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FVG Trading Strategy Explained | ICT Trading Course (Ep.4) | CISD Trading Strategy
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FVG Trading Strategy Explained | ICT Trading Course (Ep.4) | CISD Trading Strategy

Neeraj joshi

5 chapters7 takeaways10 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो ट्रेडिंग में फेयर वैल्यू गैप (FVG), इनवर्स फेयर वैल्यू गैप (IFVG), चेंज इन स्टेट ऑफ डिलीवरी (CiSD), और डिस्प्लेसमेंट जैसे एडवांस कॉन्सेप्ट्स को समझाता है। यह बताता है कि कैसे ये कॉन्सेप्ट्स बड़े इंस्टीट्यूशंस के ऑर्डर्स और मार्केट के संभावित रिवर्सल पॉइंट्स को पहचानने में मदद करते हैं। वीडियो में इन कॉन्सेप्ट्स को चार्ट पर मार्क करना और ट्रेड एंट्री के लिए इनका इस्तेमाल करना सिखाया गया है, जिसमें लिक्विडिटी और रिस्क-रिवॉर्ड का ध्यान रखना भी शामिल है।

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Chapters

  • FVG एक 'इम्बैलेंस एरिया' है जो तीन कैंडल्स के बीच बनता है, जहाँ बड़े इंस्टीट्यूशंस के पेंडिंग ऑर्डर्स हो सकते हैं।
  • यह तब बनता है जब एक नॉर्मल से बड़ी कैंडल बनती है, जो मार्केट में इम्बैलेंस का संकेत देती है।
  • बुलिश FVG तब बनता है जब एक बड़ी ग्रीन कैंडल बनती है, और प्राइस के इस गैप में वापस आने पर ऊपर जाने की संभावना होती है।
  • बेयरिश FVG तब बनता है जब एक बड़ी रेड कैंडल बनती है, और प्राइस के इस गैप में वापस आने पर नीचे जाने की संभावना होती है।
FVG को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संभावित एंट्री पॉइंट्स और बड़े मूवमेंट्स की भविष्यवाणी करने में मदद करता है, जहाँ इंस्टीट्यूशंस के ऑर्डर एग्जीक्यूट हो सकते हैं।
एक बड़ी ग्रीन कैंडल के बाद, उससे पहले वाली कैंडल के हाई और बाद वाली कैंडल के लो के बीच एक रेक्टेंगल बनाकर FVG मार्क किया जाता है। अगर प्राइस वापस इस एरिया में आती है, तो ऊपर जाने की उम्मीद की जाती है।
  • जब एक FVG 'फेल' हो जाता है, यानी प्राइस उसके अपेक्षित दिशा के विपरीत चली जाती है, तो वह IFVG बन जाता है।
  • एक बेयरिश FVG का फेल होना बुलिश IFVG बनाता है, जहाँ प्राइस के वापस उस लेवल पर आने पर ऊपर जाने की संभावना होती है।
  • एक बुलिश FVG का फेल होना बेयरिश IFVG बनाता है, जहाँ प्राइस के वापस उस लेवल पर आने पर नीचे जाने की संभावना होती है।
IFVG हमें बताता है कि पिछला फेयर वैल्यू गैप काम नहीं किया और अब मार्केट की दिशा बदल सकती है, जिससे नए ट्रेडिंग अवसर मिलते हैं।
अगर एक बेयरिश FVG के बाद प्राइस उस गैप से ऊपर निकल जाती है, तो वह एक बुलिश IFVG बन जाता है। जब प्राइस वापस उस लेवल पर आती है, तो ऊपर जाने की उम्मीद की जाती है।
  • CiSD एक 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' है जो ट्रेंड रिवर्सल का संकेत देता है, अक्सर चेंज ऑफ कैरेक्टर से पहले।
  • बुलिश CiSD के लिए, एक इंपल्सिव डाउनसाइड मूव के बाद, पिछली कैंडल के क्लोज से एक लाइन ड्रॉ की जाती है।
  • बेयरिश CiSD के लिए, एक इंपल्सिव अपसाइड मूव के बाद, पिछली कैंडल के क्लोज से एक लाइन ड्रॉ की जाती है।
  • जब कोई कैंडल CiSD लाइन के ऊपर (बुलिश) या नीचे (बेयरिश) क्लोजिंग देती है, तो CiSD कंफर्म हो जाता है।
CiSD ट्रेडर्स को ट्रेंड रिवर्सल के शुरुआती संकेत देता है, जिससे वे संभावित एंट्री पॉइंट्स पर कन्फर्मेशन के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।
एक डाउनट्रेंड में, दो बड़ी रेड कैंडल्स के बाद, पिछली ग्रीन कैंडल के क्लोज से एक लाइन ड्रॉ की जाती है। जब कोई कैंडल इस लाइन के ऊपर क्लोज होती है, तो CiSD कंफर्म होता है।
  • डिस्प्लेसमेंट एक स्ट्रॉन्ग इंपल्सिव मूव है जो अग्रेसिव बाइंग या सेलिंग को दर्शाता है, जिसमें बड़ी कैंडल्स या रैपिड प्राइस मूवमेंट शामिल होते हैं।
  • यह बड़े इंस्टीट्यूशंस की प्रेजेंस और मार्केट की इंटेंट को दिखाता है।
  • जब CiSD जैसे कॉन्सेप्ट्स डिस्प्लेसमेंट (जैसे FVG या स्ट्रक्चर ब्रेक) के साथ होते हैं, तो वे हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप बनाते हैं।
  • मार्केट स्ट्रक्चर शिफ्ट (MSS) और चेंज ऑफ कैरेक्टर (CoC) भी डिस्प्लेसमेंट के प्रकार हो सकते हैं जब वे FVG के साथ होते हैं।
डिस्प्लेसमेंट, जब अन्य कन्फर्मेशन जैसे FVG या CiSD के साथ होता है, तो यह एक बहुत मजबूत ट्रेडिंग सेटअप बनाता है, जिससे सक्सेसफुल ट्रेड की संभावना बढ़ जाती है।
एक CiSD लाइन के ऊपर कैंडल की क्लोजिंग, अगर वह एक FVG के साथ हो रही है, तो उसे डिस्प्लेसमेंट कहा जाता है, जो एक हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप का संकेत देता है।
  • एक डाउनट्रेंड में, एक बेयरिश FVG के फेल होने पर बुलिश IFVG बनता है।
  • इसके साथ ही, इंपल्सिव मूव से पहले की कैंडल के क्लोज से CiSD लाइन ड्रॉ की जाती है।
  • जब कैंडल CiSD लाइन के ऊपर क्लोज होती है और IFVG भी कन्फर्म होता है, तो यह एक डिस्प्लेसमेंट (हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप) बनता है।
  • ट्रेड एंट्री लेते समय, लिक्विडिटी और बड़े स्टॉप लॉस से बचने के लिए सही एंट्री पॉइंट और स्टॉप लॉस का ध्यान रखना चाहिए।
यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे विभिन्न कॉन्सेप्ट्स को मिलाकर एक मजबूत ट्रेडिंग निर्णय लिया जा सकता है, जिसमें जोखिम प्रबंधन भी शामिल है।
एक डाउनट्रेंड में, एक बुलिश IFVG और कन्फर्म CiSD के साथ, प्राइस के वापस लेवल पर आने पर एंट्री ली जाती है, लेकिन बड़े स्टॉप लॉस से बचने के लिए ट्रेड अवॉइड किया जा सकता है अगर रिस्क-रिवॉर्ड अच्छा न हो।

Key takeaways

  1. 1FVG मार्केट में इम्बैलेंस और इंस्टीट्यूशनल ऑर्डर के संभावित क्षेत्रों को दर्शाता है।
  2. 2FVG का फेल होना IFVG बनाता है, जो ट्रेंड रिवर्सल का संकेत दे सकता है।
  3. 3CiSD ट्रेंड रिवर्सल के लिए एक अर्ली वार्निंग सिग्नल है, जो चेंज ऑफ कैरेक्टर से पहले आता है।
  4. 4डिस्प्लेसमेंट तब होता है जब एक स्ट्रॉन्ग इंपल्सिव मूव (जैसे FVG या स्ट्रक्चर ब्रेक) कन्फर्मेशन सिग्नल (जैसे CiSD) के साथ होता है।
  5. 5हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप्स तब बनते हैं जब कई कन्फर्मेशन एक साथ मिलते हैं, जैसे CiSD और FVG का संयोजन।
  6. 6ट्रेडिंग में सिर्फ एक कॉन्सेप्ट पर निर्भर न रहें; हमेशा मल्टीपल कन्फर्मेशन और रिस्क मैनेजमेंट का उपयोग करें।
  7. 7एडवांस ट्रेडिंग कॉन्सेप्ट्स को समझने के लिए पिछली सीरीज़ और बेसिक्स को समझना बहुत ज़रूरी है।

Key terms

Fair Value Gap (FVG)Imbalance AreaInstitutional OrdersInverse Fair Value Gap (IFVG)Change in State of Delivery (CiSD)Impulsive MoveDisplacementHigh Probability SetupLiquidityStop Loss

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  1. 1FVG क्या है और यह मार्केट में क्या दर्शाता है?
  2. 2इनवर्स फेयर वैल्यू गैप (IFVG) कब बनता है और इसका क्या मतलब होता है?
  3. 3CiSD (चेंज इन स्टेट ऑफ डिलीवरी) ट्रेडर्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  4. 4डिस्प्लेसमेंट क्या है और यह हाई प्रोबेबिलिटी सेटअप बनाने में कैसे मदद करता है?
  5. 5एक सफल ट्रेडिंग निर्णय लेने के लिए FVG, IFVG, और CiSD जैसे कॉन्सेप्ट्स को एक साथ कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है?

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