
L(7) कार्य संचालन और वार्ड समिति | EO/RO Exam 2025 | Ceramic Academy | RPSC EO/RO Classes
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Overview
यह वीडियो नगरपालिका अधिनियम के अध्याय तीन पर केंद्रित है, जो कार्य संचालन और वार्ड समितियों से संबंधित है। इसमें मुख्य रूप से धारा 51 से 66 तक की व्याख्या की गई है, जिसमें नगरपालिकाओं की बैठकों का आयोजन, सदस्यों के अधिकार, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव, विभिन्न समितियों का गठन (जैसे वार्ड समिति, कार्यपालक समिति, वित्त समिति, स्वास्थ्य समिति आदि), समितियों के कार्य और शक्तियां, तथा नगरपालिका निधि से संबंधित प्रावधानों को समझाया गया है। वीडियो में यह भी बताया गया है कि कैसे सदस्य और अधिकारी लोक सेवक माने जाते हैं और संविदाओं में उनके हित रखने पर क्या कार्रवाई हो सकती है।
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Chapters
- नगरपालिका की बैठकें हर दो महीने में एक बार, यानी साल में न्यूनतम छह बार बुलाई जाएंगी।
- विशेष बैठक के लिए 1/3 सदस्य अध्यक्ष से अनुरोध कर सकते हैं, जिसे 7 दिन के भीतर बुलाया जाना चाहिए।
- यदि अध्यक्ष 7 दिन में बैठक नहीं बुलाता है, तो मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) अगले 10 दिनों में बैठक बुलाएगा।
- सदस्यों को अध्यक्ष से प्रश्न पूछने, प्रस्ताव रखने और CMO को नोटिस देकर अभिलेखों का निरीक्षण करने का अधिकार है।
- सदस्य नागरिक समस्याओं पर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं और सुझाव दे सकते हैं।
- अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को हटाने के लिए 3/4 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्ताव कलेक्टर को दिया जाएगा।
- कलेक्टर 30 दिनों के भीतर बैठक बुलाएगा और सदस्यों को 7 दिन पहले सूचित करेगा।
- अविश्वास प्रस्ताव चुनाव के कम से कम दो साल बाद ही लाया जा सकता है।
- यदि उप-चुनाव हुआ है, तो प्रस्ताव पदावधि समाप्त होने के आधे समय के बाद ही लाया जा सकता है।
- यदि प्रस्ताव पारित नहीं होता है, तो अगले दो वर्षों तक ऐसा प्रस्ताव दोबारा नहीं लाया जा सकता।
- वार्ड समिति का गठन उन नगरपालिकाओं में होगा जिनकी जनसंख्या 3 लाख या उससे अधिक है।
- इसमें संबंधित वार्डों के निर्वाचित सदस्य और अधिकतम पांच मनोनीत सदस्य (25 वर्ष से अधिक आयु वाले, जिन्हें प्रशासन का अनुभव हो) शामिल हो सकते हैं।
- वार्ड समिति नगरपालिका के कार्यों में सहायता करती है, जैसे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में।
- यह वार्ड में सामंजस्य, एकता और जनता की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।
- वार्ड समिति की गणपूर्ति (कोरम) के लिए अध्यक्ष सहित तीन सदस्य आवश्यक हैं।
- नगरपालिकाएं कार्यपालक समिति और अन्य समितियां (जैसे वित्त, स्वास्थ्य, भवन अनुज्ञा, गंदी बस्ती सुधार आदि) गठित कर सकती हैं।
- कार्यपालक समिति में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विपक्ष के नेता और निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
- अन्य समितियों में अधिकतम 10 सदस्य हो सकते हैं, और CMO पदेन सचिव होता है।
- नगरपालिका के आधे सदस्य अनुरोध करें तो सदस्यों से भिन्न व्यक्ति भी समितियों के सदस्य बन सकते हैं, बशर्ते वे कुल सदस्यों के 1/3 से अधिक न हों।
- सभी समितियां नगरपालिका के निर्देशों और अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करेंगी।
- यदि नगरपालिका अध्यक्ष किसी समिति का सदस्य है, तो वह पदेन अध्यक्ष होगा; यदि नहीं, तो उपाध्यक्ष पदेन अध्यक्ष हो सकता है।
- यदि कोई पदेन अध्यक्ष नहीं है, तो नगरपालिका अध्यक्ष या उपाध्यक्ष नियुक्त कर सकती है; अन्यथा, सदस्यों में से चुना जाएगा।
- समितियों की बैठकें दो महीने के भीतर बुलाई जानी चाहिए।
- नगरपालिका अध्यक्ष या समिति के कम से कम दो सदस्य अनुरोध करें तो दो दिनों के भीतर बैठक बुलाई जा सकती है।
- समितियों के आधे सदस्य गणपूर्ति के लिए आवश्यक हैं।
- नगरपालिका अपनी शक्तियों, कर्तव्यों और कार्यों को समितियों को सौंप (delegate) सकती है।
- यह प्रत्यायोजन (delegation) किसी नियम या उपबंध के प्रतिकूल नहीं होना चाहिए।
- यदि किसी सदस्य, अध्यक्ष या पीठासीन पदाधिकारी के निर्वाचन या नियुक्ति में कोई गलती पाई जाती है, तो भी समिति के कार्य या कार्यवाही अवैध नहीं मानी जाएगी।
- जब तक ऐसे सदस्य की अयोग्यता या पद रिक्त होने की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक उसके द्वारा किए गए कार्य मान्य रहेंगे।
- नगरपालिका द्वारा किए गए सभी खर्चे और संविदाएं नगरपालिका निधि से ही पूरी की जाएंगी।
- यदि अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य या अधिकारी के कदाचार (misconduct) के कारण कोई खर्चा या हानि होती है, तो वे व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
- कोई भी पदधारी (अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य, अधिकारी) नगरपालिका के साथ किसी भी संविदा (contract) में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हित नहीं रख सकता।
- ऐसा करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और 5000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- नगरपालिका के प्रत्येक सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 21 के तहत लोक सेवक (Public Servant) माना जाएगा।
- यह परिभाषा उन्हें सार्वजनिक कर्तव्य निभाने के लिए कानूनी सुरक्षा और जवाबदेही प्रदान करती है।
Key takeaways
- नगरपालिका की बैठकें नियमित होनी चाहिए और सदस्यों को प्रश्न पूछने व प्रस्ताव रखने का अधिकार है।
- अविश्वास प्रस्ताव जैसी प्रक्रियाएं जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं, लेकिन उनके लिए सख्त नियम हैं।
- वार्ड समितियां स्थानीय स्तर पर नगरपालिका के कार्यों को सुचारू बनाने में मदद करती हैं।
- विभिन्न प्रकार की समितियां नगरपालिका को विशेष कार्यों में विशेषज्ञता हासिल करने में मदद करती हैं।
- समितियों के गठन और संचालन के लिए स्पष्ट नियम हैं, जो उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करते हैं।
- वित्तीय अनुशासन और हितों के टकराव की रोकथाम के लिए कड़े प्रावधान हैं।
- नगरपालिका के अधिकारी और सदस्य लोक सेवक माने जाते हैं, जो उनकी जिम्मेदारियों को बढ़ाते हैं।
Key terms
Test your understanding
- नगरपालिका की साधारण बैठकें कितने समय के अंतराल पर बुलाई जानी चाहिए और न्यूनतम कितनी बैठकें होनी चाहिए?
- अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए कितने सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं और यह प्रस्ताव कब लाया जा सकता है?
- वार्ड समिति का गठन किन नगरपालिकाओं में किया जाता है और इसकी गणपूर्ति के लिए कितने सदस्य आवश्यक हैं?
- समितियों के अध्यक्ष का चुनाव कैसे होता है और यदि कोई पदेन अध्यक्ष न हो तो क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है?
- यदि किसी सदस्य के निर्वाचन में कोई गलती पाई जाती है, तो क्या उसके द्वारा किए गए नगरपालिका के कार्य अवैध हो जाएंगे? क्यों या क्यों नहीं?