
Refraction of Light at Plane Surfaces One Shot | ICSE Physics 2026 | @sirtarunrupani
Sir Tarun Rupani
Overview
यह वीडियो प्रकाश के समतल सतहों पर अपवर्तन (refraction) की अवधारणा को समझाता है। इसमें प्रकाश के परावर्तन (reflection) और अपवर्तन के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है, साथ ही अपवर्तन के कारणों, जैसे कि विभिन्न माध्यमों में प्रकाश की गति में परिवर्तन, पर भी चर्चा की गई है। वीडियो में स्नेल के नियम, अपवर्तनांक (refractive index), और प्रकाश के मुड़ने के विभिन्न अवलोकनों को विस्तार से समझाया गया है। प्रिज्म के माध्यम से प्रकाश का अपवर्तन, पार्श्व विस्थापन (lateral displacement), और पूर्ण आंतरिक परावर्तन (total internal reflection) जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उदाहरणों और चित्रों के साथ प्रस्तुत किया गया है। अंत में, वास्तविक गहराई (real depth) और आभासी गहराई (apparent depth) के बीच अंतर और दैनिक जीवन में अपवर्तन के अनुप्रयोगों पर भी प्रकाश डाला गया है।
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Chapters
- परावर्तन (Reflection) वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश किसी पॉलिश की हुई सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट जाता है।
- अपवर्तन (Refraction) वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करते समय अपनी दिशा बदलता है।
- मिरर (दर्पण) परावर्तन से संबंधित है, जबकि लेंस और पारदर्शी माध्यम अपवर्तन से संबंधित हैं।
- अपवर्तन तब होता है जब प्रकाश की गति विभिन्न माध्यमों में भिन्न होती है।
- प्रकाश की गति विभिन्न माध्यमों में भिन्न होती है (जैसे वैक्यूम में अधिकतम, फिर हवा, पानी और अंत में ग्लास में सबसे कम)।
- जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है, तो गति में परिवर्तन के कारण वह मुड़ जाता है।
- प्रकाश विरल (rarer) माध्यम से सघन (denser) माध्यम में जाने पर अभिलंब (normal) की ओर मुड़ता है।
- प्रकाश सघन (denser) माध्यम से विरल (rarer) माध्यम में जाने पर अभिलंब (normal) से दूर मुड़ता है।
- यदि प्रकाश अभिलंब के अनुदिश (perpendicularly) आपतित होता है, तो वह बिना मुड़े सीधा निकल जाता है।
- अपवर्तन के दो नियम हैं: पहला, आपतित किरण (incident ray), अपवर्तित किरण (refracted ray) और आपतन बिंदु पर अभिलंब (normal) एक ही तल (plane) में होते हैं।
- दूसरा नियम (स्नेल का नियम) कहता है कि आपतन कोण (angle of incidence) की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण (angle of refraction) की ज्या का अनुपात एक स्थिरांक (constant) होता है।
- अपवर्तनांक (Refractive Index, μ) किसी माध्यम का वह गुण है जो बताता है कि प्रकाश उस माध्यम में कितनी गति से यात्रा करेगा और कितना मुड़ेगा।
- अपवर्तनांक को निर्वात (vacuum) में प्रकाश की गति (c) और माध्यम में प्रकाश की गति (v) के अनुपात (c/v) के रूप में परिभाषित किया जाता है।
- उच्च अपवर्तनांक वाले माध्यम में प्रकाश की गति कम होती है और वह अधिक मुड़ता है।
- प्रिज्म एक त्रिकोणीय (triangular) आकार का पारदर्शी माध्यम होता है जिसके पांच सतह होते हैं (दो त्रिभुजाकार और तीन आयताकार)।
- जब प्रकाश प्रिज्म में प्रवेश करता है (विरल से सघन), तो यह अभिलंब की ओर मुड़ता है और प्रिज्म के आधार (base) की ओर झुकता है।
- जब प्रकाश प्रिज्म से बाहर निकलता है (सघन से विरल), तो यह अभिलंब से दूर मुड़ता है।
- विचलन कोण (angle of deviation, δ) आपतित किरण और निर्गत किरण (emergent ray) के बीच का कोण है, जो बताता है कि प्रकाश कितना मुड़ा है।
- प्रिज्म कोण (A) और विचलन कोण (δ) का योग आपतन कोण (i) और निर्गमन कोण (E) के योग के बराबर होता है (A + δ = i + E)।
- पार्श्व विस्थापन (Lateral Displacement) आपतित किरण की बढ़ी हुई रेखा और निर्गत किरण के बीच की लंबवत दूरी है, जब प्रकाश एक ग्लास ब्लॉक से गुजरता है।
- पार्श्व विस्थापन ग्लास ब्लॉक की मोटाई, आपतन कोण और माध्यम के अपवर्तनांक पर निर्भर करता है।
- प्रिज्म का उपयोग प्रकाश को मोड़ने या विक्षेपित करने के लिए किया जाता है, जैसे कि पेरिस्कोप (periscope) और कुछ प्रकार के दूरबीनों (telescopes) में।
- कुल आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) तब होता है जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण (critical angle) से बड़े आपतन कोण पर जाता है।
- जब कोई वस्तु सघन माध्यम (जैसे पानी) में रखी जाती है और उसे विरल माध्यम (जैसे हवा) से देखा जाता है, तो वह अपनी वास्तविक गहराई से कम गहरी दिखाई देती है।
- वास्तविक गहराई (Real Depth) वस्तु की वास्तविक दूरी है, जबकि आभासी गहराई (Apparent Depth) वह दूरी है जहां वस्तु दिखाई देती है।
- यह अंतर अपवर्तन के कारण होता है, जहाँ प्रकाश अभिलंब से दूर मुड़ता है।
- अपवर्तन के कारण तारे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं, सूर्योदय से कुछ मिनट पहले और सूर्यास्त के कुछ मिनट बाद भी दिखाई देता है।
Key takeaways
- प्रकाश की गति विभिन्न माध्यमों में भिन्न होती है, जो अपवर्तन का मुख्य कारण है।
- प्रकाश विरल से सघन माध्यम में जाने पर अभिलंब की ओर और सघन से विरल में जाने पर अभिलंब से दूर मुड़ता है।
- स्नेल का नियम (sin i / sin r = constant) और अपवर्तनांक (μ = c/v) प्रकाश के मुड़ने की मात्रा को मापने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- प्रिज्म प्रकाश को विक्षेपित करता है और विचलन कोण (angle of deviation) प्रकाश के मुड़ने की कुल मात्रा को दर्शाता है।
- पार्श्व विस्थापन तब होता है जब प्रकाश एक ग्लास ब्लॉक से गुजरता है, और यह ब्लॉक की मोटाई, आपतन कोण और अपवर्तनांक पर निर्भर करता है।
- कुल आंतरिक परावर्तन तब होता है जब प्रकाश सघन से विरल माध्यम में क्रांतिक कोण से बड़े आपतन कोण पर जाता है, और यह ऑप्टिकल फाइबर में उपयोग होता है।
- अपवर्तन के कारण वस्तुएं अपनी वास्तविक गहराई से कम गहरी दिखाई देती हैं (आभासी गहराई)।
- तारों का टिमटिमाना और सूर्योदय/सूर्यास्त के समय सूर्य का दिखाई देना वायुमंडलीय अपवर्तन के उदाहरण हैं।
Key terms
Test your understanding
- प्रकाश की गति विभिन्न माध्यमों में क्यों बदलती है और इसका अपवर्तन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
- स्नेल के नियम को समझाएं और बताएं कि अपवर्तनांक (refractive index) क्या मापता है?
- एक प्रिज्म से गुजरने पर प्रकाश के विचलन (deviation) के लिए जिम्मेदार कारक कौन से हैं?
- कुल आंतरिक परावर्तन (total internal reflection) की शर्तें क्या हैं और यह कहाँ उपयोग किया जाता है?
- वास्तविक गहराई और आभासी गहराई में क्या अंतर है और यह अंतर क्यों उत्पन्न होता है?