है।
- न्यू हिस्टोरिसिज्म टेक्स्ट को उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भों के उत्पादों के रूप में देखता है, यह स्वीकार करते हुए कि साहित्य और इतिहास एक दूसरे को प्रभावित करते हैं।
- यह साहित्य और शक्ति के बीच दो-तरफ़ा संबंध पर जोर देता है, यह दर्शाता है कि कैसे साहित्य इतिहास को आकार दे सकता है।
- कल्चरल मैटेरियलिज्म, एक मार्क्सवादी-प्रेरित सिद्धांत, टेक्स्ट का विश्लेषण उनकी सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों के भीतर करता है, जिसमें रेमंड विलियम्स जैसे विचारक शामिल हैं।
- दोनों सिद्धांत इतिहास को एक स्थिर पृष्ठभूमि के बजाय एक गतिशील, व्याख्यात्मक प्रक्रिया के रूप में देखते हैं।
- इको-क्रिटिसिज्म साहित्य और भौतिक पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन करता है, यह विश्लेषण करता है कि टेक्स्ट प्रकृति, जलवायु परिवर्तन और मानव-प्रकृति की बातचीत का प्रतिनिधित्व कैसे करते हैं।
- यह मानव-केंद्रित दृष्टिकोण (एंथ्रोपोसेंट्रिज्म) की आलोचना करता है और पृथ्वी-केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
- 'ग्रीन स्टडीज' और 'लिटरेरी इकोलॉजी' इस क्षेत्र में उपयोग किए जाने वाले प्रमुख शब्द हैं।
- विलियम रुकर्ट ने 'इको-क्रिटिसिज्म' शब्द गढ़ा, और रॉब निक्सन ने 'स्लो वायलेंस' की अवधारणा पेश की।
- पोस्ट-कॉलोनियल थ्योरी यूरोपीय साम्राज्यवाद के सांस्कृतिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक प्रभावों का विश्लेषण करती है।
- एडवर्ड सईद का 'ओरिएंटलिज्म' पश्चिम द्वारा पूर्व के निर्माण की जांच करता है।
- होमी के. भाभा 'हाइब्रिडिटी' (संस्कृतियों का मिश्रण) और 'अनकैनी' (अपने घर से अलगाव की भावना) जैसी अवधारणाएं प्रस्तुत करते हैं।
- गायत्री चक्रवर्ती स्पिवैक 'सबऑल्टर्न' (हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज) की अवधारणा पर जोर देती हैं।
Key takeaways
- साहित्यिक सिद्धांत हमें टेक्स्ट को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखने और उनके गहरे अर्थों को समझने के लिए उपकरण प्रदान करते हैं।
- फॉर्मलिज्म और स्ट्रक्चरलिज्म टेक्स्ट की आंतरिक संरचना और भाषा पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि पोस्ट-स्ट्रक्चरलिज्म और डीकंस्ट्रक्शन अर्थ की अस्थिरता पर जोर देते हैं।
- रीडर-रिस्पांस थ्योरी, साइकोएनालिटिक थ्योरी और क्वीयर थ्योरी पाठक, अचेतन मन और जेंडर/सेक्सुअलिटी की सामाजिक रचना पर प्रकाश डालते हैं।
- मार्क्सवाद, फेमिनिज्म, न्यू हिस्टोरिसिज्म और कल्चरल मैटेरियलिज्म सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संदर्भों के महत्व पर जोर देते हैं।
- इको-क्रिटिसिज्म पर्यावरण के साथ हमारे संबंधों का विश्लेषण करता है, और पोस्ट-कॉलोनियल थ्योरी साम्राज्यवाद के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रभावों की जांच करती है।
- प्रत्येक सिद्धांत की अपनी अनूठी अवधारणाएं और विचारक हैं जिन्हें परीक्षा के लिए समझना महत्वपूर्ण है।
- साहित्यिक आलोचना में विभिन्न सिद्धांत अक्सर एक-दूसरे से प्रभावित होते हैं और जटिल अंतर्संबंध रखते हैं।
Key terms
Test your understanding
- फॉर्मलिज्म और न्यू क्रिटिसिज्म के बीच मुख्य अंतर क्या हैं, और वे टेक्स्ट के विश्लेषण के लिए क्या दृष्टिकोण अपनाते हैं?
- स्ट्रक्चरलिज्म के अनुसार, भाषा और अर्थ कैसे उत्पन्न होते हैं, और 'लांग' और 'परौल' की अवधारणाएं इसमें कैसे फिट होती हैं?
- पोस्ट-स्ट्रक्चरलिज्म और डीकंस्ट्रक्शन कैसे निश्चित अर्थों के विचार को चुनौती देते हैं, और 'लेखक की मृत्यु' की अवधारणा का क्या अर्थ है?
- रीडर-रिस्पांस थ्योरी साहित्यिक अनुभव में पाठक की भूमिका को कैसे बदलती है, और 'इंटरप्रिटेटिव कम्युनिटीज' का क्या महत्व है?
- मार्क्सवाद, फेमिनिज्म और पोस्ट-कॉलोनियल थ्योरी साहित्यिक टेक्स्ट का विश्लेषण करने के लिए सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संदर्भों का उपयोग कैसे करते हैं?