LangChain Vs LangGraph | Agentic AI using LangGraph | Video 3 | CampusX
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LangChain Vs LangGraph | Agentic AI using LangGraph | Video 3 | CampusX

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4 chapters6 takeaways21 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो लैंगचेन और लैंगग्राफ के बीच के अंतर को समझाता है, खासकर एजेंटिक AI एप्लीकेशन्स बनाने के संदर्भ में। यह बताता है कि लैंगचेन लीनियर वर्कफ़्लो के लिए अच्छा है, लेकिन जटिल, नॉन-लीनियर और इवेंट-ड्रिवन सिस्टम बनाने में कठिनाई होती है। लैंगग्राफ, एक ग्राफ-आधारित फ्रेमवर्क के रूप में, इन जटिलताओं को कंट्रोल फ्लो, स्टेट हैंडलिंग, इवेंट-ड्रिवन एग्जीक्यूशन, फॉल्ट टॉलरेंस और ह्यूमन-इन-द-लूप जैसी सुविधाओं के साथ बेहतर ढंग से संभालता है। वीडियो एक ऑटोमेटेड हायरिंग वर्कफ़्लो का उदाहरण देकर इन अंतरों को स्पष्ट करता है।

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Chapters

  • एजेंटिक AI जनरेटिव AI से अलग है और समस्याओं को हल करने के लिए प्लानिंग और टूल का उपयोग करता है।
  • स्क्रैच से एजेंटिक AI एप्लीकेशन बनाना मुश्किल है, इसलिए फ्रेमवर्क जैसे लैंगचेन और लैंगग्राफ का उपयोग किया जाता है।
  • लैंगचेन LLM-आधारित एप्लीकेशन बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए मॉड्यूलर बिल्डिंग ब्लॉक्स (जैसे मॉडल, प्रॉम्प्ट, रिट्रीवर, चेन) प्रदान करता है।
  • लैंगचेन लीनियर वर्कफ़्लो, मल्टी-स्टेप वर्कफ़्लो, RAG एप्लीकेशन और बेसिक एजेंट बना सकता है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि एजेंटिक AI क्या है और इसे बनाने के लिए किन टूल्स का उपयोग किया जा सकता है, ताकि आप सही फ्रेमवर्क चुन सकें।
लैंगचेन का उपयोग करके एक ऑटोमेटेड हायरिंग सिस्टम का उदाहरण, जहां यूजर से टॉपिक लेकर रिपोर्ट बनाना और फिर उसकी समरी जनरेट करना शामिल है।
  • वीडियो एक ऑटोमेटेड हायरिंग वर्कफ़्लो का विस्तृत फ्लोचार्ट प्रस्तुत करता है, जिसमें हायरिंग रिक्वेस्ट से लेकर ऑनबोर्डिंग तक के स्टेप्स शामिल हैं।
  • यह स्पष्ट किया गया है कि यह फ्लोचार्ट एक 'वर्कफ़्लो' है, न कि एक 'एजेंटिक AI एप्लीकेशन', क्योंकि इसका कंट्रोल फ्लो डेवलपर द्वारा प्री-डिफाइन किया गया है, न कि डायनामिक रूप से एजेंट द्वारा।
  • वर्कफ़्लो में कंडीशनल ब्रांचेस, लूप्स और जंप्स जैसे नॉन-लीनियर तत्व शामिल हैं, जो इसे जटिल बनाते हैं।
यह उदाहरण दिखाता है कि वास्तविक दुनिया के जटिल प्रोसेस को ऑटोमेट करने के लिए किस तरह के लॉजिक की आवश्यकता होती है, और यह लैंगचेन जैसी लाइब्रेरी के साथ इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है।
एक हायरिंग रिक्वेस्ट प्राप्त करना, जॉब डिस्क्रिप्शन (JD) बनाना, उसे अप्रूवल के लिए भेजना, जॉब प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करना, एप्लीकेशन्स की निगरानी करना, रेज़्यूमे शॉर्टलिस्ट करना, इंटरव्यू शेड्यूल करना और ऑफर लेटर भेजना।
  • कंट्रोल फ्लो की जटिलता: लैंगचेन मुख्य रूप से लीनियर चेन्स के लिए डिज़ाइन किया गया है, और नॉन-लीनियरिटी (लूप्स, कंडीशनल ब्रांचेस, जंप्स) को संभालने के लिए बहुत अधिक कस्टम 'ग्लू कोड' की आवश्यकता होती है, जिससे मेंटेनेबिलिटी कम हो जाती है।
  • स्टेट हैंडलिंग: लैंगचेन में बिल्ट-इन स्टेट मैनेजमेंट का अभाव है; वर्कफ़्लो के स्टेट (जैसे JD अप्रूव हुआ या नहीं) को मैन्युअल रूप से ट्रैक करना पड़ता है, जो जटिल वर्कफ़्लो के लिए अव्यावहारिक है।
  • इवेंट-ड्रिवन एग्जीक्यूशन: लैंगचेन सीक्वेंशियल एग्जीक्यूशन के लिए है, और यह बाहरी ट्रिगर्स (जैसे 7 दिन का वेट) के लिए रुकने और फिर से शुरू होने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है, जिसके लिए कस्टम कोड की आवश्यकता होती है।
  • फॉल्ट टॉलरेंस: लैंगचेन में बिल्ट-इन फॉल्ट टॉलरेंस नहीं है; यदि कोई एरर आता है, तो वर्कफ़्लो को शुरू से चलाना पड़ सकता है, जबकि लॉन्ग-रनिंग वर्कफ़्लो के लिए रीस्टार्ट पॉइंट से रिज्यूम करना महत्वपूर्ण है।
  • ह्यूमन इन द लूप: लैंगचेन में ह्यूमन अप्रूवल या इनपुट के लिए पॉज़ करने और फिर से शुरू करने का कोई सीधा तरीका नहीं है, खासकर लॉन्ग-रनिंग वर्कफ़्लो के लिए।
इन चुनौतियों को समझना महत्वपूर्ण है ताकि आप जान सकें कि कब लैंगचेन उपयुक्त है और कब आपको अधिक शक्तिशाली फ्रेमवर्क की आवश्यकता होगी।
ऑटोमेटेड हायरिंग वर्कफ़्लो के JD अप्रूवल लूप को लैंगचेन में लागू करने के लिए कस्टम पाइथन कोड (ग्लू कोड) लिखने की आवश्यकता।
  • लैंगग्राफ वर्कफ़्लो को एक ग्राफ के रूप में प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रत्येक टास्क एक नोड होता है और उनके बीच का कनेक्शन एज होता है, जो नॉन-लीनियरिटी को स्वाभाविक रूप से संभालता है।
  • यह स्टेटफुल है: लैंगग्राफ ग्राफ के स्टेट को मैनेज करता है, जिससे नोड्स के बीच डेटा पास करना और अपडेट करना आसान हो जाता है।
  • यह इवेंट-ड्रिवन एग्जीक्यूशन का समर्थन करता है: ग्राफ को किसी भी समय रोका जा सकता है और बाहरी ट्रिगर्स के आधार पर फिर से शुरू किया जा सकता है।
  • इसमें बिल्ट-इन फॉल्ट टॉलरेंस है: यह रिट्राई लॉजिक और चेकपॉइंटिंग के माध्यम से एरर से रिकवर करने और एग्जीक्यूशन को वहीं से रिज्यूम करने की अनुमति देता है।
  • ह्यूमन इन द लूप को फर्स्ट-क्लास सिटीजन के रूप में सपोर्ट करता है, जिससे एग्जीक्यूशन को अनिश्चित काल तक पॉज़ किया जा सकता है और ह्यूमन इनपुट के बाद रिज्यूम किया जा सकता है।
  • नेस्टेड वर्कफ़्लो (सबग्राफ) बनाने की क्षमता प्रदान करता है, जिससे जटिल सिस्टम को मॉड्यूलर तरीके से बनाया जा सकता है।
लैंगग्राफ जटिल एजेंटिक AI सिस्टम बनाने के लिए एक अधिक मजबूत और स्केलेबल समाधान प्रदान करता है, जो लैंगचेन की सीमाओं को पार करता है।
ऑटोमेटेड हायरिंग वर्कफ़्लो के JD अप्रूवल लूप को लैंगग्राफ में नोड्स और कंडीशनल एजेस का उपयोग करके लागू करना, जिसमें कोई ग्लू कोड नहीं है।

Key takeaways

  1. 1लैंगचेन लीनियर वर्कफ़्लो और सरल LLM एप्लीकेशन के लिए एक उत्कृष्ट लाइब्रेरी है, लेकिन यह जटिल, नॉन-लीनियर या इवेंट-ड्रिवन सिस्टम के लिए उपयुक्त नहीं है।
  2. 2लैंगग्राफ एक ग्राफ-आधारित फ्रेमवर्क है जो जटिल एजेंटिक AI सिस्टम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो कंट्रोल फ्लो, स्टेट मैनेजमेंट और फॉल्ट टॉलरेंस जैसी सुविधाओं को संभालता है।
  3. 3कंट्रोल फ्लो की जटिलता (लूप्स, कंडीशनल ब्रांचेस) लैंगचेन में कस्टम कोड की मांग करती है, जबकि लैंगग्राफ इसे स्वाभाविक रूप से संभालता है।
  4. 4स्टेटफुल एग्जीक्यूशन लैंगग्राफ की एक प्रमुख विशेषता है, जो वर्कफ़्लो के दौरान डेटा को ट्रैक और मैनेज करना आसान बनाती है, जबकि लैंगचेन स्टेटलेस है।
  5. 5इवेंट-ड्रिवन एग्जीक्यूशन और फॉल्ट टॉलरेंस लैंगग्राफ में बिल्ट-इन हैं, जो इसे लॉन्ग-रनिंग और रोबस्ट एजेंट बनाने के लिए आदर्श बनाते हैं।
  6. 6ह्यूमन इन द लूप और नेस्टेड वर्कफ़्लो जैसी उन्नत सुविधाएँ लैंगग्राफ को जटिल एजेंटिक AI आर्किटेक्चर के लिए एक शक्तिशाली टूल बनाती हैं।

Key terms

Agentic AIGenerative AILangChainLangGraphLLM-based ApplicationsModular Building BlocksChainsWorkflowAgentControl FlowState HandlingEvent-Driven ExecutionFault ToleranceHuman in the LoopNested WorkflowsSubgraphsNodesEdgesGlue CodeStatefulStateless

Test your understanding

  1. 1लैंगचेन और लैंगग्राफ के बीच मुख्य अंतर क्या हैं, खासकर जब जटिल एजेंटिक AI वर्कफ़्लो बनाने की बात आती है?
  2. 2लैंगचेन में नॉन-लीनियर कंट्रोल फ्लो (जैसे लूप्स और कंडीशनल ब्रांचेस) को लागू करने में क्या चुनौतियाँ आती हैं, और लैंगग्राफ इन चुनौतियों को कैसे हल करता है?
  3. 3स्टेट हैंडलिंग के संबंध में लैंगचेन और लैंगग्राफ कैसे भिन्न हैं, और यह जटिल वर्कफ़्लो के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  4. 4इवेंट-ड्रिवन एग्जीक्यूशन और फॉल्ट टॉलरेंस की अवधारणाओं को समझाएं और बताएं कि लैंगग्राफ इन सुविधाओं को कैसे सपोर्ट करता है, जबकि लैंगचेन नहीं करता?
  5. 5ह्यूमन इन द लूप और नेस्टेड वर्कफ़्लो जैसी उन्नत सुविधाएँ लैंगग्राफ को जटिल एजेंटिक AI सिस्टम बनाने के लिए एक बेहतर विकल्प क्यों बनाती हैं?

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