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भारत संसाधन एवं उपयोग | Class 10 Geography Chapter 1 | One Shot India Resource and Use | Bihar Board
Bihar Board 10th Vidyakul
Overview
यह वीडियो भारत में संसाधनों और उनके उपयोग पर एक विस्तृत चर्चा प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि संसाधन क्या हैं, उन्हें किन शर्तों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, और मानव, प्राकृतिक, नवीकरणीय, अनवीकरणीय, स्वामित्व और विकास की स्थिति के आधार पर उनके विभिन्न प्रकार क्या हैं। वीडियो संसाधन नियोजन, संरक्षण के महत्व और भारत में इसके कार्यान्वयन पर भी प्रकाश डालता है। इसके अतिरिक्त, यह सतत विकास की अवधारणा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्लब ऑफ रोम, क्योटो प्रोटोकॉल और पृथ्वी शिखर सम्मेलनों जैसे महत्वपूर्ण समझौतों और पहलों की व्याख्या करता है।
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Chapters
- संसाधन वे वस्तुएं हैं जो हमारे वातावरण में मौजूद हैं और हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं।
- किसी वस्तु को संसाधन मानने के लिए तीन मुख्य शर्तें हैं: यह हमारी जरूरतों को पूरा करे, इसका उपयोग आर्थिक रूप से संभव हो (लागत और बाजार मूल्य का संतुलन), और इसके लिए हमारे पास उपयुक्त प्रौद्योगिकी हो।
- मानव स्वयं सबसे बड़ा संसाधन है, क्योंकि वही अन्य संसाधनों का उपयोग और विकास करता है।
संसाधन की परिभाषा को समझना महत्वपूर्ण है ताकि हम यह जान सकें कि कौन सी चीजें हमारे विकास के लिए उपयोगी हैं और उनका विवेकपूर्ण उपयोग कैसे करें।
पेन, डिजिटल बोर्ड, या फोन जो हमारी जरूरतों को पूरा करते हैं, वे संसाधन हैं। सोने का खनन तभी संसाधन है जब उसकी बाजार कीमत खनन की लागत से अधिक हो।
- संसाधनों को उत्पत्ति के आधार पर जैव (जीवित वस्तुएं जैसे वन, वन्यजीव) और अजैव (निर्जीव वस्तुएं जैसे पहाड़, नदियाँ, खनिज) में वर्गीकृत किया जाता है।
- उपलब्धता के आधार पर, संसाधनों को नवीकरणीय (जिन्हें फिर से बनाया जा सकता है, जैसे हवा, पानी, सौर ऊर्जा) और अनवीकरणीय (जिन्हें फिर से नहीं बनाया जा सकता, जैसे जीवाश्म ईंधन) में बांटा गया है।
- स्वामित्व के आधार पर, संसाधनों को व्यक्तिगत (निजी संपत्ति), सामुदायिक (सामूहिक उपयोग), राष्ट्रीय (देश की सीमा के भीतर) और अंतरराष्ट्रीय (वैश्विक अधिकार क्षेत्र) में वर्गीकृत किया जाता है।
- विकास की स्थिति के आधार पर, संसाधनों को संभावित (मौजूद लेकिन अप्रयुक्त), विकसित (मात्रा और गुणवत्ता ज्ञात, उपयोग में), भंडारित (प्रौद्योगिकी की कमी के कारण पहुंच से बाहर स्टॉक) और संचित (भविष्य के लिए संरक्षित) में बांटा गया है।
संसाधनों का वर्गीकरण हमें उनकी प्रकृति, उपलब्धता और उपयोगिता को समझने में मदद करता है, जिससे उनके प्रबंधन और संरक्षण की योजना बनाना आसान हो जाता है।
सौर ऊर्जा एक नवीकरणीय संसाधन है, जबकि कोयला एक अनवीकरणीय संसाधन है। एक व्यक्ति का खेत व्यक्तिगत संसाधन है, जबकि एक गाँव का तालाब सामुदायिक संसाधन है।
- संसाधन नियोजन का अर्थ है संसाधनों का विवेकपूर्ण और व्यवस्थित उपयोग ताकि वे भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी उपलब्ध रहें।
- भारत में संसाधन नियोजन में सर्वेक्षण, नक्शे तैयार करना, मात्रा और गुणवत्ता का मूल्यांकन, उपयुक्त प्रौद्योगिकी और कौशल का विकास, और राष्ट्रीय विकास योजनाओं के साथ समन्वय शामिल है।
- संसाधनों का संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी इच्छाएं असीमित हैं, लेकिन संसाधन सीमित हैं। महात्मा गांधी ने कहा था कि 'हमारे पास पेट भरने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन पेटी भरने के लिए नहीं'।
- संसाधन संरक्षण के लिए नर्मदा बचाओ आंदोलन और चिपको आंदोलन जैसे आंदोलनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संसाधनों का प्रभावी नियोजन और संरक्षण सुनिश्चित करता है कि वर्तमान की आवश्यकताएं पूरी हों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन उपलब्ध रहें, जिससे सतत विकास संभव हो सके।
झारखंड में खनिज और कोयले का विवेकपूर्ण उपयोग, या राजस्थान में सौर और पवन ऊर्जा का विकास संसाधन नियोजन के उदाहरण हैं। चिपको आंदोलन में पेड़ों को बचाने के लिए लोगों का उन्हें गले लगाना संरक्षण का एक उदाहरण है।
- सतत विकास का अर्थ है ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे बिना भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता किए बिना हो।
- क्लब ऑफ रोम (1968) ने सतत विकास की वकालत की, और 1974 में शमशेर की पुस्तक 'स्मॉल इज ब्यूटीफुल' में गांधीजी के विचार प्रकाशित हुए।
- पहला पृथ्वी शिखर सम्मेलन (1992, रियो डी जनेरियो) में एजेंडा 21 अपनाया गया, जो सतत विकास प्राप्त करने के लिए 21 कार्यक्रमों की एक योजना है।
- क्योटो प्रोटोकॉल (1997) का उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना था, और इसे मॉन्ट्रियल समझौते का विस्तार माना जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय समझौते और अवधारणाएं जैसे सतत विकास, एजेंडा 21, और क्योटो प्रोटोकॉल वैश्विक स्तर पर संसाधनों के प्रबंधन और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक साझा दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
एजेंडा 21 में 800 पृष्ठों का दस्तावेज़ शामिल है जिसमें पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समानता और आर्थिक विकास को संतुलित करने के लिए 21 कार्यक्रम सूचीबद्ध हैं। क्योटो प्रोटोकॉल के तहत, देशों ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य निर्धारित किए।
Key takeaways
- संसाधन वे वस्तुएं हैं जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करती हैं और जिनके उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी, आर्थिक व्यवहार्यता और उपलब्धता आवश्यक है।
- मानव स्वयं सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है, क्योंकि वह अन्य संसाधनों का उपयोग और विकास करता है।
- संसाधनों का वर्गीकरण (उत्पत्ति, उपलब्धता, स्वामित्व, विकास की स्थिति के आधार पर) उनके प्रबंधन और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
- संसाधन नियोजन यह सुनिश्चित करता है कि वर्तमान की जरूरतें पूरी हों और भविष्य के लिए भी संसाधन उपलब्ध रहें।
- सतत विकास का लक्ष्य वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को संतुलित करना है।
- अंतर्राष्ट्रीय समझौते जैसे क्योटो प्रोटोकॉल और एजेंडा 21 वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Key terms
संसाधन (Resource)नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resource)अनवीकरणीय संसाधन (Non-renewable Resource)सतत विकास (Sustainable Development)संसाधन नियोजन (Resource Planning)संसाधन संरक्षण (Resource Conservation)जैव संसाधन (Biotic Resource)अजैव संसाधन (Abiotic Resource)एजेंडा 21 (Agenda 21)क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol)
Test your understanding
- संसाधन को परिभाषित करने वाली मुख्य शर्तें क्या हैं और क्यों?
- नवीकरणीय और अनवीकरणीय संसाधनों के बीच मुख्य अंतर क्या हैं? प्रत्येक के दो उदाहरण दें।
- स्वामित्व के आधार पर संसाधनों के वर्गीकरण को उदाहरण सहित समझाइए।
- सतत विकास की अवधारणा क्या है और यह वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
- भारत में संसाधन नियोजन के प्रमुख चरण क्या हैं?