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Unit-1 Indian gvt and politics,B.A ll.B 4th sem in hindi by #lawwithriya
Law with Riya
Overview
यह वीडियो भारतीय सरकार और राजनीति के बीए एलएलबी चौथे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम की पहली इकाई का अवलोकन प्रदान करती है। इसमें भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की अवधारणा, विशेष रूप से राज्य और उसके स्वरूप पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त, यह 1919 से 1947 तक भारत के राजनीतिक और संवैधानिक विकास की पड़ताल करती है, जिसमें प्रमुख अधिनियमों और मिशनों पर प्रकाश डाला गया है जिन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वीडियो का उद्देश्य छात्रों को इन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और राजनीतिक अवधारणाओं की एक स्पष्ट समझ प्रदान करना है।
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Chapters
- पाठ्यक्रम की पहली इकाई भारतीय राजनीतिक व्यवस्था और 1919-1947 के बीच संवैधानिक विकास पर केंद्रित है।
- भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए 'राज्य' और उसके स्वरूप की अवधारणा को समझना महत्वपूर्ण है।
- संवैधानिक विकास से तात्पर्य संविधान के निर्माण की प्रक्रिया और उसमें हुए बदलावों से है।
पाठ्यक्रम के सिलेबस को समझने से आगे की पढ़ाई आसान हो जाती है और यह जानना महत्वपूर्ण है कि किन विषयों पर ध्यान केंद्रित करना है।
यदि आपको यह नहीं पता कि आपको क्या पढ़ना है, तो आपको आगे की सामग्री को समझने में कठिनाई होगी।
- राज्य एक ऐसा गणराज्य है जहाँ जनता द्वारा चुनी गई सरकार लोकतांत्रिक तरीके से शासन करती है और एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र पर अपनी सत्ता रखती है।
- भारतीय संविधान की प्रस्तावना राज्य के स्वरूप को संप्रभुता, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिभाषित करती है।
- संप्रभुता का अर्थ है कि भारत अपने आंतरिक और बाहरी मामलों में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।
- समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, और लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे शब्द राज्य के कल्याणकारी और समावेशी चरित्र को दर्शाते हैं।
राज्य की अवधारणा और उसके स्वरूप को समझने से भारत की शासन प्रणाली की नींव को समझने में मदद मिलती है।
जैसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार जनता द्वारा चुनी गई है और वह केवल उत्तर प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र में शासन करती है।
- संप्रभुता: भारत बाहरी शक्तियों के प्रभाव से मुक्त होकर अपने निर्णय स्वयं लेता है।
- समाजवादी: राज्य सभी नागरिकों के कल्याण को प्राथमिकता देता है, न कि केवल कुछ निजी व्यक्तियों के हितों को।
- धर्मनिरपेक्ष: राज्य का कोई अपना धर्म नहीं है और सभी धर्मों को समान माना जाता है।
- लोकतांत्रिक गणराज्य: जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है, और राष्ट्र का मुखिया (राष्ट्रपति) वंशानुगत न होकर चुना जाता है।
- संसदीय शासन प्रणाली: वास्तविक शक्तियाँ प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल में निहित होती हैं, जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक मुखिया होता है।
इन विशेषताओं को समझने से भारतीय राज्य की प्रकृति और शासन की कार्यप्रणाली की गहरी समझ विकसित होती है।
भारत की वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आदिवासी समुदाय से होना यह दर्शाता है कि कोई भी आम नागरिक सर्वोच्च पद तक पहुँच सकता है, जो गणराज्य की एक विशेषता है।
- 1909 का منٹو-मार्ले सुधार: पहली बार भारतीयों को विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिला और मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचक मंडल की शुरुआत हुई।
- 1919 का मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार: केंद्र और प्रांतों के बीच शक्तियों के बंटवारे के साथ द्वैध शासन प्रणाली लागू की गई।
- 1935 का भारत सरकार अधिनियम: द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतों को स्वायत्तता दी गई और संघ, राज्य व समवर्ती सूची का आधार बना, जो आज भी भारतीय संविधान का हिस्सा है।
- 1942 का क्रिप्स मिशन: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीयों को संविधान बनाने का अधिकार देने का वादा किया गया, जो संवैधानिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
- 1946 की कैबिनेट मिशन योजना: संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव रखा गया, जिससे संविधान निर्माण की प्रक्रिया संभव हुई।
यह कालखंड भारत के स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण की नींव रखता है, इसलिए इन सुधारों और अधिनियमों को समझना महत्वपूर्ण है।
1935 के अधिनियम द्वारा संघ, राज्य और समवर्ती सूची में शक्तियों का विभाजन आज भी भारतीय संविधान में मौजूद है।
- कैबिनेट मिशन की सिफारिशों के आधार पर 1946 में संविधान सभा का गठन हुआ।
- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद (स्थायी) और सच्चिदानंद सिन्हा (अस्थायी) थे।
- डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, जिन्होंने संविधान का मसौदा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- संविधान को बनाने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन लगे।
- संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, जिसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
संविधान सभा की प्रक्रिया और संविधान निर्माण में लगे समय और प्रयासों को समझने से भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का पता चलता है।
संविधान को बनने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा, जो इसके महत्व और जटिलता को दर्शाता है।
Key takeaways
- भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए 'राज्य' की परिभाषा और उसके लोकतांत्रिक, संप्रभु, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को जानना आवश्यक है।
- 1919 से 1947 तक के संवैधानिक सुधारों ने धीरे-धीरे भारतीयों को शासन में भागीदारी और अंततः अपना संविधान बनाने का अधिकार दिलाया।
- 1935 का भारत सरकार अधिनियम भारतीय संविधान के लिए एक महत्वपूर्ण आधारशिला साबित हुआ, विशेषकर शक्तियों के विभाजन के मामले में।
- संविधान सभा का गठन और डॉ. अंबेडकर जैसे नेताओं के नेतृत्व में संविधान का निर्माण भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी उपलब्धि है।
- भारत का संविधान केवल डॉ. अंबेडकर की देन नहीं है, बल्कि इसमें संविधान सभा के लगभग 300 सदस्यों का सामूहिक योगदान है।
- संविधान को अंगीकृत करने और लागू करने की तिथियों (26 नवंबर 1949 और 26 जनवरी 1950) के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है।
Key terms
भारतीय राजनीतिक व्यवस्था (Indian Political System)राज्य (State)संप्रभुता (Sovereignty)समाजवादी (Socialist)धर्मनिरपेक्ष (Secular)लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic)संसदीय शासन प्रणाली (Parliamentary System)मिंटो-मार्ले सुधार (Minto-Morley Reforms)द्वैध शासन (Diarchy)भारत सरकार अधिनियम 1935 (Government of India Act 1935)क्रिप्स मिशन (Cripps Mission)कैबिनेट मिशन (Cabinet Mission)संविधान सभा (Constituent Assembly)प्रारूप समिति (Drafting Committee)
Test your understanding
- राज्य को परिभाषित करें और भारतीय राज्य के प्रमुख स्वरूपों की व्याख्या करें।
- 1919 से 1947 के बीच हुए किन्हीं तीन प्रमुख संवैधानिक सुधारों या अधिनियमों का वर्णन करें और उनके महत्व को समझाएं।
- भारतीय संविधान के निर्माण में संविधान सभा की भूमिका क्या थी और इसमें किन प्रमुख व्यक्तियों ने योगदान दिया?
- संप्रभुता, समाजवादी और धर्मनिरपेक्षता के अर्थ को स्पष्ट करें और बताएं कि ये भारतीय राज्य के स्वरूप को कैसे परिभाषित करते हैं।
- 1935 के भारत सरकार अधिनियम को भारतीय संविधान का आधारभूत ढांचा क्यों माना जाता है?