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The Best 5 Teachings of OSHO.
16:17

The Best 5 Teachings of OSHO.

Riya Upreti

6 chapters7 takeaways8 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो ओशो की पांच प्रमुख शिक्षाओं पर प्रकाश डालता है, जो जीवन जीने के तरीके, भविष्य की सोच, भावनाओं को संभालने और जीवन की नश्वरता को स्वीकार करने पर केंद्रित हैं। ओशो की शिक्षाएं अक्सर पारंपरिक सोच को चुनौती देती हैं, लोगों को अपने 'बॉक्स' से बाहर सोचने और जीवन को पूरी तरह से जीने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जबकि आंतरिक जागरूकता बनाए रखती हैं। वीडियो में ओशो के विवादास्पद जीवन और विचारों का भी संक्षिप्त उल्लेख है, जो उन्हें 'जीसस क्राइस्ट के बाद सबसे खतरनाक आदमी' के रूप में वर्णित करते हैं।

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Chapters

  • हम अक्सर लोगों से नहीं, बल्कि 'मेरा' होने के लेबल से प्यार करते हैं।
  • जब किसी प्रियजन की मृत्यु होती है और पता चलता है कि वह जैविक रूप से संबंधित नहीं था, तो भावनाएं बदल जाती हैं, भले ही यादें वही रहें।
  • यह दर्शाता है कि हमारा लगाव व्यक्ति से नहीं, बल्कि ओनरशिप की भावना से होता है।
यह समझ हमें सिखाती है कि हमारे रिश्ते और भावनाएं अक्सर बाहरी लेबल पर आधारित होती हैं, न कि वास्तविक संबंध पर, जिससे हम अधिक प्रामाणिक जुड़ाव विकसित कर सकें।
एक पिता का अपने बेटे के प्रति भावनात्मक बदलाव जब उसे पता चलता है कि वह उसका जैविक पुत्र नहीं है, फिर भी दुख बना रहता है लेकिन गुस्सा और वियर्डनेस भी जुड़ जाती है।
  • जब हम किसी के बुरे व्यवहार पर प्रतिक्रिया करते हैं, तो हम अक्सर मान लेते हैं कि यह व्यक्तिगत है।
  • ओशो का सुझाव है कि 99% मामलों में, दूसरा व्यक्ति अपनी ही समस्याओं से जूझ रहा होता है और हम सिर्फ उसके गुस्से या दर्द का निशाना बन जाते हैं।
  • गुस्से या चिड़चिड़ाहट को महसूस करने और प्रतिक्रिया करने के बीच एक 'गैप' (जागरूकता) बनाना महत्वपूर्ण है, जिससे हम सोच-समझकर जवाब दे सकें।
यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि दूसरों के कार्यों को व्यक्तिगत रूप से न लें और अपनी प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखें, जिससे हमारे रिश्ते और मानसिक शांति बेहतर हो सके।
एक खाली नाव से टकराने पर गुस्सा आना, लेकिन जब पता चलता है कि नाव खाली थी तो गुस्सा शांत हो जाता है, क्योंकि कोई व्यक्तिगत हमला नहीं था।
  • हमारा 'ड्रीम लाइफ' अक्सर हमारे अतीत के अनुभवों और सीखी हुई चीजों का ही एक बड़ा संस्करण होता है।
  • लोग 'बॉक्स के बाहर' सोचने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में वे केवल परिचित चीजों के बेहतर संस्करण की कल्पना करते हैं।
  • सच्चाई में 'आउट ऑफ द बॉक्स' सोचने के लिए, हमें अपने अतीत से थोड़ा अलग होना पड़ता है और यह सवाल पूछना पड़ता है कि 'इसके अलावा मैं और क्या कर सकता हूँ?'
यह हमें अपनी सोच के दायरे को पहचानने और उसे तोड़ने में मदद करता है, ताकि हम वास्तव में नई संभावनाओं को खोज सकें और केवल पुरानी आदतों को दोहराने से बच सकें।
हेनरी फोर्ड के समय में लोगों से पूछने पर वे तेज घोड़े चाहते थे, कार नहीं, क्योंकि कार उनके 'बॉक्स' का हिस्सा नहीं थी।
  • ओशो ने अमीरों के गुरु बनने की इच्छा व्यक्त की, यह कहते हुए कि गरीबी का पुजारी नहीं बनना चाहते।
  • जो लोग कहते हैं कि 'पैसा मायने नहीं रखता', वे अक्सर बहुत अमीर होते हैं और यह कहने की स्थिति में होते हैं।
  • असली खोज तब शुरू होती है जब बाहरी चीजें हासिल हो जाती हैं और व्यक्ति अंदर की शांति की तलाश करता है (जोरबा द बुद्धा कॉन्सेप्ट)।
यह हमें सिखाता है कि भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही आंतरिक विकास और जागरूकता पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि जीवन पूर्ण हो सके।
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा का उदाहरण, जिन्होंने सब कुछ हासिल करने के बाद अब ध्यान और आंतरिक खोज की ओर झुकाव दिखाया है।
  • अपनी भावनाओं को न तो बढ़ाएं और न ही दबाएं, बस उन्हें बिना किसी निर्णय के देखें (ऑब्जर्व करें)।
  • जो आप दबाते हैं, वह और मजबूत होता जाता है ('What you resist, persists')।
  • भावनाओं के असली स्रोत को समझने के लिए उन्हें ऑब्जर्व करना जरूरी है, न कि उन्हें गलत मानकर सप्रेस करना।
यह हमें अपनी भावनाओं को स्वस्थ तरीके से समझने और प्रबंधित करने की क्षमता देता है, जिससे हम आंतरिक शांति पा सकते हैं और दूसरों पर अपनी दबी हुई भावनाओं को नहीं निकालते।
किसी दोस्त की तरक्की पर जलन महसूस होने पर उसे दबाने के बजाय, यह समझना कि यह जलन शायद पीछे रह जाने के डर से उपजी है।
  • जीवन दो शेरों (अतीत और मृत्यु) के बीच एक पतली बेल पर लटकने जैसा है, जिसे दिन-रात (चूहे) कुतर रहे हैं।
  • इस स्थिति में स्ट्रॉबेरी खाना (पल का आनंद लेना) पागलपन नहीं, बल्कि समझदारी है।
  • जीवन की सीमितता ही उसे कीमती बनाती है; मौत से बचने के चक्कर में हमें जीना नहीं छोड़ना चाहिए।
यह हमें जीवन की अनिश्चितता और नश्वरता को स्वीकार करने और वर्तमान क्षण में जीने, खुशियाँ खोजने और जीवन का भरपूर आनंद लेने के लिए प्रेरित करता है।
शेर, चूहे और बेल वाली कहानी, जहाँ आदमी मौत के साए में भी स्ट्रॉबेरी खाकर पल का आनंद लेता है।

Key takeaways

  1. 1हमारा लगाव अक्सर 'मेरा' होने के लेबल से होता है, न कि व्यक्ति से।
  2. 2दूसरों के बुरे व्यवहार को व्यक्तिगत न लें; वे अक्सर अपनी लड़ाई लड़ रहे होते हैं।
  3. 3सच्ची नवीनता के लिए हमें अपने अतीत के 'बॉक्स' से बाहर निकलना होगा।
  4. 4भौतिक सफलता के साथ-साथ आंतरिक शांति और जागरूकता भी जरूरी है (जोरबा द बुद्धा)।
  5. 5भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें ऑब्जर्व करना उन्हें समझने और संभालने का सबसे अच्छा तरीका है।
  6. 6जीवन की नश्वरता को स्वीकार करना हमें वर्तमान क्षण का आनंद लेने और डर के बिना जीने के लिए प्रेरित करता है।
  7. 7हम सब नश्वर हैं, इसलिए चीजों को 'मेरा मेरा' कहने के बजाय जीवन का अनुभव करें।

Key terms

ओनरशिप का लेबलखाली नाव सिद्धांतबॉक्स के बाहर सोचनाजोरबा द बुद्धाभावनाओं का दमन (Suppression)भावनाओं का अवलोकन (Observation)नश्वरता (Mortality)वर्तमान क्षण (Present Moment)

Test your understanding

  1. 1ओशो के अनुसार, हम वास्तव में लोगों से प्यार करते हैं या 'मेरा' होने के लेबल से? अपने उत्तर को उदाहरण सहित समझाएं।
  2. 2खाली नाव सिद्धांत क्या है और यह हमें दूसरों के साथ व्यवहार करने में कैसे मदद कर सकता है?
  3. 3जब ओशो कहते हैं कि 'तुम्हारा फ्यूचर तुम्हारे पास्ट की ही परछाई है', तो उनका क्या मतलब है और इससे बाहर निकलने का तरीका क्या है?
  4. 4भावनाओं को दबाने (suppress) और उन्हें ऑब्जर्व करने में क्या अंतर है, और ओशो के अनुसार कौन सा तरीका बेहतर है?
  5. 5शेर, चूहे और बेल वाली कहानी से ओशो क्या जीवन का सबक सिखाना चाहते हैं?

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