Unit-3 modern history B.A ll.B 4th semester in Hindi by #lawwithriya
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Unit-3 modern history B.A ll.B 4th semester in Hindi by #lawwithriya

Law with Riya

6 chapters6 takeaways10 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो बीए एलएलबी के चौथे सेमेस्टर के आधुनिक इतिहास के यूनिट-3 पर केंद्रित है, जिसका शीर्षक 'राष्ट्रवाद का उदय और कांग्रेस' है। इसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, उसके कारण, उदारवादी और उग्रवादी विचारधाराओं के बीच अंतर, और महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए तीन प्रमुख आंदोलनों - असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930), और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) - का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। वीडियो में क्रांतिकारी आतंकवाद और इन आंदोलनों की सफलता-असफलता पर भी प्रकाश डाला गया है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में मदद करता है।

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Chapters

  • कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, मुंबई में ए.ओ. ह्यूम द्वारा की गई थी।
  • स्थापना के मुख्य कारण अंग्रेजों का शोषण, शिक्षित भारतीयों में राजनीतिक चेतना का विकास, 'फूट डालो और राज करो' नीति का विरोध, और देश भर के नेताओं को एक मंच पर लाना था।
  • प्रारंभ में कांग्रेस केवल उच्च वर्ग, शिक्षित और अंग्रेजी बोलने वाले लोगों तक सीमित थी, लेकिन बाद में यह एक राष्ट्रीय जन आंदोलन बन गई।
  • ए.ओ. ह्यूम ने कांग्रेस के संस्थापक के रूप में और अंग्रेजों व भारतीयों के बीच संवाद सेतु के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कांग्रेस की स्थापना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव थी, जिसने भारतीयों को एकजुट होकर अपनी आवाज उठाने का एक मंच प्रदान किया।
ए.ओ. ह्यूम, एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी, ने भारतीयों की बढ़ती राजनीतिक चेतना को देखते हुए और भविष्य के विद्रोह को टालने के उद्देश्य से कांग्रेस की स्थापना की।
  • उग्रवादी वे व्यक्ति होते हैं जो अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसा और जबरदस्ती का सहारा लेते हैं, जबकि उदारवादी शांतिपूर्ण और बातचीत के तरीकों में विश्वास रखते हैं।
  • उग्रवाद के फैलने के कारणों में अन्याय, सरकार पर अविश्वास, बात कहने के अन्य तरीकों का अभाव, गरीबी, बेरोजगारी और बाहरी प्रभाव शामिल हैं।
  • उग्रवादी आंदोलन अक्सर युवा विचारों की क्रांति होते हैं, क्योंकि युवा जोश और नए विचारों के साथ बदलाव के लिए जोरदार कदम उठाना चाहते हैं।
  • उदारवादियों की असफलता के कारणों में उनकी धीमी मांगे, आम लोगों से कम जुड़ाव, और अंग्रेजों द्वारा उनकी बातों को गंभीरता से न लेना शामिल था।
इन दो विचारधाराओं को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न दृष्टिकोणों और रणनीतियों को दर्शाता है।
गांधीजी अहिंसा के माध्यम से शांतिपूर्ण बदलाव चाहते थे (उदारवादी), जबकि भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी हिंसा के माध्यम से ब्रिटिश शासन को चुनौती देते थे (उग्रवादी)।
  • क्रांतिकारी आतंकवाद एक ऐसी विचारधारा है जिसमें युवा स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों के खिलाफ हिंसक रास्ता अपनाकर आजादी की लड़ाई लड़ते थे।
  • इसके उत्थान के मुख्य कारण ब्रिटिश शासन की कठोरता, अहिंसात्मक आंदोलनों की विफलता, युवाओं में जोश और साहस, और विदेशी क्रांतियों से प्रेरणा थी।
  • इस आंदोलन की असफलता के कारणों में संगठन की कमी, जनसमर्थन का अभाव, ब्रिटिश सरकार की कठोर नीतियां (जैसे रोलेट एक्ट), और संसाधनों की कमी शामिल थी।
यह खंड बताता है कि कैसे ब्रिटिश शासन की क्रूरता ने कुछ भारतीयों को हिंसक प्रतिरोध का रास्ता अपनाने के लिए प्रेरित किया, भले ही यह अंततः असफल रहा।
जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसी घटनाओं ने भारतीयों को इतना आक्रोशित किया कि उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हिंसक कार्रवाई को एक विकल्प के रूप में देखा।
  • यह आंदोलन महात्मा गांधी के नेतृत्व में सितंबर 1920 में शुरू हुआ और फरवरी 1922 में चौरी-चौरा घटना के बाद वापस ले लिया गया।
  • मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग न करना और उन्हें पंगु बनाना था, जिसमें सरकारी स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार, उपाधियों का त्याग, और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार शामिल था।
  • आंदोलन के कारणों में जलियांवाला बाग हत्याकांड, प्रथम विश्व युद्ध के बाद निराशा, रोलेट एक्ट, खिलाफत आंदोलन और आर्थिक शोषण शामिल थे।
  • इसके परिणाम स्वरूप ब्रिटिश सरकार पर दबाव बढ़ा, राष्ट्रवादी चेतना का प्रसार हुआ, और कांग्रेस के जन आधार में वृद्धि हुई।
असहयोग आंदोलन ने पहली बार बड़े पैमाने पर भारतीयों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट किया और स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया।
छात्रों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार किया, वकीलों ने अदालतों में जाना छोड़ दिया, और लोगों ने सरकारी उपाधियों को लौटा दिया।
  • यह आंदोलन 1930 में महात्मा गांधी द्वारा शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण तरीके से उल्लंघन करना था।
  • इसकी शुरुआत दांडी मार्च से हुई, जिसमें नमक कानून तोड़ा गया, और इसमें विदेशी वस्त्रों की होली जलाना, कर न देना, और शराब की दुकानों पर धरना देना जैसे कार्य शामिल थे।
  • आंदोलन के पीछे 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य की मांग और गांधीजी द्वारा रखी गई 11 मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया न मिलना था।
  • सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए लाखों लोगों को जेल में डाला, जिसके बाद 1931 में गांधी-इरविन समझौता हुआ, जिसमें आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
सविनय अवज्ञा आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ प्रतिरोध के एक नए तरीके को पेश किया, जिसमें नागरिक अवज्ञा के माध्यम से अन्यायपूर्ण कानूनों को चुनौती दी गई।
महात्मा गांधी ने स्वयं नमक बनाकर नमक कानून का उल्लंघन किया, जो ब्रिटिश सरकार के एकाधिकार और शोषण का प्रतीक था।
  • यह आंदोलन 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी द्वारा मुंबई अधिवेशन में शुरू किया गया था और इसे 'अगस्त क्रांति' के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसका मुख्य नारा 'करो या मरो' था, और इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार से भारत छोड़ने का निवेदन करना था।
  • आंदोलन के कारणों में क्रिप्स मिशन की विफलता, द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव, ब्रिटिश सरकार का दमनकारी रवैया, आर्थिक कठिनाई, और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग शामिल थी।
  • इसके परिणाम स्वरूप व्यापक जन भागीदारी हुई, राष्ट्रवादी भावना मजबूत हुई, ब्रिटिश सरकार का दमन बढ़ा, और स्वतंत्रता की अनिवार्यता का एहसास हुआ।
भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम और सबसे निर्णायक चरण था, जिसने ब्रिटिश शासन को भारत छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।
महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का नारा दिया, जिससे भारतीयों में आजादी के लिए लड़ने या मरने का संकल्प मजबूत हुआ।

Key takeaways

  1. 1भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना भारतीयों को एकजुट करने और ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।
  2. 2उदारवादी और उग्रवादी विचारधाराओं के बीच का अंतर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनाई गई विभिन्न रणनीतियों को दर्शाता है।
  3. 3क्रांतिकारी आतंकवाद ब्रिटिश शासन की कठोरता का परिणाम था, लेकिन संगठन और जनसमर्थन की कमी के कारण यह असफल रहा।
  4. 4असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो जैसे आंदोलनों ने बड़े पैमाने पर जनता को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल किया।
  5. 5महात्मा गांधी के नेतृत्व में अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख विशेषताएँ थीं।
  6. 6प्रत्येक आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार पर दबाव बढ़ाया और अंततः भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।

Key terms

राष्ट्रवाद (Nationalism)भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress)उदारवादी (Moderates)उग्रवादी (Extremists)असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement)सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement)भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement)क्रांतिकारी आतंकवाद (Revolutionary Terrorism)गांधी-इरविन समझौता (Gandhi-Irwin Pact)पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence)

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  1. 1भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के प्रमुख कारण क्या थे और इसका प्रारंभिक स्वरूप कैसा था?
  2. 2उदारवादी और उग्रवादी विचारधाराओं के बीच मुख्य अंतर क्या हैं और उग्रवाद के उदय के क्या कारण थे?
  3. 3असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन के उद्देश्य, प्रमुख घटनाएं और परिणाम क्या थे?
  4. 4क्रांतिकारी आतंकवाद क्या था और इसके उत्थान व असफलता के मुख्य कारण क्या थे?
  5. 5महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले आंदोलनों में शांतिपूर्ण प्रतिरोध और नागरिक अवज्ञा की क्या भूमिका थी?

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