
Class 8 Maths | Chapter 1 (Introduction) | Rational Numbers | New NCERT
Ranveer Maths 8
Overview
यह वीडियो क्लास 8 गणित के पहले अध्याय, परिमेय संख्याओं (Rational Numbers) का एक परिचय है। इसमें परिमेय संख्याओं की परिभाषा, उनके विभिन्न प्रकारों (जैसे प्राकृतिक संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांक, भिन्न और दशमलव) और उन्हें p/q के रूप में कैसे दर्शाया जाता है, समझाया गया है। वीडियो परिमेय संख्याओं से संबंधित विभिन्न गुणों (properties) पर भी विस्तार से चर्चा करता है, जिनमें योज्य तत्समक (additive identity), गुणात्मक तत्समक (multiplicative identity), गुणात्मक प्रतिलोम (multiplicative inverse), क्रमविनिमेयता (commutativity), साहचर्यता (associativity) और वितरणात्मकता (distributivity) शामिल हैं। यह वीडियो अगली एक्सरसाइज के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है, जहाँ इन गुणों की पहचान करनी होगी।
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Chapters
- परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ होती हैं जिन्हें p/q के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ q शून्य नहीं होना चाहिए।
- सभी प्राकृतिक संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांक, भिन्न और दशमलव संख्याएँ परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- किसी भी पूर्णांक को उसके नीचे 1 लगाकर p/q के रूप में व्यक्त किया जा सकता है (जैसे 3 को 3/1)।
- दशमलव संख्याओं को भी भिन्न में बदलकर p/q के रूप में लिखा जा सकता है (जैसे 0.6 को 6/10)।
- दो परिमेय संख्याओं का योग, घटाव और गुणनफल हमेशा एक परिमेय संख्या होती है।
- दो परिमेय संख्याओं का भागफल भी एक परिमेय संख्या होता है, बशर्ते भाजक (denominator) शून्य न हो।
- यदि भाजक शून्य हो जाता है (जैसे 10 को 0 से भाग देना), तो परिणाम 'परिभाषित नहीं' (not defined) होता है।
- गुणात्मक तत्समक वह संख्या है जिसे किसी भी संख्या से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
- परिमेय संख्याओं के लिए, गुणात्मक तत्समक 1 है।
- किसी भी परिमेय संख्या 'a' के लिए, a * 1 = 1 * a = a होता है।
- गुणात्मक प्रतिलोम, जिसे व्युत्क्रम (reciprocal) भी कहते हैं, वह संख्या है जिसे मूल संख्या से गुणा करने पर गुणनफल 1 आता है।
- किसी परिमेय संख्या p/q का गुणात्मक प्रतिलोम q/p होता है।
- किसी संख्या को उसके गुणात्मक प्रतिलोम से गुणा करने पर हमेशा 1 मिलता है।
- योज्य तत्समक वह संख्या है जिसे किसी भी संख्या में जोड़ने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
- परिमेय संख्याओं के लिए, योज्य तत्समक 0 है।
- किसी भी परिमेय संख्या 'a' के लिए, a + 0 = 0 + a = a होता है।
- क्रमविनिमेयता का अर्थ है कि संक्रिया के क्रम को बदलने से परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- परिमेय संख्याओं के लिए, जोड़ (a + b = b + a) और गुणा (a * b = b * a) क्रमविनिमेय होते हैं।
- घटाव (a - b ≠ b - a) और भाग (a / b ≠ b / a) क्रमविनिमेय नहीं होते हैं।
- साहचर्यता का अर्थ है कि तीन या अधिक संख्याओं के समूह में, संक्रिया का क्रम बदलने से परिणाम नहीं बदलता।
- परिमेय संख्याओं के लिए, जोड़ (a + (b + c) = (a + b) + c) और गुणा (a * (b * c) = (a * b) * c) साहचर्य होते हैं।
- घटाव और भाग साहचर्य नहीं होते हैं।
- वितरणात्मकता का गुण बताता है कि गुणन संक्रिया जोड़ या घटाव पर कैसे वितरित होती है।
- यह गुण a * (b + c) = (a * b) + (a * c) के रूप में व्यक्त किया जाता है।
- यह गुण जोड़ और घटाव दोनों के साथ काम करता है।
Key takeaways
- परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिन्हें p/q रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ q शून्य नहीं है, और इसमें सभी प्राकृतिक, पूर्ण, पूर्णांक, भिन्न और दशमलव शामिल हैं।
- परिमेय संख्याओं पर जोड़, घटाव, गुणा और भाग (शून्य से भाग को छोड़कर) के परिणाम हमेशा परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- 1 गुणात्मक तत्समक है, जिसका अर्थ है कि किसी भी संख्या को 1 से गुणा करने पर वही संख्या मिलती है।
- किसी परिमेय संख्या का गुणात्मक प्रतिलोम (व्युत्क्रम) वह संख्या है जिसे मूल संख्या से गुणा करने पर 1 प्राप्त होता है।
- 0 योज्य तत्समक है, जिसका अर्थ है कि किसी भी संख्या में 0 जोड़ने पर वही संख्या मिलती है।
- जोड़ और गुणा क्रमविनिमेय और साहचर्य होते हैं, लेकिन घटाव और भाग नहीं होते।
- वितरणात्मकता का गुण गुणन को जोड़ या घटाव पर वितरित करने की अनुमति देता है, जिससे गणना सरल होती है।
Key terms
Test your understanding
- परिमेय संख्या की परिभाषा क्या है और इसे p/q रूप में कैसे दर्शाया जाता है?
- क्या सभी पूर्णांक परिमेय संख्याएँ होती हैं? अपने उत्तर का कारण बताएं।
- गुणात्मक तत्समक और गुणात्मक प्रतिलोम में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाएं।
- क्रमविनिमेयता का गुण जोड़ और घटाव पर कैसे लागू होता है? एक उदाहरण दें।
- वितरणात्मकता का गुण क्या है और यह गणनाओं को कैसे सरल बनाने में मदद करता है?