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Issue of shares Chapter 1, Corporate Accounting, Company Accounts, Equity shares, Preference shares
Aman Tiwari
Overview
यह वीडियो कॉर्पोरेट अकाउंटिंग की सीरीज का पहला चैप्टर है, जो 'इशू ऑफ शेयर्स' पर केंद्रित है। इसमें कंपनी की परिभाषा, शेयर क्या होते हैं, इक्विटी और प्रेफरेंस शेयर के बीच अंतर, और प्रेफरेंस शेयर के विभिन्न प्रकारों को समझाया गया है। वीडियो में शेयर कैपिटल के विभिन्न प्रकारों और शेयर इशू करने की प्रक्रिया को भी विस्तार से बताया गया है। अंत में, शेयर इशू करने से संबंधित जनरल एंट्रीज को उदाहरणों के साथ समझाया गया है, जो न्यूमेरिकल समस्याओं को हल करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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Chapters
- कंपनी एक आर्टिफिशियल पर्सन है जिसे कानून द्वारा बनाया जाता है, जिसकी अपनी सेपरेट लीगल एंटिटी, पर्पेचुअल सक्सेशन और कॉमन सील होती है।
- सेपरेट लीगल एंटिटी का मतलब है कि कंपनी अपने मालिकों से अलग मानी जाती है, और देनदारियों के लिए केवल कंपनी की संपत्ति ही जिम्मेदार होती है, न कि मालिकों की व्यक्तिगत संपत्ति।
- शेयर किसी कंपनी की पूंजी का सबसे छोटा हिस्सा होता है, जो कंपनी में स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करता है।
- शेयर कैपिटल वह कुल राशि है जो कंपनी अपने शेयरधारकों से शेयर जारी करके जुटाती है।
कंपनी और शेयर की इन बुनियादी अवधारणाओं को समझना कॉर्पोरेट अकाउंटिंग के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ये सभी आगे की प्रक्रियाओं और लेन-देन का आधार बनते हैं।
राहुल और उसके दोस्तों द्वारा 'आरपी डब्लू' नाम की कंपनी रजिस्टर करवाना, जहां राहुल और कंपनी को अलग-अलग माना जाता है।
- इक्विटी शेयरधारक कंपनी के मालिक होते हैं और उन्हें लाभ पर आधारित परिवर्तनीय लाभांश (dividend) मिलता है, साथ ही उनके पास वोटिंग अधिकार भी होते हैं।
- प्रेफरेंस शेयरधारकों को इक्विटी शेयरधारकों से पहले लाभांश का भुगतान किया जाता है, और उनका लाभांश दर आमतौर पर निश्चित होता है।
- इक्विटी शेयरधारकों का जोखिम अधिक होता है क्योंकि उनका रिटर्न लाभ पर निर्भर करता है, जबकि प्रेफरेंस शेयरधारकों का रिटर्न अधिक सुरक्षित होता है।
इक्विटी और प्रेफरेंस शेयर्स के बीच अंतर को समझना निवेशकों और कंपनी दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अधिकारों, जोखिमों और रिटर्न को प्रभावित करता है।
एक कंपनी को 1 करोड़ का प्रॉफिट होने पर इक्विटी शेयरहोल्डर को ज्यादा डिविडेंड मिल सकता है, जबकि प्रेफरेंस शेयरहोल्डर को केवल निश्चित 10% ही मिलेगा।
- क्यूमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर्स: यदि किसी वर्ष लाभांश का भुगतान नहीं हो पाता है, तो वह अगले वर्षों में देय हो जाता है।
- नॉन-क्यूमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर्स: यदि किसी वर्ष लाभांश का भुगतान नहीं होता है, तो वह लैप्स हो जाता है और भविष्य में देय नहीं होता।
- पार्टिसिपेटिंग प्रेफरेंस शेयर्स: ये शेयरधारक कंपनी के अतिरिक्त लाभ में भी हिस्सा ले सकते हैं, जो इक्विटी शेयरधारकों को वितरित होने के बाद बचता है।
- कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स: इन्हें एक निश्चित अवधि के बाद इक्विटी शेयर्स में बदला जा सकता है।
प्रेफरेंस शेयर्स के विभिन्न प्रकारों को जानने से निवेशक अपनी जोखिम सहनशीलता और रिटर्न की अपेक्षाओं के अनुसार सही विकल्प चुन सकते हैं।
क्यूमुलेटिव प्रेफरेंस शेयरहोल्डर को 2024 में लॉस होने पर डिविडेंड न मिलने पर भी 2025 में 2024 और 2025 दोनों का डिविडेंड मिल सकता है।
- ऑथराइज्ड शेयर कैपिटल: वह अधिकतम राशि है जो कंपनी अपने जीवनकाल में जुटा सकती है।
- इशूड शेयर कैपिटल: ऑथराइज्ड कैपिटल का वह हिस्सा जो जनता को जारी किया जाता है।
- सब्सक्राइब्ड शेयर कैपिटल: इशूड कैपिटल का वह हिस्सा जिसके लिए जनता ने आवेदन किया है।
- कॉल्ड-अप कैपिटल: शेयरधारकों से मंगाई गई राशि, जबकि पेड-अप कैपिटल वह राशि है जो वास्तव में शेयरधारकों द्वारा भुगतान की गई है।
- कंपनी प्रोस्पेक्टस जारी करके जनता को शेयर खरीदने के लिए आमंत्रित करती है।
शेयर कैपिटल के विभिन्न प्रकारों को समझना कंपनी की वित्तीय संरचना और उसकी पूंजी जुटाने की क्षमता को समझने में मदद करता है।
एक कंपनी अपनी पूरी लाइफटाइम में 10 करोड़ शेयर इशू कर सकती है (ऑथराइज्ड), लेकिन इस साल केवल 1 लाख शेयर इशू करती है (इशूड)।
- शेयर इशू करने की प्रक्रिया में एप्लीकेशन, अलॉटमेंट, फर्स्ट कॉल और सेकंड कॉल जैसे इंस्टॉलमेंट्स शामिल होते हैं।
- प्रत्येक इंस्टॉलमेंट के लिए दो मुख्य एंट्रीज होती हैं: एक ड्यू (due) की और दूसरी भुगतान (payment) की।
- एप्लीकेशन मनी प्राप्त होने पर बैंक अकाउंट डेबिट और शेयर एप्लीकेशन अकाउंट क्रेडिट होता है, फिर शेयर एप्लीकेशन को शेयर कैपिटल में ट्रांसफर किया जाता है।
- अलॉटमेंट और कॉल मनी के लिए, पहले शेयर अलॉटमेंट/कॉल अकाउंट डेबिट और शेयर कैपिटल अकाउंट क्रेडिट होता है, फिर बैंक अकाउंट डेबिट और शेयर अलॉटमेंट/कॉल अकाउंट क्रेडिट होता है।
जनरल एंट्रीज को समझना कॉर्पोरेट अकाउंटिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कंपनी के वित्तीय लेन-देन को रिकॉर्ड करने के लिए आवश्यक है।
₹10 के शेयर पर एप्लीकेशन पर ₹5, अलॉटमेंट पर ₹2, फर्स्ट कॉल पर ₹2 और फाइनल कॉल पर ₹1 की एंट्रीज को समझना।
Key takeaways
- कंपनी एक आर्टिफिशियल लीगल एंटिटी है जो अपने मालिकों से अलग होती है।
- शेयर कंपनी की पूंजी का एक छोटा हिस्सा है, जो स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करता है।
- इक्विटी शेयरधारकों को कंपनी के मालिक के रूप में उच्च जोखिम और परिवर्तनीय रिटर्न मिलता है, जबकि प्रेफरेंस शेयरधारकों को निश्चित रिटर्न और प्राथमिकता मिलती है।
- प्रेफरेंस शेयर्स के विभिन्न प्रकार (क्यूमुलेटिव, नॉन-क्यूमुलेटिव, पार्टिसिपेटिंग, कन्वर्टिबल) विभिन्न अधिकार और लाभ प्रदान करते हैं।
- शेयर कैपिटल को ऑथराइज्ड, इशूड, सब्सक्राइब्ड, कॉल्ड-अप और पेड-अप में वर्गीकृत किया जाता है।
- शेयर इशू करने की प्रक्रिया में कई इंस्टॉलमेंट्स में भुगतान शामिल होता है, जिसके लिए विशिष्ट जनरल एंट्रीज की जाती हैं।
Key terms
CompanyArtificial PersonSeparate Legal EntityPerpetual SuccessionCommon SealShareShare CapitalEquity SharePreference ShareDividendAuthorized Share CapitalIssued Share CapitalSubscribed Share CapitalCalled-up CapitalPaid-up CapitalProspectusGeneral Entry
Test your understanding
- कंपनी को आर्टिफिशियल पर्सन क्यों कहा जाता है और सेपरेट लीगल एंटिटी का क्या मतलब है?
- इक्विटी शेयरधारकों और प्रेफरेंस शेयरधारकों के बीच मुख्य अंतर क्या हैं, खासकर रिटर्न और जोखिम के संबंध में?
- क्यूमुलेटिव और नॉन-क्यूमुलेटिव प्रेफरेंस शेयर्स में क्या फर्क है और यह शेयरधारकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
- ऑथराइज्ड, इशूड और सब्सक्राइब्ड शेयर कैपिटल के बीच क्या संबंध है?
- शेयर इशू करते समय एप्लीकेशन मनी प्राप्त करने और अलॉटमेंट मनी ड्यू करने की जनरल एंट्रीज क्या होती हैं?