
Master Order Block & POI | ICT + SMC Trading Course (Ep.5) | Order Block Trading Strategy
Neeraj joshi
Overview
यह वीडियो ट्रेडिंग में ऑर्डर ब्लॉक (Order Block), ब्रेकर ब्लॉक (Breaker Block), और पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट (POI) जैसे महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स को समझाता है। यह बताता है कि बड़े इंस्टीट्यूशंस कैसे अपने बड़े ऑर्डर्स को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर ट्रेड करते हैं, और कैसे हम चार्ट पर इन ऑर्डर ब्लॉक्स को पहचान सकते हैं। वीडियो में यह भी बताया गया है कि कैसे एक फेल हुआ ऑर्डर ब्लॉक ब्रेकर ब्लॉक बन जाता है और कैसे POI का उपयोग करके हाई प्रोबेबिलिटी वाले ट्रेड सेटअप्स ढूंढे जा सकते हैं। अंत में, वैलिड और इनवैलिड ऑर्डर ब्लॉक्स के बीच अंतर और POI को मार्क करने का तरीका उदाहरणों के साथ समझाया गया है।
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Chapters
- बड़े इंस्टीट्यूशंस बहुत बड़े अमाउंट में ट्रेड करते हैं, इसलिए वे एक साथ मार्केट में पैसा नहीं डालते, वरना प्राइस बहुत ज्यादा बदल जाएगी।
- वे अपने बड़े ऑर्डर्स को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में तोड़ देते हैं ताकि प्राइस पर ज्यादा असर न पड़े और उन्हें अपनी एवरेज प्राइस मिल सके।
- ऑर्डर ब्लॉक उन इंस्टीट्यूशंस के पेंडिंग ऑर्डर्स को दर्शाता है, और जब प्राइस वापस इन लेवल्स पर आती है, तो वहां से प्राइस के रिवर्स होने की संभावना होती है।
- ऑर्डर ब्लॉक को पहचानने के लिए, हम उस जगह को देखते हैं जहाँ से एक बड़ा इंपल्सिव मूव (तेजी या मंदी) शुरू हुआ था।
- बुलिश ऑर्डर ब्लॉक के लिए, इंपल्सिव मूव से ठीक पहले वाली कैंडल के हाई और लो से एक एरिया मार्क किया जाता है।
- बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक के लिए, डाउनसाइड इंपल्सिव मूव से ठीक पहले वाली कैंडल के हाई और लो से एक एरिया मार्क किया जाता है।
- यह ज़रूरी नहीं कि हर ऑर्डर ब्लॉक पर प्राइस रिएक्ट करे; हमें कन्फर्मेशन का इंतज़ार करना चाहिए।
- ब्रेकर ब्लॉक एक ऐसा ऑर्डर ब्लॉक होता है जो अपना काम करने में फेल हो जाता है, यानी प्राइस उसके लेवल को पार कर जाती है।
- जब एक बुलिश ऑर्डर ब्लॉक फेल होता है और प्राइस उसके नीचे चली जाती है, तो वह बेयरिश ब्रेकर ब्लॉक बन जाता है।
- जब एक बेयरिश ऑर्डर ब्लॉक फेल होता है और प्राइस उसके ऊपर चली जाती है, तो वह बुलिश ब्रेकर ब्लॉक बन जाता है।
- ब्रेकर ब्लॉक के पीछे लॉजिक यह है कि जो इंस्टीट्यूशन पहले ट्रेड में फंसा था (लॉस में), वह ब्रेक ईवन पर निकलने के लिए या अपने पेंडिंग ऑर्डर्स को एग्जीक्यूट करने के लिए प्राइस को वापस उस लेवल पर ला सकता है।
- पॉइंट ऑफ इंटरेस्ट (POI) वह एरिया होता है जहाँ प्राइस के फ्यूचर में रिएक्ट करने की हाई प्रोबेबिलिटी होती है।
- ऑर्डर ब्लॉक्स, ब्रेकर ब्लॉक्स, और फेयर वैल्यू गैप्स (FVG) सभी POI के उदाहरण हैं।
- एक हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप बनाने के लिए, हमें POI के साथ-साथ प्राइस एक्शन कन्फर्मेशन जैसे लिक्विडिटी स्वीप और चेंज ऑफ कैरेक्टर (CHOCH) को भी देखना चाहिए।
- प्रीमियम और डिस्काउंट ज़ोन का उपयोग करके यह तय किया जा सकता है कि POI पर ट्रेड लेना फायदेमंद है या नहीं।
- ऑर्डर ब्लॉक सपोर्ट या रेजिस्टेंस की तरह नहीं होते जिन्हें बार-बार इस्तेमाल किया जा सके।
- एक ऑर्डर ब्लॉक को केवल एक बार ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जब प्राइस पहली बार उसके पास आती है।
- जब प्राइस एक ऑर्डर ब्लॉक को टैप करके मूव कर जाती है, तो वह ऑर्डर ब्लॉक फिर इनवैलिड हो जाता है, भले ही प्राइस बाद में दोबारा उस लेवल पर आए।
Key takeaways
- बड़े इंस्टीट्यूशंस मार्केट को मूव करने के लिए अपने ऑर्डर्स को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में बांटते हैं।
- ऑर्डर ब्लॉक चार्ट पर उन एरियाज़ को दर्शाते हैं जहाँ इंस्टीट्यूशंस के पेंडिंग ऑर्डर्स हो सकते हैं।
- एक इंपल्सिव मूव से पहले वाली कैंडल के हाई-लो को मार्क करके ऑर्डर ब्लॉक ढूंढे जाते हैं।
- ब्रेकर ब्लॉक एक फेल हुआ ऑर्डर ब्लॉक होता है जो विपरीत दिशा में रिएक्ट कर सकता है।
- POI (Point of Interest) वो एरियाज़ हैं जहाँ प्राइस के रिएक्ट करने की संभावना ज़्यादा होती है, जैसे ऑर्डर ब्लॉक या FVG।
- हाई प्रोबेबिलिटी ट्रेड सेटअप्स के लिए POI के साथ लिक्विडिटी स्वीप और चेंज ऑफ कैरेक्टर जैसे कन्फर्मेशन ज़रूरी हैं।
- एक ऑर्डर ब्लॉक को केवल एक बार ही इस्तेमाल करना चाहिए; उसके बाद वह इनवैलिड हो जाता है।
Key terms
Test your understanding
- बड़े इंस्टीट्यूशंस अपने ऑर्डर्स को छोटे ब्लॉक्स में क्यों तोड़ते हैं?
- चार्ट पर एक बुलिश ऑर्डर ब्लॉक को कैसे पहचाना और मार्क किया जाता है?
- ब्रेकर ब्लॉक क्या होता है और यह कैसे बनता है?
- POI का उपयोग करके एक हाई प्रोबेबिलिटी ट्रेडिंग सेटअप कैसे बनाया जा सकता है?
- एक ऑर्डर ब्लॉक को 'वैलिड' और 'इनवैलिड' कब माना जाता है?