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Action potential - chapter 5 (part 2/4) - Guyton and hall text book of medical physiology.
Medical Gateway
Overview
यह वीडियो एक्शन पोटेंशिअल की अवधारणा को समझाने पर केंद्रित है, जो न्यूरॉन्स में एक रैपिड मेम्ब्रेन पोटेंशियल परिवर्तन है। यह बताता है कि कैसे सोडियम और पोटेशियम आयनों के प्रवाह से मेम्ब्रेन पोटेंशियल बदलता है, जिससे डिपोलराइजेशन और रिपोलराइजेशन होता है। वीडियो में वोल्टेज-गेटेड आयन चैनलों की भूमिका, पॉजिटिव फीडबैक लूप और आयनिक ग्रेडिएंट्स को रीस्टैब्लिश करने में सोडियम-पोटेशियम पंप की क्रिया पर भी प्रकाश डाला गया है। इसके अतिरिक्त, यह कैल्शियम आयनों के महत्व और एक्शन पोटेंशिअल के प्रसार के 'ऑल-ऑर-नथिंग' सिद्धांत की व्याख्या करता है।
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Chapters
- एक्शन पोटेंशिअल मेम्ब्रेन पोटेंशियल में एक रैपिड और ट्रांजिएंट परिवर्तन है।
- यह रेस्टिंग मेंब्रेन पोटेंशियल (-90mV) से अचानक बदलकर पॉजिटिव वैल्यू (लगभग +35mV) तक जाता है और फिर वापस रेस्टिंग लेवल पर आ जाता है।
- यह परिवर्तन सोडियम आयनों के तेजी से अंदर आने और फिर पोटेशियम आयनों के बाहर जाने के कारण होता है।
एक्शन पोटेंशिअल को समझना न्यूरोनल कम्युनिकेशन की मूल प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वह सिग्नल है जो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच सूचना प्रसारित करता है।
रेस्टिंग मेंब्रेन पोटेंशियल का -90mV से अचानक +35mV तक जाना और फिर वापस -90mV पर आना।
- रेस्टिंग स्टेट में, सोडियम आयनों की परमीबिलिटी कम होती है और वे बाहर अधिक मात्रा में होते हैं।
- एक्शन पोटेंशिअल के दौरान, सोडियम चैनलों के खुलने से सोडियम आयनों की मेम्ब्रेन परमीबिलिटी बहुत बढ़ जाती है।
- सोडियम आयनों के तेजी से अंदर आने से मेम्ब्रेन का अंदरूनी हिस्सा पॉजिटिव हो जाता है (डिपोलराइजेशन)।
- इसके बाद, पोटेशियम चैनलों के खुलने से पोटेशियम आयन बाहर निकलते हैं, जिससे मेम्ब्रेन वापस नेगेटिव हो जाती है (रिपोलराइजेशन)।
यह समझना कि कैसे आयन प्रवाह मेम्ब्रेन पोटेंशियल को बदलता है, यह जानने में मदद करता है कि न्यूरॉन्स कैसे उत्तेजित होते हैं और सिग्नल कैसे उत्पन्न करते हैं।
सोडियम आयनों के अंदर आने से मेम्ब्रेन का अंदरूनी हिस्सा नेगेटिव से पॉजिटिव हो जाना, और फिर पोटेशियम आयनों के बाहर जाने से वापस नेगेटिव हो जाना।
- सोडियम और पोटेशियम चैनल वोल्टेज-गेटेड होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे मेम्ब्रेन पोटेंशियल में बदलाव पर प्रतिक्रिया करते हैं।
- जब मेम्ब्रेन का अंदरूनी हिस्सा थोड़ा सा पॉजिटिव होता है (एक थ्रेशोल्ड तक पहुंचने पर), तो सोडियम चैनल खुल जाते हैं।
- सोडियम का अंदर आना मेम्ब्रेन को और अधिक पॉजिटिव बनाता है, जिससे और अधिक सोडियम चैनल खुलते हैं - यह एक पॉजिटिव फीडबैक लूप है।
- जब मेम्ब्रेन एक निश्चित पॉजिटिविटी तक पहुँच जाती है, तो सोडियम चैनल बंद हो जाते हैं और पोटेशियम चैनल खुल जाते हैं।
वोल्टेज-गेटेड चैनल और पॉजिटिव फीडबैक मैकेनिज्म यह सुनिश्चित करते हैं कि एक्शन पोटेंशिअल तेजी से और पूरी तरह से उत्पन्न हो, जिससे कुशल सिग्नल ट्रांसमिशन हो सके।
मेम्ब्रेन के अंदर थोड़ी सी पॉजिटिविटी से सोडियम चैनल का खुलना, जिससे और अधिक सोडियम अंदर आता है और मेम्ब्रेन और अधिक पॉजिटिव हो जाती है, जो और अधिक चैनल खोलती है।
- एक्शन पोटेंशिअल के बाद, सोडियम आयन अंदर और पोटेशियम आयन बाहर चले जाते हैं, जिससे आयनिक ग्रेडिएंट्स बदल जाते हैं।
- सोडियम-पोटेशियम एटीपीस पंप इन आयनों को उनकी मूल सांद्रता में वापस लाने के लिए काम करता है।
- यह पंप 3 सोडियम आयनों को बाहर धकेलता है और 2 पोटेशियम आयनों को अंदर लाता है, जिसके लिए ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता होती है।
- यह पंप रेस्टिंग मेंब्रेन पोटेंशियल को बनाए रखने और आयनिक ग्रेडिएंट्स को रीस्टैब्लिश करने के लिए महत्वपूर्ण है।
सोडियम-पोटेशियम पंप यह सुनिश्चित करता है कि न्यूरॉन बार-बार एक्शन पोटेंशिअल उत्पन्न करने के लिए तैयार रहे, जिससे निरंतर न्यूरोनल सिग्नलिंग संभव हो सके।
सोडियम-पोटेशियम पंप का 3 सोडियम आयनों को बाहर और 2 पोटेशियम आयनों को अंदर ले जाना ताकि रेस्टिंग आयनिक ग्रेडिएंट्स को बहाल किया जा सके।
- कैल्शियम आयन भी एक्शन पोटेंशिअल में भूमिका निभाते हैं, खासकर स्मूथ मसल्स और कार्डियक मसल्स में।
- कैल्शियम आयनों के अंदर आने से भी डिपोलराइजेशन हो सकता है, कभी-कभी सोडियम के बिना भी।
- कैल्शियम आयन सोडियम चैनल की ओपनिंग को भी प्रभावित कर सकते हैं; हाइपोकैल्सीमिया (कैल्शियम की कमी) से सोडियम चैनल अधिक आसानी से खुलते हैं, जिससे हाइपर-एक्सिटेबिलिटी हो सकती है।
कैल्शियम आयनों की भूमिका को समझना विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में न्यूरोनल सिग्नलिंग और मसल कॉन्ट्रैक्शन की जटिलताओं को उजागर करता है।
हाइपोकैल्सीमिया की स्थिति में, सोडियम चैनल अधिक आसानी से खुलते हैं, जिससे न्यूरॉन की उत्तेजना बढ़ जाती है।
- एक्शन पोटेंशिअल एक बार उत्पन्न होने के बाद पूरे नर्व फाइबर में तेजी से फैलता है।
- यह प्रसार आस-पास के मेम्ब्रेन क्षेत्रों में डिपोलराइजेशन को ट्रिगर करके होता है।
- 'ऑल-ऑर-नथिंग' सिद्धांत का मतलब है कि या तो एक पूर्ण एक्शन पोटेंशिअल उत्पन्न होता है, या बिल्कुल नहीं होता।
- एक पूर्ण एक्शन पोटेंशिअल तभी उत्पन्न होता है जब उत्तेजना एक निश्चित थ्रेशोल्ड तक पहुँच जाती है; इससे कम उत्तेजना कोई एक्शन पोटेंशिअल उत्पन्न नहीं करती।
यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि न्यूरोनल सिग्नल विश्वसनीय और सुसंगत हों, जिससे सूचना का सटीक प्रसारण हो सके।
एक न्यूरॉन या तो पूरी तरह से फायर करेगा (एक्शन पोटेंशिअल उत्पन्न करेगा) या बिल्कुल फायर नहीं करेगा, कोई आंशिक प्रतिक्रिया नहीं होगी।
Key takeaways
- एक्शन पोटेंशिअल न्यूरॉन्स में सूचना प्रसारण का मूल तंत्र है, जो आयन प्रवाह द्वारा संचालित होता है।
- सोडियम और पोटेशियम आयनों की मेम्ब्रेन परमीबिलिटी में परिवर्तन एक्शन पोटेंशिअल के डिपोलराइजेशन और रिपोलराइजेशन चरणों को निर्धारित करते हैं।
- वोल्टेज-गेटेड आयन चैनल और पॉजिटिव फीडबैक लूप एक्शन पोटेंशिअल की रैपिड और पूर्ण उत्पत्ति को सक्षम करते हैं।
- सोडियम-पोटेशियम पंप एक्शन पोटेंशिअल के बाद आयनिक संतुलन को बहाल करने और न्यूरॉन को फिर से उत्तेजित करने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- कैल्शियम आयन न्यूरोनल उत्तेजना और मसल कॉन्ट्रैक्शन को मॉड्युलेट करते हैं, और उनकी सांद्रता में परिवर्तन न्यूरोनल एक्सिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
- एक्शन पोटेंशिअल 'ऑल-ऑर-नथिंग' सिद्धांत का पालन करता है, जिसका अर्थ है कि यह या तो पूरी तरह से उत्पन्न होता है या बिल्कुल नहीं होता।
Key terms
Action PotentialResting Membrane PotentialDepolarizationRepolarizationVoltage-gated ion channelsSodium-Potassium PumpIons (Sodium, Potassium, Calcium)Membrane PermeabilityThresholdAll-or-Nothing Principle
Test your understanding
- एक्शन पोटेंशिअल रेस्टिंग मेंब्रेन पोटेंशियल से कैसे भिन्न होता है, और यह परिवर्तन किन आयनों के कारण होता है?
- डिपोलराइजेशन और रिपोलराइजेशन के दौरान सोडियम और पोटेशियम आयनों की भूमिका का वर्णन करें।
- वोल्टेज-गेटेड सोडियम चैनल कैसे खुलते हैं, और यह प्रक्रिया पॉजिटिव फीडबैक लूप से कैसे संबंधित है?
- सोडियम-पोटेशियम पंप एक्शन पोटेंशिअल के बाद आयनिक ग्रेडिएंट्स को कैसे रीस्टैब्लिश करता है?
- कैल्शियम आयन एक्शन पोटेंशिअल को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, खासकर हाइपोकैल्सीमिया की स्थिति में?