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Edman Degradation Method of Protein Sequencing
Biotechnology by Dr. Swati Upadhyay
Overview
यह वीडियो प्रोटीन सीक्वेंसिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एडमन डिग्रेडेशन विधि की व्याख्या करता है। यह विधि प्रोटीन के एन-टर्मिनल सिरे से एक-एक करके अमीनो एसिड की पहचान करने के लिए उपयोग की जाती है। वीडियो में विधि के चरणों, जैसे कपलिंग, क्लीवेज और कन्वर्जन, के साथ-साथ इसके लाभ और हानियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। यह विधि विशेष रूप से छोटे पेप्टाइड्स के लिए उपयोगी है और इसके लिए प्रोटीन डेटाबेस की आवश्यकता नहीं होती है।
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Chapters
- एडमन डिग्रेडेशन विधि प्रोटीन के एन-टर्मिनल सिरे से अमीनो एसिड सीक्वेंस का पता लगाने के लिए उपयोग की जाती है।
- इस विधि को पी. एडमन ने 1950 में विकसित किया था।
- यह विधि केवल छोटे पेप्टाइड्स (लगभग 50 अमीनो एसिड तक) के लिए प्रभावी है।
यह समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रोटीन की संरचना और कार्य को समझने का एक foundational तरीका है, खासकर जब प्रोटीन डेटाबेस उपलब्ध न हो।
वीडियो में बताया गया है कि प्रोटीन के एन-टर्मिनल सिरे पर एक फ्री अमीनो ग्रुप (NH2) होता है, जिससे यह विधि शुरू होती है।
- सीक्वेंसिंग से पहले, प्रोटीन को आइसोलेट और प्यूरिफाई करना आवश्यक है।
- प्रोटीन के टर्शियरी स्ट्रक्चर को बीटा-मरकैप्टोएथेनॉल का उपयोग करके तोड़ा जाता है, जिससे डाईसल्फाइड बॉन्ड खुल जाते हैं और प्रोटीन लीनियर हो जाता है।
- बड़े प्रोटीनों को छोटे पेप्टाइड्स में तोड़ने के लिए ट्रिप्सिन या साइनोजन ब्रोमाइड (CNBr) जैसे अभिकर्मकों का उपयोग किया जाता है।
- छोटे पेप्टाइड्स को SDS-PAGE जैसी तकनीकों का उपयोग करके अलग किया जाता है।
यह चरण सुनिश्चित करता है कि एडमन डिग्रेडेशन के लिए उपयोग किए जाने वाले पेप्टाइड्स सही आकार के हों और विधि प्रभावी ढंग से काम कर सके।
प्रोटीन के डाईसल्फाइड बॉन्ड को तोड़ने के लिए बीटा-मरकैप्टोएथेनॉल (beta-mercaptoethanol) का उपयोग करना।
- पहला चरण 'कपलिंग' है, जिसमें फिनाइल आइसोथियोसाइनेट (PITC) पेप्टाइड के एन-टर्मिनल अल्फा-अमीनो ग्रुप के साथ रिएक्ट करता है, जिससे फिनाइल थायोकार्बेमोयल (PTC) डेरिवेटिव बनता है। यह रिएक्शन माइल्ड एल्कलाइन कंडीशन (pH 8.6) में होता है।
- दूसरा चरण 'क्लीवेज' है, जिसमें TFA (ट्राइफ्लोरोएसेटिक एसिड) जैसे स्ट्रांग एसिड का उपयोग एनहाइड्रस कंडीशन में किया जाता है। यह पहले पेप्टाइड बॉन्ड को तोड़ता है और पहले अमीनो एसिड को एक एटी (एनीलिनोथियाज़ोलिनोन) डेरिवेटिव के रूप में अलग करता है।
- तीसरा चरण 'कन्वर्जन' है, जिसमें अस्थिर एटी डेरिवेटिव को एक स्टेबल फिनाइल थायोहाइडेंटोइन (PTH) डेरिवेटिव में बदला जाता है। इस PTH डेरिवेटिव को फिर HPLC द्वारा पहचाना जाता है।
यह विधि का कोर है, जो एक समय में एक अमीनो एसिड को निकालने और पहचानने की प्रक्रिया को परिभाषित करता है, जिससे प्रोटीन सीक्वेंस का पता चलता है।
PITC का एन-टर्मिनल अमीनो ग्रुप के साथ रिएक्ट करके PTC डेरिवेटिव बनाना।
- लाभ: यह विधि प्रोटीन डेटाबेस के बिना अमीनो एसिड सीक्वेंस की जानकारी प्रदान करती है और यह एक्यूरेट है। यह एक बार में केवल एक पेप्टाइड बॉन्ड को डिस्टर्ब करती है।
- हानि: यह एक समय लेने वाली और महंगी प्रक्रिया है।
- हानि: यह एक साथ कई प्रोटीनों का विश्लेषण नहीं कर सकती और केवल एक बार में एक पेप्टाइड का विश्लेषण करती है।
- हानि: यदि एन-टर्मिनल अमीनो ग्रुप मॉडिफाइड हो या साइक्लिक स्ट्रक्चर में हो, तो यह विधि काम नहीं करती है।
- हानि: 50 अमीनो एसिड से लंबे पेप्टाइड्स के लिए यह विधि स्टेरिक हिंड्रेंस के कारण प्रभावी नहीं होती है।
इन लाभों और हानियों को समझने से यह तय करने में मदद मिलती है कि किसी विशेष प्रयोग के लिए एडमन डिग्रेडेशन विधि उपयुक्त है या नहीं।
यह विधि मल्टीपल प्रोटीनों का एक साथ विश्लेषण नहीं कर सकती, यह इसकी एक प्रमुख सीमा है।
Key takeaways
- एडमन डिग्रेडेशन विधि प्रोटीन के एन-टर्मिनल से अमीनो एसिड को एक-एक करके निकालने और पहचानने का एक क्लासिक तरीका है।
- विधि के तीन मुख्य चरण कपलिंग (PITC के साथ रिएक्शन), क्लीवेज (एसिड द्वारा पेप्टाइड बॉन्ड तोड़ना), और कन्वर्जन (एटी से PTH डेरिवेटिव बनाना) हैं।
- यह विधि छोटे पेप्टाइड्स के लिए सबसे उपयुक्त है और प्रोटीन डेटाबेस की आवश्यकता नहीं होती है।
- एनहाइड्रस कंडीशन में स्ट्रांग एसिड का उपयोग केवल पहले पेप्टाइड बॉन्ड को तोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि बाकी पेप्टाइड सीक्वेंस सुरक्षित रहे।
- विधि की मुख्य सीमाएं इसकी धीमी गति, उच्च लागत और लंबे पेप्टाइड्स के साथ अक्षमता हैं।
Key terms
Edman DegradationProtein SequencingN-terminalPhenylisothiocyanate (PITC)CouplingCleavageConversionTrifluoroacetic acid (TFA)PTH derivativeSDS-PAGE
Test your understanding
- एडमन डिग्रेडेशन विधि प्रोटीन सीक्वेंसिंग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है, खासकर जब प्रोटीन डेटाबेस उपलब्ध न हो?
- एडमन डिग्रेडेशन विधि के तीन मुख्य चरण क्या हैं और प्रत्येक चरण में क्या होता है?
- इस विधि में एनहाइड्रस कंडीशन में TFA का उपयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
- एडमन डिग्रेडेशन विधि की मुख्य सीमाएं क्या हैं और यह किन परिस्थितियों में प्रभावी नहीं होती है?