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UPSSSC JUNIOR ASSISTANT| POLITY CLASS - 1|राजनीति, राष्ट्र,राज्य,संविधान क्या है,ऐतिहासिक प्रष्ठभूमि
GS REVOLUTION
Overview
यह वीडियो भारतीय राजनीति की मूल अवधारणाओं जैसे राजनीति, राष्ट्र, राज्य और संविधान का परिचय देता है। यह संविधान के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संविधान सभा की भूमिका, और विभिन्न देशों से लिए गए संवैधानिक प्रावधानों पर प्रकाश डालता है। वीडियो में मूल अधिकार, राज्य के नीति निर्देशक तत्व, आपातकालीन प्रावधान, और विभिन्न सरकारी निकायों जैसे संसद, न्यायपालिका और कार्यपालिका की संरचना और कार्यों को भी समझाया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को भारतीय राजव्यवस्था की एक मजबूत समझ प्रदान करना है ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन कर सकें।
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Chapters
- राजनीति समाज में सह-अस्तित्व बनाए रखने के लिए लोगों द्वारा की जाने वाली अंतर-क्रियाओं का नीतिगत और संस्थागत स्वरूप है।
- समाज में लोग एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, भले ही वे सीधे तौर पर जुड़े न हों।
- इस सह-अस्तित्व को बनाए रखने के लिए नियम और नीतियां बनाई जाती हैं, जिनके द्वारा संस्थाएं स्वयं को शासित करती हैं।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि राजनीति केवल सत्ता संघर्ष नहीं है, बल्कि समाज को व्यवस्थित रखने का एक तरीका है, जो आगे की अवधारणाओं को समझने की नींव रखता है।
घर के बाहर गंदगी करने से पड़ोसी का प्रभावित होना, जो सामाजिक सह-अस्तित्व बनाए रखने के लिए नियमों की आवश्यकता को दर्शाता है।
- राष्ट्र एक भावनात्मक समुदाय है जो धर्म, भाषा, जातीयता, नस्ल, संस्कृति या साझा इतिहास जैसे सामान्य तत्वों से बंधा होता है।
- राष्ट्रवाद अपने राष्ट्र या संस्कृति के प्रति गौरव और समर्पण की भावना है।
- राज्य को एक देश के रूप में समझा जाना चाहिए जिसके चार प्रमुख तत्व हैं: भूमि, जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता (सोवरेन्टी)।
- संप्रभुता का अर्थ है आंतरिक और बाह्य निर्णय लेने में स्वतंत्रता।
राष्ट्र और राज्य के बीच अंतर को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये शब्द अक्सर भ्रमित करते हैं, और राज्य की संप्रभुता एक स्वतंत्र देश के लिए मौलिक है।
पाकिस्तान के IMF से लोन लेने के लिए अपनी मिसाइल प्रोग्राम खत्म करने की शर्त उसकी संप्रभुता पर बाहरी प्रभाव को दर्शाती है।
- संविधान एक विधिक दस्तावेज है जिसमें देश के संचालन के नियम, संस्थानों की संरचना और उनके कार्यप्रणाली का वर्णन होता है।
- यह देश की प्रकृति को परिभाषित करता है, जैसे भारत का धर्मनिरपेक्ष राज्य होना।
- संविधान देश को चलाने के लिए मूलभूत सिद्धांत प्रदान करता है।
संविधान को समझना आवश्यक है क्योंकि यह देश के शासन की रीढ़ है और नागरिकों के अधिकारों और राज्य की शक्तियों को परिभाषित करता है।
भारत का धर्मनिरपेक्ष राज्य होना संविधान द्वारा परिभाषित किया गया है, जो सभी धर्मों के लोगों को स्वतंत्रतापूर्वक रहने की अनुमति देता है।
- भारत में कानून द्वारा शासन की प्रक्रिया 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट से शुरू हुई, जिसने बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल बनाया।
- 1784 के पिट्स इंडिया एक्ट ने कंपनी पर नियंत्रण के लिए बोर्ड ऑफ कंट्रोल की स्थापना की।
- 1813 और 1833 के अधिनियमों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को धीरे-धीरे समाप्त किया।
- 1858 के भारत सरकार अधिनियम ने कंपनी के शासन को समाप्त कर ब्रिटिश ताज का सीधा शासन स्थापित किया।
- 1909 (मार्ले-मिंटो सुधार) और 1919 (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) के अधिनियमों ने सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और द्वैध शासन जैसी व्यवस्थाएं पेश कीं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने से यह पता चलता है कि वर्तमान संवैधानिक ढांचा कैसे विकसित हुआ और ब्रिटिश शासन के दौरान क्या महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल ऑफ बंगाल कहा जाने लगा, जो प्रशासनिक शक्ति के केंद्रीकरण की शुरुआत थी।
- संविधान सभा की मांग 1934 में एम. एन. रॉय ने की, और 1935 में कांग्रेस ने इसे अपनाया।
- 1942 में क्रिप्स मिशन और 1946 में कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों के बाद संविधान सभा का गठन हुआ।
- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, और इसमें 389 सदस्य थे, जो बाद में विभाजन के बाद 299 रह गए।
- संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को अपनाया, और विभिन्न समितियों के माध्यम से संविधान का मसौदा तैयार किया।
संविधान सभा वह संस्था थी जिसने भारत के संविधान का निर्माण किया, इसलिए इसकी संरचना, कार्यप्रणाली और निर्णयों को समझना महत्वपूर्ण है।
जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को पेश किया गया उद्देश्य प्रस्ताव, जो बाद में संविधान की प्रस्तावना का आधार बना।
- प्रस्तावना 'हम भारत के लोग' से शुरू होती है और संविधान के आदर्शों को दर्शाती है।
- प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता जैसे शब्द बाद में जोड़े गए।
- अनुच्छेद 1-4 संघ और उसके राज्य क्षेत्र से संबंधित हैं, जिसमें भारत को 'राज्यों का संघ' कहा गया है।
- संसद को नए राज्यों के निर्माण, सीमाओं में परिवर्तन और नाम बदलने का अधिकार है।
प्रस्तावना संविधान का सार है, और संघ एवं राज्य क्षेत्र का वर्णन देश की भौगोलिक और राजनीतिक संरचना को समझने के लिए मौलिक है।
किसी नए राज्य का निर्माण या किसी राज्य के नाम में परिवर्तन संसद द्वारा अनुच्छेद 3 के तहत किया जा सकता है।
- अनुच्छेद 5-11 नागरिकता के अधिग्रहण और समाप्ति से संबंधित हैं।
- मूल अधिकार (अनुच्छेद 12-35) नागरिकों को राज्य के मनमाने हस्तक्षेप से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
- अनुच्छेद 12 में 'राज्य' की परिभाषा दी गई है, जिसमें सरकार, संसद, विधानमंडल और स्थानीय निकाय शामिल हैं।
- अनुच्छेद 13 कहता है कि मूल अधिकारों से असंगत कानून शून्य होंगे।
- समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18), स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22), और शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24) प्रमुख मूल अधिकार हैं।
नागरिकता आपको राज्य का सदस्य बनाती है, और मूल अधिकार आपके व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा की गारंटी देते हैं, जो एक लोकतांत्रिक समाज के लिए आवश्यक हैं।
अनुच्छेद 15 के तहत धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर सार्वजनिक स्थानों पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
- राज्य के नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 36-51) कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए राज्य को निर्देश देते हैं, लेकिन ये न्यायोचित नहीं हैं।
- ये तत्व आयरलैंड के संविधान से प्रेरित हैं और सामाजिक-आर्थिक न्याय को बढ़ावा देते हैं।
- मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A) नागरिकों के लिए राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों को परिभाषित करते हैं, जो 1976 में स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़े गए।
- अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के पूरक हैं।
नीति निर्देशक तत्व राज्य को मार्गदर्शन देते हैं कि कैसे एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण किया जाए, जबकि मूल कर्तव्य नागरिकों को उनकी जिम्मेदारियों की याद दिलाते हैं।
अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के स्वशासन को बढ़ावा देने की बात करता है, जो नीति निर्देशक तत्व का एक उदाहरण है।
- संघीय कार्यपालिका में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल शामिल हैं।
- राष्ट्रपति (अनुच्छेद 52-62) देश का प्रमुख होता है, जबकि प्रधानमंत्री (अनुच्छेद 74-78) सरकार का प्रमुख होता है।
- संसद (अनुच्छेद 79-122) में लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति शामिल हैं, जो कानून बनाती है।
- विधायिका (संसद) कानून बनाती है और कार्यपालिका (सरकार) उन्हें लागू करती है।
कार्यपालिका और विधायिका सरकार के दो प्रमुख स्तंभ हैं जो देश के शासन और कानून निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं।
राष्ट्रपति का क्षमादान का अधिकार (अनुच्छेद 72) संघीय कार्यपालिका की शक्तियों का एक उदाहरण है।
- उच्चतम न्यायालय (अनुच्छेद 124-147) देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जो मूल अधिकारों की रक्षा करती है।
- उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय भी न्यायपालिका का हिस्सा हैं।
- संघीय व्यवस्था (सातवीं अनुसूची) केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के विभाजन को दर्शाती है, जिसमें संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची शामिल हैं।
- वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण में मदद करता है।
एक स्वतंत्र न्यायपालिका और स्पष्ट संघीय ढांचा देश में कानून के शासन और शक्तियों के संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय से परामर्श ले सकता है, जो न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संबंध को दर्शाता है।
- आपातकालीन प्रावधानों (अनुच्छेद 352, 356, 360) में राष्ट्रीय आपातकाल, राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल शामिल हैं।
- आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों का निलंबन हो सकता है (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर)।
- संवैधानिक निकायों में चुनाव आयोग, यूपीएससी, और अन्य निकाय जैसे मानवाधिकार आयोग शामिल हैं।
- राजनीतिक दल राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा कैसे प्राप्त करते हैं, यह भी चर्चा का विषय है।
आपातकालीन प्रावधान देश की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करते हैं, जबकि विभिन्न निकाय शासन प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं।
युद्ध या बाहरी आक्रमण के समय राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) लगाया जा सकता है।
- यूके से विधि का शासन, संसदीय स्वरूप, कैबिनेट प्रणाली और द्विसदनीय संसद ली गई।
- यूएसए से लिखित संविधान, मौलिक अधिकार, उपराष्ट्रपति का पद और न्यायिक पुनर्विलोकन लिया गया।
- आयरलैंड से राज्य के नीति निर्देशक तत्व और राष्ट्रपति के निर्वाचन की विधि ली गई।
- कनाडा से संघीय व्यवस्था (मजबूत केंद्र के साथ) और अवशिष्ट शक्तियां केंद्र के पास होने का प्रावधान लिया गया।
- फ्रांस से गणतंत्र, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार लिए गए।
यह जानना महत्वपूर्ण है कि भारतीय संविधान विभिन्न देशों के सर्वोत्तम संवैधानिक प्रावधानों का एक मिश्रण है, जो इसे एक मजबूत और समावेशी ढांचा प्रदान करता है।
अमेरिका के संविधान से प्रेरित होकर भारत ने अपने नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए हैं।
Key takeaways
- राजनीति समाज में व्यवस्था और सह-अस्तित्व बनाए रखने की एक प्रक्रिया है, जो नीतियों और संस्थाओं के माध्यम से संचालित होती है।
- राष्ट्र एक भावनात्मक जुड़ाव है, जबकि राज्य एक राजनीतिक इकाई है जिसके चार आवश्यक तत्व (भूमि, जनसंख्या, सरकार, संप्रभुता) होते हैं।
- संविधान देश का सर्वोच्च कानून है जो शासन के सिद्धांतों, संस्थानों की संरचना और नागरिकों के अधिकारों को परिभाषित करता है।
- भारतीय संविधान ऐतिहासिक अधिनियमों और विभिन्न देशों के संवैधानिक प्रावधानों के अध्ययन का परिणाम है।
- मूल अधिकार नागरिकों की स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं, जबकि नीति निर्देशक तत्व कल्याणकारी राज्य की स्थापना का मार्गदर्शन करते हैं।
- सरकार की विधायी, कार्यकारी और न्यायिक शाखाएं शक्तियों के पृथक्करण और संतुलन के सिद्धांत पर कार्य करती हैं।
- आपातकालीन प्रावधान देश की अखंडता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनका प्रयोग विवेकपूर्ण होना चाहिए।
Key terms
राजनीति (Polity)राष्ट्र (Nation)राज्य (State)संप्रभुता (Sovereignty)संविधान (Constitution)संविधान सभा (Constituent Assembly)प्रस्तावना (Preamble)मूल अधिकार (Fundamental Rights)नीति निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy)संघीय व्यवस्था (Federal System)कार्यपालिका (Executive)विधायिका (Legislature)न्यायपालिका (Judiciary)आपातकाल (Emergency)
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- राजनीति को समाज में सह-अस्तित्व बनाए रखने की प्रक्रिया के रूप में कैसे परिभाषित किया जा सकता है?
- एक राज्य के चार प्रमुख तत्व क्या हैं और संप्रभुता का क्या महत्व है?
- संविधान को देश का सर्वोच्च कानून क्यों माना जाता है और यह कैसे कार्य करता है?
- भारतीय संविधान के निर्माण में संविधान सभा की क्या भूमिका थी?
- मूल अधिकार और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के बीच मुख्य अंतर क्या हैं और वे देश के शासन में कैसे योगदान करते हैं?
- भारतीय संघीय व्यवस्था में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन कैसे किया गया है?