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Radio - Mass Media & Communications | Class 12 Sociology Chapter 7 | CBSE 2025-26
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Radio - Mass Media & Communications | Class 12 Sociology Chapter 7 | CBSE 2025-26

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6 chapters6 takeaways9 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो भारत में रेडियो के विकास और स्वतंत्र भारत में इसके महत्व पर केंद्रित है। यह बताता है कि कैसे रेडियो, जो कभी सूचना और मनोरंजन का एक प्रमुख स्रोत था, मोबाइल फोन के आने के बाद भी महत्वपूर्ण बना रहा। वीडियो भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसके प्रचार माध्यम के रूप में उपयोग, स्वतंत्रता के बाद इसके विस्तार और विभिन्न सरकारी पहलों, जैसे कि ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के माध्यम से इसके प्रसार पर प्रकाश डालता है। यह ग्रीन रिवोल्यूशन जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों को बढ़ावा देने में रेडियो की भूमिका और विविध भारती जैसे मनोरंजन चैनलों के उदय की भी चर्चा करता है। अंत में, यह बताता है कि कैसे रेडियो ने विभिन्न राष्ट्रीय आपातकालों और सामाजिक परिवर्तनों के दौरान सूचना प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे यह भारतीय समाज का एक अभिन्न अंग बन गया है।

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Chapters

  • भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत 1922 में कोलकाता और मद्रास में 'हम' ब्रॉडकास्टिंग क्लब के साथ हुई।
  • 1948 तक, यह एक सार्वजनिक प्रसारण प्रणाली में विकसित हुआ, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रचार के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में कार्य किया।
  • स्वतंत्रता के समय, भारत में केवल छह रेडियो स्टेशन थे, जो मुख्य रूप से बड़े शहरों में केंद्रित थे।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि कैसे रेडियो भारत में सूचना और संचार के एक प्रमुख माध्यम के रूप में उभरा, खासकर उस समय जब अन्य माध्यम सीमित थे।
1922 में कोलकाता और मद्रास में 'हम' ब्रॉडकास्टिंग क्लब की स्थापना।
  • स्वतंत्रता के बाद, सरकार ने रेडियो प्रसारण के बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी, विशेष रूप से राज्य की राजधानियों और सीमावर्ती क्षेत्रों में।
  • ऑल इंडिया रेडियो (AIR) को नए राष्ट्र के विकास में एक सक्रिय भागीदार के रूप में देखा गया, जिसने सरकारी योजनाओं और सामाजिक मुद्दों को प्रसारित किया।
  • AIR ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर कार्यक्रमों का प्रसारण किया, जो भारत की भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता था।
यह खंड बताता है कि कैसे रेडियो ने नव स्वतंत्र भारत के निर्माण और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जवाहरलाल नेहरू का मीडिया को 'लोकतंत्र के प्रहरी' के रूप में संबोधित करना और विकास योजनाओं को प्रसारित करने का आग्रह।
  • 1960 के दशक के मध्य में ग्रीन रिवोल्यूशन की शुरुआत के साथ, AIR ने उच्च उपज वाली किस्मों (HYVs) के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • AIR ने विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए, जिसमें विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया और किसानों के अनुभवों को साझा किया।
  • इन कार्यक्रमों ने किसानों को नई कृषि तकनीकों को अपनाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
यह उदाहरण दर्शाता है कि कैसे रेडियो का उपयोग विशिष्ट सरकारी नीतियों और विकास पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए किया जा सकता है।
1967 से लगभग 20 वर्षों तक उच्च उपज वाली किस्मों पर विशेष कार्यक्रमों का प्रसारण।
  • ऑल इंडिया रेडियो के अलावा, 'विविध भारती' एक लोकप्रिय मनोरंजन चैनल के रूप में उभरा, जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्म के गानों का प्रसारण करता था।
  • विविध भारती ने श्रोताओं के अनुरोध पर गाने बजाए और चिट्ठियों के माध्यम से अनुरोध स्वीकार किए, जिससे यह लोगों के साथ जुड़ाव का एक अनूठा माध्यम बन गया।
  • 1957 में AIR द्वारा विविध भारती का अधिग्रहण किया गया, और यह सूचना, मनोरंजन और विज्ञापनों के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बन गया।
यह खंड बताता है कि कैसे रेडियो ने मनोरंजन प्रदान करने के साथ-साथ वाणिज्यिक अवसरों का भी निर्माण किया, जिससे यह एक आत्मनिर्भर माध्यम बना।
श्रोताओं द्वारा चिट्ठियों के माध्यम से गानों के अनुरोध भेजना और विविध भारती द्वारा उन्हें प्रसारित करना।
  • रेडियो सेट की उच्च लागत और ट्रांसमिशन की सीमाएं शुरुआत में इसके प्रसार में बाधा थीं।
  • 1968 में ट्रांजिस्टर रेडियो के आगमन ने रेडियो को अधिक पोर्टेबल और सस्ता बना दिया, जिससे इसकी पहुंच बढ़ी।
  • सरकार ने रेडियो के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया, जिससे 1970 के दशक तक दो-तिहाई भारतीय घरों में रेडियो की पहुंच हो गई, जो 24 भाषाओं में प्रसारित होता था।
यह बताता है कि कैसे तकनीकी नवाचारों और सरकारी नीतियों ने रेडियो को आम आदमी के लिए सुलभ बनाया, जिससे यह एक जन माध्यम बन गया।
1968 में ट्रांजिस्टर रेडियो का लॉन्च, जिसने रेडियो को अधिक पोर्टेबल और सस्ता बनाया।
  • 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान, AIR ने 'टॉक' नामक एक कार्यक्रम शुरू किया, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित जानकारी प्रसारित की।
  • 1971 के बांग्लादेश संकट के दौरान, एक समाचार सेवा प्रभाग शुरू किया गया, जिसने सुबह 6 बजे से आधी रात तक समाचार बुलेटिन प्रसारित किए।
  • 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद, चौबीसों घंटे समाचार बुलेटिन प्रसारित किए गए, जो संकट के समय सूचना प्रसार के महत्व को दर्शाता है।
यह खंड रेडियो की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है, खासकर राष्ट्रीय संकटों और आपात स्थितियों के दौरान, जब यह सूचना का एक विश्वसनीय स्रोत होता है।
1971 के बांग्लादेश संकट के दौरान सुबह 6 बजे से आधी रात तक समाचार बुलेटिन का प्रसारण।

Key takeaways

  1. 1रेडियो भारत में सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है, खासकर मोबाइल और टेलीविजन के व्यापक प्रसार से पहले।
  2. 2स्वतंत्र भारत में, रेडियो ने राष्ट्रीय विकास, सरकारी योजनाओं के प्रसार और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
  3. 3ग्रीन रिवोल्यूशन जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों की सफलता में रेडियो के सूचनात्मक अभियानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
  4. 4विविध भारती जैसे चैनलों ने रेडियो को मनोरंजन का एक लोकप्रिय स्रोत बनाया और इसे वाणिज्यिक रूप से भी सफल बनाया।
  5. 5तकनीकी प्रगति, जैसे ट्रांजिस्टर रेडियो, ने रेडियो को अधिक सुलभ बनाया और इसकी पहुंच को ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ाया।
  6. 6राष्ट्रीय आपातकालों और संकटों के दौरान, रेडियो ने सूचना के एक विश्वसनीय और त्वरित स्रोत के रूप में कार्य किया है।

Key terms

Mass MediaRadio BroadcastingAll India Radio (AIR)Vividh BharatiGreen RevolutionHigh-Yielding Varieties (HYVs)Transistor RadioPropagandaNews Bulletin

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  1. 1भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत कब और कैसे हुई?
  2. 2स्वतंत्र भारत में ऑल इंडिया रेडियो (AIR) की क्या भूमिका थी और इसने राष्ट्रीय विकास में कैसे योगदान दिया?
  3. 3ग्रीन रिवोल्यूशन को बढ़ावा देने में रेडियो ने क्या भूमिका निभाई?
  4. 4विविध भारती क्या था और यह भारतीय श्रोताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण था?
  5. 5ट्रांजिस्टर रेडियो के आगमन ने भारत में रेडियो की पहुंच को कैसे प्रभावित किया?

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