Class 8 Maths | Chapter 1 (Introduction) | Rational Numbers | New NCERT
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Class 8 Maths | Chapter 1 (Introduction) | Rational Numbers | New NCERT

Ranveer Maths 8

8 chapters7 takeaways17 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो क्लास 8 गणित के पहले अध्याय, परिमेय संख्याओं (Rational Numbers) का एक परिचय है। इसमें परिमेय संख्याओं की परिभाषा, उनके विभिन्न प्रकारों (जैसे प्राकृतिक संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांक, भिन्न और दशमलव) और उन्हें p/q के रूप में कैसे दर्शाया जाता है, समझाया गया है। वीडियो परिमेय संख्याओं से संबंधित विभिन्न गुणों (properties) पर भी विस्तार से चर्चा करता है, जिनमें योज्य तत्समक (additive identity), गुणात्मक तत्समक (multiplicative identity), गुणात्मक प्रतिलोम (multiplicative inverse), क्रमविनिमेयता (commutativity), साहचर्यता (associativity) और वितरणात्मकता (distributivity) शामिल हैं। यह वीडियो अगली एक्सरसाइज के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है, जहाँ इन गुणों की पहचान करनी होगी।

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Chapters

  • परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ होती हैं जिन्हें p/q के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ q शून्य नहीं होना चाहिए।
  • सभी प्राकृतिक संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांक, भिन्न और दशमलव संख्याएँ परिमेय संख्याएँ होती हैं।
  • किसी भी पूर्णांक को उसके नीचे 1 लगाकर p/q के रूप में व्यक्त किया जा सकता है (जैसे 3 को 3/1)।
  • दशमलव संख्याओं को भी भिन्न में बदलकर p/q के रूप में लिखा जा सकता है (जैसे 0.6 को 6/10)।
परिमेय संख्याओं की मूल परिभाषा को समझना यह जानने के लिए महत्वपूर्ण है कि कौन सी संख्याएँ इस श्रेणी में आती हैं और कौन सी नहीं, जो आगे की गणितीय संक्रियाओं के लिए आधार है।
संख्या 3 को 3/1 के रूप में लिखना, जहाँ p=3 और q=1 है, और दशमलव 0.6 को 6/10 के रूप में लिखना, जहाँ p=6 और q=10 है।
  • दो परिमेय संख्याओं का योग, घटाव और गुणनफल हमेशा एक परिमेय संख्या होती है।
  • दो परिमेय संख्याओं का भागफल भी एक परिमेय संख्या होता है, बशर्ते भाजक (denominator) शून्य न हो।
  • यदि भाजक शून्य हो जाता है (जैसे 10 को 0 से भाग देना), तो परिणाम 'परिभाषित नहीं' (not defined) होता है।
यह समझना कि परिमेय संख्याओं पर जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी संक्रियाएँ कैसे व्यवहार करती हैं, यह सुनिश्चित करता है कि हम इन संख्याओं के साथ सही ढंग से गणना कर सकें।
5 को 2 से गुणा करने पर 10 प्राप्त होता है, जो एक परिमेय संख्या है। 10 को 0 से भाग देने पर 'परिभाषित नहीं' होता है।
  • गुणात्मक तत्समक वह संख्या है जिसे किसी भी संख्या से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
  • परिमेय संख्याओं के लिए, गुणात्मक तत्समक 1 है।
  • किसी भी परिमेय संख्या 'a' के लिए, a * 1 = 1 * a = a होता है।
गुणात्मक तत्समक का ज्ञान हमें यह समझने में मदद करता है कि गुणन संक्रिया में 1 की क्या भूमिका है और यह गणनाओं को कैसे सरल बनाता है।
किसी भी परिमेय संख्या 6 को 1 से गुणा करने पर परिणाम 6 ही आता है (6 * 1 = 6)।
  • गुणात्मक प्रतिलोम, जिसे व्युत्क्रम (reciprocal) भी कहते हैं, वह संख्या है जिसे मूल संख्या से गुणा करने पर गुणनफल 1 आता है।
  • किसी परिमेय संख्या p/q का गुणात्मक प्रतिलोम q/p होता है।
  • किसी संख्या को उसके गुणात्मक प्रतिलोम से गुणा करने पर हमेशा 1 मिलता है।
गुणात्मक प्रतिलोम को समझना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भाग की संक्रिया को गुणा में बदलने में मदद करता है और समीकरणों को हल करने में उपयोगी होता है।
परिमेय संख्या 5/6 का गुणात्मक प्रतिलोम 6/5 है, और (5/6) * (6/5) = 1 होता है।
  • योज्य तत्समक वह संख्या है जिसे किसी भी संख्या में जोड़ने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
  • परिमेय संख्याओं के लिए, योज्य तत्समक 0 है।
  • किसी भी परिमेय संख्या 'a' के लिए, a + 0 = 0 + a = a होता है।
योज्य तत्समक का ज्ञान यह बताता है कि जोड़ संक्रिया में शून्य का क्या महत्व है और यह संख्याओं के मान को कैसे अपरिवर्तित रखता है।
किसी भी परिमेय संख्या 5 में 0 जोड़ने पर परिणाम 5 ही आता है (5 + 0 = 5)।
  • क्रमविनिमेयता का अर्थ है कि संक्रिया के क्रम को बदलने से परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • परिमेय संख्याओं के लिए, जोड़ (a + b = b + a) और गुणा (a * b = b * a) क्रमविनिमेय होते हैं।
  • घटाव (a - b ≠ b - a) और भाग (a / b ≠ b / a) क्रमविनिमेय नहीं होते हैं।
यह गुण हमें बताता है कि किन संक्रियाओं में हम संख्याओं के क्रम को बदल सकते हैं, जिससे गणनाएँ आसान हो जाती हैं, और किनमें नहीं।
4 + 2 = 2 + 4 (दोनों 6 होते हैं), लेकिन 4 - 2 ≠ 2 - 4 (2 ≠ -2)।
  • साहचर्यता का अर्थ है कि तीन या अधिक संख्याओं के समूह में, संक्रिया का क्रम बदलने से परिणाम नहीं बदलता।
  • परिमेय संख्याओं के लिए, जोड़ (a + (b + c) = (a + b) + c) और गुणा (a * (b * c) = (a * b) * c) साहचर्य होते हैं।
  • घटाव और भाग साहचर्य नहीं होते हैं।
साहचर्यता का गुण हमें यह समझने में मदद करता है कि कैसे हम संख्याओं के समूहों को एक साथ समूहित कर सकते हैं, खासकर जब तीन या अधिक संख्याएँ शामिल हों, जिससे गणनाएँ व्यवस्थित होती हैं।
2 + (4 + 6) = (2 + 4) + 6 (दोनों 12 होते हैं)।
  • वितरणात्मकता का गुण बताता है कि गुणन संक्रिया जोड़ या घटाव पर कैसे वितरित होती है।
  • यह गुण a * (b + c) = (a * b) + (a * c) के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • यह गुण जोड़ और घटाव दोनों के साथ काम करता है।
वितरणात्मकता का गुण जटिल व्यंजकों को सरल बनाने और गणनाओं को अधिक कुशल बनाने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है।
6 * (4 + 1) = (6 * 4) + (6 * 1) (दोनों 30 होते हैं)।

Key takeaways

  1. 1परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिन्हें p/q रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ q शून्य नहीं है, और इसमें सभी प्राकृतिक, पूर्ण, पूर्णांक, भिन्न और दशमलव शामिल हैं।
  2. 2परिमेय संख्याओं पर जोड़, घटाव, गुणा और भाग (शून्य से भाग को छोड़कर) के परिणाम हमेशा परिमेय संख्याएँ होती हैं।
  3. 31 गुणात्मक तत्समक है, जिसका अर्थ है कि किसी भी संख्या को 1 से गुणा करने पर वही संख्या मिलती है।
  4. 4किसी परिमेय संख्या का गुणात्मक प्रतिलोम (व्युत्क्रम) वह संख्या है जिसे मूल संख्या से गुणा करने पर 1 प्राप्त होता है।
  5. 50 योज्य तत्समक है, जिसका अर्थ है कि किसी भी संख्या में 0 जोड़ने पर वही संख्या मिलती है।
  6. 6जोड़ और गुणा क्रमविनिमेय और साहचर्य होते हैं, लेकिन घटाव और भाग नहीं होते।
  7. 7वितरणात्मकता का गुण गुणन को जोड़ या घटाव पर वितरित करने की अनुमति देता है, जिससे गणना सरल होती है।

Key terms

Rational Numbers (परिमेय संख्याएँ)p/q formNatural Numbers (प्राकृतिक संख्याएँ)Whole Numbers (पूर्ण संख्याएँ)Integers (पूर्णांक)Fractions (भिन्न)Decimal Numbers (दशमलव संख्याएँ)Denominator (हर)Numerator (अंश)Multiplicative Identity (गुणात्मक तत्समक)Multiplicative Inverse (गुणात्मक प्रतिलोम)Reciprocal (व्युत्क्रम)Additive Identity (योज्य तत्समक)Commutativity (क्रमविनिमेयता)Associativity (साहचर्यता)Distributivity (वितरणात्मकता)Not Defined (परिभाषित नहीं)

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  1. 1परिमेय संख्या की परिभाषा क्या है और इसे p/q रूप में कैसे दर्शाया जाता है?
  2. 2क्या सभी पूर्णांक परिमेय संख्याएँ होती हैं? अपने उत्तर का कारण बताएं।
  3. 3गुणात्मक तत्समक और गुणात्मक प्रतिलोम में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाएं।
  4. 4क्रमविनिमेयता का गुण जोड़ और घटाव पर कैसे लागू होता है? एक उदाहरण दें।
  5. 5वितरणात्मकता का गुण क्या है और यह गणनाओं को कैसे सरल बनाने में मदद करता है?

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