
#1 SYBCOM SYBAF Profit Prior to Incorporation || Sem 4 | Siraj Shaikh | Mumbai University |
Siraj shaikh degree study
Overview
यह वीडियो मुंबई यूनिवर्सिटी के एस.वाई. बी.कॉम और एस.वाई. बी.ए.एफ. के छात्रों के लिए 'प्रॉफिट प्रायर टू इनकॉर्पोरेशन' (लाभ समामेलन पूर्व) के कॉन्सेप्ट को समझाने पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि कैसे एक कंपनी के रजिस्ट्रेशन से पहले और बाद के लाभ या हानि की गणना की जाती है। वीडियो में विभिन्न खर्चों और आय को इनकॉरपोरेशन की तारीख के आधार पर प्री-इनकॉरपोरेशन (समामेलन पूर्व) और पोस्ट-इनकॉरपोरेशन (समामेलन पश्चात) अवधि में विभाजित करने के तरीके बताए गए हैं, जिसमें टाइम रेश्यो और सेल्स रेश्यो जैसे महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट्स का उपयोग किया गया है। यह विषय टी.वाई. बी.कॉम के लिए भी प्रासंगिक है।
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Chapters
- यह वीडियो एस.वाई. बी.कॉम और एस.वाई. बी.ए.एफ. के छात्रों के लिए है, जो मुंबई यूनिवर्सिटी के सिलेबस पर आधारित है।
- सेमेस्टर 4 में फाइनेंशियल अकाउंटिंग और डायरेक्ट टैक्स जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे।
- फाइनेंशियल अकाउंटिंग में कंपनी फाइनल अकाउंट, रिडेम्पशन ऑफ प्रेफरेंस शेयर्स, और फॉरेन करेंसी जैसे टॉपिक शामिल हैं।
- मैनेजमेंट अकाउंटिंग के वीडियो सेमेस्टर 3 के समान ही हैं और पहले से अपलोड किए जा चुके हैं।
- डायरेक्ट टैक्स में पार्ट 2 पढ़ाया जाएगा, जिसमें टैक्स लायबिलिटी के आगे की गणना शामिल है।
- प्रॉफिट प्रायर टू इनकॉर्पोरेशन का मतलब है कंपनी के रजिस्ट्रेशन से पहले कमाए गए लाभ की गणना करना।
- जब कोई बिजनेस कंपनी के रूप में रजिस्टर होता है, तो उसके लाभ और हानि को प्री-इनकॉरपोरेशन और पोस्ट-इनकॉरपोरेशन अवधि में बांटा जाता है।
- यह विभाजन कंपनी के रजिस्ट्रेशन की तारीख के आधार पर किया जाता है।
- प्री-इनकॉरपोरेशन लाभ को कैपिटल रिजर्व में ट्रांसफर किया जाता है, जबकि पोस्ट-इनकॉरपोरेशन लाभ को प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में।
- खर्चों और आय को प्री-इनकॉरपोरेशन और पोस्ट-इनकॉरपोरेशन अवधि में विभाजित करने के लिए टाइम रेश्यो और सेल्स रेश्यो का उपयोग किया जाता है।
- टाइम रेश्यो समय की अवधि पर आधारित होता है (जैसे महीने)।
- सेल्स रेश्यो बिक्री की मात्रा पर आधारित होता है।
- कुछ खर्चे (जैसे डिबेंचर इंटरेस्ट) केवल पोस्ट-इनकॉरपोरेशन अवधि के लिए होते हैं, जबकि कुछ (जैसे प्रोपराइटर का वेतन) प्री-इनकॉरपोरेशन अवधि के लिए होते हैं।
- कंपनी 1 जुलाई 2016 को इनकॉर्पोरेट हुई और बिजनेस 1 अप्रैल 2016 को शुरू हुआ, जिससे 3 महीने का प्री-इनकॉरपोरेशन पीरियड और 9 महीने का पोस्ट-इनकॉरपोरेशन पीरियड बना।
- सेल्स को प्री-इनकॉरपोरेशन (3 महीने) और पोस्ट-इनकॉरपोरेशन (9 महीने) में 1:3 के टाइम रेश्यो में विभाजित किया गया।
- ग्रॉस प्रॉफिट (GP) को सेल्स रेश्यो में विभाजित किया गया।
- सैलरी और कमीशन जैसे खर्चों को उनके आधार (टाइम या सेल्स) के अनुसार विभाजित किया गया।
- डिबेंचर इंटरेस्ट जैसे खर्चों को केवल पोस्ट-इनकॉरपोरेशन अवधि में दिखाया गया।
- इस सम में, कंपनी 1 सितंबर 2016 को इनकॉर्पोरेट हुई और बिजनेस 1 अप्रैल 2016 को शुरू हुआ, जिससे 5 महीने का प्री-इनकॉरपोरेशन पीरियड और 7 महीने का पोस्ट-इनकॉरपोरेशन पीरियड बना (टाइम रेश्यो 5:7)।
- ग्रॉस प्रॉफिट को सेल्स रेश्यो (3 लाख प्री और 9 लाख पोस्ट) में 1:3 के अनुपात में विभाजित किया गया।
- ऑफिस स्टाफ सैलरी जैसे खर्चों को टाइम रेश्यो में विभाजित किया गया।
- सेल्समेन कमीशन को सेल्स रेश्यो में विभाजित किया गया।
- गुडविल को प्री-इनकॉरपोरेशन लाभ के रूप में दिखाया गया, जो कैपिटल रिजर्व में ट्रांसफर होगा।
Key takeaways
- कंपनी के रजिस्ट्रेशन से पहले और बाद के लाभ को अलग करना वित्तीय रिपोर्टिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- खर्चों और आय को विभाजित करने के लिए टाइम रेश्यो और सेल्स रेश्यो जैसे उचित आधारों का चयन करना आवश्यक है।
- कुछ खर्चे (जैसे डिबेंचर इंटरेस्ट) केवल पोस्ट-इनकॉरपोरेशन अवधि से संबंधित होते हैं।
- प्री-इनकॉरपोरेशन लाभ को कैपिटल रिजर्व के रूप में माना जाता है, जबकि पोस्ट-इनकॉरपोरेशन लाभ सामान्य लाभ और हानि खाते में जाता है।
- प्रॉफिट प्रायर टू इनकॉर्पोरेशन का कॉन्सेप्ट टी.वाई. बी.कॉम के लिए भी प्रासंगिक है, इसलिए इसे अच्छी तरह समझना चाहिए।
Key terms
Test your understanding
- प्रॉफिट प्रायर टू इनकॉर्पोरेशन का क्या मतलब है और इसे क्यों गणना की जाती है?
- टाइम रेश्यो और सेल्स रेश्यो की गणना कैसे की जाती है और इनका उपयोग खर्चों को विभाजित करने में कैसे होता है?
- किन खर्चों को केवल पोस्ट-इनकॉरपोरेशन अवधि में शामिल किया जाता है और क्यों?
- प्री-इनकॉरपोरेशन लाभ और पोस्ट-इनकॉरपोरेशन लाभ का वित्तीय विवरणों में क्या ट्रीटमेंट होता है?
- एक कंपनी के रजिस्ट्रेशन की तारीख लाभ के विभाजन को कैसे प्रभावित करती है?