
Leverage | Class 1 | Financial Management | Sem 6 | #calcuttauniversity #bcom
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Overview
यह वीडियो वित्तीय लिवरेज (Financial Leverage) की अवधारणा को समझाता है, जो बताता है कि कैसे एक कंपनी अपने वित्तीय जोखिम और पुरस्कारों का प्रबंधन करती है। इसमें ऑपरेटिंग लिवरेज, वित्तीय लिवरेज और संयुक्त लिवरेज की गणना के लिए एक विस्तृत इनकम स्टेटमेंट का उपयोग करके समझाया गया है। वीडियो विभिन्न प्रकार के लिवरेज के लिए फ़ार्मुलों को भी प्रस्तुत करता है और यह भी बताता है कि वे व्यावसायिक निर्णयों को कैसे प्रभावित करते हैं। अंत में, दो उदाहरणों के माध्यम से इन अवधारणाओं को स्पष्ट किया गया है, जिसमें सेल्स, ईबीआईटी, ईपीएस और लिवरेज के बीच संबंध दिखाया गया है।
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Chapters
- लिवरेज का मतलब जोखिम और पुरस्कारों का अनुपात है।
- व्यवसाय दो तरह की मदद लेते हैं: ऑपरेटिंग (स्टाफ) और वित्तीय (लोन/डिबेंचर)।
- ऑपरेटिंग लिवरेज ऑपरेटिंग फिक्स्ड कॉस्ट के कारण लाभप्रदता में बदलाव को मापता है।
- वित्तीय लिवरेज वित्तीय फिक्स्ड कॉस्ट (जैसे ब्याज) के कारण लाभप्रदता में बदलाव को मापता है।
- संयुक्त लिवरेज दोनों प्रकार के फिक्स्ड कॉस्ट के संयुक्त प्रभाव को मापता है।
- सेल्स से वेरिएबल कॉस्ट घटाने पर कंट्रीब्यूशन मार्जिन मिलता है।
- कंट्रीब्यूशन से ऑपरेटिंग फिक्स्ड कॉस्ट घटाने पर ईबीआईटी (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) मिलता है।
- ईबीआईटी से फाइनेंसियल फिक्स्ड कॉस्ट (जैसे ब्याज) घटाने पर ईबीटी (प्रॉफिट बिफोर टैक्स) मिलता है।
- ईबीटी से टैक्स घटाने पर ईएटी/पीएटी (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) मिलता है।
- ईपीएस (अर्निंग पर शेयर) की गणना ईएटी को इक्विटी शेयरों की संख्या से विभाजित करके की जाती है।
- ऑपरेटिंग लिवरेज (DOL) का बेसिक फ़ार्मूला: कंट्रीब्यूशन / ईबीआईटी।
- वित्तीय लिवरेज (DFL) का बेसिक फ़ार्मूला: ईबीआईटी / ईबीटी (यदि प्रेफरेंस शेयर न हों)।
- संयुक्त लिवरेज (DCL) का बेसिक फ़ार्मूला: कंट्रीब्यूशन / ईबीटी।
- DCL, DOL और DFL का गुणनफल भी होता है (DOL * DFL)।
- लिवरेज अनुपात जितना अधिक होगा, लाभप्रदता में परिवर्तन का जोखिम और पुरस्कार उतना ही अधिक होगा।
- ऑपरेटिंग लिवरेज (DOL) का वैकल्पिक फ़ार्मूला: सेल्स में प्रतिशत परिवर्तन / ईबीआईटी में प्रतिशत परिवर्तन।
- वित्तीय लिवरेज (DFL) का वैकल्पिक फ़ार्मूला: ईबीआईटी में प्रतिशत परिवर्तन / ईपीएस में प्रतिशत परिवर्तन।
- संयुक्त लिवरेज (DCL) का वैकल्पिक फ़ार्मूला: सेल्स में प्रतिशत परिवर्तन / ईपीएस में प्रतिशत परिवर्तन।
- ये वैकल्पिक फ़ार्मूले लाभप्रदता में बदलाव के प्रभाव को समझने में मदद करते हैं।
- एक उदाहरण में, सेल्स में 50% की वृद्धि से ईबीआईटी में 83.33% और ईपीएस में 166.67% की वृद्धि हुई।
- यह दर्शाता है कि लिवरेज कैसे लाभ को बढ़ा या घटा सकता है।
- एक प्रश्न में, DOL (2) और DFL (3) दिए गए थे, और सेल्स ज्ञात करना था।
- वित्तीय फिक्स्ड कॉस्ट (ब्याज) और कंट्रीब्यूशन मार्जिन के प्रतिशत का उपयोग करके सेल्स की गणना की गई।
- उच्च लिवरेज का मतलब उच्च जोखिम और उच्च पुरस्कार दोनों है।
Key takeaways
- लिवरेज एक कंपनी की लाभप्रदता को बढ़ाने या घटाने के लिए फिक्स्ड कॉस्ट (ऑपरेटिंग और फाइनेंसियल) का उपयोग करने की डिग्री है।
- ऑपरेटिंग लिवरेज सेल्स में बदलाव के प्रति ईबीआईटी की संवेदनशीलता को मापता है, जबकि वित्तीय लिवरेज ईबीआईटी में बदलाव के प्रति ईपीएस की संवेदनशीलता को मापता है।
- उच्च लिवरेज का मतलब है कि सेल्स में छोटे बदलावों से ईपीएस में बड़े बदलाव आ सकते हैं, जो उच्च जोखिम और उच्च पुरस्कार दोनों का संकेत देता है।
- इनकम स्टेटमेंट का विश्लेषण लिवरेज की गणना के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है, जिसमें कंट्रीब्यूशन, ईबीआईटी, ईबीटी और ईपीएस शामिल हैं।
- लिवरेज अनुपात कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और जोखिम प्रोफाइल का आकलन करने में मदद करते हैं।
Key terms
Test your understanding
- ऑपरेटिंग लिवरेज, वित्तीय लिवरेज और संयुक्त लिवरेज के बीच मुख्य अंतर क्या हैं?
- इनकम स्टेटमेंट के विभिन्न घटकों (जैसे कंट्रीब्यूशन, ईबीआईटी, ईबीटी) का लिवरेज गणना में क्या महत्व है?
- उच्च लिवरेज अनुपात वाली कंपनी में निवेश करने के क्या संभावित जोखिम और पुरस्कार हैं?
- सेल्स में प्रतिशत परिवर्तन और ईपीएस में प्रतिशत परिवर्तन के बीच संबंध को लिवरेज कैसे मापता है?
- एक कंपनी को अपने लिवरेज स्तर का प्रबंधन क्यों करना चाहिए?