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Production | Production Function | Returns To A Factor | Returns To Scale | Economics | CUET UGC NET
Yasser Khan..
Overview
यह वीडियो माइक्रो इकोनॉमिक्स में प्रोडक्शन फंक्शन, प्रोडक्शन के फैक्टर्स, शॉर्ट रन और लॉन्ग रन कॉन्सेप्ट्स, और प्रोडक्शन के विभिन्न लॉज़ जैसे लॉ ऑफ रिटर्न्स टू ए फैक्टर और लॉ ऑफ रिटर्न्स टू स्केल को विस्तार से समझाती है। इसमें टोटल प्रोडक्शन, एवरेज प्रोडक्शन, और मार्जिनल प्रोडक्शन की अवधारणाओं को भी स्पष्ट किया गया है। वीडियो विभिन्न लॉज़ के कारणों और उनके अनुप्रयोगों पर भी प्रकाश डालती है, जैसे कि लॉ ऑफ इंक्रीजिंग, कांस्टेंट और डिमिनिशिंग रिटर्न्स टू ए फैक्टर और स्केल, और इकोनॉमीज़ ऑफ स्केल के विभिन्न प्रकार।
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Chapters
- प्रोडक्शन फंक्शन इनपुट और आउटपुट के बीच टेक्निकल रिलेशनशिप को दर्शाता है।
- प्रोडक्शन के चार मुख्य फैक्टर्स हैं: लैंड, लेबर, कैपिटल और एंटरप्रेन्योर।
- फिक्स्ड फैक्टर्स वे होते हैं जिन्हें शॉर्ट रन में बदला नहीं जा सकता (जैसे लैंड, बिल्डिंग)।
- वेरिएबल फैक्टर्स वे होते हैं जिन्हें शॉर्ट रन में बदला जा सकता है (जैसे लेबर, रॉ मटेरियल)।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रोडक्शन कैसे काम करता है और किन चीजों की आवश्यकता होती है, ताकि हम उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें।
एक फैक्ट्री के लिए जमीन (लैंड), मजदूर (लेबर), मशीनें (कैपिटल) और मालिक (एंटरप्रेन्योर) प्रोडक्शन के फैक्टर्स हैं।
- शॉर्ट रन वह अवधि है जिसमें कुछ फैक्टर्स फिक्स्ड होते हैं और कुछ वेरिएबल।
- लॉन्ग रन वह अवधि है जिसमें सभी फैक्टर्स वेरिएबल होते हैं।
- शॉर्ट रन में आउटपुट को केवल वेरिएबल फैक्टर्स को बदलकर बदला जा सकता है।
- लॉन्ग रन में सभी फैक्टर्स को समान अनुपात में बदला जा सकता है।
यह अंतर समझने से हमें यह जानने में मदद मिलती है कि कंपनियां शॉर्ट टर्म में कैसे एडजस्ट करती हैं और लॉन्ग टर्म में कैसे योजना बनाती हैं।
एक फैक्ट्री मालिक शॉर्ट रन में ज्यादा लेबर लगाकर प्रोडक्शन बढ़ा सकता है, लेकिन लॉन्ग रन में वह फैक्ट्री का साइज भी बढ़ा सकता है।
- टोटल प्रोडक्शन (TP) दिए गए इनपुट्स से एक निश्चित समय में उत्पादित कुल आउटपुट है।
- एवरेज प्रोडक्शन (AP) प्रति यूनिट फैक्टर (जैसे लेबर) द्वारा उत्पादित आउटपुट है (TP/Quantity of Labor)।
- मार्जिनल प्रोडक्शन (MP) वेरिएबल फैक्टर की एक अतिरिक्त यूनिट जोड़ने से टोटल प्रोडक्शन में होने वाला बदलाव है (Change in TP / Change in Quantity of Labor)।
ये तीनों मापदंड यह समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि प्रोडक्शन में बदलाव कैसे होता है और कितना कुशल है।
अगर 10 लेबर 100 यूनिट्स बनाते हैं, तो TP 100 है, AP 10 है। अगर 11वां लेबर 12 यूनिट्स बनाता है, तो MP 12 है।
- यह लॉ शॉर्ट रन में लागू होता है, जहां एक फैक्टर वेरिएबल होता है और बाकी फिक्स्ड।
- लॉ ऑफ इंक्रीजिंग रिटर्न्स: वेरिएबल फैक्टर बढ़ाने पर TP इंक्रीजिंग रेट से बढ़ता है, MP बढ़ती है।
- लॉ ऑफ कांस्टेंट रिटर्न्स: वेरिएबल फैक्टर बढ़ाने पर TP कांस्टेंट रेट से बढ़ता है, MP कांस्टेंट रहती है।
- लॉ ऑफ डिमिनिशिंग रिटर्न्स: वेरिएबल फैक्टर बढ़ाने पर TP डिमिनिशिंग रेट से बढ़ता है, MP गिरती है।
यह लॉ बताता है कि शॉर्ट रन में एक वेरिएबल फैक्टर को बढ़ाने से प्रोडक्शन पर क्या असर पड़ता है, जो फर्मों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सहायक है।
एक खेत में ज्यादा मजदूर लगाने से शुरुआत में फसल ज्यादा बढ़ती है (इंक्रीजिंग रिटर्न्स), फिर एक पॉइंट के बाद उतनी तेजी से नहीं बढ़ती (कांस्टेंट रिटर्न्स), और अंत में बहुत ज्यादा मजदूर लगाने से प्रोडक्शन कम भी हो सकती है (डिमिनिशिंग रिटर्न्स)।
- यह लॉ लॉन्ग रन में लागू होता है, जहां सभी फैक्टर्स वेरिएबल होते हैं।
- लॉ ऑफ इंक्रीजिंग रिटर्न्स टू स्केल: सभी फैक्टर्स को समान अनुपात में बढ़ाने पर आउटपुट उस अनुपात से ज्यादा बढ़ती है।
- लॉ ऑफ कांस्टेंट रिटर्न्स टू स्केल: सभी फैक्टर्स को समान अनुपात में बढ़ाने पर आउटपुट भी उसी अनुपात में बढ़ती है।
- लॉ ऑफ डिमिनिशिंग रिटर्न्स टू स्केल: सभी फैक्टर्स को समान अनुपात में बढ़ाने पर आउटपुट उस अनुपात से कम बढ़ती है।
यह लॉ लॉन्ग रन में प्रोडक्शन बढ़ाने की एफिशिएंसी को दर्शाता है, जो कंपनियों की ग्रोथ स्ट्रेटेजी के लिए महत्वपूर्ण है।
एक कंपनी अगर अपनी फैक्ट्री का साइज, मशीनरी और लेबर सभी को दोगुना करती है, तो आउटपुट दोगुने से ज्यादा बढ़ सकती है (इंक्रीजिंग रिटर्न्स टू स्केल)।
- यह लॉ इंक्रीजिंग और डिमिनिशिंग रिटर्न्स टू ए फैक्टर को मिलाकर बनता है।
- शॉर्ट रन में वेरिएबल फैक्टर बढ़ाने पर, TP पहले इंक्रीजिंग रेट से, फिर डिमिनिशिंग रेट से बढ़ता है।
- इस लॉ में प्रोडक्शन के तीन स्टेज होते हैं: इंक्रीजिंग रिटर्न्स, डिमिनिशिंग रिटर्न्स और नेगेटिव रिटर्न्स।
- प्रोड्यूसर आमतौर पर दूसरे स्टेज में प्रोडक्शन करना पसंद करता है, जहां TP मैक्सिमम होता है और MP जीरो।
यह लॉ प्रोडक्शन के विभिन्न चरणों में फर्म के व्यवहार को समझने में मदद करता है और बताता है कि प्रोडक्शन का ऑप्टिमम लेवल क्या हो सकता है।
एक फैक्ट्री में लेबर बढ़ाने पर शुरुआत में प्रोडक्शन तेजी से बढ़ती है, फिर धीरे-धीरे बढ़ती है, और एक पॉइंट के बाद और लेबर बढ़ाने से प्रोडक्शन कम भी हो सकती है।
- इकोनॉमीज़ ऑफ स्केल का मतलब है कि प्रोडक्शन स्केल बढ़ाने पर प्रति यूनिट लागत कम हो जाती है।
- इंटरनल इकोनॉमीज़ फर्म के साइज में बदलाव के कारण होती हैं (जैसे स्पेशलाइजेशन, टेक्निकल इकोनॉमीज़)।
- एक्सटर्नल इकोनॉमीज़ इंडस्ट्री के बढ़ने के कारण होती हैं (जैसे बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च)।
- रियल इकोनॉमीज़ में इनपुट की फिजिकल क्वांटिटी कम होती है, जबकि मॉनेटरी इकोनॉमीज़ में लागत कम होती है।
यह कॉन्सेप्ट बताता है कि बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन क्यों फायदेमंद हो सकता है और लागत कम करने में कैसे मदद करता है।
बड़ी कंपनियां रॉ मटेरियल थोक में खरीदकर, स्पेशलाइज्ड लेबर का उपयोग करके और बड़ी मशीनों से प्रोडक्शन करके प्रति यूनिट लागत कम कर पाती हैं।
Key takeaways
- प्रोडक्शन फंक्शन इनपुट और आउटपुट के बीच एक टेक्निकल रिलेशनशिप है जो बताता है कि कितने इनपुट से कितना आउटपुट मिलेगा।
- शॉर्ट रन में कुछ फैक्टर्स फिक्स्ड होते हैं, जबकि लॉन्ग रन में सभी फैक्टर्स वेरिएबल होते हैं।
- लॉ ऑफ रिटर्न्स टू ए फैक्टर शॉर्ट रन में एक वेरिएबल फैक्टर को बदलने पर प्रोडक्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाता है।
- लॉ ऑफ रिटर्न्स टू स्केल लॉन्ग रन में सभी फैक्टर्स को समान अनुपात में बदलने पर प्रोडक्शन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाता है।
- लॉ ऑफ वेरिएबल प्रोपोर्शन प्रोडक्शन के तीन चरणों (इंक्रीजिंग, डिमिनिशिंग, नेगेटिव रिटर्न्स) को दर्शाता है।
- इकोनॉमीज़ ऑफ स्केल बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन से होने वाले लागत लाभों को समझाती हैं।
Key terms
Production FunctionFactors of ProductionFixed FactorsVariable FactorsShort RunLong RunTotal Production (TP)Average Production (AP)Marginal Production (MP)Returns to a FactorReturns to ScaleLaw of Variable ProportionsEconomies of Scale
Test your understanding
- प्रोडक्शन फंक्शन क्या है और यह इनपुट और आउटपुट के बीच क्या संबंध दर्शाता है?
- शॉर्ट रन और लॉन्ग रन प्रोडक्शन में क्या मुख्य अंतर हैं?
- मार्जिनल प्रोडक्शन (MP) की गणना कैसे की जाती है और यह टोटल प्रोडक्शन (TP) से कैसे संबंधित है?
- लॉ ऑफ डिमिनिशिंग रिटर्न्स टू ए फैक्टर के मुख्य कारण क्या हैं और यह किस सेक्टर में सबसे अधिक लागू होता है?
- लॉ ऑफ इंक्रीजिंग रिटर्न्स टू स्केल का क्या मतलब है और यह लॉन्ग रन में क्यों होता है?
- इकोनॉमीज़ ऑफ स्केल क्या हैं और वे फर्मों को लागत कम करने में कैसे मदद करती हैं?