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D and F Block Elements Class 12 in One Shot | Class 12th Chemistry Chapter-4 | CBSE 2026-27
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D and F Block Elements Class 12 in One Shot | Class 12th Chemistry Chapter-4 | CBSE 2026-27

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7 chapters7 takeaways17 key terms6 questions

Overview

यह वीडियो डी और एफ ब्लॉक के तत्वों (elements) के बारे में एक विस्तृत जानकारी प्रदान करता है, जो क्लास 12 के रसायन विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसमें इन तत्वों की इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन, उनकी विभिन्न भौतिक और रासायनिक प्रॉपर्टीज़ जैसे मेल्टिंग पॉइंट, एटॉमिक साइज, आयनाइजेशन एंथैल्पी, ऑक्सीडेशन स्टेट, मैग्नेटिक प्रॉपर्टीज़, और कलर्ड आयन बनाने की क्षमता पर चर्चा की गई है। वीडियो में लैंथेनॉइड कॉन्ट्रैक्शन और इंटरस्टीशियल कंपाउंड्स जैसे विशेष कॉन्सेप्ट्स को भी समझाया गया है, और यह बताया गया है कि क्यों जिंक जैसे कुछ डी-ब्लॉक तत्व ट्रांजिशन मेटल नहीं माने जाते।

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Chapters

  • डी ब्लॉक को ट्रांजिशन एलिमेंट्स कहा जाता है क्योंकि ये एस (मेटल्स) और पी (नॉन-मेटल्स) ब्लॉक के बीच में होते हैं और परिवर्तन (transition) लाते हैं।
  • एफ ब्लॉक को इनर ट्रांजिशन एलिमेंट्स कहा जाता है, जिसमें लैंथेनॉइड्स और एक्टिनॉइड्स शामिल हैं, जिन्हें उनकी अलग प्रॉपर्टीज़ के कारण पीरियडिक टेबल से अलग रखा गया है।
  • डी ब्लॉक की जनरल इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन (n-1)d^(1-10) ns^(1-2) होती है।
  • एफ ब्लॉक की जनरल इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन (n-2)f^(1-14) (n-1)d^(0-1) ns^2 होती है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि डी और एफ ब्लॉक के तत्व पीरियडिक टेबल में कहाँ स्थित हैं और उनकी मूल इलेक्ट्रॉनिक संरचना क्या है, क्योंकि यह उनकी प्रॉपर्टीज़ को समझने की नींव रखता है।
डी ब्लॉक में स्कैंडियम से जिंक तक के तत्व शामिल हैं, जबकि एफ ब्लॉक में लैंथेनम के बाद लैंथेनॉइड्स और एक्टिनम के बाद एक्टिनॉइड्स आते हैं।
  • डी ब्लॉक में 3D, 4D, 5D और 6D सीरीज होती हैं।
  • अधिकांश तत्वों की इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन अपेक्षित पैटर्न का पालन करती है, जैसे स्कैंडियम (Ar 4s² 3d¹)।
  • क्रोमियम (Ar 4s¹ 3d⁵) और कॉपर (Ar 4s¹ 3d¹⁰) इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन के एक्सेप्शन हैं क्योंकि वे हाफ-फिल्ड (d⁵) या फुल्ली-फिल्ड (d¹⁰) डी ऑर्बिटल्स के कारण अधिक स्थिर होते हैं।
क्रोमियम और कॉपर जैसे तत्वों के एक्सेप्शनल कॉन्फ़िगरेशन को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता और अन्य प्रॉपर्टीज़ को प्रभावित करता है।
क्रोमियम की अपेक्षित कॉन्फ़िगरेशन Ar 4s² 3d⁴ होती, लेकिन यह वास्तव में Ar 4s¹ 3d⁵ होती है। कॉपर की अपेक्षित कॉन्फ़िगरेशन Ar 4s² 3d⁹ होती, लेकिन यह वास्तव में Ar 4s¹ 3d¹⁰ होती है।
  • ट्रांजिशन एलिमेंट्स वे होते हैं जिनके पास अपूर्ण (incompletely filled) डी ऑर्बिटल्स होती हैं, या तो ग्राउंड स्टेट में या किसी एक सामान्य ऑक्सीडेशन स्टेट में।
  • जिंक (Zn), कैडमियम (Cd), और मरकरी (Hg) को नॉन-ट्रांजिशन एलिमेंट्स माना जाता है क्योंकि उनकी ग्राउंड स्टेट में डी ऑर्बिटल्स पूरी तरह से भरी होती हैं (d¹⁰) और वे सामान्य ऑक्सीडेशन स्टेट में भी अपूर्ण डी ऑर्बिटल्स नहीं दिखाते।
  • स्कैंडियम (Sc) ट्रांजिशन एलिमेंट है क्योंकि इसकी ग्राउंड स्टेट में d¹ कॉन्फ़िगरेशन होती है, जिसमें अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन होते हैं।
यह भेद करना महत्वपूर्ण है कि कौन से डी-ब्लॉक तत्व वास्तव में ट्रांजिशन एलिमेंट्स हैं, क्योंकि यह उनकी अद्वितीय प्रॉपर्टीज़ जैसे मैग्नेटिक बिहेवियर और कलर फॉर्मेशन को निर्धारित करता है।
जिंक का इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन [Ar] 3d¹⁰ 4s² है, जिसमें सभी डी इलेक्ट्रॉन पेयर्ड हैं, इसलिए यह ट्रांजिशन एलिमेंट नहीं है। स्कैंडियम का इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन [Ar] 3d¹ 4s² है, जिसमें एक अनपेयर्ड डी इलेक्ट्रॉन है, इसलिए यह ट्रांजिशन एलिमेंट है।
  • डी ब्लॉक एलिमेंट्स में टिपिकल मैटेलिक प्रॉपर्टीज़ होती हैं जैसे हाई टेंसाइल स्ट्रेंथ, डक्टिलिटी, मैलिएबिलिटी, हाई थर्मल और इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, और मैटेलिक लस्टर।
  • इन तत्वों में आमतौर पर हाई मेल्टिंग और बॉइलिंग पॉइंट होते हैं क्योंकि उनके पास अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स के कारण मजबूत मेटैलिक बॉन्ड होते हैं।
  • मेल्टिंग पॉइंट का ट्रेंड पहले बढ़ता है, फिर मैंगनीज (Mn) और टेक्नीशियम (Tc) में एक डिप आता है, और फिर घटता है, जो अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स की संख्या और पेयरिंग से प्रभावित होता है।
  • एंथैल्पी ऑफ एटमाइजेशन भी उच्च होती है क्योंकि मजबूत मेटैलिक बॉन्ड को तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है; मैंगनीज और टेक्नीशियम में यह कम होती है क्योंकि उनकी स्टेबल हाफ-फिल्ड डी ऑर्बिटल्स होती हैं।
इन भौतिक प्रॉपर्टीज़ को समझना औद्योगिक अनुप्रयोगों और विभिन्न तत्वों के व्यवहार की भविष्यवाणी के लिए महत्वपूर्ण है।
मैंगनीज का मेल्टिंग पॉइंट अपेक्षा से कम होता है क्योंकि इसकी 3d⁵ इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन इसे अपेक्षाकृत स्थिर बनाती है, जिससे मेटैलिक बॉन्ड कमजोर हो जाता है।
  • डी ब्लॉक में बाएं से दाएं जाने पर एटॉमिक साइज पहले घटता है (न्यूक्लियर चार्ज बढ़ने के कारण), फिर स्थिर रहता है (इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन रिपल्शन और न्यूक्लियर चार्ज के बीच संतुलन के कारण), और अंत में थोड़ा बढ़ सकता है (ज्यादा पेयरिंग और रिपल्शन के कारण)।
  • टॉप से बॉटम जाने पर एटॉमिक साइज बढ़ता है, लेकिन ज़िरकोनियम (Zr) और हॉफियम (Hf) के बीच लैंथेनॉइड कॉन्ट्रैक्शन के कारण साइज लगभग समान रहता है।
  • लैंथेनॉइड कॉन्ट्रैक्शन 4f इलेक्ट्रॉन्स के खराब शील्डिंग इफेक्ट के कारण होता है, जिससे एटॉमिक रेडियस में क्रमिक कमी आती है।
  • आयनाइजेशन एंथैल्पी बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है, लेकिन एटॉमिक साइज के ट्रेंड में अनियमितताओं के कारण इसमें भी कुछ उतार-चढ़ाव आते हैं, विशेषकर कॉपर और जिंक जैसे तत्वों में जहां फुल्ली-फिल्ड डी ऑर्बिटल्स के कारण आयनाइजेशन एंथैल्पी अधिक होती है।
एटॉमिक साइज और आयनाइजेशन एंथैल्पी किसी तत्व की प्रतिक्रियाशीलता, बॉन्डिंग क्षमता और आयन बनाने की प्रवृत्ति को सीधे प्रभावित करते हैं।
ज़िरकोनियम और हॉफियम का एटॉमिक साइज लगभग समान (लगभग 160 pm) होता है, जो कि लैंथेनॉइड कॉन्ट्रैक्शन का एक प्रमुख उदाहरण है, जबकि सामान्य ट्रेंड के अनुसार हॉफियम का साइज बड़ा होना चाहिए था।
  • डी ब्लॉक एलिमेंट्स वेरिएबल ऑक्सीडेशन स्टेट्स दिखाते हैं क्योंकि उनके ns और (n-1)d दोनों ऑर्बिटल्स में इलेक्ट्रॉन्स होते हैं जो बॉन्डिंग में भाग ले सकते हैं।
  • मैंगनीज (Mn) सबसे अधिक ऑक्सीडेशन स्टेट्स (+2 से +7) दिखाता है, जबकि +2 और +3 सबसे आम ऑक्सीडेशन स्टेट्स हैं।
  • पैरामैग्नेटिक सब्सटेंस में अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स होते हैं और वे चुंबकीय क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं।
  • डायमैग्नेटिक सब्सटेंस में सभी इलेक्ट्रॉन्स पेयर्ड होते हैं और वे चुंबकीय क्षेत्र से प्रतिकर्षित होते हैं।
  • मैग्नेटिक मोमेंट की गणना स्पिन-ओनली फॉर्मूले μ = √n(n+2) BM का उपयोग करके की जाती है, जहाँ n अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स की संख्या है।
ऑक्सीडेशन स्टेट्स और मैग्नेटिक प्रॉपर्टीज़ इन तत्वों की रासायनिक प्रतिक्रियाओं और उनके अनुप्रयोगों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मैंगनीज +2 (Mn²⁺) से लेकर +7 (Mn²⁺) तक की ऑक्सीडेशन स्टेट्स दिखा सकता है, जबकि जिंक केवल +2 दिखाता है।
  • डी ब्लॉक एलिमेंट्स के आयन अक्सर रंगीन होते हैं क्योंकि उनमें डीडी ट्रांजिशन (d-d transitions) होते हैं, जहाँ इलेक्ट्रॉन दृश्यमान स्पेक्ट्रम से ऊर्जा अवशोषित करके उत्तेजित अवस्था में जाते हैं और फिर रंगीन प्रकाश उत्सर्जित करते हुए वापस आते हैं।
  • इंटरस्टीशियल कंपाउंड्स तब बनते हैं जब छोटे परमाणु (जैसे H, C, N) धातु की क्रिस्टल लैटिस के खाली स्थानों में फंस जाते हैं।
  • ये इंटरस्टीशियल कंपाउंड्स अक्सर बहुत कठोर होते हैं, उनका मेल्टिंग पॉइंट उच्च होता है, और वे अपनी मेटैलिक कंडक्टिविटी बनाए रखते हैं।
रंगीन आयनों का निर्माण और इंटरस्टीशियल कंपाउंड्स का बनना डी ब्लॉक एलिमेंट्स की विशिष्ट विशेषताएं हैं जिनके विभिन्न औद्योगिक और रासायनिक अनुप्रयोग होते हैं।
टाइटेनियम (III) आयन (Ti³⁺) बैंगनी रंग का होता है, जबकि वेनेडियम (IV) आयन (V⁴⁺) नीले रंग का होता है।

Key takeaways

  1. 1डी और एफ ब्लॉक के तत्वों की इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन उनकी प्रॉपर्टीज़ को समझने की कुंजी है, जिसमें क्रोमियम और कॉपर जैसे एक्सेप्शन शामिल हैं।
  2. 2ट्रांजिशन एलिमेंट्स की पहचान उनके अपूर्ण डी ऑर्बिटल्स से होती है, जबकि जिंक, कैडमियम और मरकरी जैसे तत्व इस परिभाषा में फिट नहीं बैठते।
  3. 3डी ब्लॉक एलिमेंट्स में उच्च मेल्टिंग पॉइंट, उच्च एंथैल्पी ऑफ एटमाइजेशन और वेरिएबल ऑक्सीडेशन स्टेट्स जैसी कई विशिष्ट भौतिक और रासायनिक प्रॉपर्टीज़ होती हैं।
  4. 4एटॉमिक साइज का ट्रेंड डी ब्लॉक में जटिल होता है, जिसमें कमी, स्थिरता और वृद्धि का एक पैटर्न देखा जाता है, जो न्यूक्लियर चार्ज और इलेक्ट्रॉन पेयरिंग से प्रभावित होता है।
  5. 5लैंथेनॉइड कॉन्ट्रैक्शन 4f इलेक्ट्रॉन्स के खराब शील्डिंग इफेक्ट के कारण होता है, जिससे लैंथेनाइड्स के एटॉमिक साइज में क्रमिक कमी आती है।
  6. 6पैरामैग्नेटिक और डायमैग्नेटिक बिहेवियर अनपेयर्ड और पेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स की उपस्थिति पर निर्भर करता है, जो मैग्नेटिक मोमेंट को निर्धारित करता है।
  7. 7डी ब्लॉक एलिमेंट्स के आयन अक्सर रंगीन होते हैं, जिसका कारण डीडी ट्रांजिशन है, और वे इंटरस्टीशियल कंपाउंड्स भी बना सकते हैं।

Key terms

ट्रांजिशन एलिमेंट्स (Transition Elements)इनर ट्रांजिशन एलिमेंट्स (Inner Transition Elements)इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन (Electronic Configuration)अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स (Unpaired Electrons)पेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स (Paired Electrons)मेटैलिक बॉन्ड (Metallic Bond)मेल्टिंग पॉइंट (Melting Point)एंथैल्पी ऑफ एटमाइजेशन (Enthalpy of Atomization)एटॉमिक साइज (Atomic Size)लैंथेनॉइड कॉन्ट्रैक्शन (Lanthanoid Contraction)आयनाइजेशन एंथैल्पी (Ionization Enthalpy)ऑक्सीडेशन स्टेट (Oxidation State)पैरामैग्नेटिक (Paramagnetic)डायमैग्नेटिक (Diamagnetic)मैग्नेटिक मोमेंट (Magnetic Moment)डीडी ट्रांजिशन (d-d Transition)इंटरस्टीशियल कंपाउंड्स (Interstitial Compounds)

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  1. 1डी ब्लॉक के कौन से तत्व ट्रांजिशन एलिमेंट्स नहीं माने जाते हैं और क्यों?
  2. 2क्रोमियम और कॉपर की इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन में एक्सेप्शन क्यों होते हैं?
  3. 3डी ब्लॉक एलिमेंट्स के उच्च मेल्टिंग पॉइंट और उच्च एंथैल्पी ऑफ एटमाइजेशन का क्या कारण है?
  4. 4लैंथेनॉइड कॉन्ट्रैक्शन क्या है और यह डी ब्लॉक एलिमेंट्स के एटॉमिक साइज को कैसे प्रभावित करता है?
  5. 5पैरामैग्नेटिक और डायमैग्नेटिक सब्सटेंस के बीच मुख्य अंतर क्या है और यह अनपेयर्ड इलेक्ट्रॉन्स से कैसे संबंधित है?
  6. 6डी ब्लॉक एलिमेंट्स के आयन रंगीन क्यों होते हैं?

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