Relation and Function Class 12  Maths | NCERT Chapter 1 | CBSE JEE | One Shot |हिंदी में
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Relation and Function Class 12 Maths | NCERT Chapter 1 | CBSE JEE | One Shot |हिंदी में

LearnoHub - Class 11, 12

5 chapters7 takeaways16 key terms4 questions

Overview

यह वीडियो क्लास 12वीं के गणित के लिए संबंध और फलन (Relations and Functions) के महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स को एक ही वीडियो में कवर करता है। इसमें संबंधों के प्रकार (जैसे रिक्त, सार्वत्रिक, स्वतुल्य, सममित, संक्रामक), फलन (1-1, मेनी-1, ऑनटू, बाइजेक्टिव), फलनों का संयोजन (Composition of Functions), प्रतिलोम फलन (Inverse Functions), और द्विआधारी संक्रियाओं (Binary Operations) की परिभाषाएं, गुणधर्म (जैसे क्रमविनिमेय, साहचर्य, तत्समक अवयव, प्रतिलोम अवयव) और उदाहरणों के साथ विस्तार से समझाया गया है। वीडियो का उद्देश्य छात्रों को इन अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में आने वाले प्रश्नों को हल करने में मदद करना है।

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Chapters

  • संबंधों को दो समुच्चयों के अवयवों के बीच एक जुड़ाव के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • संबंधों को रोस्टर रूप (Roster Form) या समुच्चय-निर्माता रूप (Set-Builder Form) में दर्शाया जा सकता है।
  • संबंधों को दर्शाने के दो तरीके हैं: (a, b) ∈ R या a R b।
संबंधों की मूल परिभाषा को समझना गणितीय अवधारणाओं की नींव रखता है और विभिन्न प्रकार के संबंधों को पहचानने में मदद करता है।
दो बच्चों के बीच उम्र का अंतर 100 साल से कम होना एक संबंध का उदाहरण है।
  • रिक्त संबंध (Empty Relation): वह संबंध जिसमें कोई भी अवयव संबंधित न हो।
  • सार्वत्रिक संबंध (Universal Relation): वह संबंध जिसमें समुच्चय के सभी अवयव स्वयं से संबंधित हों।
  • स्वतुल्य संबंध (Reflexive Relation): यदि समुच्चय A का प्रत्येक अवयव स्वयं से संबंधित हो (a ∈ A के लिए (a, a) ∈ R)।
  • सममित संबंध (Symmetric Relation): यदि (a, b) ∈ R हो, तो (b, a) ∈ R भी होना चाहिए।
  • संक्रामक संबंध (Transitive Relation): यदि (a, b) ∈ R और (b, c) ∈ R हो, तो (a, c) ∈ R भी होना चाहिए।
विभिन्न प्रकार के संबंधों को पहचानना और उनके गुणों को समझना, विशेष रूप से तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) को सिद्ध करने के लिए महत्वपूर्ण है।
समुच्चय A = {1, 2, 3} पर संबंध R = {(1,1), (2,2), (3,3)} स्वतुल्य है।
  • फलन एक विशेष प्रकार का संबंध है जहाँ प्रांत (Domain) के प्रत्येक अवयव का केवल एक ही प्रतिबिंब (Image) सह-प्रांत (Co-domain) में होता है।
  • फलन को f: A → B के रूप में दर्शाया जाता है, जहाँ A प्रांत और B सह-प्रांत है।
  • फलन के प्रकारों में एकैकी (1-1), बहु-एक (Many-1), आच्छादक (Onto), और एकैकी-आच्छादक (Bijective) शामिल हैं।
फलनों को समझना गणितीय मॉडलिंग और विभिन्न समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि वे इनपुट और आउटपुट के बीच एक स्पष्ट नियम स्थापित करते हैं।
फलन f(x) = x² जहाँ f: N → N, एकैकी फलन नहीं है क्योंकि 2² = 4 और (-2)² = 4, लेकिन N में केवल धनात्मक पूर्णांक होते हैं, इसलिए f(x) = x² जहाँ f: N → N एकैकी है।
  • एकैकी फलन (Injective/One-to-One): यदि प्रांत के भिन्न अवयवों के प्रतिबिंब भिन्न हों (f(x₁) = f(x₂) ⇒ x₁ = x₂)।
  • बहु-एक फलन (Many-to-One): यदि प्रांत के एक से अधिक अवयवों का एक ही प्रतिबिंब हो।
  • आच्छादक फलन (Surjective/Onto): यदि सह-प्रांत का प्रत्येक अवयव प्रांत के किसी न किसी अवयव का प्रतिबिंब हो (सह-प्रांत का परिसर (Range) के बराबर होना)।
  • अनटू फलन नहीं (Not Onto): यदि सह-प्रांत में कम से कम एक अवयव ऐसा हो जिसका कोई पूर्व-प्रतिबिंब (Pre-image) प्रांत में न हो।
यह समझना कि कोई फलन एकैकी या आच्छादक है या नहीं, उसके व्युत्क्रमणीय (Invertible) होने की संभावना को निर्धारित करता है।
फलन f(x) = x² जहाँ f: R → R आच्छादक नहीं है क्योंकि ऋणात्मक वास्तविक संख्याओं का कोई पूर्व-प्रतिबिंब नहीं है।
  • द्विआधारी संक्रिया एक फलन है जो किसी समुच्चय के दो अवयवों पर परिभाषित होता है और परिणाम उसी समुच्चय का एक अवयव होता है।
  • द्विआधारी संक्रियाओं के गुणधर्मों में क्रमविनिमेय (Commutative), साहचर्य (Associative), तत्समक अवयव (Identity Element), और प्रतिलोम अवयव (Inverse Element) शामिल हैं।
  • किसी समुच्चय पर एक संक्रिया द्विआधारी तभी कहलाती है जब वह संक्रिया के बाद प्राप्त परिणाम को उसी समुच्चय में रखती हो।
द्विआधारी संक्रियाएँ गणितीय संरचनाओं को परिभाषित करने का आधार हैं और विभिन्न बीजगणितीय प्रणालियों को समझने में मदद करती हैं।
वास्तविक संख्याओं पर योग (+) एक द्विआधारी संक्रिया है क्योंकि किन्हीं भी दो वास्तविक संख्याओं का योग हमेशा एक वास्तविक संख्या होती है।

Key takeaways

  1. 1संबंधों को विभिन्न प्रकारों (स्वतुल्य, सममित, संक्रामक) में वर्गीकृत किया जा सकता है, जो उनकी प्रकृति को समझने में मदद करते हैं।
  2. 2एक फलन को एकैकी (1-1) या आच्छादक (Onto) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, जो उसके व्यवहार और व्युत्क्रमणीयता को दर्शाता है।
  3. 3तुल्यता संबंध (Equivalence Relation) वह संबंध है जो स्वतुल्य, सममित और संक्रामक तीनों होता है।
  4. 4फलन का संयोजन (Composition of Functions) दो या दो से अधिक फलनों को मिलाकर एक नया फलन बनाने की प्रक्रिया है।
  5. 5एक फलन व्युत्क्रमणीय (Invertible) तभी होता है जब वह एकैकी (1-1) और आच्छादक (Onto) दोनों हो।
  6. 6द्विआधारी संक्रियाएँ किसी समुच्चय के अवयवों पर परिभाषित होती हैं और उनके परिणाम उसी समुच्चय में होने चाहिए।
  7. 7द्विआधारी संक्रियाओं के गुणधर्म (जैसे क्रमविनिमेय, साहचर्य, तत्समक, प्रतिलोम) उनकी प्रकृति को और स्पष्ट करते हैं।

Key terms

RelationFunctionReflexive RelationSymmetric RelationTransitive RelationEquivalence RelationInjective Function (One-to-One)Surjective Function (Onto)Bijective FunctionComposition of FunctionsInverse FunctionBinary OperationCommutative PropertyAssociative PropertyIdentity ElementInverse Element

Test your understanding

  1. 1स्वतुल्य, सममित और संक्रामक संबंधों के बीच मुख्य अंतर क्या हैं?
  2. 2एक फलन को एकैकी (Injective) और आच्छादक (Surjective) कब कहा जाता है? इन दोनों स्थितियों में क्या अंतर है?
  3. 3यदि दो फलन f और g दोनों एकैकी (1-1) हों, तो क्या उनका संयोजन (g o f) भी हमेशा एकैकी होगा? अपने उत्तर का कारण बताएं।
  4. 4एक द्विआधारी संक्रिया (Binary Operation) को परिभाषित करें और बताएं कि वास्तविक संख्याओं पर घटाव (Subtraction) एक द्विआधारी संक्रिया क्यों नहीं है, जबकि योग (Addition) है।

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