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Kotlin Basics || Source Code to Machine Code || Humble Coders
Humble Coders
Overview
यह वीडियो बताता है कि कोटलिन जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखा गया सोर्स कोड, कंप्यूटर द्वारा समझे जाने वाले मशीन कोड में कैसे बदलता है। इसमें कंपाइलेशन और इंटरप्रिटेशन जैसी प्रक्रियाओं को समझाया गया है, और जावा वर्चुअल मशीन (JVM) और बाइट कोड की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। अंत में, यह बताया गया है कि एंड्रॉइड जैसे प्लेटफॉर्म पर यह पूरा प्रोसेस कैसे काम करता है, जिसमें ग्रेडल जैसे टूल्स भी शामिल हैं।
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Chapters
- प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे कोटलिन को एक खास सिंटेक्स में लिखा जाता है जिसे सोर्स कोड कहते हैं, जिसे इंसान समझ सकते हैं।
- कंप्यूटर सोर्स कोड को सीधे नहीं समझता, वह मशीन कोड (आमतौर पर बाइनरी) समझता है।
- सोर्स कोड को मशीन कोड में बदलने के लिए कंपाइलेशन और इंटरप्रिटेशन दो मुख्य तरीके हैं।
यह समझना ज़रूरी है कि आपका लिखा कोड कंप्यूटर तक पहुँचने से पहले किन प्रक्रियाओं से गुज़रता है, ताकि आप बेहतर प्रोग्रामिंग कर सकें।
एक इंग्लिश की किताब को हिंदी में ट्रांसलेट करने के दो तरीके: या तो पूरी किताब पहले हिंदी में लिख लें (कंपाइलेशन), या फिर पढ़ते समय लाइन-बाय-लाइन ट्रांसलेट करें (इंटरप्रिटेशन)।
- कंपाइलेशन में, पूरे सोर्स कोड को एक साथ मशीन कोड में बदला जाता है और फिर एग्जीक्यूट किया जाता है।
- इंटरप्रिटेशन में, सोर्स कोड को लाइन-बाय-लाइन मशीन कोड में बदला और एग्जीक्यूट किया जाता है।
- कोटलिन में पहले कंपाइलेशन होता है और फिर इंटरप्रिटेशन।
यह जानने से आपको यह समझने में मदद मिलती है कि अलग-अलग प्रोग्रामिंग लैंग्वेज कैसे काम करती हैं और उनके परफॉरमेंस में क्या अंतर हो सकता है।
पहला तरीका (पूरी किताब हिंदी में लिखना) कंपाइलेशन जैसा है, और दूसरा तरीका (लाइन-बाय-लाइन ट्रांसलेट करना) इंटरप्रिटेशन जैसा है।
- JVM (जावा वर्चुअल मशीन) एक प्रोग्राम है जो सोर्स कोड को मशीन कोड में बदलने में मदद करता है, लेकिन यह हर ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए अलग होता है।
- JVM सीधे सोर्स कोड को नहीं समझता, इसलिए सोर्स कोड को पहले बाइट कोड (एक इंटरमीडिएट कोड) में बदला जाता है।
- बाइट कोड को JVM फिर उस खास ऑपरेटिंग सिस्टम के नेटिव कोड (मशीन कोड) में बदलता है।
JVM और बाइट कोड की वजह से कोटलिन जैसे लैंग्वेज प्लेटफॉर्म इंडिपेंडेंट बन जाते हैं, यानी एक बार लिखा कोड कई अलग-अलग डिवाइस पर चल सकता है।
जैसे दिल्ली से शिमला जाने के लिए चंडीगढ़ देखना पड़ता है, वैसे ही सोर्स कोड को मशीन कोड में बदलने के लिए JVM को बाइट कोड की ज़रूरत होती है।
- नेटिव कोड (मशीन कोड) को एक्चुअल ऐप में चलाने के लिए एंड्रॉइड रनटाइम (ART) मदद करता है।
- JVM प्लेटफॉर्म इंडिपेंडेंट है और विंडोज, मैकओएस, एम्बेडेड सिस्टम और एंड्रॉइड फोन जैसे कई प्लेटफॉर्म पर काम कर सकता है।
- ग्रेडल एक हेल्पर टूल है जो JVM को सोर्स कोड से मशीन कोड में बदलने की प्रक्रिया में मदद करता है।
यह जानना आपको यह समझने में मदद करता है कि आपका एंड्रॉइड ऐप कैसे काम करता है और भविष्य में आने वाली एरर्स को कैसे ठीक किया जा सकता है।
ग्रेडल और JVM मिलकर कोटलिन सोर्स कोड को बाइट कोड में और फिर नेटिव कोड में बदलने का काम करते हैं, जिसे एंड्रॉइड रनटाइम एग्जीक्यूट करता है।
Key takeaways
- प्रोग्रामिंग लैंग्वेज का सोर्स कोड इंसानों के लिए होता है, कंप्यूटर के लिए नहीं।
- कंप्यूटर को समझने के लिए सोर्स कोड को मशीन कोड में बदलना ज़रूरी है।
- कंपाइलेशन और इंटरप्रिटेशन सोर्स कोड को मशीन कोड में बदलने के दो अलग-अलग तरीके हैं।
- कोटलिन में कंपाइलेशन और इंटरप्रिटेशन दोनों का इस्तेमाल होता है।
- JVM एक ज़रूरी कंपोनेंट है जो कोड को प्लेटफॉर्म-स्पेसिफिक मशीन कोड में बदलता है।
- बाइट कोड एक इंटरमीडिएट फॉर्मेट है जो JVM को सोर्स कोड समझने में मदद करता है।
- एंड्रॉइड रनटाइम नेटिव कोड को एक्चुअल ऐप के रूप में चलाता है।
Key terms
Source CodeMachine CodeCompilationInterpretationJVM (Java Virtual Machine)BytecodeNative CodeAndroid Runtime (ART)Gradle
Test your understanding
- सोर्स कोड और मशीन कोड के बीच मुख्य अंतर क्या है?
- कंपाइलेशन और इंटरप्रिटेशन की प्रक्रियाएं कैसे अलग हैं और कोटलिन में कौन सी पहले होती है?
- JVM का क्या काम है और यह बाइट कोड का उपयोग क्यों करता है?
- एंड्रॉइड जैसे प्लेटफॉर्म पर नेटिव कोड को एग्जीक्यूट करने में एंड्रॉइड रनटाइम की क्या भूमिका है?
- ग्रेडल टूल JVM की किस प्रक्रिया में सहायता करता है?