THE BHARATIYA NYAYA SANHITA 2023 | CHAPTER 5 | OFFENCES AGAINST WOMAN AND CHILD | LLB |
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THE BHARATIYA NYAYA SANHITA 2023 | CHAPTER 5 | OFFENCES AGAINST WOMAN AND CHILD | LLB |

Yash Dehariya

6 chapters7 takeaways12 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के अध्याय 5 पर केंद्रित है, जो महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों से संबंधित है। इसमें बलात्कार, यौन अपराध, दहेज से संबंधित अपराध, बच्चों के विरुद्ध अपराध और गर्भपात जैसे विभिन्न अपराधों की विस्तृत व्याख्या की गई है। प्रत्येक अपराध के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की तुलना में BNS में परिभाषित दंडों और नई धाराओं पर प्रकाश डाला गया है। वीडियो का उद्देश्य इन अपराधों की कानूनी परिभाषाओं, दंडों और अपवादों को स्पष्ट करना है।

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Chapters

  • धारा 63 रेप को परिभाषित करती है, जिसमें महिला की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक प्रवेश शामिल है, कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे धोखे, बेहोशी, या नाबालिग होने पर सहमति को अमान्य माना जाता है।
  • धारा 64 रेप के लिए सामान्य दंड निर्धारित करती है, जिसमें न्यूनतम 10 साल से आजीवन कारावास तक की सजा और जुर्माना शामिल है, और कुछ विशेष व्यक्तियों (जैसे पुलिस अधिकारी, सार्वजनिक सेवक) द्वारा किए गए अपराधों के लिए भी यही दंड है।
  • धारा 65 और 66 विशेष परिस्थितियों में रेप के लिए कठोर दंड का प्रावधान करते हैं, जैसे 16 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप (न्यूनतम 20 साल की सजा) या रेप के कारण मृत्यु या स्थायी वेजिटेटिव स्टेट (न्यूनतम 20 साल की सजा या मृत्युदंड)।
  • धारा 67 अलग रह रहे पति द्वारा पत्नी की सहमति के बिना यौन संबंध बनाने को अपराध मानती है (2 से 7 साल की सजा)।
  • धारा 68 किसी प्राधिकारी व्यक्ति द्वारा (जैसे पुलिस, जेल अधिकारी) कस्टडी में ली गई महिला के साथ इंड्यूसमेंट या सिडक्शन द्वारा यौन संबंध बनाने पर 5 से 10 साल की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 69 छल या धोखे से (जैसे नौकरी या शादी का झूठा वादा) सहमति प्राप्त कर यौन संबंध बनाने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
यह खंड यौन अपराधों की कानूनी परिभाषाओं और दंडों को स्पष्ट करता है, जो पीड़ितों की सुरक्षा और अपराधियों को न्याय दिलाने के लिए महत्वपूर्ण है।
यदि कोई पुलिस अधिकारी अपनी कस्टडी में मौजूद महिला के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाता है, तो उसे धारा 64 के तहत रेप का दोषी माना जाएगा।
  • धारा 70 गैंग रेप को परिभाषित करती है, जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर रेप करते हैं, और इसके लिए न्यूनतम 20 साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। 18 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के गैंग रेप पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक हो सकता है।
  • धारा 71 बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों के लिए सजा को बढ़ाती है, जिसमें न्यूनतम आजीवन कारावास और अधिकतम मृत्युदंड तक का प्रावधान है।
  • धारा 72 रेप पीड़ितों की पहचान के सार्वजनिक खुलासे को प्रतिबंधित करती है, जिसमें उल्लंघन पर 2 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है, सिवाय कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे जांच या पीड़ित की सहमति के।
यह खंड सामूहिक यौन अपराधों की गंभीरता को रेखांकित करता है और पीड़ितों की गोपनीयता की रक्षा के महत्व पर जोर देता है।
यदि दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर किसी महिला का रेप करते हैं, तो वे सभी धारा 70 के तहत गैंग रेप के दोषी माने जाएंगे और उन्हें न्यूनतम 20 साल की सजा होगी।
  • धारा 73 कोर्ट की अनुमति के बिना महिलाओं से संबंधित मामलों की कार्यवाही को प्रकाशित करने पर रोक लगाती है, उल्लंघन पर 2 साल तक की सजा और जुर्माना।
  • धारा 74 महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करने पर 1 से 5 साल की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 75 यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) को परिभाषित करती है, जिसमें अवांछित शारीरिक स्पर्श, यौन फेवर की मांग, पोर्नोग्राफिक सामग्री दिखाना, या लैंगिक टिप्पणियां शामिल हैं, जिसके लिए 1 से 3 साल तक की सजा हो सकती है।
  • धारा 76 महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला करने पर 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 77 वायरिज्म (Voyeurism) यानी चोरी-छुपे देखना या निजी पलों को रिकॉर्ड करने पर 1 से 7 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 78 स्टॉकिंग (Stalking) यानी लगातार पीछा करने या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से निगरानी करने पर 3 से 5 साल तक की सजा और जुर्माना का प्रावधान करती है।
  • धारा 79 महिला की लज्जा का अनादर करने वाले शब्दों, इशारों या कृत्यों पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
यह खंड महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाले विभिन्न प्रकार के अपराधों को कवर करता है, जो सार्वजनिक और निजी स्थानों दोनों में उनकी गरिमा की रक्षा करते हैं।
यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के चेंजिंग रूम में छिपा हुआ कैमरा लगाकर उसकी निजी पलों को रिकॉर्ड करता है, तो यह धारा 77 के तहत वायरिज्म का अपराध होगा।
  • धारा 80 दहेज मृत्यु (Dowry Death) को परिभाषित करती है, जिसमें दहेज की मांग के कारण उत्पीड़न से महिला की मृत्यु होने पर 7 साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
  • धारा 81 धोखे से वैध विवाह का विश्वास दिलाकर सहवास करने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 82 बाइगमी (Bigamy) यानी जीवित जीवनसाथी होते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान करती है, जिसमें कुछ अपवाद भी हैं।
  • धारा 83 धोखाधड़ी से की गई विवाह की रस्मों पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 84 विवाहित महिला को आपराधिक इरादे से भगा ले जाने या रोकने पर 2 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 85 पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (Cruelty) पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 86 क्रूरता को परिभाषित करती है, जिसमें आत्महत्या के लिए मजबूर करना या गंभीर चोट पहुंचाना शामिल है, और दहेज के लिए उत्पीड़न भी इसी में आता है।
यह खंड विवाह संस्था की पवित्रता को बनाए रखने और दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों से निपटने के लिए कानूनी प्रावधान प्रदान करता है।
यदि किसी महिला की शादी के सात साल के भीतर दहेज की मांग को लेकर उसके पति या ससुराल वालों द्वारा की गई क्रूरता के कारण मृत्यु हो जाती है, तो यह धारा 80 के तहत दहेज मृत्यु मानी जाएगी।
  • धारा 88 सद्भावना के बिना गर्भपात (Miscarriage) कराने पर सजा का प्रावधान करती है, जो महिला के गर्भवती होने पर 3 साल तक और 'क्विक चाइल्ड' (भ्रूण में हलचल शुरू होने पर) होने पर 7 साल तक की सजा हो सकती है।
  • धारा 89 महिला की सहमति के बिना गर्भपात कराने पर 10 साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 90 गर्भपात के इरादे से किए गए कार्य से महिला की मृत्यु होने पर 10 साल तक की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान करती है, चाहे सहमति हो या न हो।
  • धारा 91 बच्चे को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु का कारण बनने वाले कार्य पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 92 आपराधिक मानव वध (Culpable Homicide) के समान कार्य से 'क्विक बोर्न चाइल्ड' की मृत्यु पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
यह खंड गर्भपात से संबंधित कानूनों को स्पष्ट करता है और यह सुनिश्चित करता है कि ऐसे कार्य केवल चिकित्सा कारणों से और उचित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही किए जाएं, जिससे मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा हो।
यदि कोई व्यक्ति महिला की जान बचाने के लिए नहीं, बल्कि जानबूझकर और बिना उसकी सहमति के उसका गर्भपात कराता है, तो उसे धारा 89 के तहत 10 साल तक की सजा हो सकती है।
  • धारा 93 माता-पिता या देखभाल करने वाले द्वारा 12 साल से कम उम्र के बच्चे को परित्याग करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 94 मृत शिशु के शव को गुप्त रूप से निपटाने पर 2 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 95 किसी भी अपराध को करने के लिए 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को नियोजित करने या उकसाने पर 3 से 10 साल की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 96 चाइल्ड ट्रैफिकिंग (Child Trafficking) यानी बच्चे को अनुचित संभोग या अन्य अवैध कार्यों के लिए मजबूर करने हेतु ले जाने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 97 10 साल से कम उम्र के बच्चे का अपहरण उसकी संपत्ति चुराने के इरादे से करने पर 7 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 98 बच्चे को वेश्यावृत्ति या अन्य अनैतिक उद्देश्यों के लिए बेचने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
  • धारा 99 बच्चे को वेश्यावृत्ति या अन्य अनैतिक उद्देश्यों के लिए खरीदने या किराए पर लेने पर 7 से 14 साल तक की सजा का प्रावधान करती है।
यह खंड बच्चों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें उन्हें परित्याग, शोषण और तस्करी से बचाया जाता है।
यदि कोई व्यक्ति किसी 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को चोरी करने के लिए उकसाता है या उसे किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल करता है, तो उसे धारा 95 के तहत 3 से 10 साल तक की सजा हो सकती है।

Key takeaways

  1. 1भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए IPC की तुलना में अधिक कठोर दंड और कुछ नई परिभाषाएं प्रस्तुत करती है।
  2. 2यौन अपराधों में, सहमति की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है, और नाबालिगों, मानसिक रूप से अक्षम व्यक्तियों, या धोखे के शिकार लोगों की सहमति को अमान्य माना जाता है।
  3. 3गैंग रेप और बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों के लिए सजा की अवधि बढ़ाई गई है, जिसमें मृत्युदंड तक का प्रावधान है।
  4. 4महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए यौन उत्पीड़न, वायरिज्म, स्टॉकिंग जैसे अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और दंडनीय बनाया गया है।
  5. 5दहेज मृत्यु और क्रूरता जैसे विवाह से संबंधित अपराधों के लिए सख्त दंड का प्रावधान है, जो महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाने के लिए है।
  6. 6गर्भपात से संबंधित कानून मां और अजन्मे बच्चे दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं।
  7. 7बच्चों के शोषण, तस्करी और परित्याग को रोकने के लिए BNS में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसमें अपराधियों के लिए कड़ी सजा का उल्लेख है।

Key terms

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023रेप (Rape)सहमति (Consent)गैंग रेप (Gang Rape)यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)वायरिज्म (Voyeurism)स्टॉकिंग (Stalking)दहेज मृत्यु (Dowry Death)क्रूरता (Cruelty)गर्भपात (Miscarriage)चाइल्ड ट्रैफिकिंग (Child Trafficking)बाइगमी (Bigamy)

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  1. 1भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 में रेप की परिभाषा में सहमति की क्या सीमाएं बताई गई हैं?
  2. 2धारा 64 के तहत रेप के सामान्य दंड क्या हैं, और किन विशेष व्यक्तियों के लिए भी यही दंड लागू होता है?
  3. 3यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) और वायरिज्म (Voyeurism) के बीच क्या अंतर है और BNS में इनके लिए क्या दंड हैं?
  4. 4दहेज मृत्यु (Dowry Death) को BNS की धारा 80 के तहत कैसे परिभाषित किया गया है और इसके लिए क्या सजा है?
  5. 5बच्चों के विरुद्ध अपराधों में, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को किसी अपराध के लिए नियोजित करने पर क्या दंड का प्रावधान है?

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