Natural Resources and Their Use Class 8 || NEW NCERT || SST || Complete Chapter
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Natural Resources and Their Use Class 8 || NEW NCERT || SST || Complete Chapter

PW Class 8

8 chapters7 takeaways14 key terms5 questions

Overview

यह वीडियो प्राकृतिक संसाधनों और उनके उपयोगों पर एक विस्तृत अध्ययन प्रदान करता है, जो क्लास 8 के छात्रों के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों की परिभाषा, वर्गीकरण (उपयोग और उपलब्धता के आधार पर), और भारत के संदर्भ में उनकी सांस्कृतिक प्रासंगिकता पर चर्चा की गई है। वीडियो सतत उपयोग, संरक्षण, और संसाधनों के असमान वितरण के प्रभावों पर भी प्रकाश डालता है, साथ ही इकोसिस्टम कार्यों और सेवाओं की व्याख्या करता है। अंत में, यह रिन्यूएबल और नॉन-रिन्यूएबल संसाधनों के बीच अंतर, प्राकृतिक संसाधन अभिशाप, और स्टुअर्डशिप (संरक्षण) की अवधारणाओं को केस स्टडीज के साथ समझाता है।

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Chapters

  • कोई भी प्राकृतिक वस्तु तब संसाधन बनती है जब मनुष्य उसे अपने जीवन यापन के लिए उपयोग कर पाता है।
  • संसाधन बनने के लिए तीन मुख्य मानदंड हैं: तकनीकी रूप से सुलभ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य, और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य होना चाहिए।
  • उदाहरण के लिए, लकड़ी एक प्राकृतिक वस्तु है, लेकिन जब मनुष्य उससे फर्नीचर बनाता है, तो वह एक संसाधन बन जाती है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि प्रकृति में हर चीज संसाधन नहीं होती; मनुष्य की उपयोगिता ही किसी वस्तु को संसाधन बनाती है, जो हमारे दैनिक जीवन और अर्थव्यवस्था के लिए आधार है।
पानी की बोतल का उदाहरण, जिसमें छेद न होने पर वह उपयोगी (संसाधन) है, लेकिन छेद होने पर अनुपयोगी हो जाती है।
  • भारत में प्रकृति को अक्सर पवित्र माना जाता है और इसे एक 'नर्चरर' के रूप में देखा जाता है।
  • तुलसी पूजा, पवित्र उपवनों (sacred groves) का संरक्षण, और जल, सूर्य, पृथ्वी जैसे प्राकृतिक तत्वों की पूजा भारतीय परंपराओं के उदाहरण हैं।
  • ये परंपराएं प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना को दर्शाती हैं, भले ही आधुनिक समय में इसके पीछे का मूल उद्देश्य बदल गया हो।
यह खंड सिखाता है कि कैसे विभिन्न संस्कृतियाँ, विशेष रूप से भारतीय संस्कृति, प्रकृति के साथ एक गहरा आध्यात्मिक और सम्मानजनक संबंध रखती हैं, जो संरक्षण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
तुलसी की पूजा को एक पेड़ के रूप में देखना, लेकिन धर्म में उसे भगवान का दर्जा देना।
  • प्राकृतिक संसाधनों को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है: उपयोग के आधार पर और उपलब्धता के आधार पर।
  • उपयोग के आधार पर: जीवन के लिए आवश्यक (जैसे हवा, पानी), सामग्री के लिए (जैसे लकड़ी, पत्थर), और ऊर्जा के लिए (जैसे कोयला, पेट्रोलियम)।
  • उपलब्धता के आधार पर: रिन्यूएबल (नवीकरणीय) संसाधन जो जल्दी पुनर्जीवित हो जाते हैं (जैसे सौर ऊर्जा, हवा) और नॉन-रिन्यूएबल (अनवीकरणीय) संसाधन जो बनने में लाखों साल लेते हैं (जैसे कोयला, खनिज)।
संसाधनों को वर्गीकृत करने से उनकी प्रकृति, उपयोगिता और सीमितता को समझने में मदद मिलती है, जो उनके कुशल प्रबंधन और संरक्षण के लिए आवश्यक है।
हवा और पानी जीवन के लिए आवश्यक रिन्यूएबल संसाधन हैं, जबकि कोयला ऊर्जा के लिए एक नॉन-रिन्यूएबल संसाधन है।
  • प्रकृति में 'रिस्टोरेशन' (पुनर्स्थापन) और 'रीजनरेशन' (पुनरुत्पादन) का एक सुंदर चक्र चलता है, जहां चीजें अपने आप ठीक हो जाती हैं या फिर से बन जाती हैं।
  • यह चक्र वृद्धि, परिपक्वता, क्षय और अपघटन (decomposition) से होकर गुजरता है, जिससे नई जीवन चक्र शुरू होता है।
  • उदाहरण के लिए, एक पेड़ के गिरने के बाद उसके अवशेष मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं, जिससे नए पौधे उगते हैं।
प्रकृति की इस अंतर्निहित क्षमता को समझना हमें संरक्षण और टिकाऊ प्रथाओं के महत्व को सिखाता है, क्योंकि प्रकृति स्वयं को ठीक करने में सक्षम है यदि उसे अवसर दिया जाए।
एक पेड़ की टहनी कट जाने पर भी कुछ समय बाद उसमें से नई पत्तियां या शाखाएं निकल आती हैं।
  • रिन्यूएबल संसाधन भी अत्यधिक उपयोग, प्रदूषण, या जलवायु परिवर्तन के कारण नॉन-रिन्यूएबल बन सकते हैं।
  • अत्यधिक कटाई (over-harvesting) से लकड़ी जैसे संसाधन कम हो सकते हैं, और औद्योगिक प्रदूषण से ताजे पानी जैसे संसाधन दूषित हो सकते हैं।
  • जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और अत्यधिक दोहन (over-exploitation) भी प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़कर संसाधनों को खतरे में डालते हैं।
यह खंड बताता है कि कैसे मानव गतिविधियाँ रिन्यूएबल संसाधनों को भी समाप्त कर सकती हैं, जिससे उनके संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर बल पड़ता है।
पंजाब में अत्यधिक सिंचाई के कारण भूजल स्तर का खतरनाक रूप से गिर जाना, जिससे वह एक नॉन-रिन्यूएबल संसाधन की तरह हो गया है।
  • इकोसिस्टम कार्य प्रकृति के वे अंतर्निहित तरीके हैं जिनसे वह काम करता है, जैसे पेड़ों द्वारा ऑक्सीजन उत्पादन और CO2 का अवशोषण।
  • इकोसिस्टम सेवाएं वे लाभ हैं जो मनुष्य इन कार्यों से प्राप्त करता है, जैसे पीने के लिए शुद्ध पानी, सांस लेने के लिए हवा, और उपजाऊ भूमि।
  • वन पानी को फिल्टर करते हैं, आर्द्रभूमि (wetlands) बाढ़ को नियंत्रित करती हैं, और मिट्टी के जीव कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते हैं।
इकोसिस्टम कार्यों और सेवाओं को समझना हमें प्रकृति के महत्व और हमारे जीवन पर उसके सकारात्मक प्रभावों को दिखाता है, जिससे उनके संरक्षण की प्रेरणा मिलती है।
पेड़ों द्वारा ऑक्सीजन छोड़ना और कार्बन डाइऑक्साइड लेना, जो मनुष्यों के लिए एक जीवन रक्षक सेवा है।
  • प्राकृतिक संसाधन दुनिया भर में समान रूप से वितरित नहीं हैं, जिससे असमानताएँ पैदा होती हैं।
  • संसाधनों का वितरण मानव बस्तियों, व्यापार पैटर्न, आर्थिक विकास और यहां तक कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और संघर्षों को भी प्रभावित करता है।
  • उदाहरण के लिए, कुछ क्षेत्रों में उद्योगों का विकास वहां प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
यह खंड बताता है कि कैसे संसाधनों का असमान वितरण वैश्विक अर्थव्यवस्था, राजनीति और सामाजिक संरचनाओं को आकार देता है, और संघर्षों का कारण भी बन सकता है।
भारत में हिमालयी क्षेत्र की तुलना में मैदानी इलाकों में अधिक जनसंख्या घनत्व, क्योंकि वहां रहना आसान है और संसाधन अधिक उपलब्ध हैं।
  • स्टुअर्डशिप का अर्थ है प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह से उपयोग करना कि भविष्य की पीढ़ियाँ भी उनका लाभ उठा सकें।
  • इसमें क्षतिग्रस्त इकोसिस्टम को ठीक करने (रिस्टोरेशन) और नई जीवन बनाने (रीजनरेशन) में मदद करना शामिल है।
  • नॉन-रिन्यूएबल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विकास स्टुअर्डशिप का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्टुअर्डशिप की अवधारणा हमें सिखाती है कि हम पृथ्वी के संरक्षक हैं और हमें संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहे।
सिक्किम का 100% ऑर्गेनिक फार्मिंग को अपनाना, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहे और रासायनिक प्रदूषण कम हो।

Key takeaways

  1. 1प्राकृतिक संसाधन वे तत्व हैं जो मनुष्य के लिए उपयोगी होते हैं और जिन्हें वह अपने जीवन यापन के लिए उपयोग करता है।
  2. 2संसाधन बनने के लिए किसी वस्तु का तकनीकी रूप से सुलभ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य होना आवश्यक है।
  3. 3प्रकृति में रिन्यूएबल और नॉन-रिन्यूएबल संसाधन होते हैं, लेकिन मानव गतिविधियाँ रिन्यूएबल संसाधनों को भी समाप्त कर सकती हैं।
  4. 4इकोसिस्टम प्रकृति के कार्य हैं जो हमें सेवाएं प्रदान करते हैं, जैसे हवा और पानी की शुद्धता, जिन्हें संरक्षित करना महत्वपूर्ण है।
  5. 5संसाधनों का असमान वितरण वैश्विक व्यापार, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक संबंधों को प्रभावित करता है।
  6. 6स्टुअर्डशिप का अर्थ है संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करना कि वे भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी उपलब्ध रहें।
  7. 7सतत विकास और संरक्षण के लिए पारंपरिक ज्ञान और नई तकनीकों का संयोजन आवश्यक है।

Key terms

Natural ResourcesResourceTechnologically AccessibleEconomically FeasibleCulturally AcceptableRenewable ResourcesNon-renewable ResourcesEcosystem FunctionsEcosystem ServicesSustainable UseStewardshipOrganic FarmingFossil FuelsGreen Revolution

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  1. 1किसी भी प्राकृतिक वस्तु को संसाधन कब माना जा सकता है? इसके लिए कौन से तीन मुख्य मानदंड आवश्यक हैं?
  2. 2भारत में प्रकृति को पवित्र मानने की परंपराओं के क्या उदाहरण हैं और यह संरक्षण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  3. 3रिन्यूएबल और नॉन-रिन्यूएबल संसाधनों के बीच मुख्य अंतर क्या हैं? क्या कोई रिन्यूएबल संसाधन नॉन-रिन्यूएबल बन सकता है, और कैसे?
  4. 4इकोसिस्टम कार्य और इकोसिस्टम सेवाएं क्या हैं? एक उदाहरण देकर समझाएं कि मनुष्य इनसे कैसे लाभान्वित होता है।
  5. 5स्टुअर्डशिप की अवधारणा क्या है और यह प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

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