Research and Publication Ethics (RPE)| Ph.D.| Research Philosophy| Inductive and Deductive Research|
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Research and Publication Ethics (RPE)| Ph.D.| Research Philosophy| Inductive and Deductive Research|

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5 chapters5 takeaways13 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो रिसर्च और पब्लिकेशन एथिक्स (RPE) के परिचय पर केंद्रित है, विशेष रूप से पीएचडी छात्रों के लिए। यह यूनिट वन के महत्वपूर्ण विषयों को कवर करता है, जिसमें रिसर्च फिलॉसफी की मूल बातें, इसकी परिभाषा, प्रकृति, दायरा, मुख्य अवधारणाएं (ओंटोलॉजी, एपिस्टेमोलॉजी, मेथोडोलॉजी), और अनुसंधान के लिए इंडक्टिव और डिडक्टिव दृष्टिकोण के साथ-साथ ऑब्जेक्टिविटी और सब्जेक्टिविटी के बीच अंतर शामिल हैं। वीडियो का उद्देश्य इन मौलिक अवधारणाओं को स्पष्ट करना है ताकि शिक्षार्थी अनुसंधान प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें।

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Chapters

  • रिसर्च फिलॉसफी शोधकर्ता के विश्वासों, सिद्धांतों और मान्यताओं का एक समूह है जो अनुसंधान करने के तरीके को निर्देशित करता है।
  • यह अनुसंधान पद्धति के लिए एक नींव और मार्गदर्शक उपकरण के रूप में कार्य करता है, जो डेटा संग्रह से लेकर विश्लेषण और व्याख्या तक हर चरण में मदद करता है।
  • रिसर्च फिलॉसफी ज्ञान, वास्तविकता और अध्ययन की प्रकृति से संबंधित है।
यह समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अनुसंधान प्रक्रिया के लिए एक मूलभूत ढांचा प्रदान करता है, जो शोधकर्ता के दृष्टिकोण और विधियों को आकार देता है।
जैसे किसी इमारत की नींव होती है, वैसे ही रिसर्च फिलॉसफी पूरी रिसर्च की नींव होती है।
  • रिसर्च फिलॉसफी अनुसंधान प्रक्रिया को आकार देने वाले अंतर्निहित विश्वासों, मान्यताओं और सिद्धांतों से संबंधित है।
  • इसकी तीन मुख्य विमाएं हैं: ओंटोलॉजी (वास्तविकता की प्रकृति), एपिस्टेमोलॉजी (ज्ञान की प्रकृति और अधिग्रहण), और मेथोडोलॉजी (अनुसंधान विधियां और तकनीक)।
  • रिसर्च फिलॉसफी का दायरा बहुत व्यापक है और यह अनुसंधान प्रक्रिया के हर पहलू में उपयोग की जाती है, जिसमें वैचारिकरण, डिजाइन, डेटा संग्रह, विश्लेषण और प्रसार शामिल हैं।
इसकी परिभाषा, प्रकृति और दायरे को जानने से शिक्षार्थी यह समझ पाते हैं कि अनुसंधान कैसे संरचित होता है और विभिन्न चरणों में कौन से दार्शनिक विचार प्रासंगिक होते हैं।
रिसर्च फिलॉसफी को 'रिसर्च अनियन' की सबसे बाहरी परत के रूप में देखा जा सकता है, जो अनुसंधान रणनीति और डेटा संग्रह विधियों को प्रभावित करती है।
  • मुख्य अवधारणाओं में ओंटोलॉजी (वास्तविकता और अस्तित्व के बारे में प्रश्न), एपिस्टेमोलॉजी (ज्ञान की प्रकृति और इसे कैसे प्राप्त किया जाता है), और मेथोडोलॉजी (अनुसंधान करने के तरीके) शामिल हैं।
  • रिसर्च फिलॉसफी की पांच मुख्य शाखाएं हैं: पॉजिटिविज्म, इंटरप्रेटिविज्म, रियलिज्म, प्रैग्मेटिज्म और पोस्ट-मॉडर्निज़्म।
  • प्रत्येक शाखा वास्तविकता और ज्ञान के बारे में अलग-अलग मान्यताओं पर आधारित है और विभिन्न अनुसंधान विधियों को अपनाती है।
इन अवधारणाओं और शाखाओं को समझने से विभिन्न अनुसंधान दृष्टिकोणों के बीच अंतर करने और अपने शोध के लिए उपयुक्त दार्शनिक आधार चुनने में मदद मिलती है।
पॉजिटिविज्म वस्तुनिष्ठ वास्तविकता मानता है और मात्रात्मक विधियों का उपयोग करता है, जबकि इंटरप्रेटिविज्म सामाजिक रूप से निर्मित वास्तविकता पर ध्यान केंद्रित करता है और गुणात्मक विधियों का उपयोग करता है।
  • डिडक्टिव दृष्टिकोण एक सामान्य सिद्धांत या परिकल्पना से शुरू होता है और विशिष्ट अवलोकनों का परीक्षण करता है (सामान्य से विशिष्ट)।
  • इंडक्टिव दृष्टिकोण विशिष्ट अवलोकनों या परिणामों से शुरू होता है और एक सामान्य पैटर्न या सिद्धांत प्राप्त करता है (विशिष्ट से सामान्य)।
  • डिडक्टिव प्रक्रिया में एक सामान्य सिद्धांत से शुरू करके, एक विशिष्ट परिकल्पना बनाना, डेटा एकत्र करना और परिकल्पना का परीक्षण करना शामिल है।
  • इंडक्टिव प्रक्रिया में विशिष्ट अवलोकनों के आधार पर पैटर्न की पहचान करना और सामान्यीकरण करना शामिल है।
यह समझना कि कब और कैसे इंडक्टिव और डिडक्टिव तर्क का उपयोग करना है, प्रभावी अनुसंधान डिजाइन और निष्कर्ष निकालने के लिए महत्वपूर्ण है।
डिडक्टिव उदाहरण: यदि सभी हंस सफेद हैं (सामान्य सिद्धांत), तो हर देखा गया हंस सफेद होगा (विशिष्ट भविष्यवाणी)। इंडक्टिव उदाहरण: कई हंसों को सफेद देखकर यह निष्कर्ष निकालना कि सभी हंस सफेद होते हैं।
  • ऑब्जेक्टिविटी का अर्थ है व्यक्तिगत राय, पूर्वाग्रहों और व्याख्याओं की अनुपस्थिति, जिससे तटस्थ और सटीक परिणाम सुनिश्चित होते हैं।
  • सब्जेक्टिविटी में व्यक्तिगत राय, पूर्वाग्रह और व्याख्याएं शामिल होती हैं, जो अनुसंधान प्रक्रिया के हर चरण को प्रभावित कर सकती हैं।
  • ऑब्जेक्टिविटी का लक्ष्य व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों को कम करना और दोहराने योग्य, सुसंगत परिणाम प्राप्त करना है, जबकि सब्जेक्टिविटी व्यक्तिगत दृष्टिकोणों और अनुभवों को महत्व देती है।
ऑब्जेक्टिविटी और सब्जेक्टिविटी के बीच अंतर को जानने से शोधकर्ता अपने काम में पूर्वाग्रहों को पहचानने और प्रबंधित करने में सक्षम होते हैं, जिससे अनुसंधान की वैधता बढ़ती है।
ऑब्जेक्टिव प्रश्न का उदाहरण: 'क्या तापमान 25 डिग्री सेल्सियस है?' (हां/नहीं)। सब्जेक्टिव प्रश्न का उदाहरण: 'आपको मौसम कैसा लगता है?' (व्यक्तिगत राय)।

Key takeaways

  1. 1रिसर्च फिलॉसफी अनुसंधान के लिए एक मार्गदर्शक ढांचा प्रदान करती है, जो विश्वासों और सिद्धांतों पर आधारित होती है।
  2. 2ओंटोलॉजी, एपिस्टेमोलॉजी और मेथोडोलॉजी अनुसंधान के तीन मुख्य दार्शनिक स्तंभ हैं।
  3. 3पॉजिटिविज्म, इंटरप्रेटिविज्म, रियलिज्म, प्रैग्मेटिज्म और पोस्ट-मॉडर्निज़्म विभिन्न अनुसंधान दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  4. 4डिडक्टिव तर्क सामान्य से विशिष्ट की ओर बढ़ता है, जबकि इंडक्टिव तर्क विशिष्ट से सामान्य की ओर बढ़ता है।
  5. 5ऑब्जेक्टिविटी व्यक्तिगत पूर्वाग्रहों को समाप्त करती है, जबकि सब्जेक्टिविटी व्यक्तिगत दृष्टिकोणों को शामिल करती है।

Key terms

Research PhilosophyOntologyEpistemologyMethodologyPositivismInterpretivismRealismPragmatismPost-modernismInductive ApproachDeductive ApproachObjectivitySubjectivity

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  1. 1रिसर्च फिलॉसफी अनुसंधान प्रक्रिया को कैसे निर्देशित करती है?
  2. 2ओंटोलॉजी, एपिस्टेमोलॉजी और मेथोडोलॉजी के बीच मुख्य अंतर क्या हैं?
  3. 3पॉजिटिविज्म और इंटरप्रेटिविज्म रिसर्च फिलॉसफी के बीच क्या अंतर है?
  4. 4डिडक्टिव और इंडक्टिव दृष्टिकोण का उपयोग कब और क्यों किया जाता है?
  5. 5किसी शोध में ऑब्जेक्टिविटी बनाए रखने के क्या तरीके हैं?

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