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Trading Course (Day 1/10) : Learn Trading From Scratch | Trading For Beginners Full Course
Neeraj joshi
Overview
यह वीडियो ट्रेडिंग की दुनिया में शुरुआती लोगों के लिए एक विस्तृत परिचय है। यह ट्रेडिंग के मूल सिद्धांतों, विभिन्न प्रकार के बाजारों (स्टॉक, क्रिप्टो, फॉरेक्स, कमोडिटी), और ट्रेडिंग के विभिन्न तरीकों (स्कैल्पिंग, इंट्राडे, स्विंग, ऑप्शंस, फ्यूचर्स) को समझाता है। वीडियो इस बात पर भी जोर देता है कि ट्रेडिंग एक स्किल है जिसे सीखने में समय और अभ्यास लगता है, और यह निवेश से कैसे अलग है। इसमें डेल्टा एक्सचेंज जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग करने और जोखिम प्रबंधन के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।
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Chapters
- यह 10-दिवसीय कोर्स ट्रेडिंग को बिल्कुल शुरुआत से सिखाएगा, जिसमें बेसिक्स से लेकर एडवांस कॉन्सेप्ट्स शामिल हैं।
- ट्रेडिंग का मतलब है किसी एसेट (स्टॉक, क्रिप्टो, गोल्ड आदि) को खरीदकर बेचना और मूल्य के उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाना।
- ट्रेडिंग में आप एसेट के मालिक नहीं बनते, बल्कि मूल्य की चाल से लाभ कमाने की कोशिश करते हैं।
- ट्रेडिंग में दो मुख्य तरीके से पैसा कमाया जा सकता है: पहले खरीदकर बाद में बेचना (बाय एंड सेल) या पहले बेचकर बाद में खरीदना (शॉर्ट सेलिंग)।
- शॉर्ट सेलिंग गिरते हुए बाजार में भी मुनाफा कमाने का अवसर प्रदान करती है।
यह अध्याय ट्रेडिंग की बुनियादी समझ स्थापित करता है, जिससे आगे के जटिल विषयों को समझना आसान हो जाता है।
पहले किसी एसेट को ₹100 में बेचकर (शॉर्ट सेलिंग) और बाद में ₹95 में खरीदकर ₹5 का मुनाफा कमाना।
- ट्रेडिंग का उद्देश्य नियमित आय उत्पन्न करना है, इसे एक व्यवसाय की तरह लेना है, जबकि इन्वेस्टिंग का उद्देश्य धन को बढ़ाना है।
- ट्रेडिंग में प्रोबेबिलिटी (संभावना) का खेल होता है, सर्टेनिटी (निश्चितता) का नहीं।
- ट्रेडिंग के मुख्य बाजार हैं: स्टॉक मार्केट (कंपनी के शेयर), क्रिप्टो मार्केट (डिजिटल करेंसी), फॉरेक्स मार्केट (मुद्रा जोड़े), और कमोडिटी मार्केट (सोना, चांदी, तेल)।
- फॉरेक्स और कमोडिटी ट्रेडिंग भारत में शुरुआती लोगों के लिए कानूनी और सुरक्षित प्लेटफॉर्म की कमी के कारण अनुशंसित नहीं हैं।
यह अध्याय आपको विभिन्न बाजारों की विशेषताओं को समझने में मदद करता है ताकि आप अपनी जोखिम क्षमता और लक्ष्यों के अनुसार सही बाजार चुन सकें।
वारेन बफे का नाम इन्वेस्टिंग के लिए जाना जाता है, जबकि ट्रेडिंग को एक नियमित आय स्रोत के रूप में देखा जाता है।
- स्टॉक मार्केट सोमवार से शुक्रवार, दिन के समय (9:15 AM - 3:30 PM) खुला रहता है, जबकि क्रिप्टो मार्केट 24/7 खुला रहता है।
- क्रिप्टो मार्केट में स्टॉक मार्केट की तुलना में बहुत अधिक वोलेटिलिटी (अस्थिरता) होती है, जिससे अधिक अवसर और अधिक जोखिम होता है।
- स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग शुरू करने के लिए लगभग ₹5,000 की शुरुआती पूंजी की सिफारिश की जाती है, जबकि क्रिप्टो में ₹100 से भी शुरू किया जा सकता है (सीखने के उद्देश्य से)।
- स्टॉक मार्केट में अधिकतम 5x लिवरेज मिलता है, जबकि क्रिप्टो फ्यूचर्स में 200x तक का लिवरेज मिल सकता है, जिससे कम पूंजी से बड़ी ट्रेड संभव है।
यह तुलना आपको यह तय करने में मदद करती है कि आपकी जीवनशैली और जोखिम सहनशीलता के लिए कौन सा बाजार अधिक उपयुक्त है।
नौकरी करने वाले व्यक्ति के लिए रात में ट्रेडिंग करने हेतु क्रिप्टो मार्केट का 24/7 खुला होना एक बड़ा फायदा है।
- स्कैल्पिंग (कुछ मिनटों में ट्रेड पूरा करना) बहुत जोखिम भरा है और शुरुआती लोगों के लिए नहीं है।
- इंट्राडे ट्रेडिंग (एक ही दिन में ट्रेड पूरा करना) शुरुआती लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है।
- स्विंग ट्रेडिंग (कुछ दिनों से हफ्तों तक ट्रेड होल्ड करना) बड़े टाइमफ्रेम पर काम करता है और कम तनावपूर्ण हो सकता है।
- ऑप्शंस ट्रेडिंग बहुत वोलेटाइल होती है और शुरुआती लोगों के लिए अनुशंसित नहीं है क्योंकि इसमें एक्सपायरी का जोखिम होता है।
- फ्यूचर्स ट्रेडिंग, विशेष रूप से क्रिप्टो में, उच्च लिवरेज के कारण आकर्षक है लेकिन इसमें जोखिम भी अधिक होता है।
विभिन्न ट्रेडिंग शैलियों को समझने से आपको अपनी जोखिम लेने की क्षमता और समय की उपलब्धता के अनुसार सबसे उपयुक्त रणनीति चुनने में मदद मिलती है।
इंट्राडे ट्रेडिंग में, आप सुबह ट्रेड लेते हैं और दोपहर 3:30 बजे से पहले उसे बंद कर देते हैं।
- स्पॉट ट्रेडिंग में आप सीधे क्रिप्टो खरीदते और बेचते हैं, जिस पर 30% टैक्स और 1% टीडीएस लग सकता है, और लॉस को सेट-ऑफ नहीं किया जा सकता।
- फ्यूचर्स ट्रेडिंग में आप कॉन्ट्रैक्ट्स का ट्रेड करते हैं, जिसमें 200x तक का लिवरेज मिलता है और टैक्स नियम अलग होते हैं (लॉस सेट-ऑफ हो सकता है)।
- डेल्टा एक्सचेंज जैसे प्लेटफॉर्म फ्यूचर्स ट्रेडिंग के लिए 200x तक का लिवरेज और एफआईयू (FIU) रजिस्ट्रेशन प्रदान करते हैं।
- शुरुआती लोगों के लिए, क्रिप्टो में फ्यूचर्स ट्रेडिंग को अधिक फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें लिवरेज और टैक्स के मामले में बेहतर विकल्प होते हैं।
स्पॉट और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है ताकि आप टैक्स, लिवरेज और जोखिम के निहितार्थों को समझ सकें और सूचित निर्णय ले सकें।
डेल्टा एक्सचेंज पर ₹10,000 लगाकर 200x लिवरेज के साथ ₹20 लाख का ट्रेड लेना।
Key takeaways
- ट्रेडिंग एक स्किल है जिसे सीखने में समय, धैर्य और लगातार अभ्यास की आवश्यकता होती है।
- ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग दो अलग-अलग वित्तीय गतिविधियाँ हैं जिनके उद्देश्य भिन्न होते हैं।
- बाजारों (स्टॉक, क्रिप्टो) और ट्रेडिंग शैलियों (इंट्राडे, स्विंग) की अपनी-अपनी विशेषताएं, अवसर और जोखिम होते हैं।
- लिवरेज (Leverage) कम पूंजी से बड़े ट्रेड करने की अनुमति देता है, लेकिन यह लाभ और हानि दोनों को कई गुना बढ़ा देता है।
- किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अकाउंट खोलने से पहले उसकी विश्वसनीयता और रेगुलेशन की जांच करना महत्वपूर्ण है।
- लोन लेकर ट्रेडिंग करना अत्यधिक जोखिम भरा है और इससे बचना चाहिए।
Key terms
TradingInvestingAssetStock MarketCrypto MarketForex MarketCommodity MarketShort SellingLeverageVolatilityIntraday TradingSwing TradingOptions TradingFutures TradingSpot TradingDelta ExchangeFIU Registered
Test your understanding
- ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बीच मुख्य अंतर क्या हैं और आप किसे चुनेंगे?
- आप गिरते हुए बाजार में शॉर्ट सेलिंग का उपयोग करके कैसे मुनाफा कमा सकते हैं?
- स्टॉक मार्केट और क्रिप्टो मार्केट की तुलना में, आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों के लिए कौन सा बाजार बेहतर हो सकता है और क्यों?
- इंट्राडे ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग के बीच क्या अंतर है, और शुरुआती ट्रेडर के लिए कौन सी शैली अधिक उपयुक्त हो सकती है?
- क्रिप्टो में स्पॉट ट्रेडिंग और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के बीच क्या अंतर है, खासकर टैक्स और लिवरेज के संबंध में?