
MPS-003 Unit-01 LEGACY OF NATIONAL MOVEMENT l राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत l IGNOU l Political Science
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Overview
यह वीडियो भारत के राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत पर केंद्रित है, जिसमें विकास और भागीदारी के पहलुओं पर जोर दिया गया है। इसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, गांधीजी के योगदान, स्वराज की अवधारणा, समाजवाद के विचार और गांधीवादी आर्थिक और सामाजिक दर्शन की पड़ताल की गई है। वीडियो बताता है कि कैसे विभिन्न आंदोलनों, जैसे कि किसान संघर्ष और आदिवासी विद्रोह, ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाई, और कैसे कांग्रेस ने प्रतिनिधित्व और सुधारों की मांग की। यह गांधीजी के चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में हस्तक्षेपों पर भी प्रकाश डालता है, और कराची संकल्प जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर चर्चा करता है, जो सामाजिक-आर्थिक सिद्धांतों को रेखांकित करते हैं। अंत में, यह गांधीजी के आत्म-निर्भरता, अहिंसा और मानवीय मूल्यों पर आधारित आर्थिक विचारों और सर्वोदय के उनके दर्शन की व्याख्या करता है।
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Chapters
- 1857 में आदिवासी समुदायों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ रक्षात्मक आंदोलन शुरू किए।
- 19वीं सदी के अंत में किसान संघर्षों का एक स्पष्ट आर्थिक दृष्टिकोण था, जो भूमि राजस्व प्रणाली और जमींदारों के शोषण के खिलाफ थे।
- दादाभाई नौरोजी, एम.जी. रानाडे और आर.सी. दत्त जैसे नेताओं ने ब्रिटिश आर्थिक शोषण की आलोचना की और इसे भारत में गरीबी का मुख्य कारण बताया।
- 1885 में शिक्षित अभिजात वर्ग द्वारा आईएनसी की स्थापना की गई।
- आईएनसी ने वरिष्ठ सरकारी सेवाओं और विधायी निकायों में भारतीयों के प्रतिनिधित्व की मांग की।
- आईएनसी ने भारतीय सिविल सेवाओं में भारतीयों की पहुंच की भी मांग की, जिसमें परीक्षा भारत में आयोजित की जाए।
- आईएनसी में नरमपंथी (petition और protest में विश्वास रखने वाले) और गरमपंथी (militant methods में विश्वास रखने वाले) दो गुट थे।
- एनी बेसेंट के नेतृत्व में, कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संपत्ति का अधिकार, कानून के समक्ष समानता और सार्वजनिक कार्यालयों में काम करने का अधिकार जैसी मांगों को शामिल करते हुए एक संविधान का मसौदा तैयार किया।
- 1918 की मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने जीवन और संपत्ति के अधिकार, भाषण की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता जैसी मांगों को दोहराया।
- 1925 में महात्मा गांधी की अध्यक्षता वाली 'ऑल पार्टी कॉन्फ्रेंस' ने 'कॉमनवेल्थ बिल ऑफ इंडिया' तैयार किया, जिसमें भारतीयों के लिए स्व-शासन की मांग की गई।
- 1928 की मोतीलाल नेहरू समिति की रिपोर्ट ने इन सभी मांगों को शामिल किया और हेबियस कॉर्पस के अधिकार को भी जोड़ा।
- गांधीजी की पहली सामाजिक-आर्थिक गतिविधि चंपारण सत्याग्रह थी, जिसने किसानों को ब्रिटिश नील बागान मालिकों के शोषण से बचाया।
- खेड़ा सत्याग्रह (1918) सरकार की उच्च राजस्व मांगों के खिलाफ एक अहिंसक असहयोग आंदोलन था।
- अहमदाबाद मिल हड़ताल में, गांधीजी ने कपड़ा मिल श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन की मांग का समर्थन किया।
- 1929 के लाहौर सत्र में जवाहरलाल नेहरू ने 'पूर्ण स्वराज' (पूर्ण स्व-शासन) की घोषणा की।
- गांधीजी ने पाउंड-रुपया विनिमय दर में कमी, भूमि राजस्व में 50% की कमी, नमक कर को समाप्त करने और सैन्य व्यय को कम करने की मांग की।
- गांधीवादी अर्थशास्त्र आत्म-निर्भरता, अहिंसा और मानवीय मूल्यों पर आधारित था, जिसमें ट्रस्टीशिप की रणनीति शामिल थी।
- गांधीजी ने शोषण और आम लोगों के अधिकारों के हनन का विरोध किया, जैसा कि उनकी 1907 की पुस्तक 'हिंद स्वराज' में परिलक्षित होता है।
- 1917 की बोल्शेविक क्रांति ने भारत में समाजवाद के प्रति रुचि जगाई, जिससे छोटे समाजवादी समूह उभरे।
- 1934 में कांग्रेस के भीतर 'कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी' का गठन हुआ, और 1935 में 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया' बनी (जिसे तुरंत प्रतिबंधित कर दिया गया)।
- जवाहरलाल नेहरू ने समाजवाद का समर्थन किया और इसे भारत और दुनिया की समस्याओं का समाधान बताया।
- गांधीजी का मानना था कि हर धर्म का मूल सत्य और अहिंसा है, और उन्होंने छुआछूत को खत्म करने और 'हरिजन' (दलितों) के उत्थान पर जोर दिया।
Key takeaways
- राष्ट्रीय आंदोलन केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें आर्थिक शोषण के खिलाफ संघर्ष और सामाजिक सुधार भी शामिल थे।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने धीरे-धीरे भारतीयों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों की मांग की, जो शुरू में शिक्षित अभिजात वर्ग पर केंद्रित थी।
- गांधीजी ने अहिंसक प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा के माध्यम से राष्ट्रीय आंदोलन को जन-आंदोलन में बदल दिया।
- स्वराज का अर्थ केवल स्व-शासन नहीं था, बल्कि इसमें आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक न्याय भी शामिल था।
- कराची संकल्प जैसे प्रस्तावों ने भारत के लिए एक सामाजिक-आर्थिक एजेंडा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- समाजवाद के विचारों ने भारतीय राष्ट्रवाद को प्रभावित किया, खासकर जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं के माध्यम से।
- गांधीवादी अर्थशास्त्र मानवीय मूल्यों, अहिंसा और आत्म-निर्भरता पर आधारित था, जो शोषण का विरोध करता था।
- गांधीजी ने धार्मिक सुधारों और सामाजिक समानता पर जोर दिया, विशेष रूप से छुआछूत को समाप्त करने के लिए।
Key terms
Test your understanding
- राष्ट्रीय आंदोलन के प्रारंभिक चरण में आदिवासी और किसान आंदोलनों के मुख्य आर्थिक कारण क्या थे?
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद उसकी प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक मांगें क्या थीं?
- गांधीजी ने चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद में हस्तक्षेप करके राष्ट्रीय आंदोलन में क्या योगदान दिया?
- स्वराज की अवधारणा में गांधीजी के आर्थिक और सामाजिक विचार कैसे शामिल थे?
- भारत में समाजवाद के विचार के प्रसार में किन घटनाओं और नेताओं का योगदान था?