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D & F Block in 87 Minutes | Full Chapter Revision | Class 12th JEE
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D & F Block in 87 Minutes | Full Chapter Revision | Class 12th JEE

JEE Wallah

6 chapters7 takeaways16 key terms7 questions

Overview

यह वीडियो डी और एफ ब्लॉक के तत्वों का विस्तृत पुनरीक्षण प्रदान करता है, जिसमें उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, ऑक्सीकरण अवस्थाएं, परमाणु त्रिज्या, गलनांक, क्वथनांक और ऊष्मा एटमाइजेशन जैसे गुणों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह इंटरस्टिशियल यौगिकों, उत्प्रेरक गतिविधि और पोटेशियम परमैंगनेट और पोटेशियम डाइक्रोमेट जैसे महत्वपूर्ण यौगिकों की तैयारी और गुणों पर भी चर्चा करता है। वीडियो का उद्देश्य JEE और कक्षा 12 के छात्रों के लिए एक व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करना है।

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Chapters

  • डी ब्लॉक तत्व आवर्त सारणी में समूह 3 से 12 तक फैले हुए हैं।
  • एफ ब्लॉक तत्व डी ब्लॉक के नीचे स्थित हैं और उन्हें लैंथेनाइड्स (4f सीरीज) और एक्टिनाइड्स (5f सीरीज) में विभाजित किया गया है।
  • डी ब्लॉक में 3d, 4d, 5d और 6d सीरीज शामिल हैं, जो क्रमशः चौथे, पांचवें, छठे और सातवें पीरियड से शुरू होती हैं।
  • एफ ब्लॉक के तत्व, लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स, डी ब्लॉक के तत्वों के बीच में स्थित होते हैं और उनका समूह संख्या 3 होता है।
डी और एफ ब्लॉक के तत्वों की स्थिति और संरचना को समझना उनके रासायनिक और भौतिक गुणों को समझने की नींव रखता है।
डी ब्लॉक समूह 3 से 12 तक फैला है, जबकि एफ ब्लॉक को लैंथेनाइड्स और एक्टिनाइड्स के रूप में अलग किया गया है।
  • डी ब्लॉक तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में अंतिम इलेक्ट्रॉन (n-1)d ऑर्बिटल में प्रवेश करता है।
  • एफ ब्लॉक तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में अंतिम इलेक्ट्रॉन (n-2)f ऑर्बिटल में प्रवेश करता है।
  • कुछ अपवादों में क्रोमियम (3d5 4s1) और कॉपर (3d10 4s1) जैसे तत्व शामिल हैं, जो अर्ध-भरे या पूर्ण-भरे डी ऑर्बिटल्स की अतिरिक्त स्थिरता के कारण होते हैं।
  • लैंथेनाइड्स 4f सीरीज बनाते हैं और एक्टिनाइड्स 5f सीरीज बनाते हैं, जो क्रमशः 4f और 5f ऑर्बिटल्स में इलेक्ट्रॉनों के भरने से बनते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास तत्वों के रासायनिक व्यवहार, उनकी ऑक्सीकरण अवस्थाओं और अन्य गुणों को निर्धारित करता है।
क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 4s1 3d5 होता है, जो 4s2 3d4 के अपेक्षित विन्यास से भिन्न है।
  • डी ब्लॉक के तत्व, जिन्हें संक्रमण धातुएं कहा जाता है, आंशिक रूप से भरे हुए डी ऑर्बिटल्स वाले परमाणु या आयन होते हैं।
  • जिंक, कैडमियम और मर्करी को संक्रमण धातुएं नहीं माना जाता है क्योंकि उनके परमाणु और सामान्य आयन (जैसे Zn2+) में डी ऑर्बिटल पूरी तरह से भरे होते हैं।
  • ये तत्व परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं प्रदर्शित करते हैं, जो उनके (n-1)d और ns इलेक्ट्रॉनों की उपलब्धता के कारण होता है।
  • परमाणु त्रिज्या बाएं से दाएं जाने पर घटती है और ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है, लेकिन लैंथेनाइड संकुचन के कारण 4d और 5d श्रृंखलाओं के तत्वों की त्रिज्या लगभग समान होती है।
परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं और डी ऑर्बिटल्स की उपस्थिति डी ब्लॉक तत्वों को उत्प्रेरक, रंगीन यौगिक बनाने और मिश्र धातुएं बनाने जैसे विविध अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।
मैंगनीज (Mn) +2 से +7 तक विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएं प्रदर्शित कर सकता है, जबकि जिंक (Zn) केवल +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
  • डी ब्लॉक तत्वों में उच्च गलनांक और क्वथनांक होते हैं, जो मजबूत धात्विक बंधों के कारण होते हैं।
  • अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ने से धात्विक बंधन मजबूत होता है, जिससे गलनांक और क्वथनांक बढ़ता है।
  • क्रोमियम (Cr) का गलनांक उच्चतम होता है क्योंकि इसमें सबसे अधिक अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन होते हैं (3d5 4s1)।
  • मैंगनीज (Mn) और जिंक (Zn) में कम गलनांक होते हैं क्योंकि उनके डी ऑर्बिटल्स अर्ध-भरे (d5) या पूर्ण-भरे (d10) होते हैं, जिससे कमजोर धात्विक बंधन बनता है।
उच्च गलनांक और क्वथनांक डी ब्लॉक तत्वों को उच्च तापमान अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाते हैं, जैसे कि मिश्र धातुएं बनाना।
क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (4s1 3d5) इसे 3d श्रृंखला में सबसे अधिक अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन प्रदान करता है, जिसके परिणामस्वरूप इसका उच्चतम गलनांक होता है।
  • डी ब्लॉक धातुएं छोटे परमाणुओं जैसे हाइड्रोजन, कार्बन, नाइट्रोजन और बोरॉन को अपने क्रिस्टल जाली में फंसाकर इंटरस्टिशियल यौगिक बनाती हैं।
  • इन इंटरस्टिशियल यौगिकों में उच्च गलनांक, कठोरता और धात्विक चालकता होती है, और वे रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।
  • डी ब्लॉक तत्वों में बड़ी सतह क्षेत्र, परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं, संकुल बनाने की क्षमता और खाली डी ऑर्बिटल्स की उपस्थिति के कारण उत्कृष्ट उत्प्रेरक गुण होते हैं।
  • उदाहरणों में हैबर प्रक्रिया में आयरन, संपर्क प्रक्रिया में वैनेडियम पेंटोक्साइड (V2O5) और पॉलीथीन उत्पादन में जिग्लर-नाटा उत्प्रेरक (TiCl4 और एल्यूमीनियम एल्काइल) शामिल हैं।
इंटरस्टिशियल यौगिकों के अद्वितीय गुण उन्हें विभिन्न औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोगी बनाते हैं, जबकि उत्प्रेरक गतिविधि रासायनिक प्रतिक्रियाओं की दक्षता को बढ़ाती है।
टाइटेनियम (Ti) हाइड्रोजन के साथ इंटरस्टिशियल यौगिक बनाता है, जो शुद्ध टाइटेनियम की तुलना में अधिक कठोर और रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।
  • पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO4) एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है जिसका उपयोग कार्बनिक संश्लेषण और जल उपचार में किया जाता है।
  • KMnO4 अम्लीय, क्षारीय या तटस्थ माध्यम में विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में अपचयित हो सकता है, जिससे MnO2, Mn2+ या MnO4^2- बनता है।
  • पोटेशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7) एक और महत्वपूर्ण ऑक्सीकारक है, जो क्रोमाइट अयस्क से तैयार किया जाता है और अम्लीय माध्यम में Cr3+ में अपचयित होता है।
  • क्रोमेट (CrO4^2-) और डाइक्रोमेट (Cr2O7^2-) आयन pH पर निर्भर करते हैं; अम्लीय माध्यम में डाइक्रोमेट और क्षारीय माध्यम में क्रोमेट अधिक स्थिर होते हैं।
KMnO4 और K2Cr2O7 जैसे यौगिकों के ऑक्सीकरण गुण उन्हें प्रयोगशाला और उद्योग में महत्वपूर्ण अभिकर्मक बनाते हैं।
अम्लीय माध्यम में, पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO4) आयोडाइड आयनों (I-) को आयोडीन (I2) में ऑक्सीकृत करता है।

Key takeaways

  1. 1डी और एफ ब्लॉक के तत्व आवर्त सारणी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो अद्वितीय इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और रासायनिक गुणों को प्रदर्शित करते हैं।
  2. 2परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएं डी ब्लॉक तत्वों की एक प्रमुख विशेषता है, जो उनकी व्यापक उपयोगिता में योगदान करती है।
  3. 3अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉनों की संख्या डी ब्लॉक तत्वों के भौतिक गुणों जैसे गलनांक और क्वथनांक को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है।
  4. 4डी ब्लॉक धातुएं मजबूत धात्विक बंधन बनाती हैं, जिससे उन्हें उच्च गलनांक और क्वथनांक प्राप्त होते हैं।
  5. 5इंटरस्टिशियल यौगिकों के निर्माण से धातुओं के गुणों में सुधार होता है, जिससे वे अधिक कठोर और रासायनिक रूप से स्थिर हो जाते हैं।
  6. 6डी ब्लॉक तत्वों की उत्प्रेरक गतिविधि उन्हें विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं में अमूल्य बनाती है।
  7. 7पोटेशियम परमैंगनेट और पोटेशियम डाइक्रोमेट जैसे यौगिक शक्तिशाली ऑक्सीकारक हैं जिनका विभिन्न रासायनिक प्रतिक्रियाओं में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

Key terms

डी ब्लॉकएफ ब्लॉकसंक्रमण धातुएंइलेक्ट्रॉनिक विन्यासऑक्सीकरण अवस्थापरमाणु त्रिज्यालैंथेनाइड संकुचनधात्विक बंधनगलनांकक्वथनांकइंटरस्टिशियल यौगिकउत्प्रेरक गतिविधिपोटेशियम परमैंगनेट (KMnO4)पोटेशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7)क्रोमेट आयनडाइक्रोमेट आयन

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  1. 1डी ब्लॉक तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की सामान्य प्रवृत्ति क्या है और इसमें क्या अपवाद हैं?
  2. 2संक्रमण धातुओं को परिभाषित करें और बताएं कि जिंक, कैडमियम और मर्करी को संक्रमण धातुएं क्यों नहीं माना जाता है?
  3. 3डी ब्लॉक तत्वों की परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाओं के क्या कारण हैं और यह उनके गुणों को कैसे प्रभावित करता है?
  4. 4डी ब्लॉक तत्वों के उच्च गलनांक और क्वथनांक के लिए कौन से कारक जिम्मेदार हैं?
  5. 5इंटरस्टिशियल यौगिक क्या हैं और वे शुद्ध धातुओं की तुलना में किन गुणों में भिन्न होते हैं?
  6. 6डी ब्लॉक तत्वों की उत्प्रेरक गतिविधि के पीछे क्या सिद्धांत हैं और इसके कुछ प्रमुख उदाहरण क्या हैं?
  7. 7पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO4) और पोटेशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7) के प्रमुख उपयोग क्या हैं और वे विभिन्न माध्यमों में कैसे प्रतिक्रिया करते हैं?

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