
Nationalism in INDIA | New One Shot | CBSE Class 10 History 2026-27
Digraj Singh Rajput
Overview
यह वीडियो भारत में राष्ट्रवाद के उदय को समझाता है, विशेष रूप से प्रथम विश्व युद्ध के बाद के समय पर ध्यान केंद्रित करता है। यह बताता है कि कैसे प्रथम विश्व युद्ध ने भारत में आर्थिक और राजनीतिक कठिनाइयाँ पैदा कीं, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ा। वीडियो महात्मा गांधी के सत्याग्रह के विचार, चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में उनके शुरुआती आंदोलनों, और फिर खिलाफत आंदोलन के साथ मिलकर असहयोग आंदोलन की शुरुआत की व्याख्या करता है। यह विभिन्न सामाजिक समूहों - शहरों के लोगों, किसानों, आदिवासियों और बागान मजदूरों - द्वारा असहयोग आंदोलन में अलग-अलग समझ के साथ भागीदारी पर भी प्रकाश डालता है। अंत में, यह चौरी-चौरा की घटना के बाद आंदोलन के स्थगन और सविनय अवज्ञा आंदोलन की ओर बढ़ने की पृष्ठभूमि की पड़ताल करता है।
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Chapters
- यूरोप में राष्ट्रवाद पुनर्जागरण से विकसित हुआ, जो स्वतंत्रता और समानता के विचारों पर आधारित था।
- भारत में राष्ट्रवाद आधुनिक उपनिवेशवाद के विकास से जुड़ा है, विशेष रूप से ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के कारण।
- उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों ने लोगों को उनकी एकता की खोज करने और एकजुट होने के लिए प्रेरित किया।
- महात्मा गांधी ने विभिन्न सामाजिक समूहों के अलग-अलग अनुभवों को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया।
- प्रथम विश्व युद्ध के कारण रक्षा व्यय बढ़ा, जिससे करों में वृद्धि हुई और पहली बार आयकर लागू किया गया।
- युद्ध के दौरान आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ा।
- जबरन भर्ती के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष फैला, क्योंकि लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध लड़ने के लिए भेजा गया।
- फसल की विफलता और इन्फ्लूएंजा महामारी ने स्थिति को और खराब कर दिया, जिससे लोगों में ब्रिटिश शासन के प्रति गहरा आक्रोश पैदा हुआ।
- महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटे और भारत में संघर्ष का एक नया तरीका, सत्याग्रह, पेश किया।
- सत्याग्रह सत्य और अहिंसा पर आधारित एक दर्शन है, जिसका उद्देश्य अन्याय के विरुद्ध खड़े होना है।
- इसका उद्देश्य उत्पीड़क की अंतरात्मा को अपील करना है, न कि उन्हें शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाना।
- गांधीजी ने 1917-18 में चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में सत्याग्रह के सिद्धांतों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया।
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की (ऑटोमन साम्राज्य) की हार और खलीफा के प्रति ब्रिटिशों के कथित अपमानजनक व्यवहार ने मुस्लिम समुदाय में रोष पैदा किया।
- मोहम्मद अली और शौकत अली जैसे नेताओं ने इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम एकता के अवसर के रूप में देखा।
- 1919 में रोलेट एक्ट, जिसने बिना किसी मुकदमे के गिरफ्तारी की अनुमति दी, और जलियांवाला बाग हत्याकांड ने राष्ट्रीय असंतोष को और बढ़ाया।
- सितंबर 1920 में कलकत्ता अधिवेशन में, गांधीजी ने खिलाफत के समर्थन में और स्वराज के लिए असहयोग आंदोलन शुरू करने का प्रस्ताव रखा, जिसे दिसंबर 1920 में नागपुर अधिवेशन में अपनाया गया।
- शहरों में, छात्रों ने स्कूल छोड़े, वकीलों ने अदालतें छोड़ीं, और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया गया।
- किसानों ने उच्च करों और जमींदारों के शोषण के खिलाफ आंदोलन किया, जिसे बाबा रामचंद्र और अवध किसान सभा ने नेतृत्व दिया।
- आदिवासियों ने वन कानूनों का उल्लंघन किया और अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में गुरिल्ला युद्ध का सहारा लिया।
- बागान मजदूरों के लिए स्वराज का अर्थ था बागान क्षेत्रों से बाहर निकलना, लेकिन उन्हें अक्सर रास्ते में ही पकड़ लिया जाता था।
- आंदोलन की सीमाओं में खादी की महँगाई और वैकल्पिक संस्थानों की कमी शामिल थी, जिससे लोग वापस ब्रिटिश संस्थानों की ओर लौटे।
- फरवरी 1922 में चौरी-चौरा (गोरखपुर) में एक हिंसक घटना हुई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी, जिससे 22 पुलिसकर्मी मारे गए।
- इस घटना के कारण महात्मा गांधी ने आंदोलन को हिंसक होते देख असहयोग आंदोलन को तुरंत वापस लेने का फैसला किया।
- गांधीजी का मानना था कि लोगों को सत्याग्रह के लिए अभी और प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
- असहयोग आंदोलन के स्थगन के बाद, कांग्रेस के भीतर स्वराज पार्टी का गठन हुआ जिसने चुनाव में भाग लेने की वकालत की।
- 1928 में साइमन कमीशन भारत आया, जिसका भारतीयों ने 'गो बैक साइमन' के नारों के साथ जोरदार विरोध किया क्योंकि इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था।
- वायसराय इरविन ने डोमिनियन स्टेटस का प्रस्ताव दिया और गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया, लेकिन युवा नेताओं ने इसे अस्वीकार कर दिया।
- 1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज (संपूर्ण स्वतंत्रता) की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।
- 31 जनवरी 1930 को गांधीजी ने वायसराय इरविन को 11 सूत्रीय मांग पत्र भेजा, जिसमें नमक पर लगे टैक्स को समाप्त करने की प्रमुख मांग शामिल थी।
- नमक एक ऐसी वस्तु थी जिसका उपभोग सभी करते थे, इसलिए इस मुद्दे ने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने में मदद की।
- इरविन द्वारा मांगों को अस्वीकार करने के बाद, गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से डांडी तक प्रसिद्ध नमक मार्च शुरू की।
- 6 अप्रैल 1930 को डांडी पहुंचकर, गांधीजी ने नमक कानून तोड़ा, जिससे सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन में लोगों से सहयोग से इनकार करने के साथ-साथ औपनिवेशिक कानूनों को तोड़ने का आह्वान किया गया।
- देश भर में नमक कानून तोड़े गए, विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया गया, और शराब की दुकानों पर पिकेटिंग की गई।
- किसानों ने राजस्व और चौकीदारी कर देने से इनकार कर दिया, और आदिवासियों ने वन कानूनों का उल्लंघन किया।
- सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए नेताओं को गिरफ्तार किया, जैसे अब्दुल गफ्फार खान और स्वयं महात्मा गांधी, और बल का प्रयोग किया।
- ब्रिटिश सरकार की क्रूर प्रतिक्रिया के जवाब में, गांधी-इरविन पैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित हो गया।
Key takeaways
- प्रथम विश्व युद्ध की आर्थिक कठिनाइयों ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के लिए जमीन तैयार की।
- महात्मा गांधी का सत्याग्रह का विचार सत्य और अहिंसा पर आधारित था और इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी।
- असहयोग आंदोलन विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी के साथ एक व्यापक जन आंदोलन था, लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी थीं।
- खिलाफत मुद्दा और रोलेट एक्ट जैसे मुद्दे राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और बड़े आंदोलनों को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण थे।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन में केवल सहयोग से इनकार करना ही नहीं, बल्कि कानूनों को सक्रिय रूप से तोड़ना भी शामिल था।
- नमक कानून का उल्लंघन एक शक्तिशाली प्रतीक बन गया जिसने आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया।
- विभिन्न सामाजिक समूहों की स्वराज की अपनी-अपनी समझ थी, लेकिन इन सभी ने मिलकर एक राष्ट्रीय पहचान बनाने में योगदान दिया।
Key terms
Test your understanding
- प्रथम विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रवाद को कैसे बढ़ावा दिया?
- सत्याग्रह के मूल सिद्धांत क्या हैं और महात्मा गांधी ने इन्हें भारत में कैसे लागू किया?
- असहयोग आंदोलन में विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी की व्याख्या करें और उनकी मुख्य सीमाओं पर प्रकाश डालें।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन, असहयोग आंदोलन से किस प्रकार भिन्न था?
- नमक मार्च का क्या महत्व था और इसने सविनय अवज्ञा आंदोलन को कैसे प्रेरित किया?