
Unit-3 modern history B.A ll.B 4th semester in Hindi by #lawwithriya
Law with Riya
Overview
यह वीडियो बीए एलएलबी के चौथे सेमेस्टर के आधुनिक इतिहास के यूनिट-3 पर केंद्रित है, जिसका शीर्षक 'राष्ट्रवाद का उदय और कांग्रेस' है। इसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, उसके कारण, उदारवादी और उग्रवादी विचारधाराओं के बीच अंतर, और महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए तीन प्रमुख आंदोलनों - असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930), और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) - का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। वीडियो में क्रांतिकारी आतंकवाद और इन आंदोलनों की सफलता-असफलता पर भी प्रकाश डाला गया है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में मदद करता है।
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Chapters
- कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, मुंबई में ए.ओ. ह्यूम द्वारा की गई थी।
- स्थापना के मुख्य कारण अंग्रेजों का शोषण, शिक्षित भारतीयों में राजनीतिक चेतना का विकास, 'फूट डालो और राज करो' नीति का विरोध, और देश भर के नेताओं को एक मंच पर लाना था।
- प्रारंभ में कांग्रेस केवल उच्च वर्ग, शिक्षित और अंग्रेजी बोलने वाले लोगों तक सीमित थी, लेकिन बाद में यह एक राष्ट्रीय जन आंदोलन बन गई।
- ए.ओ. ह्यूम ने कांग्रेस के संस्थापक के रूप में और अंग्रेजों व भारतीयों के बीच संवाद सेतु के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- उग्रवादी वे व्यक्ति होते हैं जो अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसा और जबरदस्ती का सहारा लेते हैं, जबकि उदारवादी शांतिपूर्ण और बातचीत के तरीकों में विश्वास रखते हैं।
- उग्रवाद के फैलने के कारणों में अन्याय, सरकार पर अविश्वास, बात कहने के अन्य तरीकों का अभाव, गरीबी, बेरोजगारी और बाहरी प्रभाव शामिल हैं।
- उग्रवादी आंदोलन अक्सर युवा विचारों की क्रांति होते हैं, क्योंकि युवा जोश और नए विचारों के साथ बदलाव के लिए जोरदार कदम उठाना चाहते हैं।
- उदारवादियों की असफलता के कारणों में उनकी धीमी मांगे, आम लोगों से कम जुड़ाव, और अंग्रेजों द्वारा उनकी बातों को गंभीरता से न लेना शामिल था।
- क्रांतिकारी आतंकवाद एक ऐसी विचारधारा है जिसमें युवा स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों के खिलाफ हिंसक रास्ता अपनाकर आजादी की लड़ाई लड़ते थे।
- इसके उत्थान के मुख्य कारण ब्रिटिश शासन की कठोरता, अहिंसात्मक आंदोलनों की विफलता, युवाओं में जोश और साहस, और विदेशी क्रांतियों से प्रेरणा थी।
- इस आंदोलन की असफलता के कारणों में संगठन की कमी, जनसमर्थन का अभाव, ब्रिटिश सरकार की कठोर नीतियां (जैसे रोलेट एक्ट), और संसाधनों की कमी शामिल थी।
- यह आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में सितंबर 1920 में शुरू हुआ और फरवरी 1922 में चौरी-चौरा घटना के बाद वापस ले लिया गया।
- मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग न करना और उन्हें पंगु बनाना था, जिसमें सरकारी स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार, उपाधियों का त्याग, और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार शामिल था।
- आंदोलन के कारणों में जलियांवाला बाग हत्याकांड, प्रथम विश्व युद्ध के बाद निराशा, रोलेट एक्ट, खिलाफत आंदोलन और आर्थिक शोषण शामिल थे।
- इसके परिणाम स्वरूप ब्रिटिश सरकार पर दबाव बढ़ा, राष्ट्रवादी चेतना का प्रसार हुआ, और कांग्रेस के जन आधार में वृद्धि हुई।
- यह आंदोलन 1930 में महात्मा गांधी द्वारा शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण तरीके से उल्लंघन करना था।
- इसकी शुरुआत दांडी मार्च से हुई, जिसमें नमक कानून तोड़ा गया, और इसमें विदेशी वस्त्रों की होली जलाना, कर न देना, और शराब की दुकानों पर धरना देना जैसे कार्य शामिल थे।
- आंदोलन के पीछे 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य की मांग और गांधीजी द्वारा रखी गई 11 मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया न मिलना था।
- सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए लाखों लोगों को जेल में डाला, जिसके बाद 1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ, जिसमें आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
- यह आंदोलन 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी द्वारा मुंबई अधिवेशन में शुरू किया गया था और इसे 'अगस्त क्रांति' के नाम से भी जाना जाता है।
- इसका मुख्य नारा 'करो या मरो' था, और इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार से भारत छोड़ने का निवेदन करना था।
- आंदोलन के कारणों में क्रिप्स मिशन की विफलता, द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव, ब्रिटिश सरकार का दमनकारी रवैया, आर्थिक कठिनाई, और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग शामिल थी।
- इसके परिणाम स्वरूप व्यापक जन भागीदारी हुई, राष्ट्रवादी भावना मजबूत हुई, ब्रिटिश सरकार का दमन बढ़ा, और स्वतंत्रता की अनिवार्यता का एहसास हुआ।
Key takeaways
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना भारतीयों को एकजुट करने और ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।
- उदारवादी और उग्रवादी विचारधाराओं के बीच का अंतर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनाई गई विभिन्न रणनीतियों को दर्शाता है।
- क्रांतिकारी आतंकवाद ब्रिटिश शासन की कठोरता का परिणाम था, लेकिन संगठन और जनसमर्थन की कमी के कारण यह असफल रहा।
- असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो जैसे आंदोलनों ने बड़े पैमाने पर जनता को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल किया।
- महात्मा गांधी के नेतृत्व में अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख विशेषताएँ थीं।
- प्रत्येक आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार पर दबाव बढ़ाया और अंततः भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।
Key terms
Test your understanding
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के प्रमुख कारण क्या थे और इसका प्रारंभिक स्वरूप कैसा था?
- उदारवादी और उग्रवादी विचारधाराओं के बीच मुख्य अंतर क्या हैं और उग्रवाद के उदय के क्या कारण थे?
- असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन के उद्देश्य, प्रमुख घटनाएं और परिणाम क्या थे?
- क्रांतिकारी आतंकवाद क्या था और इसके उत्थान व असफलता के मुख्य कारण क्या थे?
- महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले आंदोलनों में शांतिपूर्ण प्रतिरोध और नागरिक अवज्ञा की क्या भूमिका थी?