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Master Order Block & POI | ICT + SMC Trading Course (Ep.5) | Order Block Trading Strategy
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Master Order Block & POI | ICT + SMC Trading Course (Ep.5) | Order Block Trading Strategy

Neeraj joshi

5 chapters7 takeaways10 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो ट्रेडिंग में ऑर्डर ब्लॉक (Order Block), ब्रेकर ब्लॉक (Breaker Block), और पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट (POI) जैसे महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स को समझाता है। यह बताता है कि बड़े इंस्टीट्यूशंस कैसे अपने बड़े ऑर्डर्स को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर ट्रेड करते हैं, और कैसे हम चार्ट पर इन ऑर्डर ब्लॉक्स को पहचान सकते हैं। वीडियो में यह भी बताया गया है कि कैसे एक फेल हुआ ऑर्डर ब्लॉक ब्रेकर ब्लॉक बन जाता है और कैसे POI का उपयोग करके हाई प्रोबेबिलिटी वाले ट्रेड सेटअप्स ढूंढे जा सकते हैं। अंत में, वैलिड और इनवैलिड ऑर्डर ब्लॉक्स के बीच अंतर और POI को मार्क करने का तरीका उदाहरणों के साथ समझाया गया है।

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Chapters

  • बड़े इंस्टीट्यूशंस बहुत बड़े अमाउंट में ट्रेड करते हैं, इसलिए वे एक साथ मार्केट में पैसा नहीं डालते, वरना प्राइस बहुत ज्यादा बदल जाएगी।
  • वे अपने बड़े ऑर्डर्स को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में तोड़ देते हैं ताकि प्राइस पर ज्यादा असर न पड़े और उन्हें अपनी एवरेज प्राइस मिल सके।
  • ऑर्डर ब्लॉक उन इंस्टीट्यूशंस के पेंडिंग ऑर्डर्स को दर्शाता है, और जब प्राइस वापस इन लेवल्स पर आती है, तो वहां से प्राइस के रिवर्स होने की संभावना होती है।
यह समझना ज़रूरी है कि बड़े खिलाड़ी कैसे ट्रेड करते हैं ताकि हम उनके फुटप्रिंट्स को फॉलो करके बेहतर ट्रेडिंग डिसीजन ले सकें।
एक इंस्टीट्यूशन को 50 करोड़ का ट्रेड लेना है, तो वह उसे 5-5 करोड़ के 10 ब्लॉक्स में तोड़कर अलग-अलग प्राइस लेवल पर एग्जीक्यूट करेगा, जिससे एवरेज प्राइस 105 रुपये आए।
  • ऑर्डर ब्लॉक को पहचानने के लिए, हम उस जगह को देखते हैं जहाँ से एक बड़ा इंपल्सिव मूव (तेजी या मंदी) शुरू हुआ था।
  • बुलिश ऑर्डर ब्लॉक के लिए, इंपल्सिव मूव से ठीक पहले वाली कैंडल के हाई और लो से एक एरिया मार्क किया जाता है।
  • बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक के लिए, डाउनसाइड इंपल्सिव मूव से ठीक पहले वाली कैंडल के हाई और लो से एक एरिया मार्क किया जाता है।
  • यह ज़रूरी नहीं कि हर ऑर्डर ब्लॉक पर प्राइस रिएक्ट करे; हमें कन्फर्मेशन का इंतज़ार करना चाहिए।
चार्ट पर ऑर्डर ब्लॉक को मार्क करना सीखने से हमें उन एरियाज़ की पहचान करने में मदद मिलती है जहाँ इंस्टीट्यूशंस के बड़े ऑर्डर्स हो सकते हैं, जिससे हम हाई प्रोबेबिलिटी एंट्रीज़ ढूंढ सकते हैं।
जब मार्केट में कई ग्रीन कैंडल्स एक साथ बनती हैं (इंपल्सिव मूव), तो उससे ठीक पहले वाली कैंडल के हाई और लो को मार्क करके एक एरिया बनाया जाता है, जो बुलिश ऑर्डर ब्लॉक होता है।
  • ब्रेकर ब्लॉक एक ऐसा ऑर्डर ब्लॉक होता है जो अपना काम करने में फेल हो जाता है, यानी प्राइस उसके लेवल को पार कर जाती है।
  • जब एक बुलिश ऑर्डर ब्लॉक फेल होता है और प्राइस उसके नीचे चली जाती है, तो वह बेयरिश ब्रेकर ब्लॉक बन जाता है।
  • जब एक बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक फेल होता है और प्राइस उसके ऊपर चली जाती है, तो वह बुलिश ब्रेकर ब्लॉक बन जाता है।
  • ब्रेकर ब्लॉक के पीछे लॉजिक यह है कि जो इंस्टीट्यूशन पहले ट्रेड में फंसा था (लॉस में), वह ब्रेक ईवन पर निकलने के लिए या अपने पेंडिंग ऑर्डर्स को एग्जीक्यूट करने के लिए प्राइस को वापस उस लेवल पर ला सकता है।
ब्रेकर ब्लॉक को समझना हमें यह बताता है कि मार्केट स्ट्रक्चर में बदलाव कैसे होता है और कैसे फेल हुए लेवल्स नए ट्रेडिंग ऑपर्च्युनिटीज़ प्रदान कर सकते हैं।
एक बुलिश ऑर्डर ब्लॉक बनाया गया, लेकिन प्राइस उसके नीचे क्लोज हो गई। अब यह एक बेयरिश ब्रेकर ब्लॉक है, और जब प्राइस वापस इस लेवल पर आएगी, तो वहां से गिरने की संभावना है।
  • पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट (POI) वह एरिया होता है जहाँ प्राइस के फ्यूचर में रिएक्ट करने की हाई प्रोबेबिलिटी होती है।
  • ऑर्डर ब्लॉक्स, ब्रेकर ब्लॉक्स, और फेयर वैल्यू गैप्स (FVG) सभी POI के उदाहरण हैं।
  • एक हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप बनाने के लिए, हमें POI के साथ-साथ प्राइस एक्शन कन्फर्मेशन जैसे लिक्विडिटी स्वीप और चेंज ऑफ कैरेक्टर (CHOCH) को भी देखना चाहिए।
  • प्रीमियम और डिस्काउंट ज़ोन का उपयोग करके यह तय किया जा सकता है कि POI पर ट्रेड लेना फायदेमंद है या नहीं।
POI और कन्फर्मेशन सिग्नल्स को मिलाकर ट्रेड करने से हमें अधिक भरोसेमंद और लाभदायक ट्रेड सेटअप्स मिलते हैं, जिससे हमारी ट्रेडिंग की सफलता दर बढ़ती है।
जब प्राइस एक लेवल को स्वीप करती है, फिर चेंज ऑफ कैरेक्टर होता है, और वह एक ऑर्डर ब्लॉक या FVG (जो प्रीमियम ज़ोन में हो) पर रिएक्ट करती है, तो यह एक हाई प्रोबेबिलिटी शॉर्टिंग सेटअप हो सकता है।
  • ऑर्डर ब्लॉक सपोर्ट या रेजिस्टेंस की तरह नहीं होते जिन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सके।
  • एक ऑर्डर ब्लॉक को केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जब प्राइस पहली बार उसके पास आती है।
  • जब प्राइस एक ऑर्डर ब्लॉक को टैप करके मूव कर जाती है, तो वह ऑर्डर ब्लॉक फिर इनवैलिड हो जाता है, भले ही प्राइस बाद में दोबारा उस लेवल पर आए।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऑर्डर ब्लॉक का प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे करें और कब उन्हें छोड़ देना चाहिए, ताकि हम गलत ट्रेड एंट्रीज़ से बच सकें।
अगर प्राइस एक ऑर्डर ब्लॉक को टच करके ऊपर चली जाती है, तो वह ऑर्डर ब्लॉक अब खत्म हो गया है। अगर प्राइस बाद में फिर से उसी लेवल पर आती है, तो उसे दोबारा ऑर्डर ब्लॉक नहीं मानना चाहिए।

Key takeaways

  1. 1बड़े इंस्टीट्यूशंस मार्केट को मूव करने के लिए अपने ऑर्डर्स को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में बांटते हैं।
  2. 2ऑर्डर ब्लॉक चार्ट पर उन एरियाज़ को दर्शाते हैं जहाँ इंस्टीट्यूशंस के पेंडिंग ऑर्डर्स हो सकते हैं।
  3. 3एक इंपल्सिव मूव से पहले वाली कैंडल के हाई-लो को मार्क करके ऑर्डर ब्लॉक ढूंढे जाते हैं।
  4. 4ब्रेकर ब्लॉक एक फेल हुआ ऑर्डर ब्लॉक होता है जो विपरीत दिशा में रिएक्ट कर सकता है।
  5. 5POI (Point of Interest) वो एरियाज़ हैं जहाँ प्राइस के रिएक्ट करने की संभावना ज़्यादा होती है, जैसे ऑर्डर ब्लॉक या FVG।
  6. 6हाई प्रोबेबिलिटी ट्रेड सेटअप्स के लिए POI के साथ लिक्विडिटी स्वीप और चेंज ऑफ कैरेक्टर जैसे कन्फर्मेशन ज़रूरी हैं।
  7. 7एक ऑर्डर ब्लॉक को केवल एक बार ही इस्तेमाल करना चाहिए; उसके बाद वह इनवैलिड हो जाता है।

Key terms

Order BlockBreaker BlockPoint of Interest (POI)Institutional TradingImpuslive MoveLiquidity SweepChange of Character (CHOCH)Fair Value Gap (FVG)Premium ZoneDiscount Zone

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  1. 1बड़े इंस्टीट्यूशंस अपने ऑर्डर्स को छोटे ब्लॉक्स में क्यों तोड़ते हैं?
  2. 2चार्ट पर एक बुलिश ऑर्डर ब्लॉक को कैसे पहचाना और मार्क किया जाता है?
  3. 3ब्रेकर ब्लॉक क्या होता है और यह कैसे बनता है?
  4. 4POI का उपयोग करके एक हाई प्रोबेबिलिटी ट्रेडिंग सेटअप कैसे बनाया जा सकता है?
  5. 5एक ऑर्डर ब्लॉक को 'वैलिड' और 'इनवैलिड' कब माना जाता है?

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